पंचायती राज मंत्रालय
ड्रोन-आधारित ज़मीन सर्वे एवं संपत्ति रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण
प्रविष्टि तिथि:
21 JUL 2026 6:20PM by PIB Delhi
स्वामित्व योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति मालिकों को अधिकार अभिलेख उपलब्ध कराना है। इस योजना के अंतर्गत, गांवों के आबादी क्षेत्रों के उच्च सटीकता वाली मैपिंग करने के लिए कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन (सीओआरएस) तकनीक का उपयोग करके ग्रामीण आबादी वाली भूमि का सीमांकन किया जाता है। ये अत्यधिक सटीक मानचित्र संपत्ति की सीमाओं का स्पष्ट निर्धारण करने एवं अधिकार अभिलेख तैयार करके संपत्ति संबंधी विवादों को कम करने में सहायता करते हैं। यह योजना संपत्ति कार्ड जारी करने से पहले सक्षम राज्य प्राधिकरणों द्वारा स्थलीय सत्यापन और आपत्तियों/विवादों के समाधान का प्रावधान करती है, जिससे संपत्तियों के सीमांकन में पारदर्शिता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।
पंचायती राज मंत्रालय ने आईआईएम अहमदाबाद के ज़रिए इस योजना का प्रभाव जानने के लिए एक मूल्यांकन किया है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि बैंक लोन लेने और ग्राम पंचायत की अपनी आमदनी के स्रोतों पर इस योजना का क्या असर पड़ा है। अध्यन में पाया गया कि स्वामित्व योजना लागू होने के बाद संपत्ति कार्ड के आधार पर लिए जाने वाले बैंक लोन की रकम में काफी बढ़ोतरी हुई है और साथ ही ग्राम पंचायत के संपत्ति कर एवं दूसरे सामान्य कर से होने वाली आमदनी में भी बढ़ोत्तरी हुई है। मंत्रालय इस योजना के लागू होने से पहले और बाद में सुलझाए गए ज़मीन के विवादों की संख्या का डेटा नहीं रखता है। अब तक, 3.30 लाख गांवों में ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है और 1.97 लाख गांवों के लिए 3.24 करोड़ प्रॉपर्टी कार्ड तैयार हो चुके हैं।
राज्य और ज़िलेवार विवरण अनुलग्नक में दिए गए हैं
यह जानकारी केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 21 जुलाई 2026 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
***
पीके/केसी/एके/डीके
(रिलीज़ आईडी: 2287400)
आगंतुक पटल : 52
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें:
English