स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
आईसीएमआर-एनआईएन के नेतृत्व में ‘लेट्स फिक्स अवर फूड’ (एलएफओएफ) कंसोर्टियम ने बच्चों और किशोरों के लिए बेहतर खान-पान को बढ़ावा देने के मकसद से नीतिगत प्राथमिकताएं जारी कीं
इस नीतिगत दस्तावेज़ में बच्चों और किशोरों के लिए बेहतर खान-पान का माहौल बनाने और उनके खान-पान की आदतों में सुधार लाने के लिए प्रमाण आधारित सुझाव दिए गए हैं
नई दिल्ली में एलएफओएफ से जुड़ी जानकारी साझा करने और विचार-विमर्श के लिए आयोजित कार्यशाला के दौरान नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास ने यह नीति दस्तावेज़ जारी किया
प्रविष्टि तिथि:
22 JUL 2026 6:03PM by PIB Delhi
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर-एनआईएन) के नेतृत्व वाले 'लेट्स फिक्स अवर फूड' (एलएफओएफ) कंसोर्टियम ने आज 'भारत में बच्चों और किशोरों के लिए बेहतर खान-पान और भोजन के माहौल को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिकता वाले नीतिगत कदम' नाम से एक नीति दस्तावेज़ जारी किया। इसमें देश भर के बच्चों और किशोरों के लिए बेहतर खान-पान का माहौल बनाने और उनकी खान-पान की आदतों में सुधार लाने में मदद करने के लिए प्रमाण आधारित सुझाव दिए गए हैं।
इस नीति दस्तावेज़ को नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास ने नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित एलएफओएफ प्रसार और परामर्श कार्यशाला में लॉन्च किया। इस मौके पर आईसीएमआर-एनआईएन की निदेशक डॉ. भारती कुलकर्णी, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई) के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) के. श्रीनाथ रेड्डी और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, एफएसएसएआई, यूनिसेफ इंडिया, रिज़ॉल्व टू सेव लाइव्स (आरटीएसएल), कंसोर्टियम पार्टनर संस्थानों, शोधकर्ताओं, विकास सहयोगियों और युवा प्रतिनिधियों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
'लेट्स फिक्स अवर फूड' (एलएफओएफ) कंसोर्टियम, आईसीएमआर-एनआईएन के नेतृत्व में एक बहु संस्थान राष्ट्रीय मंच है, जिसमें रिज़ॉल्व टू सेव लाइव्स (आरटीएसएल) इंडिया, यूनिसेफ इंडिया, ग्लोबल हेल्थ एडवोकेसी इनक्यूबेटर (जीएचएआई), पीएचएफआई, डब्ल्यूएचओ, एफएसएसएआई, आईईजी, डब्ल्यूईपी, लेडी इरविन कॉलेज, आईएफपीआरआई, डीकिन विश्वविद्यालय और अन्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय साझेदार शामिल हैं। अनुसंधान, नीति विश्लेषण, एडवोकेसी और हितधारकों के साथ बातचीत के ज़रिए, यह कंसोर्टियम खास तौर पर बच्चों और किशोरों के लिए खानपान के माहौल में बदलाव लाकर, खान-पान से जुड़ी गैर-संचारी बीमारियों को रोकने की भारत की कोशिशों में मदद करना चाहता है।
यह दस्तावेज़ लगभग तीन साल की मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च, हितधारकों के साथ वार्ता और नीतिगत वार्ताओं को एक साथ लाता है। इसमें कई अहम क्षेत्रों में नीतियों से जुड़ी सिफारिशें दी गई हैं, जैसे- स्कूल में हेल्दी फूड से जुड़ा वातावरण, पोषण को लेकर साक्षरता, फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग, बच्चों के लिए अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों की मार्केटिंग पर रेगुलेशन, ज़्यादा फैट, नमक और चीनी (एचएफएसएस) वाले खाद्य पदार्थों पर कर, हेल्दी डाइटरी फैट, नमक कम करना, कम सोडियम वाले नमक के विकल्प, सामजिक और व्यावहारिक बदलाव संचार, युवाओं की भागीदारी और स्वस्थ पोषण को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय उपाय।
इस मौके पर नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास ने कहा, "बच्चों और किशोरों के लिए बेहतर खान-पान का माहौल बनाने के लिए प्रमाणों पर आधारित और कई क्षेत्रों को शामिल करने वाली नीतियां ज़रूरी है। भारत में ज़्यादा वज़न, मोटापे और खान-पान से जुड़ी गैर-संक्रामक बीमारियों के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए लेट्स फिक्स अवर फूड कंसोर्टियम जैसी मिलकर की जाने वाली पहलें अहम हैं।"
