उप राष्ट्रपति सचिवालय

उपराष्ट्रपति ने जाति के नाम पर सामाजिक वैमनस्य फैलाने के प्रयासों की निंदा की


जाति समाज के लिेए एक अभिशाप है: उपराष्ट्रपति

जस्टिस नागेंद्र सिंह एक महान न्यायवादी थे जिन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून का गहरा और अगाध ज्ञान था;

मीडिया द्वारा हिंसा के चित्रण में संयम बरतने और जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार करने की आवश्यकता;

भारत सद्भाव और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का एक आलोकित प्रकाशस्तंभ रहा है;

हमें हिंसा के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से मुकाबला करना चाहिए। शांति लाने के लिए हमें एक बहुपक्षीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है;

विकास के लिए शांति एक पूर्व आवश्यक शर्त है; अगर तनाव है तो हम विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे सकते;

चिन्मया मिशन को डॉ नागेंद्र सिंह अंतर्राष्ट्रीय शांति पुरस्कार दिया, मिशन के मानवीय सेवा की सराहना की

प्रविष्टि तिथि: 24 NOV 2018 8:39PM by PIB Delhi

भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने आज जाति के नाम पर सामाजिक वैमनस्य फैलाने के प्रयासों की निंदा की और देश में सामाजिक और लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में लोगों द्वारा जाति पर की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को सुनने से वे आहत हुए हैं और उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में जाति के लिए कोई स्वीकृति नहीं है। उन्होंने कहा कि  ' समाज के लिए जाति एक अभिशाप है'। श्री नायडू डॉ नागेंद्र सिंह अंतर्राष्ट्रीय शांति पुरस्कार के वितरण समारोह में एक सभा को संबोधित कर रहे थे।

श्री नायडू ने राजनीति और जाति के एक साथ आने के खतरों के खिलाफ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि लोगों को ऐसे जनप्रतिनिधियों को चुनना चाहिए जिनके पास कैरेक्टर, कैलिबर, कैपिसिटी और गुड कंडक्ट हो, लेकिन दुर्भाग्यवश कई बार चार अन्य ‘सी’, कास्ट, कैश, क्रिमनैलिटी और कम्यूनिटी को वरीयता मिल रही है।

विश्व शांति पर अपने विचारों को व्यक्त करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमें बहु-पार्श्ववाद पर आधारित एक उत्तरदायी विश्व व्यवस्था बनाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पारस्परिक सम्मान का माहौल पैदा किया जाना चाहिए और विवादों को वार्तालापों के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।

हेग में स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में 11 साल से अधिक समय तक सेवा देने वाले न्यायमूर्ति नागेंद्र सिंह के प्रति अपना सम्मान और प्रशंसा व्यक्त करते हुए श्री नायडू ने कहा कि न्यायमूर्ति सिंह न केवल एक विशिष्ट जनसेवक थे, बल्कि एक महान न्यायवादी भी थे, जिनको अंतरराष्ट्रीय कानून का गहरा और व्यापक ज्ञान था। उन्होंने इंटरनेशनल गुडविल सोसाइटी ऑफ इंडिया (आईजीएसआई) को उन व्यक्तियों और संस्थानों को पहचानने के लिए बधाई दी जो कि अपने दर्शन और कार्यों के माध्यम से दुनिया में शांति और सद्भावना को बढ़ावा दे रहे हैं।

उपराष्ट्रपति ने अवलोकन किया कि विश्व शांति मानवता का दीर्घकालिक सपना रहा है। उन्होंने इस बात पर अपनी निराशा व्यक्त की कि 21 वीं शताब्दी में भी विश्व शांति हमसे बचकर निकल रही है और हमारे लिए एक अपूर्ण खोज बनी हुई है। विश्व युद्ध के भयावह दिनों को याद करते हुए, हिरोशिमा और नागासाकी के लिए प्रलयकारी और दुःखद समय, उपराष्ट्रपति ने टिप्पणी की कि मानवता इस तथ्य को अपने दिल से लगा सकती है कि उसने तब से लेकर अबतक शांति के मार्ग पर एक लंबा सफर तय किया है। उन्होंने विश्व राष्ट्रों की शांति के लिए ललक की बात की जिसके कारण संयुक्त राष्ट्र संघ का गठन हुआ।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत सद्भाव और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का एक आलोकित प्रकाशस्तंभ रहा है। उन्होंने कहा कि 'हमारे लिए पूरी दुनिया एक बड़ा परिवार है और ‘वसुधैव कुतुंबकम' अधिकांश रूप से हमारी चेतना में दृढ़ता से शामिल है।

श्री नायडू ने प्रतिष्ठित डॉ नागेंद्र सिंह अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार के विजेता चिन्मया मिशन को बधाई दी। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में, युवाओं के सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, पर्यावरण और संस्कृति के क्षेत्र में मिशन के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि 'चिन्मया मिशन भारतीय सदाचार और मूल्यों का एक महान राजदूत है। यह शूचिता शांति और मानवता की भावना का एक का मूर्त रूप है जिसके लिए हिंदू धर्म हमेशा खड़ा रहता है।

उपराष्ट्रपति ने सभी लोगों से अपने दिमाग में पृथ्वी पर जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने और विश्व शांति की स्थापना ही अपना अंतिम उद्देश्य को बनाने के लिए अपने सोच को परिवर्तित करने, अलग-अलग प्रकार से सोचने और व्यवहार करने के लिए आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन के मूल में शेयरिंग और केयरिंग आदर्श रहे हैं और उन्होंने जोर दिया कि हम जो भी करते हैं उसमें इस भावना का समावेश होना चाहिए।

हिंसा के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान देते हुए श्री नायडू ने शोक व्यक्त किया कि अक्सर, मास मीडिया, इंटरनेट और हमारी लोकप्रिय संस्कृति द्वारा हिंसा को बढ़ावा दिया जाता है बल्कि कभी-कभी इसे गौरवान्वित भी किया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि हिंसा को दिखाने में संयम और जिम्मेदारी का प्रयोग करने की आवश्यकता है।

श्री नायडू ने कहा कि विश्व शांति के लिए आतंकवाद एक बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने कहा कि अलगाववाद, कट्टरवाद और हिंसक अतिवाद जैसे कई कारक हैं जो दुनिया में संघर्ष और आतंक को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'हमें हिंसा के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से मुकाबला करना होगा। उन्होंने कहा, हमें शांति प्राप्त करने के लिए एक बहुपक्षीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि प्रगति के लिए शांति एक अनिवार्य पूर्व-आवश्यकता है और इस तथ्य पर जोर दिया कि तनाव रहने पर हम विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि 'हमें एक समावेशी और सामंजस्यपूर्ण दुनिया का निर्माण करना चाहिए'।

इस अवसर पर जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण और संसदीय मामलों के  राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

आर.के.मीणा/एएम/ए-11424


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