पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
प्रविष्टि तिथि:
01 DEC 2018 8:42PM by PIB Delhi
कॉन्फ्रेंस ऑफ दी पार्टीज टू दी यूनाईटेड नेशन्स फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज के 24वें सत्र की बैठक 2 दिसंबर से 14 दिसंबर 2018 तक पोलैंड के केटोवाइस में आयोजित की जा रही है।सीओपी-24 बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि 2016 में अपनाए गए पेरिस समझौते के कार्यान्वयन के लिए दिशानिर्देशों को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन 17 सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। अपनी यात्रा की पूर्व संध्या पर उन्होंने कहा कि भारत उम्मीद करता है कि सीओपी-24 को दिशानिर्देश तैयार करने में सक्षम होना चाहिए, जो व्यावहारिक हैं और चुनौतियों, अपनी प्राथमिकताओं के लिए उचित विचार देते हैं। साथ ही जिसमें विकासशील देशों के साथ-साथ विकसित देशों की तुलना में अलग-अलग शुरुआती बिंदुओं के अलावा, उनकी कमजोरियों, गरीबी उन्मूलन जैसे विकास प्राथमिकताओं, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा पहुंच, स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा आदि प्रदान करना शामिल करना है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘सीओपी-24 को सभी एजेंडों पर समान रूप से ध्यान देना चाहिए। साथ ही सीओपी24 के सम्मेलन का नतीजा संतुलित होना चाहिए। उसके अलावा उसके पेरिस समझौते का सिद्धांत और उसका परिणाम तथा प्रावधान संतुलित, समावेशी, व्यापक और सुसंगत होना चाहिए।’
भारत वैश्विक स्तर तापमान को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे और तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री तक सीमित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाने को लेकर जलवायु परिवर्तन के खतरे को देखते हुए वैश्विक प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए पेरिस समझौते के उद्देश्य को दृढ़ता से समर्थन देता है। भारत गरीबी उन्मूलन और हाशिए के लोगों और गरीबों की देखभाल करने के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण मानता है। बता दें कि यह समझौता जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को अनुकूलित करने के लिए साझेदार देश की जरूरतों को विकसित करने पर भी केंद्रित है, इस तरह से यह उन पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालता है।
सीओपी-24 के दौरान, भारत जलवायु परिवर्तन के लिए अपनी चिंताओं पर जोर देना चाहता है और पेरिस समझौते कार्य कार्यक्रम (पीएडब्ल्यूपी) को अंतिम रूप देने के लिए अपनी प्रतिबद्धताओं की पुष्टि करना चाहता है। भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि विभिन्न राष्ट्रीय परिस्थितियों के लिहाज से आम लेकिन विभिन्न जिम्मेदारियों और समान क्षमताओं (सीबीडीआर-आरसी), पीएडब्ल्यूपी के सभी तत्वों में परिचालित हों। भारत मानता है कि पीएडब्ल्यूपी के नतीजों को निस्वार्थ भाव से और महत्वाकांक्षाओं को बिना उड़ान दिए समर्थन करना चाहिए।
पूर्व 2020 जलवायु प्रयासों में महत्वपूर्ण अंतर न केवल शमन में बल्कि विकासशील देशों के अनुकूलन और समर्थन में भी मौजूद हैं। कार्यान्वयन में यह अंतर 2020 के बाद के विकासशील देशों पर अतिरिक्त बोझ डालेंगे। इसलिए, भारत के लिए महत्वपूर्ण चिंता यह सुनिश्चित करना है कि 2020 के बाद के विकासशील देशों पर कोई बेवजह का बोझ नहीं डाला जाए। क्योटो प्रोटोकॉल के तहत प्री-2020 प्रतिबद्धताओं का मुद्दा, विशेष रूप से विकसित देशों की उच्च शमन कार्रवाई और विकसित देशों की आवश्यकता 2020 तक प्रति वर्ष 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने की जलवायु वित्त प्रतिबद्धताओं को पूरा करने को लेकर सीओपी-24 के दौरान भारत की प्राथमिकता होगी।
विकासशील देशों के लिए अनुकूलन बहुत महत्वपूर्ण है और वित्त, क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ विकासशील देशों के अनुकूलन आवश्यकताओं के संदर्भ में तत्काल वैश्विक कार्यवाही की आवश्यकता है। भारत का मानना है कि नए, पर्याप्त और अनुमानित वित्त, प्रौद्योगिकी विकास और हस्तांतरण के साथ-साथ क्षमता निर्माण समर्थन के लिए बढ़ते प्रावधान, सतत विकास के संदर्भ में विकासशील देशों को लेकर अपने जलवायु कार्यों में उच्च महत्वाकांक्षा हासिल करने की खातिर अहम मददगार साबित होंगे।
