सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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गुवाहाटी में आज से 8 दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 आरंभ


31 महिलाओं सहित 75 कारीगर, हथकरघा और हस्तशिल्प की 40 किस्मों के उत्पाद प्रदर्शित करेंगे

यह मेला अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, सफाई मित्रों और विमुक्त जनजातियों से संबंधित कारीगरों के लिए बाजार पहुंच, उद्यमिता और संवहनीय आजीविका को बढ़ावा देगा

प्रविष्टि तिथि: 21 OCT 2026 5:35PM by PIB Delhi

असम की राजधानी गुवाहाटी में आज आठ दिनों तक चलने वाला शिल्प समागम मेला 2026 आरंभ हुआ। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित यह मेला 28 अक्टूबर तक चलेगा।

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मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गुवाहाटी के खानापारा स्थित फार्म गेट पर यह मेला आम लोगों के लिए प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहेगा। उन्होंने कहा कि आगंतुक यहां विविध पारंपरिक उत्पाद देख और खरीद सकेंगे तथा हुनरमंद कारीगरों के कार्यों को समर्थन दे सकेंगे।  

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अधिकारी ने बताया कि इस मेले में देशभर के कारीगर भाग ले रहे हैं, जिनमें पूर्वोत्तर राज्यों के कारीगर भी शामिल हैं। इसका उद्देश्य भारत की समृद्ध और विविध पारंपरिक हस्तशिल्प एवं हथकरघा विरासत को प्रदर्शित करना है।

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उन्होंने कहा कि मेले में कुल 75 कारीगर भाग ले रहे हैं, जिनमें 31 महिला कारीगर शामिल हैं। ये कारीगर हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की लगभग 40 किस्में प्रदर्शित कर रहे हैं।

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अधिकारी ने बताया कि यह आयोजन भाग लेने वाले कारीगरों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और सीधे ग्राहकों को बेचने, संभावित खरीदारों से संपर्क स्थापित करने तथा अपने बाजार का विस्तार करने के अवसर प्रदान कर रहा है। कारीगरों और उपभोक्ताओं के बीच सीधे संवाद को बढ़ावा देकर यह मेला बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने, उद्यमिता प्रोत्साहित करने और कारीगरों की आजीविका के अवसरों में सुधार लाने का प्रयास है।

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उन्होंने बताया कि गुवाहाटी में आयोजित इस मेले में देश के विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक शिल्प और हथकरघा उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की जा रही है। पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों से आए कारीगरों की भागीदारी से आगंतुकों को भारत की कलात्मक परंपराओं, स्थानीय शिल्प कौशल और सांस्कृतिक विरासत की विविधता को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। अधिकारी ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य उन कारीगरों के कौशल और रचनात्मकता के प्रति लोगों में अधिक सराहना पैदा करना भी है, जिनके उत्‍पाद पारंपरिक ज्ञान और शिल्पकलाओं को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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अधिकारी ने बताया कि मेले का एक प्रमुख उद्देश्य भारत-तुलिप, यानी पारंपरिक कारीगरों के उत्थान एवं आजीविका कार्यक्रम, को बढ़ावा देना है। इस पहल का उद्देश्य लक्षित समुदायों के कारीगरों द्वारा निर्मित उत्पादों की बिक्री को भौतिक बिक्री केंद्रों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से सुगम बनाना है। व्यापक बाजारों और डिजिटल माध्यमों तक पहुंच उपलब्ध कराकर यह पहल कारीगरों के बाजार संपर्क बेहतर बनाने, ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाने और उनकी आय में वृद्धि के अतिरिक्त अवसर पैदा करने का प्रयास है। साथ ही यह पारंपरिक कलाओं और हस्तशिल्प को नए उपभोक्ता बाजारों से जोड़कर उनके संरक्षण और संवर्धन में भी सहयोग देता है।

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शिल्प समागम मेला -2026 सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य मंत्रालय के तीन राष्ट्रीय निगमों- राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम से जुड़े कारीगरों और लाभार्थियों को विपणन सहायता प्रदान करना है।

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वर्ष 2026 के शिल्प समागम मेले का प्रथम आयोजन 19 अक्टूबर को कर्नाटक के मैसूरु में संपन्‍न हुआ। मैसूरु के दशहरा प्रदर्शनी मैदान में आयोजित नौ दिवसीय मेले में हजारों आगंतुक पहुंचे।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास दृष्टिकोण से प्रेरित यह मेला अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्ग, सफाई मित्रों और विमुक्त जनजातियों से संबंधित कारीगरों के आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देने का प्रयास है। यह इन समुदायों के कारीगरों को अपने कौशल प्रदर्शित करने, उत्पादों की बिक्री और संवहनीय आजीविका के अवसरों द्वारा आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत बनाने के लिए समर्पित मंच प्रदान करता है।

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पारंपरिक उत्पादों की बिक्री प्रोत्साहित करने के अलावा, यह मेला आगंतुकों और भाग लेने वाले समुदायों को मंत्रालय तथा उसके तीनों राष्ट्रीय निगमों द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता और विकास योजनाओं के बारे में जागरूक बनाएगा। इस पहल का उद्देश्य वित्तीय और विकास संबंधी सहायता के साथ ही बाजार-केंद्रित उपायों को भी बढ़ावा देना है, ताकि कारीगर अपने पारंपरिक कौशल और शिल्पकला को आजीविका के व्यावहारिक एवं संवहनीय साधनों में बदल सकें।

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यह उल्लेखनीय है कि शिल्प समागम मेले जैसी पहल द्वारा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय आर्थिक कठिनाइयों का सामना करने वाले समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण के प्रयासों को आगे बढ़ा रहा है। इसके तहत उद्यमिता को प्रोत्साहित करने, बाजार तक पहुंच सुगम बनाने और सतत आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

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उम्मीद है कि यह मेला भाग लेने वाले कारीगरों को अधिक पहचान दिलाएगा, उनके उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा और भारत की हथकरघा एवं हस्तशिल्प की समृद्ध परंपराओं के प्रति आम लोगों की रूचि बढाएगा।

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केपी/केसी/आरटी/एकेवी/एसके


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