लोकसभा सचिवालय
12वें BRICS संसदीय मंच, 2026 के समापन सत्र में माननीय लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला जी के संबोधन का मूल पाठ
प्रविष्टि तिथि:
27 OCT 2026 3:28PM by PIB Delhi
Excellencies,
BRICS के सदस्य एवं भागीदार देशों की संसदों के माननीय पीठासीन अधिकारीगण, विशिष्ट प्रतिनिधिगण, और देवियो और सज्जनो,
12वें BRICS संसदीय मंच के समापन के इस अवसर पर पिछले दो दिनों में हमने अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श किया। हमारे विचार अलग-अलग हो सकते हैं। हमारे मत भी अलग-अलग हो सकते हैं। हमारी परिस्थितियाँ और चुनौतियाँ भी अलग हो सकती हैं। लेकिन मानवता के कल्याण, शांति और समृद्धि के प्रति हमारी प्रतिबद्धता एक समान है। यही BRICS की सबसे बड़ी शक्ति है।
भारत की संसद की ओर से मैं सभी सदस्य एवं भागीदार देशों के प्रतिनिधिमंडलों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने अपने महत्वपूर्ण विचार, सुझाव, चिंताएँ और संकल्प हमारे साथ साझा किए। इस मंच पर हमने केवल वर्तमान चुनौतियों पर ही चर्चा नहीं की, बल्कि भविष्य के लिए सहयोग की नई संभावनाओं पर भी विचार किया।
Excellencies,
आज विश्व अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में संघर्ष और अस्थिरता है। आर्थिक अनिश्चितताएँ हैं। ऐसे समय में संवाद, विश्वास और सहयोग का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। भारत का यह विश्वास रहा है कि विश्व की समस्याओं का स्थायी समाधान संघर्ष में नहीं, संवाद में है। युद्ध में नहीं, शांति में है। और प्रतिस्पर्धा से अधिक सहयोग में है।
हमें एक ऐसे विश्व के निर्माण के लिए मिलकर कार्य करना चाहिए, जहाँ प्रत्येक राष्ट्र की संप्रभुता का सम्मान हो। जहाँ अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान शांतिपूर्ण तरीकों से हो। और जहाँ विकास के अवसर सभी को समान रूप से उपलब्ध हों।
वैश्विक शांति का वास्तविक अर्थ है - सबके लिए सुरक्षा, सम्मान, न्याय और बेहतर भविष्य का आश्वासन। आज विश्व का प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवा पीढ़ी, हमसे इसी भविष्य की अपेक्षा करती है। आने वाली पीढ़ियाँ हमें इस आधार पर याद करेंगी कि हमने उनके लिए कितना सुरक्षित, शांतिपूर्ण और समृद्ध विश्व बनाया।
इसलिए हमारा दायित्व होना चाहिए कि हम वर्तमान समस्याओं का समाधान करते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य की नींव रखें।
Excellencies,
लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद जनता की आशाओं और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं है। यह संवाद, सहमति, जवाबदेही और जनविश्वास की संस्था भी है।
हमारी संसदीय व्यवस्थाओं में पर्याप्त विविधता होने के बावजूद अपने नागरिकों के हितों की सुरक्षा करना और जनता के विश्वास को जीतना हमारी साझा जिम्मेदारी है। इसलिए यह आवश्यक है कि हमारी संसदें बदलते समय के साथ अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा जन-केंद्रित बनें।
आज Artificial Intelligence (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और डिजिटल तकनीक हमारे कार्य करने के तरीकों को बदल रही हैं। Responsible Technology के उपयोग से संसदीय कार्य प्रणाली को प्रभावी बनाया जा सकता है और नागरिकों की सहभागिता मजबूत हो सकती है। साथ ही, हमारे माननीय संसद सदस्यों की दक्षता और कार्यकुशलता भी बढ़ सकती है।
तकनीक का उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए। इसलिए हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक का विकास मानवीय मूल्यों के अनुरूप हो। Artificial Intelligence का उपयोग नैतिकता, पारदर्शिता, जवाबदेही और मानव कल्याण के सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।
हमारी संसदें इस दिशा में अपने अनुभव और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियाँ साझा करके महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
Excellencies,
मुझे विशेष प्रसन्नता है कि इस सम्मेलन में Joint Declaration (संयुक्त घोषणा-पत्र) पर सहमति बनी है। यह हमारी साझा सोच और सहयोग की भावना का महत्वपूर्ण प्रतीक है। इस संयुक्त घोषणा-पत्र के माध्यम से हमने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, राष्ट्रों की संप्रभु समानता, पारस्परिक सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
साथ ही, हमने इस मंच से आतंकवाद के सभी कृत्यों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित सभी आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के विरुद्ध समन्वित और ठोस कार्रवाई करने का भी आह्वान किया है।
हमने संसदीय सहयोग, डिजिटल तकनीक के उपयोग तथा अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक वैश्विक व्यवस्था के महत्व को भी रेखांकित किया है। यह सहमति हमारे भविष्य के सहयोग के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है।
BRICS विश्व के विभिन्न क्षेत्रों, संस्कृतियों और विकास के अनुभवों को एक साथ लाता है। इस विविधता में सहयोग की अपार संभावनाएँ हैं। BRICS की सफलता केवल उसके सदस्य देशों की प्रगति तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव व्यापक विश्व समुदाय तक पहुँचना चाहिए। विशेष रूप से Global South (ग्लोबल साउथ) की आकांक्षाओं को वैश्विक निर्णय प्रक्रियाओं में उचित स्थान मिलना चाहिए।
हमारा उद्देश्य किसी के विरुद्ध खड़ा होना नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर आगे बढ़ना होना चाहिए। एक अधिक समावेशी, संतुलित और न्यायसंगत विश्व व्यवस्था के निर्माण में BRICS महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Excellencies,
आज इस सम्मेलन का समापन हो रहा है, लेकिन हमारी साझा यात्रा जारी रहेगी। नई दिल्ली से हमारा संदेश स्पष्ट होना चाहिए - संवाद निरंतर रहे, विश्वास और मजबूत हो तथा हमारा सहयोग ठोस परिणामों में बदले। मुझे आशा है कि यहाँ हुई चर्चाएँ हमारे नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएँगी।
इस अवसर पर मैं वर्ष 2027 के लिए BRICS की अध्यक्षता ग्रहण करने वाले चीन को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। मुझे विश्वास है कि चीन की अध्यक्षता में BRICS सहयोग की यह यात्रा आगे बढ़ेगी।
आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे भविष्य के निर्माण का संकल्प लें, जहाँ विकास मानवता की सेवा करे, तकनीक मानवीय मूल्यों को मजबूत करे और हमारी संसदें शांति, सहयोग तथा समृद्धि की सशक्त आवाज बनें। हम इस मंच से सहयोग की नई ऊर्जा, साझा संकल्प और भविष्य के प्रति नए विश्वास के साथ आगे बढ़ें।
अंत में, मैं सभी माननीय पीठासीन अधिकारियों, प्रतिनिधिमंडलों तथा विशिष्ट अतिथियों को उनकी गरिमामयी उपस्थिति और सक्रिय सहभागिता के लिए पुनः धन्यवाद देता हूँ। आप सभी ने नई दिल्ली में इस आयोजन को सफल और सार्थक बनाया है। मुझे विश्वास है कि भारत में आपका प्रवास सुखद रहा होगा।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
जय हिन्द।
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AM
(रिलीज़ आईडी: 2328948)
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