सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
गंभीर ओवरडोज से लेकर निरंतर सुधार तक
असम के कामरूप निवासी अमित की आशा और पुनर्वास की यात्रा
प्रविष्टि तिथि:
23 OCT 2026 7:12PM by PIB Delhi
समय पर चिकित्सीय सहायता, साक्ष्य-आधारित उपचार और परिवार का निरंतर सहयोग लोगों को नशीले पदार्थों की लत से उबरने और अपना जीवन फिर से संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
असम के कामरूप महानगरीय जिले के 31 वर्षीय अमित (बदला हुआ नाम) की यात्रा इस बात को दर्शाती है कि किस तरह समन्वित चिकित्सीय देखभाल एवं निरंतर पुनर्वास, दीर्घकालिक सुधार और समाज में फिर से शामिल होने की प्रक्रिया में सहायक साबित हो सकते हैं।
अमित एक स्नातक हैं और स्वरोजगार करते हैं। सुधार की उनकी यात्रा तब शुरू हुई, जब हेरोइन की जानलेवा ओवरडोज लेने के बाद उनकी हालत बहुत बिगड़ गई। उन्हें गुवाहाटी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें सांस लेने में गंभीर समस्या हो रही थी और तत्काल चिकित्सीय सहायता की जरूरत थी। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान, उन्हें हेपेटाइटिस-सी होने का भी पता चला। ओपिओइड की लत ने उनके स्वास्थ्य और जीवन पर बहुत बुरा असर डाला था। इसलिए, समय रहते सही एवं व्यापक उपचार मिलना उनके लिए बेहद जरूरी हो गया था।
इन चुनौतियों के बावजूद, अमित नशीले पदार्थों की लत से बाहर निकलने के लिए संकल्पबद्ध रहे। उनके परिवार के प्रोत्साहन एवं व्यावहारिक सहयोग ने उन्हें उपचार जारी रखने और स्वस्थ होने की दिशा में आगे बढ़ने में अहम भूमिका निभाई। शुरुआती स्थिति स्थिर होने के बाद, उन्हें न्यूरोसाइकियाट्री वार्ड में भेज दिया गया, जहां उन्हें ब्यूप्रेनोर्फिन का उपयोग करते हुए ‘ओपिओइड सब्स्टिट्यूशन थेरेपी’ (ओएसटी) दी गई। उन्हें हेपेटाइटिस-सी के लिए भी उपचार मिला और दोबारा लत लगने से रोकने वाली थेरेपी (रीलैप्स प्रिवेंशन थेरेपी) दी गई। इस प्रकार, उनकी चिकित्सीय जरूरतों और नशीले पदार्थों की लत से जुड़ी मनोवैज्ञानिक व सामाजिक चुनौतियों, दोनों का समाधान किया गया।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद, अमित ने चिकित्सीय देखरेख में अपना इलाज जारी रखा। इसमें ब्यूप्रेनोर्फिन-नैलॉक्सोन दवा, मनो-सामाजिक उपाय, नर्सिंग सहायता और नियमित फॉलो-अप परामर्श शामिल थे। लगातार निगरानी एवं परामर्श से उन्हें अपने उपचार संबंधी योजना का पालन करने और स्वस्थ होने की दिशा में प्रगति बनाए रखने में मदद मिली। इस समन्वित दृष्टिकोण ने यह सुनिश्चित किया कि उनका उपचार केवल आपातकालीन देखभाल तक ही सीमित न रहे, बल्कि उसमें शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी निरंतर सहायता भी शामिल हो।

अमित के पुनर्वास में एक महत्वपूर्ण मोड़ यह आया कि स्वस्थ होने के दो-तीन महीने के भीतर ही उन्हें रोजगार मिल गया। इस उपलब्धि ने उन्हें फिर से सार्थक कार्यों में जुटने, अपने परिवार में आर्थिक योगदान देने और अपने निजी एवं सामाजिक जीवन में अधिक स्थिरता हासिल करने में समर्थ बनाया। उनकी प्रगति ने यह दर्शाया कि सही उपचार एवं निरंतर सहयोग लोगों को अपनी आजीविका फिर से खड़ी करने और अधिक आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने में कैसे मदद कर सकता है।
अमित ने एक वर्ष से अधिक समय तक अपने उपचार का पालन किया है और नशीले पदार्थों के सेवन से पूरी तरह दूर रहे हैं। इस दौरान, उन्हें दोबारा नशीले पदार्थों की लत नहीं लगी। उनका स्वास्थ्य निरंतर बेहतर हो रहा है। इसलिए, डॉक्टरों की देखरेख में अब उनकी दवाओं की खुराक धीरे-धीरे कम की जा रही है। उनकी यह यात्रा नशीले पदार्थों की लत से स्थायी रूप से उबरने की प्रक्रिया में समय पर आपातकालीन देखभाल, साक्ष्य-आधारित उपचार, दोबारा लत लगने से बचाव, नियमित फॉलो-अप और परिवार के सहयोग के महत्व को दर्शाती है।
एम्स गुवाहाटी में स्थित ‘एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी’ (एटीएफ) के जरिए, अमित को समन्वित चिकित्सा और मनो-सामाजिक सहायता मिली। इससे उन्हें जानलेवा आपातकालीन स्थिति से उबरकर, निरंतर सुधार की दिशा में बढ़ने में मदद मिली। उनका अनुभव उपचार और पुनर्वास सेवाओं की सुलभता के महत्व को रेखांकित करता है। ये सेवाएं लोगों को दोबारा स्वस्थ होने, पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने, आजीविका को फिर से खड़ा करने और समाज में दोबारा शामिल होने में मदद करती हैं। उनकी यह यात्रा आशा जगाती है कि सही उपचार, निरंतर सहयोग और व्यक्तिगत संकल्प के जरिए, नशे की लत से उबरना पूरी तरह संभव है।
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पीके/केसी/आरटी/आर
(रिलीज़ आईडी: 2327668)
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