ग्रामीण विकास मंत्रालय
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12 और 13 अक्टूबर, 2026 को हरियाणा के गुरुग्राम में 'दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' के तहत 'डिजिटल डेटा प्रणालियों को सुदृढ़ करने और साक्ष्य-आधारित शिक्षा' पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया


'जो मापा जाता है वह किया जाता है; जो मापा जाता है वह बेहतर हो जाता है': सचिव, डीएवाई-एनआरएलएम के अगले चरण को आगे बढ़ाने के लिए ग्रामीण विकास विभाग को सदस्यों के स्तर के सटीक और विस्तृत डेटा की आवश्यकता है

लोकओएस एक रिपोर्टिंग प्लैटफॉर्म से विश्वसनीय सामुदायिक-वित्त अवसंरचना के रूप में विकसित होगा, जो एक सुदृढ़ निगरानी, मूल्यांकन और सीखने के ढांचे द्वारा समर्थित होगा

प्रविष्टि तिथि: 15 OCT 2026 8:58PM by PIB Delhi

भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने हरियाणा के गुरुग्राम में 12 और 13 अक्टूबर 2026 को डीएवाई-एनआरएलएम के तहत 'डिजिटल डेटा सिस्टम और साक्ष्य-आधारित शिक्षा को सुदृढ़ करने' पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, नीति आयोग, विश्व बैंक, जीआईजेड, जे-पीएल, गेट्स फाउंडेशन, 3आईई, बीआरएसी, नाबार्ड, एनपीसीआई, वित्तीय संस्थानों और विकास भागीदारों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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भारत सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री रोहित कंसल ने अपने संबोधन में कहा कि लगभग 92 लाख स्वयं सहायता समूहों में संगठित करीब 10 करोड़ महिलाओं ने लगभग 14 लाख करोड़ रुपये का औपचारिक ऋण प्राप्त किया है। अगले चरण में लगभग 87 लाख उद्यमों को मजबूत किया जाना चाहिए और छह करोड़ के लक्ष्य की ओर लखपति दीदी की प्रगति पर नजर रखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस चीज को मापा जाता है, वही की जाती है; जिसे मापा जाता है, उसमें सुधार होता है।' उन्होंने कहा कि लोकओएस को एक ऐसा ऑपरेशनल प्लैटफॉर्म बनना चाहिए जो बैंकिंग पोर्टल्स के साथ जुड़ा हो, जिससे डिजिटल क्रेडिट की प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के पूरी हो सके। उन्होंने आग्रह किया कि डेटा पूर्ण, सुसंगत, अद्यतन (अपडेट), सही और सत्यापित होना चाहिए, और मिशन को निगरानी डैशबोर्ड से आगे बढ़कर निर्णय-सहायक प्रणालियों की ओर बढ़ना चाहिए।

भारत सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के अतिरिक्त सचिव श्री विपिन कुमार ने डीएवाई-एनआरएलएम के लिए तीन रणनीतिक बदलावों की रूपरेखा बताईं। इनमें समावेश से समृद्धि की ओर, ऋण तक पहुंच से गुणवत्तापूर्ण ऋण की ओर और समर्थित संस्थानों से आत्मनिर्भर संस्थानों की ओर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि लोकओएस हर महिला की बचत और कर्ज चुकाने के व्यवहार के आधार पर उसकी विश्वसनीयता का एक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह डेटा उन महिलाओं का है, जो इसे तैयार करती हैं और इसका इस्तेमाल उनके हित में ही किया जाना चाहिए।

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मंत्रालय राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों और तकनीकी साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि परिचालन और प्रणाली संबंधी समस्याओं का व्यवस्थित रूप से समाधान किया जा सके। साथ ही जिम्मेदारियां और समय-सीमाएं स्पष्ट रूप से तय की जा सकें, फील्ड कर्मियों और सामुदायिक कैडरों के प्रशिक्षण तथा मार्गदर्शन को मजबूत किया जा सके और राज्यों की बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाकर आपसी सीख को बढ़ावा दिया जा सके। कार्यशाला के दौरान एसएचजी, वीओ और सीएलएफ प्रोफाइल के डिजिटलीकरण और लोकओएस प्लैटफॉर्म पर उनके वित्तीय लेनदेन को दर्ज करने की प्रगति की समीक्षा की गई। सदस्यों और संस्था के आंकड़ों के सत्यापन को लेन-देन, ऋण इतिहास और कार्यक्रम विश्लेषण का आधार बताया गया। यह कार्यशाला निगरानी ढांचे को मजबूत करेगी। इसके लिए परिवारों, संस्थानों और उद्यमों से जुड़े परिणामों पर ध्यान दिया जाएगा, साक्ष्य आधार के रूप में लोकओएस का उपयोग किया जाएगा, विभिन्न योजनाओं के प्रशासनिक डेटासेट को आपस में जोड़ा जाएगा और साक्ष्य तैयार करने तथा उनका उपयोग करने की राज्य की क्षमता में निवेश किया जाएगा।

इस कार्यशाला में भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री अमित शुक्ला; भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की उप सचिव डॉ. मोनिका; भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त निदेशक श्रीमती रंगोली पाठक; हरियाणा एसआरएलएम के सीईओ श्री सूरज भान; बिहार एसआरएलएम के  सीईओ श्री हिमांशु शर्मा और गुरुग्राम, हरियाणा के  सीईओ-जेडपी श्री सुमित कुमार भी उपस्थित रहे।

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पीके/केसी/आरटी/आरकेजे


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