इसके अतिरिक्त, 2018 तालानोआ वार्ता और स्टॉक का अंतिम राजनीतिक चरण प्री-2020 का लेकर चर्चा भी सीओपी-24 के दौरान निर्धारित है। भारत सीओपी-24 में उच्च स्तरीय तलानो वार्ता के दौरान विचारों के समृद्ध आदान-प्रदान की उम्मीद कर रहा है। इसके अलावा पूर्व 2020 के कार्यों और एक महत्वपूर्ण तत्व के रूप में समर्थन देने के साथ, और सहमत मॉडलों के अनुसार 2018 में इसका सफल निष्कर्ष निकालने को लेकर भारत सीओपी-24 में पीएडब्ल्यूपी को अंतिम रूप देने में संतुलित और व्यापक परिणाम प्राप्त करने के लिए सभी पक्षों के साथ एक खुले, पारदर्शी, समावेशी और पार्टी संचालित तरीके से मिलकर काम करेगा।
भारत, हालांकि समस्या का हिस्सा नहीं है, लेकिन जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक और घरेलू कार्रवाई में नेतृत्व की भूमिका निभा रहा है। भारत ने स्वच्छ ऊर्जा, विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता में वृद्धि, कार्बन करने और शहरी केंद्रों के विकास, सुरक्षित, स्मार्ट और टिकाऊ हरित परिवहन नेटवर्क के क्षेत्र में महत्वाकांक्षी शमन और अनुकूलन कार्यवाही की है। कार्बन सिंक बढाना वन और पेड़ के माध्यम से प्रदूषण कम करने के प्रयासों का अपमान। भारत ने 2022 तक अक्षय ऊर्जा के 175 जीडब्ल्यू उत्पादन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य, और स्मार्ट शहरों, विद्युत वाहनों, ऊर्जा दक्षता पहलों आदि पर पहल आदि के साथ भारत वैश्विक स्तर लीडर की भूमिका में है। लक्षित 175 जीडब्ल्यू से 2018 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के 72 जीडब्ल्यू की उपलब्धि के साथ, भारत पवन ऊर्जा में विश्व स्तर पर चौथी पायदान, सौर ऊर्जा स्थापित करने की क्षमता में 6वें स्थान और अक्षय ऊर्जा में कुल 5वें स्थान पर है।
2020 तक 2005 के स्तर को 20-25 प्रतिशत तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की उत्सर्जन तीव्रता को कम करने के लिए भारत ने 2009 में स्वैच्छिक रूप से संकल्प लिया था। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, हम इस लक्ष्य को हासिल करने के रास्ते पर हैं। भारत ने 2021-2030 के लिए आठ (8) लक्ष्यों को रेखांकित करते हुए 2015 में अपने जलवायु लक्ष्यों को बढ़ाया, जिसमें 2005 के स्तर को 2030 तक 33-35 प्रतिशत की जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता में कमी करना शामिल है। भारत ने जलवायु को अपनी कार्रवाई को इसके विकास लक्ष्यों के साथ तालमेल बनाया है और साथ ही जिसमें जलवायु परिवर्तन से निपटने की हमारी साहसिक दृष्टि को प्रतिबिंबित होती है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है कि भारत को 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन से कुल बिजली का 40 प्रतिशत उत्पादन शुरू करना होगा, जिससे भारत को अक्षय ऊर्जा मानचित्र पर प्रीमियम स्थिति में रखा जा सके। संयुक्त राष्ट्र के उच्चतम पर्यावरणीय सम्मान, यूएनईपी " चैंपियंस ऑफ अर्थ" पुरस्कार को आईएसए चैंपियनिंग में अपने अग्रणी काम के लिए नीति नेतृत्व श्रेणी में भारत के प्रधानमंत्री को 3 अक्टूबर 2018 को सम्मानित किया गया था और उन्होंने 2022 तक प्लास्टिक के इस्तेमाल को खत्म करने की अभूतपूर्व प्रतिज्ञा ली है।
सीओपी-24 के दौरान बैठक से इतर भारत अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में अपने सकारात्मक जलवायु कार्यों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए एक मंच स्थापित करेगा। 2 अक्टूबर 2018 को अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की पहली आम बैठक के दौरान हमारे माननीय प्रधानमंत्री द्वारा इस वर्ष के भारतीय मंच का विषय 'वन वर्ल्ड, वन सन, वन ग्रिड' दिया गया है।
भारत इसके जरिये पूरी दुनिया को एक साथ आने और कार्रवाई करने के लिए अभिनव विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक आदर्श मंच बनने का प्रयास करेगा। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन 3 दिसंबर 2018 को मंडप का उद्घाटन करेंगे और संबोधित करेंगे। साथ ही भारत की दूसरी द्विवार्षिक अद्यतन रिपोर्ट का लोकार्पण करेंगे।
इस पवेलियन यानी अपने मंडप में, भारत 3 दिसंबर से 13 दिसंबर 2018 तक एक अलग से कार्यक्रम आयोजित करेगा। इसमें जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और शमन के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों को लेकर तकरीबन 20 सत्र होंगे। इन सत्रों में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के विशेषज्ञों की प्रस्तुतियां और पैनल चर्चाएं शामिल होंगी।
भारत सीओपी-24 के दौरान अतीत में दिखाई गई प्रतिबद्धता और नेतृत्व की एक ही भावना का प्रदर्शन करना चाहता है। सीओपी-24 से भारत की उम्मीद यह है कि निर्णय यूएनएफसीसीसी के सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए जिसमें क्योटो प्रोटोकॉल और इक्विटी, सीबीडीआर-आरसी, और जलवायु न्याय सहित पेरिस समझौते शामिल हों।
आर.के.मीणा/एएम/वीएस-11558