सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
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गुणवत्तापूर्ण सड़क अवसंरचना के लिए सहयोग बढ़ाने और ज्ञान-साझाकरण पर जोर के साथ चिंतन शिविर 2026 का समापन


दो दिवसीय सम्मेलन ने केंद्र, राज्यों और हितधारकों को अनुभव, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां और व्यावहारिक समाधान साझा करने के लिए एक मंच प्रदान किया

प्रविष्टि तिथि: 06 OCT 2026 6:20PM by PIB Delhi

दो दिवसीय “चिंतन शिविर 2026 – राजमार्ग अवसंरचना पर राष्ट्रीय सम्मेलन” का आज गुजरात के एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में समापन हुआ । सम्मेलन में गुणवत्तापूर्ण सड़क अवसंरचना के विकास के लिए केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करने, जमीनी स्तर के अनुभवों को साझा करने तथा संस्थागत क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया गया।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव श्री वी. उमाशंकर ने कहा कि चिंतन शिविर ने राजमार्ग और सड़क क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों का एक साझा समुदाय विकसित करने का अवसर प्रदान किया है। इसके माध्यम से राज्यों और अन्य हितधारकों को नीतिगत तथा कार्यान्वयन दोनों स्तरों पर अपने पहल, अनुभवों और समाधानों को साझा करने का अवसर मिला।

श्री उमाशंकर ने कहा कि आधारभूत संरचना के विकास का ध्यान अब तेजी से इसकी गुणवत्ता की ओर स्थानांतरित हो रहा है। विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों, राज्य राजमार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों तथा एक्सप्रेसवे सहित सभी स्तरों पर उच्च गुणवत्ता वाली सड़कों की आवश्यकता है।

 

 

चिंतन शिविर की चर्चाओं का एक प्रमुख परिणाम यह रहा कि राज्यों को राष्ट्रीय स्तर पर विकसित किए गए तकनीकी प्लेटफॉर्म और संस्थागत क्षमताओं का लाभ उठाने का अवसर मिला। पीएम गतिशक्ति, डेटा लेक, ई-डीएआर (eDAR), ठेकेदार रेटिंग प्रणाली और भूमि राशि (Bhoomi Rashi) जैसे प्लेटफॉर्म राज्य स्तर पर भी उपयोग में लाए जा सकते हैं। इसके लिए तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।

वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के लिए उपयोग किए जा रहे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित ई-डीएआर प्लेटफॉर्म का उपयोग राज्य और स्थानीय सड़कों पर दुर्घटनाओं के पैटर्न का विश्लेषण करने तथा सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए साक्ष्य-आधारित उपाय विकसित करने में भी किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए संबंधित सड़कों से जुड़े आवश्यक आंकड़ों की उपलब्धता जरूरी होगी।

शिविर में निर्माण क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए व्यावसायिकता, कौशल विकास और बेहतर पर्यवेक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। श्री उमाशंकर ने निर्माण श्रमिकों के लिए लक्षित कौशल विकास और क्षमता निर्माण के महत्व को रेखांकित किया, ताकि निर्माण प्रक्रियाओं में सुधार हो और बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

डीपीआर सलाहकारों, प्राधिकरण अभियंताओं और स्वतंत्र अभियंताओं के चयन तथा उनके प्रदर्शन के आकलन की गुणवत्ता को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया। इसमें तकनीकी क्षमता और पिछले प्रदर्शन को अधिक महत्व देने की आवश्यकता बताई गई। इन उपायों का उद्देश्य पर्यवेक्षण से संबंधित कमियों को दूर करना और परियोजनाओं के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करना है।

सम्मेलन में राज्यों द्वारा नवीन अनुबंध और वित्तपोषण तंत्र अपनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इनमें मॉडल कन्सेशन एग्रीमेंट, बीओटी (BOT) और एन्युटी आधारित मॉडल शामिल हैं, जिनका उपयोग विशेष रूप से राज्य राजमार्गों और राज्य एक्सप्रेसवे के विकास में किया जा सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर विकसित अनुभव और विशेषज्ञता का उपयोग राज्यों द्वारा संरचित तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण के माध्यम से किया जा सकता है।

श्री उमाशंकर ने राज्यों से अपने स्तर पर भी चिंतन शिविर और कार्यशालाएं आयोजित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इनमें क्षेत्र के विशेषज्ञों और अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित कर ज्ञान के आदान-प्रदान तथा सफल कार्यप्रणालियों को व्यापक स्तर पर अपनाने को बढ़ावा दिया जा सकता है।

दो दिवसीय सम्मेलन में पीएम गतिशक्ति और एकीकृत अवसंरचना योजना; भूमि अधिग्रहण और भूमि राशि; मॉडल कन्सेशन एग्रीमेंट और रेटिंग; सुरक्षित राजमार्गों का डिजाइन, हरित राजमार्ग, सड़क सुरक्षा और टोल सुधार; तथा गुणवत्ता आश्वासन और परियोजना निगरानी जैसे विषयों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए गए।

इन सत्रों के माध्यम से केंद्र और राज्यों के बीच संवाद, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान तथा कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों के व्यावहारिक और अन्य क्षेत्रों में भी लागू किए जा सकने वाले समाधानों की पहचान की गई। इससे देश में भविष्य के लिए तैयार, सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाली सड़क अवसंरचना के निर्माण के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण को और मजबूत किया गया।

 

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