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सहकारिता मंत्रालय
राष्ट्रीय सहकारिता नीति और डेटाबेस
प्रविष्टि तिथि:
21 JUL 2026 5:31PM by PIB Delhi
राष्ट्रीय सहकारिता नीति (एनसीपी), 2025 सहकारी क्षेत्र के व्यवस्थित और सर्वांगीण विकास के लिए एक रोडमैप प्रदान करती है जिसमें केंद्रीय और राज्य सरकारों सहित सभी हितधारकों द्वारा निरंतर और लगातार प्रयासों के साथ-साथ नियमित निगरानी की आवश्यकता होती है । एनसीपी 2025 में नीति के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए निम्नलिखित संस्थागत तंत्र दिए गए हैं:
“9.5.1. समग्र मार्गदर्शन, अंतरमंत्रालयीय समन्वय, नीति की आवधिक समीक्षा, आदि के लिए माननीय सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में ‘सहकारी नीति पर राष्ट्रीय संचालन समिति’ का गठन किया जाएगा । इस समिति में सदस्य के रूप में भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों के मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है,
9.5.2. केंद्र-राज्य समन्वय, कार्यान्वयन समस्याओं का समाधान, आवधिक निगरानी और समीक्षा, आदि के लिए सहकारिता सचिव की अध्यक्षता में ‘नीति कार्यान्वयन और निगरानी समिति’ का गठन किया जाएगा । इसमें भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों के सचिवों, सभी राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों के सहकारी विभागों के सचिवों/प्रधान सचिवों/अपर मुख्य सचिवों, नीति आयोग के प्रतिनिधि, राष्ट्रीय सहकारी परिसंघों/संघों/समितियों, नाबार्ड, एनडीडीबी, एनसीडीसी, एनएफडीबी, एनसीसीटी, वैमनीकॉम, इत्यादि के अध्यक्षों/प्रबंध निदेशकों को सदस्य के रूप में शामिल किया जा सकता है ।”
उपरोक्त दोनों समितियों का गठन किया जा चुका है।
‘नीति कार्यान्वयन और निगरानी समिति’ की प्रथम बैठक दिनांक 09.06.2026 को आयोजित हुई । इस बैठक में यह सूचित किया गया कि एनसीपी को सरकार के समग्र दृष्टिकोण के माध्यम से और सहकारी संघवाद की भावना के साथ कार्यान्वित किया गया है । सहकारिता मंत्रालय ने एनसीपी, 2025 के कार्यान्वयन को अग्रसर करने के लिए 152 पहलें की हैं (संलग्नक-क के रूप में संलग्न) । इसके अलावा, सभी राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों को एनसीपी, 2025 के अनुरूप राज्य-स्तरीय सहकारिता नीति तैयार करने की सलाह दी गई है ।
राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (एनसीडी) के अनुसार, दिनांक 15.07.2026 तक देश भर में कुल 1,12,895 प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियां (पैक्स) हैं, जिनमें से 1,07,457 पैक्स कार्यशील हैं । कार्यशील पैक्स की कुल संख्या का राज्य-वार ब्योरा संलग्नक-1 पर प्रस्तुत है । देश भर की सभी पंचायतों और गांवों को आच्छादित करने के लिए नई बहुउद्देशीय पैक्स, डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियों की स्थापना की भारत सरकार की योजना दिनांक 15.02.2023 को अनुमोदित होने के बाद से कुल 10,225 एम-पैक्स पंजीकृत किए गए हैं । एम-पैक्स की कुल संख्या का राज्य-वार ब्योरा संलग्नक-2 के रूप में संलग्न है ।
सरकार ने वर्ष 2022 में पैक्स कंप्यूटरीकरण की केंद्रीय क्षेत्रक परियोजना शुरू की है । भारत सरकार ने कार्यशील पैक्स के कंप्यूटरीकरण की परियोजना के अधीन प्रारंभ में 2,516 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय से 63,000 पैक्स को अनुमोदित किया था, जिसे अब 79,630 पैक्स को शामिल करते हुए बढ़ाकर 2925.39 करोड़ रुपये किया गया है जिसमें सभी कार्यशील पैक्स को ईआरपी (एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) आधारित कॉमन राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर पर लाकर उन्हें राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) के माध्यम से नाबार्ड के साथ लिंक करना शामिल है । तत्संबंधी राज्य-वार ब्योरा संलग्नक-3 पर दिया गया है ।
इसके अलावा, भारत सरकार ने अगले पांच वर्षों में देश की सभी पंचायतों और गांवों को आच्छादित करने के लक्ष्य से नई बहुउद्देशीय पैक्स/डेयरी/मात्स्यिकी सहकारी समितियां स्थापित करने की योजना को अनुमोदित किया है । राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के अनुसार, दिनांक 15.02.2023 को योजना के अनुमोदन के पश्चात् देश भर में दिनांक 15.07.2026 तक कुल 10,225 नए पैक्स पंजीकृत किए गए हैं। तत्संबंधी राज्य-वार ब्योरा संलग्नक-2 पर दिया गया है ।
सहकारिता मंत्रालय द्वारा राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों के सहयोग से एक व्यापक राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (एनसीडी) तैयार किया गया है । यह डेटाबेस 30 आर्थिक क्षेत्रों में फैली 8.5 लाख से अधिक सहकारी समितियों, जिसमें लगभग 30 करोड़ सदस्य हैं, के बारे में सूचना तक सिंगल-प्वाइंट एक्सेस प्रदान करता है । इस उद्देश्य के लिए राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारियों द्वारा सहकारी समितियों के डेटा को एनसीडी पोर्टल पर नियमित रूप से एकत्र और अद्यतित किया जाता है । पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सहित देश भर में सहकारी समितियों का राज्य-वार ब्योरा संलग्नक-4 के रूप में संलग्न है । पालघर जिला सहित महाराष्ट्र राज्य की सहकारी समितियों का जिला-वार ब्योरा संलग्नक-5 के रूप में संलग्न है ।
एनसीडी न केवल किसी नीतिगत पहल के प्रतिपादन के दौरान बल्कि नीति कार्यान्वयन के दौरान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । यह डेटाबेस सहकारी समितियों के भौगोलिक आच्छादन, वित्तीय प्रदर्शन, आदि में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करता है और इस प्रकार नीति सिफारिशों को कार्यान्वित करने में मदद करता है । यह डेटाबेस अनाच्छादित और अल्प-आच्छादित क्षेत्रों में नई पैक्स, डेयरी और मात्स्यिकी प्राथमिक सहकारी समितियों की स्थापना के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में कार्य करता है, रैंकिंग संरचना के विकास को सक्षम बनाता है और भारतीय अर्थव्यवस्था में सहकारी क्षेत्र के आर्थिक योगदान का अनुमान लगाने में सहायता प्रदान करता है ।
*****
संलग्नक-1
कार्यशील प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्स) की कुल संख्या का राज्य-वार ब्योरा
|
क्रम सं.
