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ब्रिक्स


प्रगति, सहयोग और भारत की नेतृत्वकारी भूमिका

प्रविष्टि तिथि: 10 SEP 2026 12:43PM by PIB Delhi

चार उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक संक्षिप्त नाम आज एक बहुत बड़े समूह का रूप ले चुका है। आज यह चार महाद्वीपों तक फैला एक महत्वपूर्ण जियोपॉलिटिकल ब्लॉक है। इसकी यात्रा चार देशों के बीच संवाद से शुरू होकर आज के कहीं अधिक व्यापक समूह तक पहुँची है। सदस्यता के लगातार विस्तार के साथ इसमें तेल-समृद्ध देश, अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाएँ और दक्षिण-पूर्व एशिया के साझेदार भी शामिल होते गए। इस विस्तारित व्यवस्था के केंद्र में आज भारत है, जो इस समूह की स्थापना के बाद से इस वर्ष चौथी बार इसकी अध्यक्षता कर रहा है।

ब्रिक्स: समावेशी वैश्विक व्यवस्था का निर्माण

ब्रिक्स प्रमुख उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक नीतियों के समन्वय के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है। यह वह प्रमुख मंच है, जहाँ ये देश ग्लोबल गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण तैयार करते हैं। निरंतर संवाद के माध्यम से यह बहुपक्षीय संस्थाओं के भीतर ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम बन गया है। ब्रिक्स का एजेंडा विकास, वित्त, प्रौद्योगिकी, व्यापार तथा लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे व्यापक क्षेत्रों तक फैला हुआ है। यह समूह विश्व स्तर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बढ़ते आर्थिक प्रभाव और उनकी आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करता है। साथ ही, यह सदस्य देशों को अपने अनुभव साझा करने और साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान तलाशने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करता है।

भारत की 2026 की अध्यक्षता के तहत, 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी 12–13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारत द्वारा की जाएगी। वर्ष 2026 में यह ब्रिक्स की अध्यक्षता करने का भारत का चौथा अवसर होगा। भारत की अध्यक्षता का मार्गदर्शक विषय है— “सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण”। यह विषय भारत के मौजूदा उपलब्धियों को मजबूत करने और संस्थागत प्रभावशीलता को बढ़ाने पर केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है। इसमें विकास, स्थिरता और नवाचार को एजेंडे के केंद्र में रखा गया है। साथ ही, यह ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को भी प्रमुखता देता है। भारत का उद्देश्य ब्रिक्स को एक रचनात्मक, समाधान-केंद्रित और परिणामोन्मुख मंच के रूप में और अधिक सशक्त बनाना है।

आज ब्रिक्स में 11 देश शामिल हैं— ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात। सामूहिक रूप से, ये सदस्य देश विश्व की 49.5 प्रतिशत आबादी, वैश्विक जीडीपी के 40 प्रतिशत और विश्व व्यापार के 26  प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये आँकड़े उनकी उल्लेखनीय जनसांख्यिकीय और आर्थिक क्षमता को रेखांकित करते हैं। ब्रिक्स के विस्तारित सदस्य-समूह ने एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका तक इसकी भौगोलिक पहुँच को भी व्यापक बनाया है। यह विविधता बड़े बाजारों, प्राकृतिक संसाधनों, तकनीकी क्षमताओं और विकास के विभिन्न अनुभवों को एक साझा मंच पर लेकर आती है।

ब्रिक्स क उद्भव

ब्रिक’ (BRIC) संक्षिप्त नाम वर्ष 2001 में गोल्डमैन सैक्स द्वारा प्रकाशित ग्लोबल इकोनॉमिक्स पेपर The World Needs Better Economic BRICs’ में गढ़ा गया था। इकोनॉमेट्रिक एनालिसिस के आधार पर इस शोध-पत्र में अनुमान लगाया गया था कि ब्राजील, रूस, भारत और चीन अगले पाँच दशकों के दौरान विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होंगे। इन देशों की बढ़ती आर्थिक शक्ति और तीन महाद्वीपों में फैली उनकी विशाल भौगोलिक पहुँच ने उनके उभरते वैश्विक महत्व को रेखांकित किया। इसके बाद ब्रिक की अवधारणा एक औपचारिक समूह के रूप में विकसित हुई। वर्ष 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के साथ ब्रिक का विस्तार होकर ब्रिक्स बन गया। यह बदलाव केवल विश्लेषकों द्वारा पहचाने गए एक आर्थिक समूह से आगे बढ़कर राजनीतिक, आर्थिक और विकासात्मक सहयोग के लिए एक औपचारिक मंच के रूप में इसके रूपांतरण को दर्शाता है।

