पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
सीएक्यूएम ने पूरे एनसीआर में धूल नियंत्रण उपायों की निगरानी व प्रवर्तन को बढ़ाया, सी एंड डी स्थलों पर नियमों का गंभीर उल्लंघन करने वालों पर मुकदमा चलाने के लिए अधिक यूएलबी को दिए गए अधिकार
प्रविष्टि तिथि:
04 AUG 2026 7:18PM by PIB Delhi
एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में 500 वर्ग मीटर से कम प्लॉट क्षेत्र वाले निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (सी एंड डी) स्थलों पर धूल नियंत्रण उपायों के उल्लंघन के खिलाफ प्रवर्तन को और मजबूत करने के लिए अपने वैधानिक निर्देश संख्या 86 में 03.08.2026 को एक संशोधन जारी किया है।
यह संशोधन एनसीआर में अतिरिक्त नगर निगमों, विकास प्राधिकरणों, नगर परिषदों, नगर बोर्डों और शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) को गंभीर उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा चलाने का अधिकार देकर प्रवर्तन के दायरे को बढ़ाता है।
02.01.2025 को जारी और 24.06.2025 को संशोधित वैधानिक निर्देश संख्या 86 ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के आयुक्त/क्षेत्रीय उपायुक्तों, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के सचिव, और गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद तथा सोनीपत में विभिन्न यूएलबी के आयुक्तों/मुख्य कार्यकारियों/उपायुक्तों को उनके संबंधित अधिकार क्षेत्र में ऐसे स्थलों पर धूल और वायु प्रदूषण नियंत्रण तथा रोकथाम उपायों से संबंधित निर्देशों/आदेशों के गंभीर उल्लंघन के मामलों में क्षेत्राधिकार वाले न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत/मुकदमा दर्ज करने के लिए अधिकृत किया था।
इस निर्देश ने इन प्राधिकरणों को सी एंड डी गतिविधियों के संबंध में जीआरएपी अनुसूची से संबंधित उल्लंघनों सहित, गंभीर उल्लंघनों के मामलों में ऐसे स्थलों को बंद करने का आदेश देने और पर्यावरण क्षतिपूर्ति (ईसी) लगाने या वसूलने का अधिकार भी दिया।
यह स्वीकार करते हुए कि 500 वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल वाले भूखंडों पर बड़ी संख्या में निर्माण परियोजनाएं एनसीआर के कई अन्य नगर निगमों और बड़े शहरों/कस्बों में भी चल रही हैं, जो सी एंड डी क्षेत्र से उत्पन्न होने वाले कुल पीएम10 और पीएम2.5 के स्तर में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, आयोग ने पूरे क्षेत्र में धूल नियंत्रण उपायों का अधिक प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए प्रवर्तन ढांचे का विस्तार किया है।
तदनुसार एनसीआर में मौजूदा प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करने के अलावा सी एंड डी स्थलों पर धूल नियंत्रण उपायों का गंभीर उल्लंघन करने वालों के खिलाफ मुकदमा शुरू करने का अधिकार अब मानेसर, करनाल, पानीपत, रोहतक, मेरठ, अलवर, भरतपुर, भिवाड़ी और नीमराणा सहित पूरे एनसीआर में अतिरिक्त नगर निगमों, विकास प्राधिकरणों और शहरी स्थानीय निकायों तक बढ़ा दिया गया है।
संशोधित निर्देश में सभी संबंधित एजेंसियों को पहले से जमा की जा रही मासिक प्रगति रिपोर्ट के साथ-साथ दर्ज की गई शिकायतों और मुकदमों पर आयोग को एक मासिक स्थिति रिपोर्ट जमा करने की भी आवश्यकता है। इस रिपोर्टिंग तंत्र से जवाबदेही मजबूत होने और पूरे एनसीआर में प्रवर्तन कार्रवाइयों की सूक्ष्म निगरानी में आसानी होने की उम्मीद है।
पिछले तिमाही, अप्रैल-जून 2026 के दौरान डीपीसीसी/एसपीसीबी द्वारा दिल्ली में सी एंड डी स्थलों पर 16,195 निरीक्षण किए गए, हरियाणा (एनसीआर) में 909 स्थलों, उत्तर प्रदेश (एनसीआर) में 230 स्थलों और राजस्थान के एनसीआर जिलों में 160 स्थलों का निरीक्षण किया गया।
पूरे एनसीआर में जारी सी एंड डी गतिविधियों की बड़ी संख्या को देखते हुए, विशेष रूप से 500 वर्ग मीटर से कम क्षेत्रफल वाले भूखंडों पर छोटे निर्माण परियोजनाओं के मामले में, धूल नियंत्रण उपायों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने और पूरे क्षेत्र में अनुपालन को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त नगर निगमों, विकास प्राधिकरणों, नगर परिषदों, नगर बोर्डों और यूएलबी तक प्रवर्तन ढांचे का विस्तार करना अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
आयोग ने दोहराया है कि सी एंड डी स्थलों पर धूल नियंत्रण उपायों का प्रभावी प्रवर्तन क्षेत्र की समग्र वायु गुणवत्ता में सुधार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। विस्तारित प्रवर्तन तंत्र सख्त अनुपालन सुनिश्चित करेगा, उल्लंघनों के खिलाफ रोकथाम को मजबूत करेगा और पूरे एनसीआर में धूल उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
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पीके/केसी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2294606)
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