आईसीएमआर-एनआईएन की निदेशक डॉ. भारती कुलकर्णी ने कहा, " आईसीएमआर-एनआईएन अच्छी गुणवत्ता के प्रमाण जुटाने और ऐसी साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जो शोध को जनस्वास्थ्य से जुड़े कामों में बदल सकें। नीतियों से जुड़ी ये सिफारिशें शोध कर्ताओं, नीति निर्माताओं, विकास में साझेदार और युवाओं की मिली-जुली कोशिशों को दिखाती हैं, जो भारत की आने वाली पीढ़ियों के लिए खान-पान का बेहतर माहौल बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।"
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पीएचएफआई) के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) के. श्रीनाथ रेड्डी ने अस्वास्थ्यकर खान-पान के व्यावसायिक, सामाजिक और पर्यावरणीय कारणों से निपटने के लिए व्यापक नीतिगत उपायों की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और बच्चों तथा किशोरों को मोटापे को बढ़ावा देने वाले खान-पान के माहौल से बचाने के लिए लगातार कदम उठाने की अपील की।
इस कार्यशाला में कंसोर्टियम के तहत तैयार किए गए कई ज्ञान के उत्पाद भी लॉन्च किए गए। इनमें एलएफओएफ वेबसाइट, स्कूलों के लिए न्यूट्रिशन एनवायरनमेंट असेसमेंट टूलकिट (एनईएटी-एस) और उसकी रिपोर्ट, फूड लेबल को समझने के लिए एक ई-लर्निंग मॉड्यूल, और बच्चों व किशोरों में पोषण के बारे में जानकारी बढ़ाने के लिए फैट, शुगर और नमक पर आईसीएमआर-एनआईएन के शैक्षणिक संसाधन शामिल हैं।
यूनिसेफ इंडिया में पोषण प्रमुख मैरी-क्लाउड डेसिलेट्स ने कहा, "कुपोषण का मतलब अब सिर्फ़ पोषण की कमी नहीं है। अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों की वजह से मोटापा बढ़ रहा है, जो बच्चों और किशोरों के स्वस्थ विकास के लिए चुनौती है। इन दस नीति संबंधी संक्षिप्त विवरण और स्कूलों के लिए न्यूट्रिशन एनवायरनमेंट असेसमेंट टूलकिट (एनईएटी-एस) का लॉन्च, स्कूलों में स्वस्थ खाद्य पदार्थों के वातावरण के लिए नीति बनाने की दिशा में एक कदम है। हर बच्चे को खान पान के ऐसे स्वस्थ वातावरण में बड़े होने का अधिकार है, जो उन्हें फलने-फूलने, सीखने और अपनी पूरी क्षमता हासिल करने में मदद करे।"
रिज़ॉल्व टू सेव लाइव्स (आरटीएसएल) के कार्यकारी निदेशक डॉ. सैयद इमरान फारूक ने ज़्यादा नमक, फैट और चीनी के सेवन को कम करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। साथ ही, उन्होंने ऐसी खाद्य नीति की ज़रूरत बताई जो स्वस्थ खाद्य वातावरण को बढ़ावा दें और दिल की बीमारियों व अन्य स्वास्थ्य खतरों के बोझ को कम करें। उन्होंने आईसीएमआर-एनआईएन के नेतृत्व की सराहना की और पूरे भारत में स्वस्थ खाद्य वातावरण के साझा दृष्टिकोण के प्रति आरटीएसएल की प्रतिबद्धता को दोहराया।
इस विचार विमर्श में कई राज्यों में स्कूल के खाने-पीने के माहौल, अस्वास्थ्यकर खाने की मार्केटिंग, पोषण शिक्षा, खान-पान की आदतों, वित्तीय नीति के विकल्पों और पोषण से जुड़े माहौल के आकलन पर कंसोर्टियम के सहयोगियों द्वारा जुटाए गए नए प्रमाण पेश किए गए। कार्यशाला का समापन इस विषय पर चर्चा के साथ हुआ, कि कैसे इन प्रमाणों को बच्चों और किशोरों के लिए बेहतर खान-पान का माहौल बनाने वाली व्यावहारिक नीतिगत सिफारिशों में बदला जाए।
पृष्ठभूमि
लेट्स फिक्स अवर फूड कंसोर्टियम की स्थापना भारत में बच्चों और किशोरों पर खास ध्यान देते हुए, बेहतर खान-पान का माहौल बनाने के लिए प्रमाण जुटाने और नीतिगत कार्रवाई को बढ़ावा देने के मकसद से की गई थी। आज जारी की गई नीतिगत प्राथमिकताएं कई क्षेत्रों के शोध और बातचीत पर आधारित हैं। इनका मकसद समन्वित और प्रमाण आधारित कार्रवाई के ज़रिए खान-पान से जुड़ी गैर-संचारी बीमारियों को रोकने की कोशिशों में मदद करना है।
नीतिगत संक्षिप्त विवरण यहां उपलब्ध हैं: https://letsfixourfood.org/LFOF-policy-brief.php.

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पीके/केसी/एनएस
(रिलीज़ आईडी: 2288116)
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