|
राज्य/संघ राज्यक्षेत्र
|
समितियों की संख्या
|
सदस्यों की संख्या
|
|
1
|
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह
|
47
|
16,051
|
|
2
|
आंध्र प्रदेश
|
2,041
|
53,45,995
|
|
3
|
अरुणाचल प्रदेश
|
177
|
19,545
|
|
4
|
असम
|
1,401
|
22,86,183
|
|
5
|
बिहार
|
8,494
|
1,37,72,082
|
|
6
|
चंडीगढ़
|
4
|
589
|
|
7
|
छत्तीसगढ़
|
2,554
|
34,99,717
|
|
8
|
गोवा
|
141
|
2,54,104
|
|
9
|
गुजरात
|
10,576
|
33,59,851
|
|
10
|
हरियाणा
|
820
|
28,16,408
|
|
11
|
हिमाचल प्रदेश
|
2,225
|
13,49,946
|
|
12
|
जम्मू और कश्मीर
|
769
|
2,64,718
|
|
13
|
झारखंड
|
4,457
|
17,21,520
|
|
14
|
कर्नाटक
|
6,189
|
78,10,312
|
|
15
|
केरल
|
1,647
|
3,05,03,909
|
|
16
|
लद्दाख
|
128
|
14,616
|
|
17
|
मध्य प्रदेश
|
5,185
|
57,61,249
|
|
18
|
महाराष्ट्र
|
21,212
|
1,22,52,114
|
|
19
|
मणिपुर
|
352
|
70,119
|
|
20
|
मेघालय
|
811
|
1,44,890
|
|
21
|
मिजोरम
|
154
|
9,841
|
|
22
|
नागालैंड
|
584
|
25,329
|
|
23
|
ओडिशा
|
4,139
|
70,88,943
|
|
24
|
पुदुचेरी
|
53
|
69,911
|
|
25
|
पंजाब
|
3,662
|
22,57,948
|
|
26
|
राजस्थान
|
9,600
|
76,64,251
|
|
27
|
सिक्किम
|
202
|
34,231
|
|
28
|
तमिलनाडु
|
4,509
|
1,06,06,708
|
|
29
|
तेलंगाना
|
905
|
2,892,610
|
|
30
|
दादरा और नागर हवेली तथा दमण और दीव
|
17
|
10,584
|
|
31
|
त्रिपुरा
|
565
|
4,02,355
|
|
32
|
उत्तराखंड
|
988
|
12,13,774
|
|
33
|
उत्तर प्रदेश
|
8,003
|
1,08,88,558
|
|
34
|
पश्चिम बंगाल
|
4,851
|
47,56,095
|
|
|
कुल
|
1,07,462
|
13,91,85,056
|
संलग्नक-2
एम-पैक्स की कुल संख्या का राज्य-वार ब्योरा
|
क्रम सं.
|
राज्य/संघ राज्यक्षेत्र
|
समितियों की संख्या
|
सदस्यों की संख्या
|
|
1
|
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह
|
1
|
12
|
|
2
|
आंध्र प्रदेश
|
11
|
110
|
|
3
|
अरुणाचल प्रदेश
|
136
|
2868
|
|
4
|
असम
|
580
|
10875
|
|
5
|
बिहार
|
57
|
98369
|
|
6
|
छत्तीसगढ़
|
517
|
263952
|
|
7
|
गोवा
|
38
|
1161
|
|
8
|
गुजरात
|
662
|
99147
|
|
9
|
हरियाणा
|
40
|
23235
|
|
10
|
हिमाचल प्रदेश
|
136
|
5213
|
|
11
|
जम्मू और कश्मीर
|
232
|
23249
|
|
12
|
झारखंड
|
45
|
5792
|
|
13
|
कर्नाटक
|
265
|
73239
|
|
14
|
लद्दाख
|
3
|
333
|
|
15
|
मध्य प्रदेश
|
680
|
490858
|
|
16
|
महाराष्ट्र
|
212
|
59755
|
|
17
|
मणिपुर
|
127
|
15750
|
|
18
|
मेघालय
|
290
|
18537
|
|
19
|
मिजोरम
|
97
|
5444
|
|
20
|
नागालैंड
|
50
|
2065
|
|
21
|
ओडिशा
|
1539
|
705969
|
|
22
|
पुदुचेरी
|
4
|
99
|
|
23
|
पंजाब
|
152
|
2504
|
|
24
|
राजस्थान
|
2003
|
690478
|
|
25
|
सिक्किम
|
27
|
636
|
|
26
|
तमिलनाडु
|
27
|
12020
|
|
27
|
दादरा और नागर हवेली तथा दमण और दीव
|
5
|
98
|
|
28
|
त्रिपुरा
|
294
|
4318
|
|
29
|
उत्तराखंड
|
606
|
7892
|
|
30
|
उत्तर प्रदेश
|
1364
|
151736
|
|
31
|
पश्चिम बंगाल
|
25
|
3794
|
| |
कुल
|
10225
|
2779508
|
संलग्नक: 3
15 जुलाई, 2026 तक पैक्स कंप्यूटरीकरण के आंकड़े:
|
क्रम सं.
|
राज्य/संघ राज्यक्षेत्र
|
स्वीकृत पैक्स
|
हार्डवेयर वितरित
|
ईआरपी पर ऑनबोर्ड
|
ई-पैक्स
|
|
1
|
अंडमान और निकोबार
|
46
|
46
|
46
|
0
|
|
2
|
आंध्र प्रदेश
|
2037
|
2021
|
2021
|
2017
|
|
3
|
अरुणाचल प्रदेश
|
139
|
14
|
14
|
14
|
|
4
|
असम
|
850
|
709
|
581
|
540
|
|
5
|
बिहार
|
4495
|
4477
|
4482
|
4469
|
|
6
|
छत्तीसगढ़
|
2028
|
2028
|
2028
|
2028
|
|
7
|
दमण और दीव
|
9
|
4
|
4
|
4
|
|
8
|
गोवा
|
86
|
58
|
55
|
46
|
|
9
|
गुजरात
|
6216
|
5754
|
5760
|
5683
|
|
10
|
हरियाणा
|
710
|
710
|
710
|
710
|
|
11
|
हिमाचल प्रदेश
|
1885
|
1789
|
1598
|
1168
|
|
12
|
जम्मू और कश्मीर
|
708
|
537
|
537
|
537
|
|
13
|
झारखंड
|
2797
|
1500
|
1491
|
1400
|
|
14
|
कर्नाटक
|
5894
|
5491
|
4590
|
3794
|
|
15
|
लद्दाख
|
10
|
10
|
10
|
10
|
|
16
|
मध्य प्रदेश
|
5455
|
4536
|
4536
|
4536
|
|
17
|
महाराष्ट्र
|
12178
|
12000
|
12033
|
11987
|
|
18
|
मणिपुर
|
308
|
196
|
214
|
116
|
|
19
|
मेघालय
|
330
|
108
|
103
|
97
|
|
20
|
मिजोरम
|
99
|
49
|
45
|
24
|
|
21
|
नागालैंड
|
231
|
231
|
142
|
28
|
|
22
|
ओडिशा
|
4240
|
0
|
0
|
0
|
|
23
|
पुदुचेरी
|
45
|
45
|
44
|
32
|
|
24
|
पंजाब
|
3482
|
3456
|
3454
|
2517
|
|
25
|
राजस्थान
|
8525
|
6781
|
6933
|
5954
|
|
26
|
सिक्किम
|
131
|
107
|
107
|
107
|
|
27
|
तमिलनाडु
|
4561
|
4532
|
4481
|
3007
|
|
28
|
त्रिपुरा
|
475
|
268
|
268
|
267
|
|
29
|
उत्तर प्रदेश
|
6257
|
3581
|
3219
|
2014
|
|
30
|
उत्तराखंड
|
1216
|
670
|
668
|
663
|
|
31
|
पश्चिम बंगाल
|
4187
|
4167
|
3512
|
938
|
| |
कुल
|
79630
|
65875
|
63686
|
54707
|
संलग्नक-4
सहकारी समितियों का महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल सहित राज्य-वार ब्योरा
|
क्रम सं.
|
राज्य/संघ राज्यक्षेत्र
|
पंजीकृत एम-पैक्स
|
|
1
|
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
|
2,244
|
|
2
|
आंध्र प्रदेश
|
18,165
|
|
3
|
अरुणाचल प्रदेश
|
1,547
|
|
4
|
असम
|
12,838
|
|
5
|
बिहार
|
27,288
|
|
6
|
चंडीगढ़
|
476
|
|
7
|
छत्तीसगढ़
|
11,957
|
|
8
|
दिल्ली
|
5,827
|
|
9
|
गोवा
|
5,611
|
|
10
|
गुजरात
|
88,119
|
|
11
|
हरियाणा
|
35,040
|
|
12
|
हिमाचल प्रदेश
|
5,844
|
|
13
|
जम्मू और कश्मीर
|
10,735
|
|
14
|
झारखंड
|
12,207
|
|
15
|
कर्नाटक
|
47,288
|
|
16
|
केरल
|
19,479
|
|
17
|
लद्दाख
|
273
|
|
18
|
लक्षद्वीप
|
65
|
|
19
|
मध्य प्रदेश
|
53,216
|
|
20
|
महाराष्ट्र
|
2,27,177
|
|
21
|
मणिपुर
|
11,655
|
|
22
|
मेघालय
|
3,599
|
|
23
|
मिजोरम
|
1,559
|
|
24
|
नागालैंड
|
7,497
|
|
25
|
ओडिशा
|
8,667
|
|
26
|
पुदुचेरी
|
464
|
|
27
|
पंजाब
|
20,332
|
|
28
|
राजस्थान
|
43,723
|
|
29
|
सिक्किम
|
3,750
|
|
30
|
तमिलनाडु
|
23,034
|
|
31
|
तेलंगाना
|
60,680
|
|
32
|
दादरा और नागर हवेली तथा दमण और दीव
|
571
|
|
33
|
त्रिपुरा
|
3,280
|
|
34
|
उत्तराखंड
|
6,442
|
|
35
|
उत्तर प्रदेश
|
40,591
|
|
36
|
पश्चिम बंगाल
|
32,190
|
|
|
कुल
|
8,53,430
|
स्रोत:- दिनांक 15.07.2026 के अनुसार एनसीडी पोर्टल ।
संलग्नक-5
पालघर जिला सहित महाराष्ट्र में सहकारी समितियों का राज्य-वार ब्योरा
|
क्रम सं.