उद्देश्य, लक्ष्यों एवं सहयोग के प्रमुख क्षेत्र

ब्रिक्स की प्रारंभिक अवधारणा ऐसे प्रमुख मुद्दों पर संवाद के लिए एक मंच के रूप में की गई थी, जो अंतरराष्ट्रीय एजेंडे को प्रभावित करते हैं। शुरुआती दौर में इसका ध्यान वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक विषयों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करने पर केंद्रित था। इसका उद्देश्य एक अधिक लोकतांत्रिक, वैध और संतुलित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देना था। इस समूह ने सतत आर्थिक एवं सामाजिक विकास, सामाजिक समावेशन तथा उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझा समृद्धि पर भी विशेष जोर दिया। समय के साथ, इन प्राथमिकताओं ने सदस्य देशों के बीच अधिक गहरे और व्यापक सहयोग की मजबूत नींव तैयार की है।

लगातार आयोजित शिखर सम्मेलनों के माध्यम से ब्रिक्स का सहयोग धीरे-धीरे बढ़कर रणनीतिक वैश्विक मुद्दों और व्यावहारिक सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों तक विस्तृत हुआ है। इसके एजेंडे में आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार तथा कृषि जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। इसके साथ ही, यह श्रम एवं रोजगार, दूरसंचार, अंतरराष्ट्रीय वित्त और वैश्विक आर्थिक स्थिति जैसे विषयों पर भी ध्यान केंद्रित करता है। ब्रिक्स, विश्व व्यापार संगठन  और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था सहित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व और समानता का प्रबल समर्थन करता है। इन प्रयासों का उद्देश्य ग्लोबल गवर्नेंस को अधिक समावेशी, प्रभावी और वर्तमान चुनौतियों के प्रति अधिक उत्तरदायी बनाना है।

ब्रिक्स की विकास यात्रा: संकट से सामूहिक प्रयास तक

2008 का वैश्विक वित्तीय संकट ब्रिक्स के विकासक्रम में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इस संकट ने मौजूदा वैश्विक वित्तीय व्यवस्था की कमियों को उजागर किया। साथ ही, ग्लोबल इकोनॉमिक गवर्नेंस के संबंध में व्यापक सहमति की आवश्यकता को भी सामने रखा। चारों ब्रिक (BRIC) देशों ने इन मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने अधिक प्रतिनिधित्व वाली अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की अधिक प्रभावी भागीदारी और आवाज की मांग की। उन्होंने संरक्षणवाद का भी विरोध किया तथा खुले और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार तंत्र का समर्थन किया। इन साझा प्रयासों ने 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में आयोजित पहले ब्रिक (BRIC) शिखर सम्मेलन की नींव तैयार की।

ब्रिक (BRIC) की औपचारिक स्थापना वर्ष 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन के बीच राजनीतिक सहयोग के एक मंच के रूप में हुई थी। इसके संस्थापक सदस्य अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और न्यायसंगत वैश्विक व्यवस्था की साझा आकांक्षा रखते थे। दक्षिण अफ्रीका वर्ष 2011 में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल हुआ, जिसके साथ ब्रिक (BRIC) का विस्तार होकर बिक्स (BRICS) हो गया। इस समावेशन से विभिन्न महाद्वीपों में समूह का भौगोलिक प्रतिनिधित्व और व्यापक हुआ। इसके बाद समूह ने अपने एजेंडे का विस्तार केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित न रखते हुए विकास, वित्त, स्वास्थ्य, जलवायु कार्रवाई, प्रौद्योगिकी और व्यापार जैसे क्षेत्रों तक किया। इस विकासक्रम ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग और संवाद के लिए ब्रिक्स को एक व्यापक एवं प्रभावी मंच के रूप में और अधिक सशक्त बनाया।

