कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
प्रस्तावित 'सीड बिल' पर कृषि भवन, नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर के किसान संगठनों के शीर्ष नेताओं के साथ किया व्यापक संवाद
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार हर नीति किसानों से संवाद और सहमति के आधार पर तय करने के लिए प्रतिबद्ध- श्री शिवराज सिंह
1966 का पुराना कानून अब समय के अनुकूल नहीं'; 70% बीज मौजूदा एक्ट के दायरे से बाहर, नकली बीजों पर नकेल कसना जरूरी- श्री शिवराज सिंह चौहान
किसानों के अधिकारों की पूरी गारंटी, पारंपरिक बीजों की पूरी सुरक्षा- श्री शिवराज सिंह
ट्रेसेबिलिटी सिस्टम से किसान को सही बीज की पहचानन आसान होगी- श्री शिवराज सिंह चौहान
प्रविष्टि तिथि:
10 SEP 2026 8:36PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में केंद्र सरकार किसानों के हित में एक और ऐतिहासिक कदम उठा रही है। नकली और घटिया बीजों से किसानों को हमेशा के लिए मुक्ति दिलाने के लिए प्रस्तावित 'सीड बिल' पर आज कृषि भवन, नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर के किसान संगठनों के शीर्ष नेताओं के साथ व्यापक संवाद किया. लगभग सभी राज्यों के किसान प्रतिनिधियों के साथ हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रस्तावित कानून के हर पहलू पर खुलकर चर्चा हुई और किसानों के जमीनी अनुभवों को केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने ध्यानपूर्वक सुना और कहा कि इन पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव श्री अतीश चंद्रा सहित वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

बैठक में भारतीय किसान संघ, बीकेयू (विभिन्न घटक), अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति (AIKCC), किसान महापंचायत, भारतीय कृषक समाज, गांव किसान उन्नयन, सोसाइटी फॉर इंडिपेंडेंट फार्मर्स एसोसिएशन (SIFA), कर्नाटक रैयत संघ, तेलंगाना रैयत संघ, महाराष्ट्र का शेतकारी संगठन, गुजरात का खेदुत समाज, राजस्थान व बिहार की राष्ट्रीय किसान प्रोग्रेसिव एसोसिएशन, तमिलनाडु का व्यवसाइगल संघम, झारखंड का प्रगतिशील कृषि मंच तथा केरल के कोट्टायम का कृषक संगठन सहित कई राज्यों के जमीनी किसान प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

1966 का पुराना कानून अब समय के अनुकूल नहीं, जल्दबाजी में कोई कदम नहीं- केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक की शुरुआत में ही स्पष्ट किया कि वर्तमान बीज अधिनियम 1966 में बना था और बीज नियंत्रण आदेश 1983 में लागू हुआ था। उन्होंने कहा कि आप सब जानते हैं कि हमारा जो बीज अधिनियम है, वो 1966 में बना हुआ था और बीज नियंत्रण आदेश 83 में आया, लेकिन समय के साथ-साथ जब भी हम विकास करते हैं, तो कुछ समस्याएं सामने आती रहती हैं। अभी खऱाब बीज का उत्तरदायित्व स्थापित करने की व्यवस्था नहीं है, जिससे नकली या खराब बीज बाजार में पहुंच जाते हैं।
बैठक के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए श्री शिवराज सिंह ने कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के दौरान किसानों की तरफ से यह सुझाव और मांग आई थी कि सीड एक्ट और पेस्टिसाइड एक्ट 1966 में बने थे, और तब से लेकर अब तक परिस्थितियों में बहुत परिवर्तन हुआ है। उन्होंने कहा कि जरूरत है कि नया सीड एक्ट आए और पेस्टिसाइड एक्ट भी नया आए, क्योंकि एक बड़ी समस्या घटिया बीज, घटिया पेस्टिसाइड की पहचान भी है। उन्होंने बताया कि 2025 के नवंबर-दिसंबर में बीज बिल पर सुझाव मांगे गए थे, जिन पर लगभग 18,000 सुझाव किसानों और किसान संगठनों से आए थे। उन्होंने कहा कि अभी हमने एक विचार-विमर्श भी किया, यह सिलसिला फिर प्रारंभ किया, क्योंकि जो कदम उठेगा, वो बहुत सोच-समझ के, गहराई में जाकर ही उठाना पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि आज लगभग 20 किसान संगठनों ने अपने सुझाव दिए, सुझाव लेने का क्रम अभी जारी रहेगा। शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि कोई भी किसान संगठन हो, या किसान हो इंडिविजुअल भी, कोई भी सुझाव देना चाहे, उन सबके सुझावों का स्वागत है। उन पर संपूर्णता से और गहराई से विचार करके, हमारे किसानों के हित में, फिर एक्ट के लिए कदम उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह विचार-विमर्श की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी। इसमें कोई डेडलाइन अभी तय नहीं कर रहे हैं। किसान, किसान संगठन, बाकी सुझाव देंगे, तो उन पर विचार और करेंगे, उसके बाद फिर आगे बढ़ेंगे। शिवराज सिंह ने बताया कि अलग-अलग तरह के सुझाव आए हैं, अलग-अलग तरह की राय आई है, सारे ऐसे मुद्दे हैं जिन पर जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया जा सकता, इसलिए सोच-विचार करके हम ये एक्ट लाएंगे, जो ज्यादा कड़ा होगा, प्रभावी होगा, जिससे नकली बीजों पर रोक लगे।