|
जिला
|
समितियों की संख्या
|
|
1
|
अहिल्यानगर
|
6,117
|
|
2
|
अकोला
|
1,048
|
|
3
|
अमरावती
|
2,033
|
|
4
|
बीड
|
3,419
|
|
5
|
भंडारा
|
1,927
|
|
6
|
बुलढाना
|
2,246
|
|
7
|
चंद्रपुर
|
1,591
|
|
8
|
छत्रपति संभाजीनगर
|
5,056
|
|
9
|
धाराशिव
|
2,075
|
|
10
|
धूले
|
1,390
|
|
11
|
गडचिरोली
|
669
|
|
12
|
गोंदिया
|
1,712
|
|
13
|
हिंगोली
|
1,067
|
|
14
|
जलगांव
|
3,539
|
|
15
|
जालना
|
1,946
|
|
16
|
कोल्हापुर
|
13,661
|
|
17
|
लातूर
|
2,311
|
|
18
|
मुंबई
|
68
|
|
19
|
मुंबई सबअर्बन
|
41,433
|
|
20
|
नागपुर
|
3,947
|
|
21
|
नांदेड
|
2,632
|
|
22
|
ननदरबार
|
874
|
|
23
|
नासिक
|
8,323
|
|
24
|
पालघर
|
10,186
|
|
25
|
परभनी
|
2,070
|
|
26
|
पुणे
|
33,062
|
|
27
|
रायगढ़
|
11,809
|
|
28
|
रत्नागिरी
|
3,448
|
|
29
|
सांग्ली
|
4,758
|
|
30
|
सतारा
|
4,722
|
|
31
|
सिंधुदुर्ग
|
1,650
|
|
32
|
शोलापुर
|
5,874
|
|
33
|
थाने
|
36,750
|
|
34
|
वर्धा
|
953
|
|
35
|
वाशिम
|
1,044
|
|
36
|
यवतमाल
|
1,767
|
|
|
कुल
|
2,27,177
|
स्रोत:- दिनांक 15.07.2026 के अनुसार एनसीडी पोर्टल ।
संलग्नक-क
- प्राथमिक सहकारी समितियों को आर्थिक रूप से जीवंत और पारदर्शी बनाना
- प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्स) को बहुउद्देशीय, बहुआयामी तथा पारदर्शी संस्था बनाने के लिए आदर्श उपविधियां:
सरकार ने राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों, राष्ट्रीय स्तर के परिसंघों, राज्य सहकारी बैंकों (StCBs), जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs), आदि सहित सभी हितधारकों के परामर्श से पैक्स के लिए आदर्श उपविधियां तैयार कर सभी राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों को परिचालित की हैं, जो पैक्स को 25 से अधिक व्यावसायिक कार्यकलाप करने, शासन में सुधार लाने, अपने प्रचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने हेतु सक्षम बनाते हैं l महिलाओं और अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देते हुए पैक्स की सदस्यता को अधिक समावेशी एवं व्यापक बनाने के भी उपबंध किए गए हैं । अब तक 32 राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों द्वारा आदर्श उपविधियां अपनाई गई हैं या उनकी मौजूदा उपविधियां, आदर्श उपविधियों के अनुरूप हैं ।
- कंप्यूटरीकरण द्वारा पैक्स का सशक्तीकरण:
पैक्स को सशक्त करने के लिए 2925.39 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय से कार्यशील पैक्स के कंप्यूटरीकरण की परियोजना को भारत सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया है जिसमें देश के सभी कार्यशील पैक्स को कॉमन ईआरपी (एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) आधारित राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर पर लाकर राज्य सहकारी बैंकों (StCBs) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) के माध्यम से नाबार्ड के साथ लिंक किया जाना है । इस परियोजना के अधीन 31 राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों के कुल 79,630 पैक्स अनुमोदित किए गए हैं । 30 राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों में कुल 63,707 पैक्स को एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) सॉफ्टवेयर पर ऑनबोर्ड किया गया है, और 65,875 हार्डवेयर वितरित किए गए हैं । दिनांक 15 जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार, अब तक 54,707 पैक्स को ई-पैक्स घोषित किया जा चुका है और इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से कुल 51.58 करोड़ लेनदेन किए गए हैं।
- सभी पंचायतों को आच्छादित करने के लिए नए बहुउद्देशीय पैक्स/डेयरी/मात्स्यिकी सहकारी समितियों की स्थापना:
भारत सरकार ने आगामी पांच वर्षों में देश की सभी पंचायतों और गांवों को आच्छादित करने के लक्ष्य से नए बहुउद्देशीय पैक्स/डेयरी/मात्स्यिकी सहकारी समितियां स्थापित करने की योजना को अनुमोदित किया है । यह पहल नाबार्ड, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी), राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (एनएफडीबी), और राज्य/संघ राज्यक्षेत्र की सरकारों द्वारा समर्थित है । राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के अनुसार, कुल 38,138 नई पैक्स, डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियां पंजीकृत की गई हैं; दिनांक15.2.2023 को योजना के अनुमोदन के बाद से दिनांक 15.06.2026 तक देश भर में 21,292 डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियों को सशक्त किया गया है।
- सभी पंचायतों को आच्छादित करने के लिए नए बहुउद्देशीय पैक्स/डेयरी/मात्स्यिकी सहकारी समितियों की स्थापना हेतु मार्गदर्शिका/मानक प्रचालन प्रक्रिया (SOP) का विमोचन:
योजना के प्रभावी और समयबद्ध कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सहकारिता मंत्रालय ने राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) और राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (एनएफडीबी) के समन्वय से दिनांक 19.09.2024 को एक मानक प्रचालन प्रक्रिया (मार्गदर्शिका) जारी की है जिसमें सभी संबंधित हितधारकों के लिए लक्ष्य और समय-सीमा दर्शायी गई है।
- सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अन्न भंडारण योजना: सरकार ने कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ), कृषि विपणन अवसंरचना (एएमआई), कृषि यांत्रिकीकरण पर उपमिशन (एसएमएएम), प्रधान मंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई), आदि सहित भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं के अभिसरण से पैक्स स्तर पर अन्न भंडारण के लिए गोदामों, कस्टम हायरिंग केंद्रों, प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयों तथा अन्य कृषि-अवसंरचनाओं के निर्माण हेतु योजना अनुमोदित की है। इससे खाद्यान्न की बर्बादी तथा परिवहन लागत में कमी आएगी, किसानों को उनकी उपज की बेहतर कीमत प्राप्त हो सकेगी एवं पैक्स स्तर पर ही विभिन्न कृषि आवश्यकताएं पूरी हो सकेगीं । पायलट परियोजना के अधीन 11 राज्यों के 11 पैक्स में गोदामों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है । इसके अलावा, पायलट परियोजना का विस्तार करते हुए देशभर में 600 से अधिक पैक्स को सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के अधीन गोदामों के निर्माण हेतु चिह्नित किया गया है। कैबिनेट सचिव ने सितंबर 2026 तक 5 लाख मीट्रिक टन की क्षमता बनाने का लक्ष्य सौंपा है।
वर्तमान में, राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई), भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ मर्यादित (नेफेड), और भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ मर्यादित (NCCF) ने 10.86 लाख मीट्रिक टन की क्षमता वाले 680 पैक्स /सहकारी गोदामों को किराए पर लेने का आश्वासन दिया है । 505 पैक्स (2.84 लाख मीट्रिक टन ) में निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जिसमें से 302 पैक्स में निर्माण कार्य पूरा होने से कुल 1.71 लाख मीट्रिक टन की क्षमता का सृजन हुआ है (आंध्र प्रदेश – 0.79 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले 117 गोदाम, राजस्थान – 0.60 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले 120 गोदाम, महाराष्ट्र – 0.16 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले 18 गोदाम, गुजरात – 0.15 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले 43 गोदाम और तमिलनाडु – 0.013 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले 4 गोदाम)। इसके अतिरिक्त, 14.56 लाख मीट्रिक टन की कुल भंडारण क्षमता वाले 496 पैक्स /सहकारी समितियों को चिह्नित किया गया है I
- सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना की मार्गदर्शिका/मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) का विमोचन: इस योजना के सुचारु एवं एकरूप कार्यान्वयन के लिए एक व्यापक मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) – “मार्गदर्शिका” तैयार कर राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों के साथ साझा की गई है । इस मार्गदर्शिका में योजना के अधीन विभिन्न समितियों का गठन, अंतर-मंत्रालयी समिति (आईएमसी) में लिए गए निर्णय, योजना के अधीन अभिसरण की गई विभिन्न योजनाओं का परिचय एवं उनके लाभ, आवेदन प्रक्रिया, चरणबद्ध कार्यान्वयन हेतु परियोजना फ्लो-चार्ट, अनुमानित परिणाम और निर्धारित समय-सीमा, सहकारिता मंत्रालय और अन्य हितधारकों की भूमिकाएं व जिम्मेदारियां, गोदाम निर्माण हेतु भांडागारण विकास और विनियामक प्राधिकरण (डब्ल्यूडीआरए) के दिशानिर्देश, योजना के अधीन पैक्स के चयन के मानदंड शामिल हैं ।
- सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के संबंध में कृषि विपणन अवसंरचना (एएमआई) योजना के अधीन किए गए संशोधन: सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना की द्वितीय अंतरमंत्रालयी बैठक (आईएमसी) बैठक, जो दिनांक 23.10.2024 को आयोजित हुई थी, में लिए गए निर्णयों के आधार पर कृषि और किसान कल्याण विभाग द्वारा कृषि विपणन अवसंरचना योजना में निम्नलिखित संशोधन किए गए:
- योजना की वित्तीय व्यवहार्यता बढ़ाने के लिए मार्जिन धनराशि की आवश्यकता को 20% से घटाकर 10% किया गया ।
- निर्माण लागत को संशोधित करके मैदानी क्षेत्रों में ₹3000–3500/मीट्रिक टन से बढ़ाकर ₹6000 -7000/ मीट्रिक टन तथा पूर्वोत्तर राज्यों में ₹4000/मीट्रिक टन से बढ़ाकर ₹8000/मीट्रिक टन किया गया।
- सब्सिडी को 25% से बढ़ाकर 33.33% किया गया (मैदानी क्षेत्रों में ₹875/मीट्रिक टन से बढ़ाकर ₹2333/मीट्रिक टन तथा पूर्वोत्तर राज्यों में ₹1333.33/मीट्रिक टन से बढ़ाकर ₹2666/मीट्रिक टन किया गया) ।
- पैक्स के लिए आंतरिक सड़क, तौल पुल, चाहरदीवारी, आदि सहायक अवसंरचना पर कुल अनुमत सब्सिडी का 1/3 (एक तिहाई) अतिरिक्त सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान किया गया।
- सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के अधीन भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा गोदामों की पहचान एवं किराया आश्वासन से संबंधित प्रगति: दिनांक 02.06.2025 को माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर भारतीय खाद्य निगम को पैक्स की पहचान करने, किराया आश्वासन प्रदान करने तथा इन गोदामों का वार्षिक किराये पर उपयोग सुनिश्चित करने का कार्य सौंपा गया है । इसमें हुई प्रगति निम्नानुसार है:
- प्रथम चरण में, भारतीय खाद्य निगम ने 2500 मीट्रिक टन एवं उससे अधिक (पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी क्षेत्रों के लिए 1671 मीट्रिक टन एवं उससे अधिक) की क्षमता के गोदामों को किराये पर लेने के लिए 216 संभावित स्थानों की पहचान की है ।
- भारतीय खाद्य निगम द्वारा 18 राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों के इन 216 संभावित स्थानों में लगभग 26.03 लाख मीट्रिक टन भंडारण आवश्यकता का आकलन किया गया है ।
- राज्यों द्वारा 200 पैक्स/सहकारी समितियों की पहचान की गई है और वे अतिरिक्त पैक्स/ सहकारी समितियों की सक्रियता पूर्वक पहचान कर रहे हैं ।
- ई-सेवाओं तक बेहतर पहुंच के लिए कॉमन सेवा केंद्र (सीएससी) के रूप में पैक्स:
पैक्स के माध्यम से बैंकिंग, बीमा, आधार नामांकन/अद्यतन, स्वास्थ्य सेवाएं, पैन कार्ड तथा आईआरसीटीसी/बस/हवाई टिकट, आदि जैसी 300 से भी अधिक ई-सेवाएं प्रदान करने के लिए उन्हें सक्षम बनाने हेतु सहकारिता मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, नाबार्ड तथा सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के बीच एक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया है। अब तक 55,514 पैक्स ने ग्रामीण जनता को कॉमन सेवा केंद्र की सेवाएं प्रदान करना शुरू कर दिया है I
- पैक्स द्वारा नए किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की स्थापना: 10,000 किसान उत्पादक संगठनों की स्थापना और संवर्धन की केंद्रीय क्षेत्रक योजना के अधीन कृषि और किसान कल्याण विभाग, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) को सहकारी सोसाइटी अधिनियम के अधीन किसान उत्पादक संगठनों की स्थापना और संवर्धन के लिए कार्यान्वयन एजेंसियों में से एक एजेंसी के रूप में नामोदिष्ट किया गया है । कृषि और किसान कल्याण विभाग द्वारा एनसीडीसी को 746 किसान उत्पादक संगठनों की स्थापना और संवर्धन का लक्ष्य सौंपा गया था तथा एनसीडीसी द्वारा सहकारी क्षेत्र में 746 किसान उत्पादक संगठनों का पंजीकरण किया गया । तत्पश्चात, इस योजना के अधीन पैक्स के सशक्तीकरण के माध्यम से सहकारी क्षेत्र में किसान उत्पादक संगठनों की स्थापना और संवर्धन के लिए सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार की पहल पर कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एनसीडीसी को किसान उत्पादक संगठनों की स्थापना के अतिरिक्त लक्ष्य सौंपे गए और उसे 1117 किसान उत्पादक संगठनों का लक्ष्य दिया गया और एनसीडीसी ने पैक्स के सदस्यों के माध्यम से 1117 किसान उत्पादक संगठनों को पंजीकृत/ऑनबोर्ड कर इस लक्ष्य को प्राप्त किया । यह किसानों को आवश्यक बाजार लिंकेज प्रदान करने और उनके उपज का उचित एवं लाभकारी मूल्य दिलाने में सहायक होगा ।
एनसीडीसी ने दिनांक 31.05.2026 तक इस योजना के अधीन किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ)/क्लस्टर-आधारित व्यावसायिक संगठनों (सीबीबीओ) को 320 करोड़ रुपये संवितरित किए हैं।
- खुदरा पेट्रोल/डीज़ल आउटलेट के लिए पैक्स को प्राथमिकता: सरकार ने पैक्स को खुदरा पेट्रोल/डीज़ल आउटलेट के आबंटन के लिए कंबाइंड कैटेगरी 2 (सीसी-2) में शामिल करने की अनुमति प्रदान कर दी है । तेल विपणन कंपनियों (ओएमसीज) से प्राप्त सूचना के अनुसार, 28 राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों के 394 पैक्स ने खुदरा पेट्रोल/डीजल आउटलेट्स के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है और 13 आउटलेट्स चालू कर दिए गए हैं।
- पैक्स को थोक उपभोक्ता पेट्रोल पंप को खुदरा आउटलेट में परिवर्तित करने हेतु अनुमति: मौजूदा थोक उपभोक्ता लाइसेंस प्राप्त पैक्स को तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा खुदरा आउटलेट में परिवर्तित होने के लिए एक बारगी विकल्प दिया गया है । तेल विपणन कंपनियों द्वारा साझा की गई सूचना के अनुसार 5 राज्यों के 115 थोक उपभोक्ता पेट्रोल पंप लाइसेंस प्राप्त पैक्स ने खुदरा आउटलेट में परिवर्तित होने की सहमति दी है जिसमें से 62 पैक्स को इस संबंध में तेल विपणन कंपनियों द्वारा चालू किया गया है ।