ब्रिक्स का विस्तार: बढ़ती पहुँच और मजबूत होता सहयोग

विस्तार का एक महत्वपूर्ण चरण जनवरी 2024 में शुरू हुआमिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ब्रिक्स के पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया 11वें पूर्ण सदस्य के रूप में ब्रिक्स में शामिल हुआ। इन नए सदस्य देशों के शामिल होने से ब्रिक्स की भौगोलिक और आर्थिक पहुँच में उल्लेखनीय विस्तार हुआ। इस विस्तार के साथ 'पार्टनर कंट्री' (साझेदार देश) की एक नई श्रेणी भी बनाई गई। वर्ष 2025 के दौरान दस देश इस ढाँचे में शामिल हुए— बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम। यह नई व्यवस्था ब्रिक्स के साथ संरचित सहयोग और संवाद के लिए एक अतिरिक्त माध्यम उपलब्ध कराती है।

'पार्टनर कंट्री' फ़्रेमवर्क, ब्रिक्स की पूर्ण सदस्यता संरचना में कोई परिवर्तन किए बिना इसके दायरे और पहुँच को व्यापक बनाती है। यह एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और यूरेशिया में साउथ-साउथ सहयोग के अवसरों को और मजबूत करती है। यह व्यापक नेटवर्क व्यापार, वित्त, जलवायु कार्रवाई और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएँ भी उपलब्ध कराता है। यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच ग्लोबल गवर्नेंस से जुड़े विमर्श में भागीदारी की बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

ब्रिक्स का विकास चार देशों के आर्थिक संवाद से आगे बढ़कर राजनीतिक, आर्थिक, वित्तीय और सामाजिक सहयोग के व्यापक ढाँचे में परिवर्तन को दर्शाता है। इसके विस्तार ने समूह की जनसांख्यिकीय और आर्थिक शक्ति को बढ़ाया है। साथ ही, इसके क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सहयोग के क्षेत्रों का भी विस्तार हुआ है। ब्रिक्स का संस्थागत विकास उभरती अर्थव्यवस्थाओं की बदलती प्राथमिकताओं के अनुरूप निरंतर आगे बढ़ा है

ब्रिक्स की अध्यक्षता: क्रमिक व्यवस्था और दायित्व

ब्रिक्स की अध्यक्षता इसके संक्षिप्त नाम में शामिल अक्षरों के क्रम के अनुसार हर वर्ष बदलती रहती है। प्रत्येक अध्यक्षता अवधि संबंधित वर्ष की 1 जनवरी से शुरू होकर 31 दिसंबर को समाप्त होती है। अध्यक्षता करने वाला देश उस वर्ष के एजेंडे की प्राथमिकताएँ निर्धारित करता है। साथ ही, वह समूह के वार्षिक शिखर सम्मेलन का आयोजन करता है तथा प्रमुख मंत्रिस्तरीय बैठकों और कार्य समूहों की बैठकों का संचालन करता है। ब्रिक्स की सदस्य संख्या में हाल के विस्तार को देखते हुए, सदस्य देशों के बीच अध्यक्षता के लिए नई क्रमिक व्यवस्था पर भी चर्चा चल रही है।

ब्रिक्स का नेतृत्व करता भारत: निरंतरता से सर्वसम्मति तक

इस वर्ष से पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। प्रत्येक अध्यक्षता ने अपने-अपने समय की प्राथमिकताओं और चुनौतियों को प्रतिबिंबित किया। भारत द्वारा बार-बार ब्रिक्स का नेतृत्व किया जाना समूह के साथ उसकी निरंतर और सक्रिय सहभागिता को दर्शाता है। यह रचनात्मक बहुपक्षवाद तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की प्राथमिकताओं के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।

 2012: सशक्त सहयोग की नींव रखना

भारत ने 29 मार्च 2012 को नई दिल्ली में चौथे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। यह शिखर सम्मेलन “वैश्विक स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि के लिए ब्रिक्स साझेदारी” की थीम के तहत आयोजित किया गया। शिखर सम्मेलन में ग्लोबल गवर्नेंस में सुधार, सतत विकास, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। सम्मेलन में दिल्ली घोषणा-पत्र तथा ब्रिक्स सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए कार्ययोजना को अपनाया गया। इन महत्वपूर्ण परिणामों ने ब्रिक्स के संस्थागत और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया। दिल्ली घोषणा-पत्र के बारे में अधिक जानने के लिए क्लिक करें।

 

प्रमुख परिणाम

  • शिखर सम्मेलन में इंफ्रास्ट्रक्चर और सस्टेनेबल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए संसाधन जुटाने हेतु एक नए विकास बैंक की स्थापना की संभावनाएँ तलाशने का प्रस्ताव रखा गया। प्रस्तावित संस्था ब्रिक्स देशों के साथ-साथ उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होगी। यह संस्था वैश्विक आर्थिक वृद्धि और विकास को समर्थन देने वाली मौजूदा बहुपक्षीय एवं क्षेत्रीय वित्तीय संस्थाओं के पूरक के रूप में कार्य करेगी। एनडीबी के बारे में अधिक पढ़ने के लिए क्लिक करें।
  • सदस्य देशों ने स्थानीय मुद्रा में ऋण सुविधा प्रदान करने से संबंधित मास्टर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए, जिससे ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
  • शिखर सम्मेलन ने कंटिंजेंट रिजर्व अरेंजमेंट (सीआरए) की नींव भी रखी, जिसे ब्रिक्स देशों के लिए एक फाइनेंशियल सेफ्टी मैकेनिज्म के रूप में विकसित किया गया। इस व्यवस्था का उद्देश्य शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी सपोर्ट देने तथा सदस्य देशों को वित्तीय अस्थिरता से निपटने में सहायता प्रदान करना था।
  • भारत ने कृषि, स्वास्थ्य और विज्ञान के क्षेत्र में व्यावहारिक सहयोग के लिए नए संयुक्त कार्य-तंत्रों को संस्थागत रूप प्रदान किया।

 

2016: गोवा शिखर सम्मेलन से ब्रिक्स का व्यापक विस्तार

भारत ने अक्टूबर 2016 में गोवा में आठवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। यह शिखर सम्मेलन “उत्तरदायी, समावेशी और सामूहिक समाधान का निर्माण” थीम के तहत आयोजित किया गया। भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा समूह की पहुँच का विस्तार करने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके साथ ही आतंकवाद-रोधी प्रयासों, व्यापार, नवाचार और बहुपक्षीय समन्वय के क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाया गया। गोवा शिखर सम्मेलन ने उभरती वैश्विक चुनौतियों से निपटने तथा व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा देने के प्रति ब्रिक्स की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।

प्रमुख परिणाम

  • न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) के संचालन को उसके पहले चरण के वित्तीय ऋणों के माध्यम से और अधिक सुदृढ़ किया गया। इन ऋणों का प्रमुख उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना था।
  • ब्रिक्स ने नवीकरणीय ऊर्जा तक पहुंच, स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव और ऊर्जा सुरक्षा को साझा प्राथमिकताओं के रूप में प्रमुखता प्रदान की।
  • एचआईवी और तपेदिक (टीबी) से निपटने के प्रयासों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया।
  • भारत ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को लेकर ब्रिक्स की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया तथा एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) के मानकों के पालन पर जोर दिया।
  • बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फ़ॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (बिम्सटेक) के आउटरीच शिखर सम्मेलन के माध्यम से ब्रिक्स और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के व्यापक देशों के बीच सहयोग एवं संपर्क को और विस्तार मिला। बैठक में आतंकवाद-रोधी सहयोग, व्यापार, ऊर्जा, निवेश, पर्यावरण, प्रौद्योगिकी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
  • ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच, ब्रिक्स रेलवे अनुसंधान नेटवर्क, ब्रिक्स खेल परिषद तथा युवाओं पर केंद्रित विभिन्न सहयोग मंचों की स्थापना के लिए समझौता किया गया।

 

2021: बदलते दौर में साथ मिलकर आगे बढ़ना

भारत ने 9 सितंबर 2021 को 13वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की वर्चुअल माध्यम से मेजबानी की। यह शिखर सम्मेलन ब्रिक्स की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया गया। सम्मेलन का विषय था — “ब्रिक्स@15: निरंतरता, मजबूती और सहमति के लिए ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग।” भारत की अध्यक्षता के दौरान संस्थागत निरंतरता को मजबूत करने, सहयोग को और गहरा करने तथा व्यापक सहमति बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। इस दौरान स्वास्थ्य, डिजिटल प्रौद्योगिकी, आतंकवाद-रोधी प्रयासों और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को भी आगे बढ़ाया गया।

