भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने चीनी मिलों एवं उनके संघों पर पेट्रोल में मिलाने हेतु एथेनॉल के अधिग्रहण के लिये तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी संयुक्त निविदा में हेरफेर के लिये अर्थदण्ड लगाया
प्रविष्टि तिथि:
18 SEP 2018 6:02PM by PIB Delhi
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने पेट्रोल में मिलाने हेतु एथेनॉल के अधिग्रहण के लिये तेल विपणन कंपनियों (एचपीसीएल/ बीपीसीएल/ आईओसीएल) द्वारा दिनांक 02.01.2013 को जारी संयुक्त निविदा में हेरफेर के लिये 18 चीनी मिलों एवं 2 संघों (इण्डियन सूगर मिल्स एसोसिएशन एवं एथेनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इण्डिया) पर अर्थदण्ड लगाया है ।
सीसीआई ने इण्डिया ग्लाइसोल लिमिटेड एवं 5 अन्य सूचना देने वालों द्वारा प्रदान की गई अनेक सूचनाओं पर दिनांक 18.09.2018 को अंतिम आदेश पारित किया था । पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार, द्वारा मोटर स्पिरिट/ गैसोलीन में आवश्यक रूप से 5% एथेनॉल मिलाने से संबंधित अधिसूचना जारी होने के बाद सरकारी क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों यानी आईओसीएल/ एचपीसीएल/ बीपीसीएल ने एथेनॉल की आपूर्ति के लिये एल्कोहल निर्माताओं से एक संयुक्त ठेके के ज़रिये दिनांक 02.01.2013 को संविदाएं आमंत्रित की थी जो इन तेल विपणन कंपनियों की ओर से ठेका प्रक्रिया के समन्वयक के रूप में बीपीसीएल ने जारी की थी । संयुक्त ठेके के माध्यम से तेल विपणन कंपनियों ने एथेनॉल के आपूर्तिकर्ताओं के लिये दो प्रणालियों के अंतर्गत सीलबंद निविदाएं आमंत्रित की थी यानी- तकनीकी निविदा एवं मूल्य आधारित निविदा । देश भर में तेल विपणन कंपनियों के विभिन्न डिपो/ टर्मिनलों तक आपूर्ति दिनांक 01.03.2013 से प्रभावी होकर एक वर्ष के लिये उपलब्ध कराई जानी थी ।
सूचनादाता (इण्डिया ग्लाइसोल लिमिटेड) ने हालांकि आरोप लगाया कि इण्डियन सूगर मिल्स एसोसिएशन (आईएसएमए) एवं एथेनॉल मैन्यूफैक्चर्रस एसोसिएशन ऑफ इण्डिया (इएमएआई) ने एथेनॉल के अधिग्रहण हेतु तेल विपणन कंपनियों को संयुक्त ठेके पर राज़ी किया । आरोप है कि तेल विपणन कंपनियों द्वारा संयुक्त ठेका बदनीयती वाली कंपनियों द्वारा विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं से एथेनॉल की खरीद का एक समझौता है- जो प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 की धारा 3 के प्रावधानों के विरुद्ध है तथा जिससे भारत में एथेनॉल की आपूर्ति एवं वितरण की प्रतिस्पर्धा पर अहम दुष्प्रभाव पड़ सकता है । यह आरोप भी लगाया गया कि ऐसे चीनी निर्माता जिन्होंने 2013 के संयुक्त टेंडर में भागीदारी की है, उन्होंने बोली लगाने में अधिनियम की धारा 3 के प्रावधानों का उल्लंघन कर समान संविदा भाव के ज़रिये एवं कुछ मामलों में सामूहिक आपसी समझ के माध्यम से एकसमान संविदा भाव देकर हेरफेर किया है ।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बोली लगाने वालों ने अपने बाज़ी लगाने वाले आचरण से कपटपूर्ण एवं संगठित ढंग से कार्य कर अधिनियम की धारा 3(3)(डी) के प्रावधानों की अवहेलना की है, जिससे तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी निविदा के संदर्भ में निविदा प्रक्रिया में हेरफेर के अतिरिक्त प्रतिस्पर्धा ख़त्म एवं कम हुई है । तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी संयुक्त ठेके पर उत्तर प्रदेश, गुजरात एवं आंध्र प्रदेश स्थित डिपो के लिये बोली लगाने वालों को अपनी बोली जमा कराने के दौरान कपटपूर्ण एवं संगठित ढंग से आचरण करते हुए पाया गया । यह प्रस्तुत किये गए मूल्य, ऑफर की गई मात्रा एवं पार्टियों द्वारा दिये गए स्पष्टीकरण से प्रमाणित हुआ । इस संगठित आचरण को आगे इस तथ्य से और मज़बूती मिली कि बोली लगाने वालों ने आईएसएमए के मंच का उपयोग किया एवं इएमएआई द्वारा प्रदान इशारों के अनुरूप कार्य किया जिसने नीलामी में शामिल पार्टियों के व्यवहार को प्रभावित किया ।
तदनुसार 18 चीनी मिलों एवं उनके संघों (आईएसएमए/ इएमएआई) पर कुल 38.05 करोड़ रुपये का अर्थदण्ड लगाया गया । इसके अतिरिक्त उनके विरुद्ध एक सीज़ एवं डेज़िस्ट ऑर्डर भी जारी किया गया । अर्थदण्ड निर्धारित करते समय आयोग ने प्रासंगिक टर्नओवर के सिद्धांत का प्रयोग किया एवं चीनी मिलों द्वारा केवल एथेनॉल की बिक्री से जनित राजस्व पर अर्थदण्ड आधारित किया । आयोग ने चीनी मिलों के औसत प्रासंगिक टर्नओवर का 7 प्रतिशत अर्थदण्ड लगाया है । यद्यपि व्यापारिक संघों जैसे आईएसएमए एवं इएमएआई से, निविदा प्रक्रिया में हेरफेर में उनके प्रमुख योगदान को देखते हुए, औसत पावती का 10% अर्थदंड लिया गया ।
आयोग का आदेश 2013 के मामला संख्या 21, 29, 36, 47 एवं 48 एवं 49 में पारित किया गया एवं सीसीआई की वेबसाइट www.cci.gov.in पर एक प्रति अपलोड कर दी गई है ।
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आर.के.मीणा/ए.एम/ए.बी-10289
(रिलीज़ आईडी: 1546606)
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