- पैक्स द्वारा अपने कार्यकलापों में विविधता लाने के लिए एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप की पात्रता: सरकार ने अब पैक्स को एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप हेतु आवेदन करने की अनुमति प्रदान कर दी है । इससे पैक्स को अपने आर्थिक कार्यकलाप को बढ़ाने और अपनी आय प्रवाह के विविधीकरण का एक विकल्प प्राप्त होगा।
- ग्रामीण स्तर पर जेनेरिक औषधियों तक सुगम पहुंच हेतु प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र के रूप में पैक्स: सरकार द्वारा पैक्स को प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र (पीएमबीजेके) के रूप में कार्य करने की अनुमति प्रदान की गई है, जिससे उन्हें आय के अतिरिक्त स्रोत प्राप्त होंगे और ग्रामीण जनता को गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक औषधियों तक सुगम पहुँच सुनिश्चित होगी । अब तक 4,275 पैक्स/सहकारी समितियों ने प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र के रूप में कार्य करने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है जिसमें से 4,255 पैक्स को फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) द्वारा प्रारंभिक मंजूरी दी गई है और 846 पैक्स को फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया से स्टोर कोड मिल गए हैं जिनमें से 645 पैक्स ने पीएम भारतीय जन औषधि केंद्रों के रूप में काम करना शुरू कर दिया है।
- प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (पीएमकेएसके) के रूप में पैक्स: देश में किसानों को उर्वरक और अन्य संबंधित सेवाओं की सुलभ पहुंच सुनिश्चित करने हेतु पैक्स को प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (पीएमकेएसके) के रुप में चलाने हेतु सक्षम किया गया है । राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों द्वारा साझा की गई सूचना के अनुसार, अब तक कुल 38,974 पैक्स पीएमकेएसके के रूप में कार्य कर रहे हैं।
- पैक्स द्वारा ग्रामीण नल जलापूर्ति योजनाओं (पीडब्ल्यूएस) का प्रचालन और रखरखाव (ओ एंड एम) कार्य: ग्रामीण क्षेत्रों में पैक्स को नल जलापूर्ति योजनाओं के प्रचालन व रख-रखाव (ओ एंड एम) कार्य करने के लिए पात्र बनाया गया है । राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों से प्राप्त सूचना के अनुसार, पंचायत/ग्राम स्तर पर प्रचालन व रख-रखाव (ओ एंड एम) सेवाएं प्रदान करने के लिए राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों द्वारा 1,480 पैक्स को चिह्नित/चयनित किया गया है, इनमें से 118 पैक्स ने कार्य करना शुरू कर दिया है।
- पैक्स के स्तर पर PM-KUSUM का अभिसरण: पैक्स से जुड़े किसान सौर कृषि जल पंप अपना सकते हैं और अपने खेतों में फोटोवोल्टेइक मॉड्यूल इंस्टॉल करा सकते हैं ।
- प्रधानमंत्री सूर्य घर– मुफ्त बिजली योजना (पीएमएसजी–एमबीवाई) का सहकारी समितियों के स्तर पर अभिसरण: इस पहल का उद्देश्य सहकारी समितियों की व्यापक जमीनी स्तर की उपस्थिति का लाभ उठाते हुए स्वच्छ और कम लागत वाली रूफटॉप सौर ऊर्जा को अपनाने की प्रक्रिया में तेजी लाना है। इस पहल के केंद्रित कार्यान्वयन के लिए 100 नगरों का चयन किया गया है ।
- डोर-स्टेप वित्तीय सेवाएं प्रदान करने के लिए बैंक मित्र सहकारी समितियों को माइक्रो-एटीएम: डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियों को जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) और राज्य सहकारी बैंकों (StCBs) का बैंक मित्र बनाया जा सकता है । उनके सुगम व्यवसाय, पारदर्शिता और वित्तीय समावेशिता सुनिश्चित करने के लिए नाबार्ड के सहयोग से इन बैंक मित्र सहकारी समितियों को ‘डोर-स्टेप वित्तीय सेवाएं” प्रदान करने के लिए माइक्रो-एटीएम दिए जा रहे हैं I इस पहल के सफल कार्यान्वयन के लिए दिनांक 19 सितंबर, 2024 को मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) लॉन्च की गई है I अब तक गुजरात राज्य में बैंक मित्र सहकारी समितियों को 10,060 नए माइक्रो-एटीएम वितरित किए जा चुके हैं।
- दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्यों को रुपे किसान क्रेडिट कार्ड: जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) और राज्य सहकारी बैंकों (StCBs) की पहुंच का विस्तार करने तथा डेयरी सहकारी समितियों के सदस्यों को आवश्यक लिक्विडिटी प्रदान करने और तुलनात्मक रूप से निम्नतर ब्याज दरों पर ऋण प्रदान करने तथा अन्य वित्तीय लेनदेनों में सक्षम बनाने हेतु सहकारी समितियों के सदस्यों को रुपे किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) का वितरण किया जा रहा है । इस पहल के सफल कार्यान्वयन के लिए दिनांक 19 सितंबर, 2024 को मानक प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) लॉन्च की गई है I गुजरात राज्य में अब तक 6.57 लाख नए रुपे किसान क्रेडिट कार्ड वितरित किए जा चुके हैं।
- मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) की स्थापना: मछुआरों को बाजार लिंकेज तथा प्रसंस्करण सुविधाएं प्रदान करने हेतु राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने प्रारंभिक चरण में 70 मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों का पंजीकरण किया है । इसके अतिरिक्त, मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार ने 1,000 मौजूदा मात्स्यिकी सहकारी समितियों को एफएफपीओ में बदलने का कार्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम को आबंटित किया है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम ने एफएफपीओ के रूप में सशक्त करने के लिए 1,000 प्राथमिक मात्स्यिकी सहकारी समितियों की पहचान की है, जिसके लिए 280.65 करोड़ रुपये का परिव्यय स्वीकृत किया गया है। सीबीबीओ द्वारा चयनित समितियों के लिए एक व्यावसायिक योजना तैयार की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत एनसीडीसी ने दिनांक 31 मई 2026 तक की स्थिति के अनुसार एफएफपीओ/सीबीबीओ को ₹130 करोड़ संवितरित किए हैं।
- श्वेत क्रांति 2.0: सहकारिता मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र के नेतृत्व में "श्वेत क्रांति 2.0" का मार्ग प्रशस्त करने के लिए एक पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य सहकारी कवरेज का विस्तार करना, रोजगार सृजन और महिला सशक्तीकरण है, जिसका लक्ष्य " अनाच्छादित क्षेत्रों में डेयरी किसानों को बाजार तक पहुंच प्रदान करके और संगठित क्षेत्र में डेयरी सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाकर, अगले पांच वर्षों में डेयरी सहकारी समितियों के दुग्ध प्रापण को वर्तमान स्तर (यानी आधार वर्ष 2023-24 में 660 एलकेजीपीडी) से 50% बढ़ाकर वर्ष 2028-29 में 1007 एलकेजीपीडी करना है”। माननीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री की उपस्थिति में दिनांक 19.09.2024 को माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा श्वेत क्रांति 2.0 की “मार्गदर्शिका” (एसओपी) लॉन्च की गई । माननीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री की उपस्थिति में दिनांक 25.12.2024 को माननीय गृह और सहकारिता मंत्री ने 6,600 नई स्थापित सहकारी डेयरी समितियों (डीसीएस) का उद्घाटन किया । अब तक 31 राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों में 25,282 सहकारी दुग्ध समितियां (डीसीएस) पंजीकृत की गईं हैं ।
