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ओडिशा में वर्षा जल संग्रह: जागरूकता से भूजल पुनर्भरण तक

प्रविष्टि तिथि: 01 AUG 2026 1:22PM by PIB Delhi

28 जून 2026 को 'मन की बात' के 135वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा वर्षाजल की हर बूंद को संरक्षित करने के आह्वान के बाद, ओडिशा ने 'कैच द रेन 2026' अभियान के तहत अपने प्रयासों को तेज कर दिया है ताकि जन जागरूकता को ठोस जल संरक्षण परिणामों में बदला जा सके, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पारंपरिक जल निकायों के जीर्णोद्धार और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जा सके।

जल राजदूतों की एक पीढ़ी का निर्माण

ओडिशा ने सामुदायिक संपर्क, व्यवहार परिवर्तन, संस्थागत भागीदारी और जल संरक्षण संपत्तियों के निर्माण को मिलाकर एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया है। राज्य भर में 968 सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियों के माध्यम से एक व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसमें नुक्कड़ नाटक, लोक प्रदर्शन, सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम और वर्षा जल संचयन और भूजल संरक्षण पर जागरूकता अभियान शामिल थे। ये गतिविधियां कई जिलों में आयोजित की गईं, जिनमें खुर्दा में 230 आईईसी गतिविधियां दर्ज की गईं, इसके बाद अंगुल (124); कटक, केंद्रपाड़ा, जाजपुर, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, नबरंगपुर और सुबर्णपुर (प्रत्येक में 62); मयूरभंज (60); नयागढ़ और पुरी (प्रत्येक में 50); और गंजम (20) का स्थान रहायह ओडिशा भर में अभियान की व्यापक पहुंच और मजबूत जन भागीदारी को दर्शाता है।

इस अभियान में शिक्षण संस्थान महत्वपूर्ण भागीदार बनकर उभरे हैं। छात्रों को जागरूकता कार्यक्रमों, प्रशिक्षण सत्रों और तकनीकी संवादों के माध्यम से भूजल विज्ञान, जल विज्ञान प्रक्रियाओं और वर्षा जल संचयन प्रणालियों से परिचित कराया गया है। इन पहलों का उद्देश्य ऐसे जागरूक नागरिक तैयार करना है जो अपने समुदायों में जल संरक्षण का समर्थन करें और दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तन में योगदान दे सकें।

जागरूकता को कार्रवाई में बदलना

जागरूकता अभियान के साथ-साथ, राज्य भर में 905 वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण पूरा हो चुका है। इनमें 849 छत पर वर्षा जल संचयन (आरआरडब्ल्यूएच) संरचनाएं शामिल हैं , जिनमें से 21 सरकारी भवनों में और 828 निजी भवनों में हैं , साथ ही भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किए गए 56 पुनर्भरण शाफ्ट भी शामिल हैं। जिलावार उपलब्धियों में गंजम में 330 , खोर्धा में 121, मयूरभंज में 94 , कटक में 62 , संबलपुर में 54 , सुंदरगढ़ में 53, केंद्रपाड़ा में 48 , झारसुगुड़ा में 25, बरगढ़ में 16, पुरी में 13, नयागढ़ में 12, अंगुल में 10, नबरंगपुर में 7 और बालांगीर में 4 आरआरडब्ल्यूएच संरचनाएं शामिल हैं । इसके अतिरिक्त, जाजपुर में 45 , केंद्रपाड़ा में 10 और सुंदरगढ़ में 1 भूजल पुनर्भरण शाफ्ट का निर्माण किया गया, जिससे #CatchtheRain अभियान के तहत भूजल पुनर्भरण प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान मिला।


इन आंकड़ों का महत्व केवल पूर्ण हो चुकी संरचनाओं की संख्या में ही नहीं है। ये जागरूकता से अपनाने तक के बदलाव को दर्शाते हैं। वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित करने वाला परिवार स्थानीय जल प्रबंधन में भागीदार बन जाता है।

भूजल पुनर्भरण शाफ्ट सतह पर वर्षा के पानी और जमीन के नीचे जमा पानी के बीच संबंध स्थापित करता है। इस प्रकार के उपाय मिलकर उन क्षेत्रों में सिंचाई और स्थानीय जल उपलब्धता को मजबूत कर सकते हैं जहां भूजल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है।

पारंपरिक जल संसाधनों का पुनरुद्धार

ओडिशा ने नए पुनर्भरण अवसंरचना के निर्माण के साथ-साथ पारंपरिक जलाश्‍यों के जीर्णोद्धार को प्राथमिकता दी है। राज्य योजना की तालाब सुधार और लघु सिंचाई परियोजना योजना के अन्‍तर्गत, सभी 30 जिलों में स्थित 98 तालाबों के जीर्णोद्धार और गाद हटाने का कार्य शुरू किया गया है।

इन जलाशयों के जीर्णोद्धार से इनकी भंडारण क्षमता बढ़ रही है, जिससे मानसून जल का अधिक संचय संभव हो रहा है, सिंचाई में सहायता मिल रही है, स्थानीय जल उपलब्धता में सुधार हो रहा है और भूजल पुनर्भरण में योगदान मिल रहा है। यह पहल ग्रामीण जल सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलेपन को मजबूत करने में पारंपरिक जल संसाधनों की भूमिका को सुदृढ़ करती है।

जल सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाना

सिंचाई परियोजनाओं, भूजल कार्यालयों और जल अवसंरचना स्थलों पर चलाए जा रहे वृक्षारोपण अभियान, मृदा स्थिरता में सुधार, कटाव में कमी, जल अंतर्प्रवाह में वृद्धि और उचित जलग्रहण तंत्रों को बढ़ावा देकर जल संरक्षण प्रयासों में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। ये उपाय जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रति लचीलेपन को मजबूत करते हुए जल संसाधनों की दीर्घकालिक स्थिरता में योगदान करते हैं।

जल सुरक्षा के लिए जन आंदोलन

ओडिशा का 'कैच द रेन' अभियान दर्शाता है कि सामुदायिक भागीदारी जल संरक्षण के परिणामों को किस प्रकार बढ़ावा दे सकती है। राज्य सतत जल प्रबंधन के लिए जागरूकता सृजन, व्यवहार परिवर्तन, संस्थागत सहभागिता, पारंपरिक जलाश्‍यों का जीर्णोद्धार और भूजल पुनर्भरण अवसंरचना के निर्माण को मिलाकर एक व्यापक ढांचा तैयार कर रहा है।

जैसे-जैसे अभियान आगे बढ़ रहा है, ओडिशा इस सिद्धांत को सुदृढ़ कर रहा है कि जल सुरक्षा तभी सबसे प्रभावी होती है जब नागरिक अपने समुदायों में होने वाली वर्षा के संरक्षण, संग्रहण और पुनर्भरण में सक्रिय भागीदार बनते हैं। यह पहल 'कैच द रेन' के व्यापक उद्देश्य को दर्शाती है - मौसमी वर्षा को सतत विकास और जल सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक संसाधन में परिवर्तित करना।


 

 

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पीके/केसी/पीपी/एमबी


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