विधि एवं न्याय मंत्रालय
विधि कार्य विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय ने ब्रिक्स देशों की अभियोजन सेवाओं के प्रमुखों की 8वीं बैठक की मेजबानी की
यह बैठक 'अभियोजन पक्ष के नजरिए से आपराधिक मामलों के निपटारे से जुड़े अनुभवों और सर्वोत्तम तौर-तरीकों के आदान-प्रदान' विषय पर केंद्रित थी
प्रविष्टि तिथि:
21 JUL 2026 9:00PM by PIB Delhi
विधि कार्य विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार ने भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत, 20-21 जुलाई 2026 को वर्चुअल तरीके से ब्रिक्स अभियोजन सेवाओं के प्रमुखों की 8वीं बैठक सफलतापूर्वक आयोजित की। भारत के महान्यायवादी (अटॉर्नी जनरल) श्री आर. वेंकटरमणी की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण आधिकारिक बातचीत में ब्राजील, चीन, इजिप्ट (मिस्र), इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और यूएई के अभियोजन सेवाओं के प्रमुख, वरिष्ठ अधिकारी, प्रतिनिधि और कानूनी नेतृत्व से जुड़े लोग शामिल हुए। इस सत्र का उद्घाटन करते हुए, श्री आर. वेंकटरमणी ने स्वागत भाषण दिया और जोर देकर कहा, "कानून का शासन, आपराधिक न्याय का निष्पक्ष और समय पर प्रशासन, और हमारी अभियोजन संस्थाओं के बीच आपसी भरोसा - ये कई मायनों में वे मजबूत आधार हैं जिन पर इस साल की अध्यक्षता के तहत मजबूती और टिकाऊपन बनाने का लक्ष्य टिका है।" यह अहम बैठक "मजबूती, नवाचार, सहयोग और टिकाऊपन के लिए निर्माण" के भारत के व्यापक ब्रिक्स विजन को आगे बढ़ाने में पूरी तरह सफल रही। सदस्य देशों के अभियोजन नेतृत्व को एक साथ लाकर, इस बैठक ने स्थिर, निष्पक्ष और अनुमान लगाने योग्य कानूनी ढांचे को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता को उजागर किया, जिससे पूरे ब्रिक्स ब्लॉक में आर्थिक विकास को समर्थन मिलता है।
यह वर्चुअल बैठक "अभियोजन पक्ष के नजरिए से आपराधिक मामलों के निपटारे में अनुभवों और बेहतरीन तौर-तरीकों का आदान-प्रदान" विषय पर केंद्रित थी। दो दिनों तक चली इस बैठक में ब्रिक्स देशों के अभियोजन सेवाओं के प्रमुखों ने आधुनिक संस्थागत चुनौतियों पर चर्चा की और मामलों के निपटारे से जुड़े महत्वपूर्ण तौर-तरीकों का आदान-प्रदान किया। इन चर्चाओं ने पिछले मंचों पर शुरू की गई डिजिटल पहल को आगे बढ़ाया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा न्याय से जुड़ी अवधारणाओं को व्यावहारिक, रोजमर्रा की प्रक्रियाओं में शामिल करने की दिशा में कदम बढ़ाए। तकनीक की मदद से मामलों के निपटारे पर विचार करते हुए, इस बैठक में आपराधिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के प्रबंधन और समय-सीमा के भीतर मुकदमों को पूरा करने जैसे जरूरी मुद्दों पर चर्चा की गई।
इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली को ज्यादा संवेदनशील, पारदर्शी और पीड़ित-केंद्रित बनाना था। सदस्य देशों ने अभियोजन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने और अभियोजन सेवाओं में जनता का भरोसा बढ़ाने के लिए अपने खास अनुभव साझा किए। सीमा-पार वित्तीय अपराध, साइबर खतरे, भ्रष्टाचार और पर्यावरण से जुड़े उल्लंघनों जैसी जटिल आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत सीमा-पार सहयोग की ज़रूरत को समझते हुए, प्रतिनिधियों ने अहम तरीकों पर चर्चा की। इनमें देरी कम करने और सबूतों के आदान-प्रदान को बेहतर बनाने के उद्देश्य से न्यायिक सहयोग के लिए एक 'ब्रिक्स मॉडल फ्रेमवर्क' तैयार करना और साथ ही कानूनी शोध, क्षमता निर्माण और अभियोजन सेवाओं के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए भारत की नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना शामिल था।
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पीके/केसी/एमपी
(रिलीज़ आईडी: 2287524)
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