- आत्मनिर्भरता अभियान: सहकारिता मंत्रालय ने आयात निर्भरता घटाने के लिए दलहन (तुअर, मसूर और उड़द) के उत्पादन को प्रोत्साहित करने और एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (ईबीपी) के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एथेनॉल के उत्पादन के लिए भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ मर्यादित (एनसीसीएफ) और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ मर्यादित (नेफेड) के माध्यम से मक्के के उत्पादन को प्रोत्साहित करने की पहल शुरू की है । दोनों संगठनों ने सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों के पंजीकरण के लिए क्रमशः अपने स्वयं के वेब पोर्टल, यानी ई-संयुक्ति और ई-समृद्धि विकसित किए हैं। दोनों ने तुअर, उड़द, मसूर और मक्का के पूर्व-पंजीकृत किसानों को उनकी उपज का 100% न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का आश्वासन दिया है। हालांकि, यदि बाजार मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक हो जाता है, तो किसान अपनी उपज खुले बाजार में बेचने के लिए स्वतंत्र हैं । एनसीसीएफ के ई-संयुक्ति पोर्टल पर कुल 44,09,590 किसान पहले ही पंजीकरण करा चुके हैं। इसी तरह 15,84,759 किसानों ने नेफेड के ई-समृद्धि पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया है।
- सहकारी बैंकों का सशक्तीकरण
- शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को व्यापार विस्तारण हेतु नई शाखाएं खोलने की अनुमति: शहरी सहकारी बैंक (यूसीबी) अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की पूर्वानुमति के बिना पिछले वित्तीय वर्ष में मौजूदा शाखाओं की संख्या का 15% (अधिकतम 10 शाखाएं) नई शाखाएँ खोल सकेंगे ।
- शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को आरबीआई द्वारा अपने ग्राहकों को डोर-स्टेप सेवाएं प्रदान करने की अनुमति: शहरी सहकारी बैंकों द्वारा अब डोर-स्टेप बैंकिंग सुविधा प्रदान की जा सकती है I इन बैंकों के खाताधारक अब अपने घर पर ही विभिन्न बैंकिंग सुविधाएं जैसे नकद निकासी, नकद जमा, केवाईसी, डिमांड ड्राफ्ट और पेंशनभोगियों के लिए जीवन प्रमाण पत्र, आदि का लाभ प्राप्त कर सकेंगे I
- शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को शामिल करने हेतु शेड्यूलिंग मानदंडों की अधिसूचना:
शहरी सहकारी बैंक जो व्यवसाय प्राधिकार की पात्रता शर्तों का अनुपालन करते हैं तथा पिछले दो वर्षों से टियर- 3 के रूप में वर्गीकरण हेतु आवश्यक न्यूनतम जमा राशि बरकरार रखे हुए हैं, अब भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम,1934 की अनुसूची-II में शामिल होने के लिए पात्र हैं एवं 'अनुसूचित' का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं ।
- शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के साथ नियमित संवाद हेतु आरबीआई में एक नोडल अधिकारी नामित: सहकारिता क्षेत्र की गहन समन्वय और केंद्रित संवाद हेतु काफी समय से लंबित मांग को पूरा करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने एक नोडल अधिकारी अधिसूचित किया है ।
- शहरी सहकारी बैंकों के लिए पीएसएल लक्ष्य को 75% से घटाकर 60% करने हेतु राहत: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) लक्ष्य को 75% के पूर्व स्तर से घटाकर 60% कर शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को राहत दी है । इस छूट से शहरी सहकारी बैंकों पर अनुपालन दबावों में कमी आई है और उन्हें अपने ऋण पोर्टफोलियों के प्रबंधन में अधिक प्रचालनात्मक लचीलेपन की प्राप्ति हुई है ।
- शहरी सहकारी बैंकों के लिए आवास ऋण सीमा 10% से बढ़ाकर 25% की गई: शहरी सहकारी बैंकों के सदस्यों के लिए आवास ऋण सीमा को उनकी कुल परिसंपत्ति का 10% से बढ़ाकर उनके ऋण एवं अग्रिम का 25% (3 करोड़ रुपये तक) कर दिया गया है
- महिला ऋण पुनर्भुगतान के लिए 2 लाख रुपये के लक्ष्य को हटाकर 12% (दुर्बल वर्ग) की उप-सीमा में राहत: दुर्बल वर्गों के लिए 12% की उप-सीमा के तहत महिला उधारकर्ताओं के लिए ₹2 लाख के लक्ष्य को हटाने से अब प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) का अनुपालन सरल हो गया है और शहरी सहकारी बैंकों को प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) के दायित्वों को पूरा करने में अधिक प्रचालन स्वतंत्रता की प्राप्ति हुई है I
- शहरी सहकारी संस्थानों को राहत देते हुए ऋण सीमा को 50% बढ़ाते हुए ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹3 करोड़ किया गया: शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लिए ऋण और अग्रिम की 50% सीमा के तहत ऋण और अग्रिम एक्सपोज़र सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹3 करोड़ (या टियर-I पूंजी का 0.4%, जो भी कम हो) कर दिया गया है, जो उन्हें व्यक्तिगत उधारकर्ताओं की उच्च ऋण मांगों को पूरा करने में मदद करता है, व्यावसायिक विकास का समर्थन करता है और रिटेल तथा एसएमई ऋण क्षेत्रों में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करता है ।
- स्वर्ण ऋण हेतु भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मौद्रिक सीमा हटाई गई: भारतीय रिजर्व बैंक ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए 2 लाख रुपये की मौद्रिक सीमा को हटाकर उन्हें वाणिज्यिक बैंकों के अनुरूप किया ।
- शहरी सहकारी बैंकों के लिए अंब्रेला संगठन: भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमोदन से शहरी सहकारी बैंक क्षेत्र के लिए एक अम्ब्रेला संगठन (यूओ) के रूप में नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव एंड क्रेडिट सोसाइटीज लि. (एनएएफसीयूबी) की स्थापना की गई जो लगभग 1,500 शहरी सहकारी बैंकों को आवश्यक आईटी अवसंरचना और प्रचालनात्मक सहयोग प्रदान कर रहा है । इसने डिजि लोन और डिजि पे जैसी विभिन्न सेवाएं लॉन्च की हैं ।
- भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रतिभूति प्राप्तियों के ग्लाइड पथ को वित्तीय वर्ष 2025-26 से वित्तीय वर्ष 2027-28 तक बढ़ाया गया: भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 24.02.2025 के परिपत्र के माध्यम से शहरी सहकारी बैंकों में पूंजी और तरलता के बेहतर प्रबंधन के लिए गैर-निष्पादित आस्तियों का परिसंपत्ति पुनर्गठन कंपनी के माध्यम से दो वर्ष का अतिरिक्त समय प्रदान किया है जिससे ये बैंक संकटग्रस्त परिसंपत्तियों के नुकसान को कम कर सकें ।
- सहकारी बैंकों को वाणिज्यिक बैंकों की तरह बकाया ऋणों का वन टाइम सेटलमेंट करने की अनुमति: सहकारी बैंक अब बोर्ड-अनुमोदित नीतियों के माध्यम से तकनीकी राइट-ऑफ करने सहित उधारकर्ताओं के साथ निपटान की प्रक्रिया भी प्रदान कर सकेंगे ।
- उच्चतर आवास ऋण सीमाएं: भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए व्यक्तिगत आवासन ऋण की सीमा को ढाई गुना बढ़ाकर ₹75 लाख कर दिया है और उन्हें अपनी कुल जोखिम सीमा के 5% तक वाणिज्यिक रियल एस्टेट /आवासीय आवास (सीआरईआरएच) क्षेत्र को ऋण देने में सक्षम बनाया है।
- सहकारी बैंकों में 'आधार सक्षम भुगतान प्रणाली' (AePS) के लिए लाइसेंस शुल्क घटाया गया: सहकारी बैंकों को 'आधार सक्षम भुगतान प्रणाली' (AePS) में ऑनबोर्ड करने के लाइसेंस शुल्क को लेनदेन की संख्या से लिंक करके घटा दिया गया है । सहकारी वित्तीय संस्थानों को उत्पादन-पूर्व चरण में अब यह सुविधा पहले तीन महीनों तक निःशुल्क प्राप्त होगी । इससे ऑनबोर्ड हुए बैंकों के सदस्यों को बायोमीट्रिक्स के माध्यम से अपने घर पर ही बैंकिंग की सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी ।
- भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने दिनांक 01.08.2025 को आधार समर्थित भुगतान प्रणाली (AePS) में सहकारी समितियों को ऑनबोर्ड होने के लिए एक नई संरचना की शुरूआत की है। अब, केवल एसटीसीबी को प्रमाणीकरण उपयोगकर्ता एजेंसियों (एयूए)/ईकेवाईसी उपयोगकर्ता एजेंसियों (केयूए) के रूप में शामिल होने की आवश्यकता है; डीसीसीबी को राज्य सहकारी बैंक के माध्यम से उप एयूए/केयूए के रूप में इसका नि:शुल्क उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी।
- ऋण प्रदाय में सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए गैर-अनुसूचित शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी), राज्य सहकारी बैंकों (StCBs) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) को सीजीटीएमएसई योजना में सदस्य ऋण संस्थान (एमएलआई) के रूप में अधिसूचित किया गया: सहकारी बैंक अब दिए गए ऋणों पर 85 प्रतिशत तक जोखिम कवरेज का लाभ उठा सकेंगे । सहकारी क्षेत्र के उद्यमों को भी अब सहकारी बैंकों से समपार्श्विक- मुक्त (कोलेटरल-फ्री) ऋण मिल सकेगा । योजना के अधीन सदस्य ऋण संस्थानों (एमएलआई) के रूप में सहकारी बैंकों के पंजीकरण के लिए सीजीटीएमएसई ने 5% सकल एनपीए या उससे कम को 7% सकल एनपीए या उससे कम पर युक्तिसंगत किया है ।
- सहकारी बैंकों के निदेशक मंडल के कार्यकाल को उसके गठन के अनुरूप (अधिकतम 10 लगातार वर्ष) करने के लिये बैंककारी विनियमन अधिनियम में संशोधन किया गया है ।
- प्राथमिकता क्षेत्र दिशानिर्देशों के तहत कृषि सहकारी समितियों (डेयरी) के लिए ऋण सीमा ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ की गई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने दिनांक 24.03.2025 के मास्टर निदेश द्वारा कृषि सहकारी समितियों (डेयरी) के लिए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण की सीमा को ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दिया है । यह कदम बैंकों को कृषि सहकारी समितियों (डेयरी) को अपने सदस्यों के उत्पादन की खरीद करने में अधिक ऋण सहायता प्रदान करने में सक्षम बनाता है I
- सहकार सारथी (साझा सेवा निकाय): ग्रामीण सहकारी बैंकों को प्रौद्योगिकीय सेवाएं प्रदान करने और उनके सशक्तीकरण के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमोदन के बाद सहकार सारथी (साझा सेवा निकाय) प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की गई है। इसने ग्रामीण सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए 15 सेवाएं लॉन्च की हैं ।
- भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 07.10.2025 की अपनी अधिसूचना के माध्यम से ग्रामीण सहकारी बैंकों को अपने एकीकृत ऑम्बड्समैन योजना में शामिल किया है । इससे ग्रामीण सहकारी बैंकों के कार्यों में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी ।
- भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 04.12 2025 के मास्टर निदेश द्वारा राज्य सहकारी बैंकों (StCBs) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) को स्वचालित माध्यम से नई शाखाएं (अधिकतम 10) खोलने की अनुमति प्रदान कर दी है । पात्रता के अध्यधीन राज्य सहकारी बैंक और जिला केंद्रीय सहकारी बैंक अब बिना विलंब के अपनी नई शाखाएं खोल सकेंगे और अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकेंगे ।
- भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 28.11.2025 के मास्टर निदेश द्वारा ग्रामीण और शहरी सहकारी बैंकों को आधुनिक बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए वित्तीय मानदंडों में शिथिलता प्रदान की है । सकल एनपीए का 7% से कम होना और शुद्ध एनपीए का 3% से अधिक न होने एवं शुद्ध लाभ की शर्तों की पूर्वापेक्षाओं को हटा दिया गया है । अब सहकारी बैंक अपने ग्राहकों को आसानी से आधुनिक बैंकिंग सेवाएं प्रदान कर सकेंगे ।
- भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 04.12 2025 के मास्टर निदेश द्वारा व्यवसाय प्राधिकार के लिए पात्रता शर्तें मानदंड (ईसीबीए) जारी किया है जो पूर्व के वित्तीय सुदृढ़ और सुप्रबंधित (एफएसडब्ल्यूएम) प्रावधानों को अधिक्रांत करेंगे । इन मानदंडों से विगत दो वर्षों में कोई शास्ति के न होने से संबंधित उपबंध को हटा दिया गया है । अब सहकारी बैंक आसानी से नई शाखाएं खोल सकेंगे और अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकेंगे ।
- भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 07.01.2026 के पत्र के माध्यम से बैंककारी विनियमन अधिनियम की धारा 20 के संदर्भ में स्पष्टीकरण जारी किया है जिसके कारण ग्रामीण सहकारी बैंकों के निदेशकगण और उनसे संबंधित सहकारी समितियां, विनिर्दिष्ट शर्तों के अध्यधीन अपने संबंधित राज्य सहकारी बैंकों और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों से ऋण लेने के लिए अब पात्र हो गए हैं ।
- भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 19.01.2026 की अधिसूचना के माध्यम से पीएसएल फ्रेमवर्क के ऑन-लेंडिंग प्रावधानों के अधीन राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) को पात्र संस्था के रूप में शामिल किया है । अब बैंकों द्वारा एनसीडीसी को कृषि, आवासन, सामाजिक अवंसरचना, इत्यादि के लिए आगे सहकारी समितियों को ऑन-लेंडिंग हेतु दिया गया ऋण पीएसएल की श्रेणी के अधीन आएगा।
- भारतीय रिजर्व बैंक ने एनयूसीएफडीसी को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 42(2) के तहत एक वित्तीय वर्ष के दौरान चुकता पूंजी के लिए 200 अंशदाताओं की सीमा से छूट प्रदान की है।
- भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए बीमा वितरण हेतु कॉर्पोरेट एजेंट बनने के लिए ₹50 करोड़ की नेटवर्थ की शर्त को हटा दिया है ।
- भारतीय रिजर्व बैंक ने अब आरसीएस के साथ समझौता ज्ञापन के संदर्भ की शर्तों को संशोधित करके यूसीबी के लिए टीएएफसीयूबी को सशक्त किया है। इससे कमजोर यूसीबी के पुनरुद्धार, उनके विलय और क्षमता निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा ।
- भारतीय रिजर्व बैंक ने इफको जैसे निर्दिष्ट उधारकर्ताओं को बैंकों से अपनी कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं के 50% से अधिक (अतिरिक्त निधियां) उधार लेने के लिए छूट प्रदान की है।
- कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में सचिवों की समिति ने भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत भागीदार संस्थानों के रूप में सहकारी बैंकों को शामिल करने की सिफारिश की है। विभिन्न मंत्रालयों/विभागों, जैसे पशुपालन और डेयरी विभाग ने भी सहकारी बैंकों को शामिल करने के लिए अपनी योजना के दिशानिर्देशों में संशोधन किया है।
