रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग
azadi ka amrit mahotsav

केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री ने भारत को वैश्विक रासायनिक विनिर्माण और नवाचार हब में बदलने की प्राथमिकताओं पर चर्चा के लिए सीईओ गोलमेज बैठक की अध्यक्षता की 


सरकार और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने वर्ष 2040 तक भारत की 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की रासायन अर्थव्यवस्था के लिए रोडमैप पर विचार-विमर्श किया

प्रविष्टि तिथि: 24 AUG 2026 7:46PM by PIB Delhi

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग(डीसीपीसी) ने 'इन्वेस्ट इंडिया' के सहयोग से वर्ष 2040 तक भारत के 1-ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के रसायन क्षेत्र के निर्माण के लक्ष्य पर विचार-विमर्श करने के लिए आज एक उच्च स्तरीय सीईओ गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया।

माननीय केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री, श्री जे.पी. नड्डा की अध्यक्षता में और केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री, श्रीमती अनुप्रिया पटेल की उपस्थिति में, 'भारत का रसायन क्षेत्र: वर्ष 2040 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का मार्ग प्रशस्त करना' विषय पर गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें भारत को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी रसायन निर्माण और नवाचार हब में बदलने के लिए आवश्यक रणनीतिक प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया गया। इस गोलमेज सम्मेलन में दुनिया भर से रसायन उद्योग के 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिसमें बीएएसएफ, ट्रोनॉक्स, एक्सॉनमोबिल, फुजीफिल्म, लुब्रिजोल, डॉव केमिकल्स, यूपीएल, रिलायंस, डीसीएम श्रीराम, एचएमईएल, एसएबीआईसी और हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स जैसी विदेशी और घरेलू कंपनियां शामिल थीं।

विशेष रसायन, पेट्रो-रसायन और थोक रसायन क्षेत्र की 30 से अधिक प्रमुख वैश्विक और भारतीय रासायन कंपनियों के प्रतिनिधियों ने इस चर्चा में भाग लिया।

इस बैठक के दौरान, उद्योग जगत के नेताओं ने रासायनिक क्षेत्र की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता और विकास के लिए महत्वपूर्ण कई मुद्दों पर प्रकाश डाला, जिनमें शामिल हैं:

  • उपयुक्त वित्तपोषण और निवेश-सहायता तंत्र के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश को सुगम बनाना, विशेष रूप से अधिक पूंजी की आवश्यकता वाली अपस्ट्रीम परियोजनाओं के लिए।
  • मौजूदा पीसीपीआईआर(पेट्रोलियम, रसायन और पेट्रो-रसायन निवेश क्षेत्र) को औद्योगिक क्षेत्रों से प्रमुख रासायन विनिर्माण केंद्रों में उन्नत करना, जिसमें उद्योग के लिए बुनियादी ढाँचे और उपयोगिता सुविधाओं का विकास करना एवं उसे बेहतर बनाना शामिल है।
  • अनुचित व्यापारिक कार्यों से सुरक्षा सुनिश्चित करने और सभी के लिए समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए व्यापार सुधारात्मक उपायों को अपनाना।
  • निम्नलिखित उपायों के माध्यम से अनुसंधान एवं विकास(आर-एंड-डी), नवाचार और प्रौद्योगिकी के विकास के लिए अधिक सहायता प्रदान करना:
  • विदेशों से वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए चीन, जापान और ब्रिटेन जैसे देशों की तर्ज पर विशेष टैक्स छूट दी जा सकती है।
  • दक्षिण कोरिया और अमेरिका की तर्ज पर प्रौद्योगिकी अधिग्रहण को सुगम बनाने के लिए एक संप्रभु कोष का गठन किया जा सकता है।
  • रसायन और पेट्रो-रसायन परियोजनाओं के लिए समयबद्ध सिंगल-विंडो मंज़ूरी की व्यवस्था करना, विशेष रूप से यह देखते हुए कि ऐसी परियोजनाओं को स्थापित करने में केंद्र और राज्य स्तर की कई मंज़ूरियां शामिल होती हैं।
  • भू-राजनीतिक परिस्थितियों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में होने वाले व्यवधानों के प्रति संवेदनशीलता को कम करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय फीडस्टॉक नीति का विकास करना।

