कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रारंभ डिजिटल एग्रीकल्चर और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन में 100% सैचुरेशन का केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों से किया आह्वान
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान बोले- दोनों मिशन किसान हितैषी, अन्नदाताओं की आय बढ़ने के साथ ही होगी आत्मनिर्भरता
सभी राज्य किसानों के डिजिटल सर्वे को फास्ट-ट्रैक करें- श्री शिवराज सिंह
जमीन का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड जरूरी, बीज से बाजार तक पूरी वैल्यू चेन मजबूत होना चाहिए- श्री शिवराज सिंह
केंद्र धन दे रहा है; शिविर और काम के लिए निधि का सही उपयोग सुनिश्चित करें राज्य- केंद्रीय मंत्री श्री चौहान
सभी राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में हर किसान तक मिशन के फायदे पहुंचाने पर फोकस
प्रविष्टि तिथि:
22 AUG 2026 7:59PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में शुरू हुए डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की प्रगति और आगे की रणनीति पर आज पूसा में राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ। इसमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता के अनुरूप यह काफ़ी महत्वपूर्ण कार्य है जिसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, दालों में आत्मनिर्भरता लाना और खेती से जुड़ी सेवाओं को डिजिटल व पारदर्शी बनाकर खेतों तक वास्तविक असर पहुँचाना है। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी, हरियाणा के कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा, असम के मंत्री श्री पियूष हजारिका, अरुणाचल प्रदेश के मंत्री श्री ग्रेबियल डेन्वांग बागसू, नागालैंड के मंत्री श्री महात यंथन और केंद्रीय कृषि सचिव श्री अतीश चन्द्रा समेत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब समय आ गया है कि योजनाओं का असर सिर्फ रिपोर्टों में नहीं बल्कि खेतों में और किसानों की जेब में दिखे; उन्होंने राज्यों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आप करेंगे तो जरूर होगा और कहा कि जिन जगहों पर गंभीरता और कौशल से काम हुआ है वहाँ लक्ष्यों को 100% से ऊपर हासिल किया गया जबकि जहाँ कोशिश कम रही वहां परिणाम पीछे रहे, इसलिए उन्होंने राज्यों से पूरी जिम्मेदारी और समयबद्ध कार्रवाई की अपेक्षा रखी। उन्होंने फार्मर आईडी के महत्व पर विशेष जोर दिया और बताया कि फार्मर आईडी बनने के बाद भुगतान सीधे किसान के खाते में जा रहे हैं जिससे भुगतान तेज़ और पारदर्शी हुआ है; महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के उदाहरण देते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि समय पर भुगतान से बड़े पैमाने पर लाभ देखा गया और केंद्र ने फार्मर आईडी बनवाने और शिविर चलाने के लिए फंड भी उपलब्ध करवाया है, इतना ही नहीं उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी रूप से एक महीने के भीतर आईडी बनना संभव है पर यह तभी होगा जब शिविर ईमानदारी और सही तरीके से चलें और पैसा कार्यक्रम के नाम पर बर्बाद न हो।

लैंड और डिजिटल सर्वे के विषय पर श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नक्शे जोड़ना और डेटा वेरिफिकेशन मिशन की रीढ़ हैं क्योंकि कई जगह सर्वे से जुड़े तकनीकी कारणों- जैसे कुछ फसलों की बनावट या खेत की स्थिति के कारण डेटा पूरी तरह सटीक नहीं आ रहा, इन मामलों में मैदान पर व्यावहारिक समाधान निकालना होगा ताकि डिजिटल रिकॉर्ड असल जमीन से मेल खाए और योजनाओं का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचे; उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जब सर्वे सही होंगे तभी योजनाओं का असली लाभ दिखाई देगा और जमीन पर परिवर्तन महसूस होगा।

दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की चर्चा में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने यह रेखांकित किया कि दालों के क्षेत्र और उत्पादन में जो वृद्धि पिछले साल कुछ जगहों पर दिखी है, वह सकारात्मक संकेत है और इसे पूरे देश में फैलाया जाना चाहिए ताकि आयात कम हो और किसानों की आमदनी बढ़े; पर उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्पादन बढ़ाना अकेले काफी नहीं है- प्रोसेसिंग, भंडारण और मार्केट कनेक्टिविटी का काम भी उतना ही जरूरी है वरना किसान अपनी उपज का पूरा मूल्य नहीं पा सकेगा।
प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के मुद्दे पर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जोर देकर कहा कि बीज से लेकर बाजार तक की पूरी वैल्यू चेन को एक साथ मजबूत करना होगा क्योंकि कई स्थानों पर प्रोसेसिंग की कमी या बाजार तक कनेक्टिविटी न होने से लक्ष्य पूरे नहीं हो रहे; इसलिए उन्होंने शासकीय और निजी भागीदारी के ज़रिये प्रोसेसिंग यूनिट्स, कोल्ड स्टोरेज और मार्केट लिंकिंग को तेज करने का निर्देश दिया ताकि फसल का मूल्य बढ़े और किसान को बेहतर दाम मिले। उन्होंने समय पर इनपुट और भुगतान पर विशेष ध्यान देने की बात दोहराई और कहा कि देरी के कारण बुआई, कटाई और बिक्री पर असर पड़ता है जिससे किसान को नुकसान उठाना पड़ता है; इसी कारण उन्होंने अधिकारियों से कहा कि समयबद्ध वितरण और भुगतान सुनिश्चित किया जाए और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर कड़ी निगरानी रखी जाए।
सम्मेलन में हुए लम्बे विचार-विमर्श में राज्यों के अनुभव भी साझा किए गए और केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने इस बारे में कहा कि जहाँ फोकस, प्रशिक्षण और जमीन पर डेमो ठीक से हुआ वहां बेहतर नतीजे आए; इसलिए सफल प्रैक्टिसेज़ को हर राज्य में साझा कर शीघ्र अपनाने की आवश्यकता है।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता का हवाला देते हुए आश्वासन दिया कि केंद्र और राज्य मिलकर इन मिशनों को सफल बनाएंगे और उन्होंने सभी से ईमानदारी, जवाबदेही और समयपालन का आग्रह करते हुए दोहराया कि यदि सभी गंभीरता से काम करेंगे तो डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन न केवल किसानों की आय और सुविधाओं को बढ़ाएंगे बल्कि देश की खाद्य-आत्मनिर्भरता को भी मजबूती देंगे; उन्होंने हर स्तर पर मिलकर किसानों की भलाई के लिए काम करने का आह्वान किया।
AgriStack डिजिटल कृषि मिशन के तहत एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
- यह कृषि सेवाओं की डिलीवरी को तेज और अधिक पारदर्शी बनाएगा।
- Farmer ID को सेवा वितरण और use case implementation में व्यावहारिक करना एक लक्ष्य है, ताकि लाभ सही किसान तक, सही समय पर पहुंच सके।
- मुख्य डिजिटल आधार अब काफी तैयार है।
- 10.41 करोड़ Farmer ID बनाई जा चुकी हैं।
- इसमें 26 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।
- कवरेज PM-KISAN का 84.68% है।
- कवरेज लगभग ऑपरेशनल होल्डिंग्स का 77% है।
- गांव के नक्शों की geo-referencing में मजबूत प्रगति हुई है।
- 5.9 लाख गांवों को कवर किया गया है।
- यह पहचाने गए गांवों का 93.05% है।
- यह सटीक crop survey और land parcel-based सेवाओं में मदद करेगा।
- Digital Crop Survey तेजी से बढ़ा है।
- कवरेज 2024-25 में 290 जिलों से बढ़कर रबी 2025-26 में 650 जिलों तक पहुंचा।
- अब 2026-27 खरीफ में इसे 692 जिलों के लिए योजना बनाई गई है।
- क्षेत्र कवरेज 3.87 करोड़ हेक्टेयर (2024-25) से बढ़कर 9.18 करोड़ हेक्टेयर (2025-26) हुआ, और अब खरीफ 2026-27 में 13.4 करोड़ हेक्टेयर का लक्ष्य है।
दलहन उत्पादन वर्ष 2024-25 के 256.83 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 274.09 लाख मीट्रिक टन हो गया है।
- आयात में कमी- घरेलू उत्पादन में इस वृद्धि के परिणामस्वरूप दलहन की आयात निर्भरता वर्ष 2024-25 के 72.56 लाख मीट्रिक टन से घटकर वर्ष 2025-26 में 59.64 लाख मीट्रिक टन हो गई है, जो घरेलू उपलब्धता को सुदृढ़ करने तथा दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती है।
- क्षेत्रफल में वृद्धि- दलहन की खेती के अंतर्गत क्षेत्रफल 277.20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 286.46 लाख हेक्टेयर हो गया है। यह किसानों द्वारा दलहन फसलों को अपनाने तथा दलहन क्षेत्र के विस्तार को दर्शाता है।
- उत्पादकता में वृद्धि- दलहन की उत्पादकता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उत्पादकता वर्ष 2024-25 के 926 किलोग्राम/हेक्टेयर से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 957 किलोग्राम/हेक्टेयर हो गई है।
- उत्पादन, क्षेत्रफल एवं उत्पादकता- तीनों प्रमुख संकेतकों में वृद्धि मिशन के अंतर्गत किए जा रहे हस्तक्षेपों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है।
- Processing Units- दलहन मिशन के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में राज्यों को कुल 528 प्रसंस्करण इकाइयाँ (Processing Units) स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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आरसी/ पीयू/ डीके
(रिलीज़ आईडी: 2302389)
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