प्रमुख परिणाम

  • भारत ने संयुक्त ब्रिक्स आतंकवाद-रोधी कार्ययोजना को अपनाने की प्रक्रिया में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई। कार्ययोजना के बारे में अधिक जानने के लिए क्लिक करें।
  • भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान पहली बार ब्रिक्स डिजिटल स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन की मेजबानी की।
  • ब्रिक्स वैक्सीन अनुसंधान एवं विकास केंद्र की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य वर्तमान और भविष्य में आने वाली महामारियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों को सुदृढ़ करना था।
  • ब्रिक्स रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन के लिए सहयोग समझौते पर सहमति बनी। इसके माध्यम से सदस्य देश पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन और जलवायु निगरानी के लिए रिमोट सेंसिंग डेटा को साझा कर सकेंगे।
  • भारत ने मंत्रिस्तरीय स्तर पर सहयोग के नए कार्य-तंत्रों की शुरुआत की। इसके तहत ग्रीन टूरिज्म के लिए ब्रिक्स अलायंस की स्थापना तथा सतत संसाधन प्रबंधन के लिए पहली ब्रिक्स जल मंत्रियों की बैठक आयोजित की गई।

लगातार होने वाली अध्यक्षताओं के माध्यम से भारत ने ब्रिक्स के संस्थागत और विषयगत विकास में योगदान दिया है। उभरती वैश्विक चुनौतियों के साथ इसकी प्राथमिकताएं विकसित होती रही हैं, जबकि व्यावहारिक सहयोग पर इसका ध्यान लगातार बना रहा है। भारत की 2026 की अध्यक्षता इसी अनुभव और ब्रिक्स की विस्तारित सदस्यता के आधार पर आगे बढ़ रही है।

ब्रिक्स 2026: मंत्री-स्तरीय बैठकों से निकले प्रमुख निष्कर्ष

भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण की। अपनी अध्यक्षता के दौरान भारत ने ब्रिक्स सहयोग के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में मंत्रिस्तरीय बैठकों की एक श्रृंखला आयोजित की। वर्ष भर ब्रिक्स के सदस्य देशों ने साझा प्राथमिकताओं तथा वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। इन चर्चाओं से समूह के सहयोग के तीन मूलभूत स्तंभों के अंतर्गत सहयोग को आगे बढ़ाने में मदद मिली। इन स्तंभों में राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग, आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग तथा सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच संपर्क शामिल हैं।

भारत की अध्यक्षता के दौरान 25 शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्च-स्तरीय सहभागिताएं आयोजित की गईं। इन बैठकों के माध्यम से सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में व्यावहारिक और विकासोन्मुख परिणाम सामने आए। भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान आयोजित मंत्रिस्तरीय बैठकों से निम्नलिखित प्रमुख परिणाम सामने आए।