70% बीज मौजूदा एक्ट के दायरे से बाहर, नकली बीजों पर नकेल कसना जरूरी- बैठक में श्री शिवराज सिंह चौहान ने चिंता व्यक्त की कि आज 70% बीज मौजूदा बीज अधिनियम के दायरे से बाहर हैं। बीज की व्यवस्था भिन्न है और राज्यों की अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं। सजा के प्रावधान भी बहुत प्रभावी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए एक नया सीड बिल लाना चाहिए, जिसकी अभी आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पिछले साल नवंबर-दिसंबर 2025 में ड्राफ्ट पर पब्लिक कंसल्टेशन के लिए सुझाव मांगे गए थे, जिन पर लगभग 18,000 सुझाव किसानों और किसान संगठनों से आए थे। उन्होंने कहा कि उन सुझावों का भी अध्ययन किया, लेकिन मुझे लगा कि प्रत्यक्ष रूप से वो किसान संगठन, जो किसानों के बीच में काम करते हैं, वो किसान की समस्याओं से सुपरिचित हैं, उनके साथ चर्चा एक बार हो जाए, क्योंकि जो आए, वो बहुत सोच-समझ के आए।
किसानों के अधिकारों की पूरी गारंटी, पारंपरिक बीजों को पूरी सुरक्षा- केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने स्पष्ट किया कि इस कानून से किसानों के अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। किसान अपने पारंपरिक और कृषक किस्मों के बीजों का उपयोग, आपस में आदान-प्रदान और विक्रय स्वतंत्र रूप से कर सकेंगे। पारंपरिक बीजों के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं होगा, हालांकि यदि कोई किसान अपनी किस्म को पंजीकृत करवाना चाहे तो उसके लिए स्वेच्छा से पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध होगी। किसानों को किसी भी तरह के पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। किसान अगर बीज को उत्पादित करता है, किसी कंपनी के लिए भी करता है, या अपने पर्सनल यूज़ के लिए करता है, या गाँव में बाँटने के लिए करता है, तो उसको डिजिटल से पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है।
प्रभावी दंड व्यवस्था- नए सीड बिल के प्रस्ताव में अपराधों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। छोटी चूक के लिए पहली बार चेतावनी और दूसरी बार अधिक जुर्माना होगा।
किसान संगठनों ने दिए सुझाव, गंभीरता से होगा विचार- बैठक में देशभर के किसान संगठनों के नेताओं ने प्रस्तावित सीड एक्ट पर महत्वपूर्ण सुझाव रखे, जिसके लिए श्री शिवराज सिंह ने सभी का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा- बैठक में देशभर से आए किसान प्रतिनिधियों ने जो सुझाव दिए हैं, उन सभी पर हम गंभीरता से विचार करेंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार हर नीति किसानों से संवाद और सहमति के आधार पर तय करने के लिए प्रतिबद्ध है। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि यह महामंथन देश के कृषि क्षेत्र को नकली बीजों के दंश से पूरी तरह मुक्त कराने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। किसान संगठनों के नेताओं ने जो अनुभव साझा किए, जो सुझाव दिए, वे सभी बहुमूल्य हैं। हम इन सभी पर गंभीरता से विचार-विमर्श करेंगे और जिन सुझावों को लागू किया जा सकता है, उन्हें अंतिम मसौदे में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कानून किसानों के हितों को केंद्र में रखकर बनाया जा रहा है, और इसमें किसी भी तरह की कमी नहीं रहेगी।
किसान सर्वोपरि, अन्य स्टेकहोल्डर्स से भी होगी चर्चा- किसानों के अलावा अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा के बारे में पूछे जाने पर श्री शिवराज सिंह ने कहा कि सभी स्टेकहोल्डर्स से चर्चा की जा रही है, जिनमें फार्मर प्रमुख हैं। खेती का आधार किसान है।
प्रधानमंत्री मोदी के विजन का अमलीजामा, किसान होंगे सशक्त और आत्मनिर्भर- श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के समृद्ध और आत्मनिर्भर किसान के विजन को अमलीजामा पहनाते हुए यह कानून तैयार किया गया है। सरकार हर नीति किसानों से संवाद और सहमति के आधार पर तय करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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आरसी/ एचआर/ डीके
(रिलीज़ आईडी: 2308905)
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