सभा को संबोधित करते हुए माननीय केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जे. पी. नड्डा ने जोर देकर कहा कि देश को वर्ष 2040 तक रसायन के क्षेत्र को 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के लक्ष्य तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योग जगत के साथ निरंतर और संस्थागत संवाद तंत्र स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसका उद्देश्य बाधाओं की पहचान करना और सुझावों को समयबद्ध कार्रवाई में बदलना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए निरंतर निवेश, प्रौद्योगिकी विकास और घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता होगी। उन्होंने आगे कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, सरकार निवेश, नवाचार, सतत विकास और दीर्घकालिक वृद्धि के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर निरंतर ध्यान दे रही है। गोलमेज बैठक ने उद्योग जगत के नेताओं के साथ संवाद करने, उनकी प्राथमिकताओं को समझने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी रासायनिक विनिर्माण एवं नवाचार हब के रूप में भारत की स्थिति को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि उद्योग जगत द्वारा उठाए गए मुद्दों को उचित रूप से संज्ञान में लिया गया है और उन्हें संबंधित मंत्रालयों के समक्ष आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

अपने संबोधन में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने रसायन एवं पेट्रो-रसायन क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा हाल ही में शुरू किए गए सुधारों और योजनाओं का उल्लेख किया। इनमें भाव्य रसायन, कोयला गैसीकरण, रेयर अर्थ कॉरिडोर, क्रिटिकल मिनरल मिशन, तथा कर-सुधार और श्रम-सुधार जैसे उपाय शामिल हैं। उन्होंने उद्योग जगत को आश्वस्त किया कि सरकार नियामक सुविधा प्रदाता की भूमिका से आगे बढ़कर सक्रिय विकास भागीदार बनने के लिए प्रतिबद्ध है। इसका उद्देश्य प्रशासनिक बोझ को कम करना और निवेश की दीर्घकालिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करना है।

सरकार और उद्योग जगत के बीच साझेदारी के महत्व पर जोर देते हुए, रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग के सचिव श्री तेजवीर सिंह ने कहा कि प्रमुख डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में बढ़ती घरेलू मांग के कारण रासायनिक क्षेत्र में व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने भविष्य की नीतिगत पहलों को आकार देने के लिए उद्योग जगत के प्रणेताओं के साथ घनिष्ठ सहयोग करने की विभाग की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। मंत्रालय की ओर से उन्होंने उद्योग जगत के प्रणेताओं द्वारा पूछे गए प्रश्नों का भी उत्तर दिया।

इस अवसर पर बोलते हुए इन्वेस्ट इंडिया की प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुश्री निवृति राय ने कहा कि भारत रासायनिक विनिर्माण के लिए एक पसंदीदा वैश्विक गंतव्य के रूप में उभरने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके पीछे भारत का बड़ा घरेलू बाजार, कुशल प्रतिभा, बेहतर होता बुनियादी ढाँचा और जारी सुधार प्रमुख आधार हैं।

गोलमेज बैठक में वैश्विक निवेश के रुझानों, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश(एफडीआई) के प्रवाह, राज्यों की प्रतिस्पर्धात्मकता और क्षेत्र-विशिष्ट अवसरों पर भी एक प्रस्तुति दी गई। इन्वेस्ट इंडिया ने उद्योग जगत के प्रणेताओं के साथ किए गए एक सर्वेक्षण के परिणाम भी प्रस्तुत किए, जिसमें उद्योग जगत की ओर से इस क्षेत्र में निवेश करने में गहरी रुचि दिखाई गई।

उपरोक्त के अलावा, ओडिशा, गुजरात, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने राज्यों में निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार द्वारा पेश किए गए नीतिगत पैकेजों के रूप में अपनी बात रखी।

इस परामर्श से सामने आने वाली सिफारिशें भविष्य के नीति निर्माण, संस्थागत सुधारों और निवेश सुविधा ढांचे को दिशा देंगी, जिन पर भारत को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी रासायनिक विनिर्माण और नवाचार हब बनाने में मदद करने के लिए 'समग्र सरकारी दृष्टिकोण' के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

***

पीके/केसी/पीकेपी/डीए


(रिलीज़ आईडी: 2302966) आगंतुक पटल : 56
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu