सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
अवैतनिक सहायक से स्वच्छता उद्यमी तक: नमस्ते-एसयूवाई सहायता ने कैसे बदला कपिल का जीवन
प्रविष्टि तिथि:
24 AUG 2026 6:54PM by PIB Delhi
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं के लिए सीमित शिक्षा और अस्थिर रोजगार प्रगति के अवसरों को सीमित कर सकते हैं। समय पर वित्तीय सहायता और मशीनी उपकरण स्वच्छता कर्मियों को अधिक सुरक्षित, संवहनीय और सम्मानजनक आजीविका निर्माण करने में मदद कर सकते हैं।
'नमस्ते-स्वच्छता उद्यमी योजना' पहल के तहत मिली मदद से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मुरादनगर स्थित हुसैनपुर गाँव के 25 वर्षीय निवासी कपिल ने अपने पिता के साथ अवैतनिक सहायक के रूप में काम करने से लेकर एक स्वतंत्र स्वच्छता उद्यमी बनने तक का सफर तय किया है।
कपिल अनुसूचित जाति (खटीक) समुदाय से हैं और आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवार से आते हैं जो स्वच्छता के काम पर निर्भर है। कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण, वह केवल 12वीं कक्षा तक ही अपनी शिक्षा जारी रख सके।
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद, कपिल ने सीवर और सेप्टिक टैंक की सफ़ाई के काम में अपने पिता की मदद करना शुरू किया। काम करते हुए उन्होंने सफ़ाई सेवाओं के व्यावहारिक पहलुओं को सीखा, लेकिन इतनी मेहनत वाले काम के लिए उन्हें कोई तय वेतन नहीं मिलता था।
सबसे बड़े बेटे होने के नाते, कपिल पर कम उम्र से ही बड़ी ज़िम्मेदारियाँ थीं। वह अपने माता-पिता, चार बहनों और तीन भाइयों की मदद करते थे। सीमित साधनों के कारण, परिवार मुख्य रूप से सफ़ाई से जुड़े पारंपरिक कामों पर निर्भर था।
आर्थिक तंगी, सीमित उच्च शिक्षा, अस्थिर रोजगार और स्वच्छता कार्य से जुड़े सामाजिक कलंक ने कपिल की प्रगति के अवसरों को सीमित कर दिया था। इन बाधाओं के बावजूद, वे आत्मनिर्भर बनने और अपने परिवार के जीवन स्तर में सुधार करने के लिए दृढ़ संकल्प रहे। कपिल का सपना था कि वह एक डिस्टर्जिंग वाहन (कीचड़/गाद निकालने वाली गाड़ी) के साथ अपना खुद का उद्यम स्थापित करें और साथ ही अधिक सुरक्षित एवं कुशल स्वच्छता सेवाएं प्रदान करने और सम्मान के साथ एक स्थिर आय अर्जित करें।
कपिल को 2023 में सक्शन मशीन (कचरा खींचने वाली मशीन) से लैस एक ट्रैक्टर खरीदने के लिए 'नमस्ते' योजना के तहत लागू 'स्वच्छता उद्यमी योजना' के माध्यम से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। 10,70,400 रुपये की कुल परियोजना लागत के एवज में, उन्हें 6,77,800 रुपये का ऋण और 3,92,600 रुपये की पूंजीगत सब्सिडी मिली।

इस सहायता ने कपिल को एक मशीनीकृत स्वच्छता सेवा व्यवसाय स्थापित करने में सक्षम बनाया। ट्रैक्टर और सक्शन मशीन की मदद से, अब वे स्वतंत्र और कुशल तरीके से सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई का काम करते हैं। इस सहायता ने उनकी आजीविका, आत्मविश्वास, सम्मान और सामाजिक पहचान को मजबूत किया है।
सहायता प्राप्त करने से पहले, कपिल एक अवैतनिक सहायक के रूप में काम करते थे और उनकी कोई निश्चित मासिक आय नहीं थी। आज, अपने खर्चों को पूरा करने और 14,517 रुपये की मासिक ऋण किश्त चुकाने के बाद भी, वह मशीनीकृत स्वच्छता कार्य से प्रतिमाह लगभग 30,000–35,000 रुपये कमाते हैं।
बढ़ी हुई आय की वजह से वह अपने ऋण को चुकाने और अपना कारोबार चलाने के साथ-साथ घर के खर्च उठाने, नियमित बचत करने और अपने परिवार को ज़्यादा आर्थिक सुरक्षा देने में सक्षम हो पाएं हैं।
'नमस्ते-एसयूवाई' पहल ने कपिल के व्यावहारिक अनुभव को संवहनीय स्वरोजगार में बदल दिया। पैसे और मशीनी उपकरणों ने उन्हें अनिश्चित, श्रम-साध्य कार्य से बाहर निकालकर सुरक्षित कामकाज और एक स्वतंत्र आजीविका की ओर बढ़ने में मदद की। एक अवैतनिक सहायक से स्वच्छता उद्यमी बनने तक का उनका सफ़र दिखाता है कि मशीनीकृत सफ़ाई, काम की गरिमा और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए सही दिशा में दी गई मदद कितनी असरदार हो सकती है। पक्के इरादे और समय पर मिली मदद से, वे अब अपने और अपने परिवार के लिए एक सुरक्षित भविष्य बना रहे हैं।
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पीके/केसी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2302895)
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