  • कृषि-पद्धतियों पर ब्रिक्स उत्कृष्टता केंद्रों को प्राकृतिक, जैविक और पुनर्स्थापनात्मक कृषि पद्धतियों के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान, ज्ञान के आदान-प्रदान और क्षमता विकास के लिए एक सहयोगात्मक मंच के रूप में स्थापित करने पर सहमति बनी। इसका उद्देश्य जलवायु-अनुकूल और सतत कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देना है। इस पहल का प्रारंभिक समन्वय आईसीएआर-भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम द्वारा किया जाएगा। इसी प्रकार, डिजिटल कृषि पर ब्रिक्स नेटवर्क के माध्यम से कृषि क्षेत्र में एआई-आधारित निर्णय-सहायता प्रणालियों, जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस, आईओटी-सक्षम निगरानी और उन्नत डेटा विश्लेषण के उपयोग को बढ़ावा देते हुए आपसी सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। इसका प्रारंभिक समन्वय आईआईटी दिल्ली द्वारा किया जाएगा।
  • BRICS AGRIN (एग्रो-इनपुट्स, जेनेटिक रिसोर्सेज़ और इन्फॉर्मेशन नेटवर्क) को ब्रिक्स देशों के बीच बीज, जर्मप्लाज्म और कृषि-इनपुट के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए एक स्वैच्छिक और किसान-केंद्रित सहयोग ढाँचे के रूप में स्थापित करने पर सहमति बनी।
  • स्वस्थ जीवनशैली के लिए ब्रिक्स मिशन: इस प्राथमिकता के तहत स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त पहल संबंधी ब्रिक्स रोडमैप (2026-2029) भी शुरू किया गया। इसका उद्देश्य तकनीकी सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और समन्वित जागरूकता पहलों के लिए एक सहयोगात्मक मंच उपलब्ध कराना है। इसके माध्यम से मोटापे और अन्य गैर-संचारी रोगों की रोकथाम के लिए जीवन के विभिन्न चरणों को ध्यान में रखते हुए निवारक उपायों को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • पारंपरिक, सहायक एवं एकीकृत चिकित्सा (टीसीआईएम) पर ब्रिक्स विशेषज्ञ कार्य समूह: इसका उद्देश्य पारंपरिक, सहायक एवं एकीकृत चिकित्सा के क्षेत्र में संरचित और सर्वसम्मति-आधारित सहयोग के लिए एक मंच प्रदान करना है। इसके अंतर्गत नीतिगत संवाद, अनुसंधान एवं साक्ष्य तैयार करना, क्षमता विकास एवं शैक्षणिक आदान-प्रदान, डिजिटल ज्ञान मंच, गुणवत्ता एवं नियामक मानक तथा पारंपरिक एवं स्वदेशी ज्ञान का संरक्षण शामिल है।
  • ब्रिक्स प्रशिक्षण हब नेटवर्क और ब्रिक्स उत्कृष्टता केंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान। इस पहल के समन्वय केंद्र के रूप में भारत के निम्हान्स (NIMHANS) को नामित किया गया है। इसका उद्देश्य कौशल उन्नयन, कार्य-विभाजन और मानकीकृत प्रशिक्षण के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपलब्ध मानव संसाधनों की क्षमता को बेहतर बनाना तथा प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में मानसिक स्वास्थ्य को शामिल करना है।
  • ब्रिक्स के सिद्धांतों को अपनाकर पारंपरिक ज्ञान को मुख्यधारा में शामिल करना, जिसमें लोगों पर केंद्रित और समुदाय-आधारित अनुकूलन के माध्यम से जलवायु-चुनौतियों से निपटने की क्षमता तथा पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने संबंधी ब्रिक्स मार्गदर्शक सिद्धांत शामिल हैं।
  • ब्रिक्स संस्थानों के नेटवर्क के माध्यम से सतत जीवनशैली को बढ़ावा देना, ताकि ज्ञान के आदान-प्रदान, अनुसंधान एवं नवाचार तथा सतत जीवनशैली सप्ताह के माध्यम से नीतियों, कार्यक्रमों, पहलों और उत्कृष्ट कार्य-पद्धतियों से संबंधित ज्ञान का आदान-प्रदान किया जा सके, विषयगत क्षेत्रों पर क्षमता विकास कार्यशालाएँ आयोजित की जा सकें, शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों सहित विभिन्न हितधारकों के बीच संवाद को सुगम बनाया जा सके तथा मामलों के अध्ययन का संकलन किया जा सके।
  • कौशल विकास के लिए ब्रिक्स कनेक्ट: क्षमता विकास, रोजगार-क्षमता तथा नए कौशल और प्रौद्योगिकियों के लिए ब्रिक्स कनेक्ट, जो ब्रिक्स वर्चुअल संपर्क कार्यालय की पहल पर आधारित है। यह चार घटकों वाला एक बहुआयामी मंच है, जिसमें सामाजिक सुरक्षा को आगे बढ़ाने के लिए क्षमता विकास, वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी, कौशल एवं रोजगार-योग्यता तथा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। इसके तहत सहयोग स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी है।
  • स्मार्ट ग्रिड और एनर्जी स्टोरेज: एनर्जी स्टोरेज और स्मार्ट ग्रिड पर ब्रिक्स मार्गदर्शक सिद्धांतों को अपनाया गया तथा स्मार्ट ग्रिड और एनर्जी स्टोरेज के लिए ब्रिक्स डिजिटल उत्कृष्टता केंद्र की शुरुआत की गई। यह ब्रिक्स देशों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान, क्षमता विकास, नीतिगत एवं नियामक सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों के आदान-प्रदान तथा प्रायोगिक पहलों को बढ़ावा देने के लिए एक वॉलंटरी प्लेटफ़ॉर्म के रूप में कार्य करेगा।
  • सतत अर्बन मोबिलिटी में ज्ञान के आदान-प्रदान, क्षमता विकास और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक वर्चुअल सहयोगात्मक मंच के रूप में ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब की स्थापना; शहरी नियोजन, डिजाइन, निवेश, निर्माण और रखरखाव में जलवायु तथा आपदा जोखिम के पहलुओं को एकीकृत करने में मदद हेतु क्लाइमेट रेज़िलिएंट अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ब्रिक्स स्वैच्छिक सिद्धांतों को अपनाया जाना; तथा व्यावहारिक शहरी अनुसंधान, देशों के बीच आपसी ज्ञान का आदान प्रदान और निरंतर संस्थागत सहयोग के लिए ब्रिक्स अर्बन रिसर्च एंड नॉलेज नेटवर्क की स्थापना के माध्यम से अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया गया।
  • ब्रिक्स एमएसएमई सहयोग पोर्टल एक डिजिटल इकोसिस्टम के तौर पर काम करेगा, जो सभी ब्रिक्स सदस्य देशों के लिए उपलब्ध होगा। यह एमएसएमी, टेक्नोलॉजी सेंटर और क्लस्टर, व्यापार संघों, वित्तीय संस्थानों, ट्रेनिंग और क्षमता-विकास संस्थानों, नीति-निर्माताओं और अन्य संबंधित हितधारकों को सहायता देगा। इसके साथ ही, एमएसएमई फाइनेंस पर संस्थागत बातचीत और एमएसएमई के ​​अंतर्राष्ट्रीयकरण के लिए वर्कप्लान भी मुख्य नतीजे रहे, जिनका मकसद बाजार और फाइनेंस तक एमएसएमई की पहुँच को बेहतर बनाने के लिए ब्रिक्स का लाभ उठाना है।
  • ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क की स्थापना की गई है, जो ब्रिक्स देशों की राष्ट्रीय नोडल एजेंसियों, चुने हुए इन्क्यूबेटरों और स्टार्टअप्स को आपस में जोड़ने वाले एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा। यह सहभागी इन्क्यूबेटरों के साथ पंजीकरण और जुड़ाव को आसान बनाएगा, साथ ही योग्य स्टार्टअप्स को अन्य ब्रिक्स देशों के इन्क्यूबेटरों से जोड़ने व भेजने (रेफरल) में मदद करेगा।
  • ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों में शुरुआती और विकास चरण के स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता देना तथा नवाचार आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
  • ब्रिक्स विज्ञान एवं अनुसंधान रिपॉजिटरी का स्वागत किया गया है, जो ब्रिक्स देशों के बीच वैज्ञानिक ज्ञान को सुरक्षित रखने और साझा करने के लिए एक संरचित मंच के रूप में कार्य करेगा।
  • ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई-चेन सहयोग रूपरेखा: क्रॉस-सेक्टर परिवहन लॉजिस्टिक्स में मजबूती और स्थिरता लाने के लिए एक स्वैच्छिक और सर्वसम्मति-आधारित ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सप्लाई-चेन सहयोग ढाँचे को स्वीकार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य तकनीकी आदान-प्रदान, कार्गो व शिपिंग सेवाओं में ज्ञान साझा करने, स्थानीय असेंबली और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा देने तथा क्षमता विकास के माध्यम से असंगठित आपूर्ति श्रृंखलाओं और कमजोर कनेक्टिविटी की चुनौतियों को दूर करना है साथ ही पर्यावरण के अनुकूल और जलवायु-अनुकूल लॉजिस्टिक्स प्रथाओं को आगे बढ़ाना है।
  • ग्लोबल वैल्यू चेन पर ब्रिक्स सहयोग : ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच बाजारों को खोलने और आर्थिक विविधीकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने के लिए कि ग्लोबल वैल्यू चेन (जीवीसी) अधिक मजबूत, कुशल और उत्पादक बनी रहें, जीवीसी एक्शन प्लान 2026-2030 के माध्यम से सहयोग पर सहमति बनी है। इसके तहत आपसी तालमेल को मजबूत करने के उद्देश्य से एक तकनीकी परिषद का गठन और जीवीसी संयुक्त अध्ययन शामिल हैं।
  • सीमा शुल्क मामलों में सहयोग एवं परस्पर प्रशासनिक सहायता पर ब्रिक्स समझौता: व्यापार को गति देने, कम ट्रांजैक्शन लागत, सीमाओं को अधिक सुरक्षित बनाने, विश्वसनीय व्यापार सुविधा और ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा देने के साथ-साथ अवैध व्यापार पर लगाम लगाने के उद्देश्य से सदस्य देशों ने इस समझौते को सैद्धांतिक मंजूरी दी है तथा इस पर हस्ताक्षर करने की अपनी सहमति व्यक्त की है।
  • ब्रिक्स राष्ट्रीय मानक निकायों के प्रमुखों द्वारा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के माध्यम से मानकीकरण के क्षेत्र में सहयोग को संस्थागत रूप दिया गया है। यह औपचारिक रूपरेखा मानकों के विकास, उन्हें अपनाने और लागू करने में तालमेल बढ़ाएगी; सूचना के आदान-प्रदान, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने, तकनीकी सहयोग तथा क्षमता विकास को बढ़ावा देगी; गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढाँचे को मजबूत करेगी; उपभोक्ता संरक्षण को बेहतर बनाएगी और व्यापार में आने वाली तकनीकी बाधाओं को कम करेगी।
  • युवा केंद्रित पहलों के तहत भावी संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान और व्यावहारिक पहलों को आगे बढ़ाने के लिए ब्रिक्स यूथ कोऑपरेशन फ्रेमवर्क 2026 को एक संदर्भ दस्तावेज के रूप में अपनाया गया है। इसका उद्देश्य इस क्षेत्र में निरंतरता, तालमेल और व्यवस्थित सहयोग को मजबूती प्रदान करना है।
  • एक नए कार्य समूह के गठन के माध्यम से खेल तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को संस्थागत रूप दिया गया है। इसका उद्देश्य सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों, संस्थागत अनुभवों, तकनीकी सूचनाओं और अनुसंधान इनपुट के आदान-प्रदान के जरिए खेल तकनीक में आपसी सहयोग को बढ़ावा देना है।

भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत आयोजित मंत्रिस्तरीय बैठकों के परिणाम व्यावहारिक सहयोग, समावेशी विकास और 'ग्लोबल साउथ' की आवाज को और अधिक सशक्त बनाने पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने को दर्शाते हैं।

2026: एक अधिक समावेशी भविष्य की ओर ब्रिक्स का मार्गदर्शन

भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता ऐसे समय में हो रही है जब विश्व एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था आर्थिक असंगठन, तकनीकी बदलाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता का सामना कर रही है। जलवायु परिवर्तन और संसाधनों का बढ़ता दबाव इस स्थिति को और अधिक जटिल बना रहे हैं। इन परस्पर जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए एक ऐसे सहयोग की आवश्यकता है जो समावेशी, व्यावहारिक और विभिन्न राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुकूल हो।

ब्रिक्स संवाद और समन्वित कार्रवाई के माध्यम से इन चुनौतियों से निपटने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है। इसके बढ़ते सदस्य देशों के साथ प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के विविध दृष्टिकोण सामने आते हैं। यह समूह विकास, जलवायु कार्रवाई, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा और वित्तीय मजबूती पर सहयोग को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है। साथ ही, यह वैश्विक संस्थानों में सुधारों पर चर्चा में भी अपना योगदान दे सकता है।

भारत के लिए, इसका उद्देश्य केवल इस समूह का दायरा या आकार बढ़ाना भर नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य अधिक प्रतिनिधित्व को सार्थक सहयोग और ठोस परिणामों में बदलना है। भारत की अध्यक्षता का प्रयास विविध सदस्य देशों के बीच सहमति कायम करना और साथ ही मौजूदा व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता को मजबूत करना है। भारत का लक्ष्य ब्रिक्स को एक अधिक समावेशी वैश्विक व्यवस्था के निर्माण के लिए एक रचनात्मक शक्ति के रूप में सुदृढ़ करना है

संदर्भ
 

कैबिनेट

 

स्पेशल सर्विस एंड फीचर

प्रधानमंत्री कार्यालय

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय


सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय

 

ब्रिक्स

विदेश मंत्रालय

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय

  • https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/185/AU271_UZhNkJ.pdf?source=pqals

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

 

पीआईबी रिसर्च

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