- बीमा व्यवसाय शुरू करने के लिए सहकारी बैंकों को कॉर्पोरेट एजेंट के रूप में ऑनबोर्ड करने के उद्देश्य से, सहकारिता मंत्रालय ने सभी राज्यों/ संघ राज्यक्षेत्रों और सहकारी बैंकों से इफको की संयुक्त उद्यम कंपनी के साथ कॉर्पोरेट एजेंट के रूप में जुड़ने का अनुरोध किया है।
- साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम तथा तत्काल रिपोर्टिंग एवं कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सहकारिता मंत्रालय ने सभी राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों और सहकारी बैंकों से I4C और एनसीआरपी पोर्टलों पर ऑनबोर्ड होने का अनुरोध किया है । 1200 से अधिक सहकारी बैंक I4C पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं ।
- राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 के अधिदेश के अनुसरण में नाबार्ड के अधीन एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है जो नीति निर्माण के लिए आवश्यक इनपुट्स प्रदान करेगा और ग्रामीण सहकारी बैंकिंग क्षेत्र द्वारा सामना की जा रही समस्याओं और चुनौतियों का समाधान करेगा ।
- मंत्रालय ने NAFCUB के अधीन 'शहरी सहकारी बैंकों और सहकारी साख समितियों के रूपांतरण’ पर एक टास्क फोर्स का गठन किया है। इस कार्य बल ने तीन रिपोर्ट सौंप दी हैं।
- मंत्रालय के अनुरोध पर, नाबार्ड ने कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (एआरडीबी) में सुधारों, पुनर्गठन और नवाचार पर एक रिपोर्ट सौंपी है ।
- मंत्रालय ने नेशनल कोऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक्स फेडरेशन लिमिटेड (एनएएफसीआरडी) के लिए इरमा के माध्यम से एक विस्तृत अध्ययन पूरा कर लिया है, जिसके परिणामस्वरूप एक स्वीकृत कार्य योजना तैयार हुई है जो ऋण विस्तार का मार्गदर्शन करती है, गैर-कृषि क्षेत्र के कार्यकलापों को बढ़ावा देती है और सहकारी शासन को सशक्त करती है ।
- मंत्रालय ने अमृत काल (2022-2047) में एनएएफएससीओबी की भूमिका को और बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक अध्ययन पूरा कर लिया है। इसमें सहकारी क्रेडिट, डिजिटल एकीकरण, वित्तीय सेवाओं के विविधीकरण और संस्थागत सुदृढ़ीकरण के सुधारों की रूपरेखा दी गई है। सुशासन, राज्य-स्तरीय क्षमता निर्माण और समावेशी आउटरीच पर जोर देने के साथ, यह रोडमैप एनएएफएससीओबी को सहकारी बैंकिंग का नेतृत्व करने और पूरे भारत में सतत ग्रामीण विकास को गति देने के लिए तैयार करता है ।
ग. सहकारी समितियों को आयकर अधिनियम में राहत
- एक करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक की आय वाली सहकारी समितियों के आयकर पर अधिभार को 12% से घटाकर 7% कर दिया गया है: ₹1 करोड़ से ₹10 करोड़ तक की आय वाली सहकारी समितियों के लिए अधिभार (Surcharge) की दर 12% से घटाकर 7% कर दी गई है । इससे सहकारी समितियों पर आयकर का बोझ कम होगा तथा उनके पास अपने सदस्यों के हित में कार्य करने के लिए अधिक पूंजी उपलब्ध होगी ।
- सहकारी समितियों के न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) को 18.5% से घटाकर 15% किया गया: सहकारी समितियों के लिए न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) की दर 18.5% से घटाकर 15% कर दी गई है । इस प्रावधान से अब इस संबंध में सहकारी समितियों और कंपनियों के बीच समरूपता हो गई है ।
- आयकर अधिनियम की धारा 269ST के अधीन नकद लेनदेन में राहत: आयकरअधिनियम की धारा 269ST के अधीन सहकारी समतियों द्वारा नकद लेनदेन में हो रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए सरकार ने एक स्पष्टीकरण जारी कर यह स्पष्ट किया है कि किसी सहकारी समिति द्वारा अपने वितरक के साथ किसी एक दिन में किए गए 2 लाख रुपये से कम के नकद लेनदेन को पृथक माना जाएगा और उस पर आयकर जुर्माना नहीं लगाया जाएगा ।
- नई विनिर्माण सहकारी समितियों के लिए कर में कटौती: दिनांक 31 मार्च, 2024 तक विनिर्माण कार्य शुरू करने वाली नई सहकारी समितियों पर, पूर्व में लागू 30% तक की कर दर तथा अधिभार के स्थान पर, 15% की एक समान (फ्लैट) निम्न कर दर लागू की जाएगी । इससे विनिर्माण क्षेत्र में नई सहकारी समितियों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा ।
- प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्स) और प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (PCARDBs) द्वारा नकद जमा राशि एवं भुगतान की सीमा में वृद्धि: प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) तथा प्राथमिक सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों (PCARDBs) के लिए नकद जमा एवं भुगतान की सीमा प्रति सदस्य ₹20,000 से बढ़ाकर ₹2 लाख कर दी गई है। इससे उनके कार्यकलापों को सुगमता मिलेगी, उनके व्यवसाय में वृद्धि होगी तथा उनकी समितियों के सदस्यों को लाभ मिलेगा ।
- प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्स) और प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (PCARDBs) द्वारा नकद ऋण की सीमा और नकद ऋण चुकौती की सीमा में वृद्धि:
प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) तथा प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (PCARDBs) के लिए नकद में ऋण की सीमा और नकद ऋण चुकौती की सीमा को प्रति सदस्य ₹20,000 से बढ़ाकर ₹2 लाख कर दी गई है । इससे उनके प्रचालन संबंधी कठिनाइयों तथा अनुपालन (Compliance) के बोझ में कमी आएगी ।
- नकद निकासी पर स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) की सीमा में वृद्धि: सहकारी समितियों के लिए स्रोत पर कर कटौती (TDS) के बिना नकद निकासी की सीमा ₹1 करोड़ प्रति वर्ष से बढ़ाकर ₹3 करोड़ प्रति वर्ष कर दी गई है । इससे सहकारी समितियों के नकदी प्रवाह में वृद्धि होगी ।
- करदाताओं को वस्तुओं की खरीद के संबंध में निम्न या शून्य स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) प्रमाणपत्र प्राप्त करने में सक्षम करना: आयकर उपबंधों के अधीन, वस्तुओं की खरीद के लिए किए गए भुगतानों पर भुगतानकर्ता (Payer) को स्रोत पर कर कटौती (TDS) करना आवश्यक होता है । दिनांक 01.04.2025 से प्राप्तकर्ता (Payee) को निम्न/शून्य कर कटौती प्रमाणपत्र (Low/Nil Deduction Certificate) प्राप्त करने का विकल्प प्रदान किया गया है । इससे वस्तुओं की खरीद के लिए किए गए भुगतानों पर टीडीएस संबंधी अनुपालन (Compliance) का बोझ कम होगा ।
- धारा 206C(1H) के अधीन वस्तुओं के विक्रय पर टीसीएस को अप्रभावी बनाया गया: वस्तुओं के विक्रय पर टीसीएस एकत्र करने की आवश्यकता दिनांक 1 अप्रैल 2025 से हटा लिया गया है ।
- प्राथमिक सहकारी समितियों को अपने सदस्यों द्वारा उत्पादित पशु चारा और कपास के बीजों की आपूर्ति पर कटौती की अनुमति: वर्तमान में उन सहकारी समितियों को, जो अपने सदस्यों द्वारा उगाए गए या उत्पादित दूध, तिलहन, फल अथवा सब्जियों की आपूर्ति किसी संघीय सहकारी समिति तथा ऐसे समान कार्यकलाप से जुड़े अन्य संस्थाओं को करती हैं, उनके लाभ एवं आय पर कटौती की अनुमति प्रदान की जाती है । यह कटौती अब उनके सदस्यों द्वारा उत्पादित पशु आहार तथा कपास के बीज की आपूर्ति पर भी प्रदान की गई है । सदस्यों द्वारा उत्पादित पशु आहार तथा कपास के बीज की आपूर्ति से प्राप्त लाभ पर कटौती प्रदान करने से प्राथमिक सहकारी समितियों को अपने कार्यकलापों का विविधीकरण करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा । इससे जमीनी स्तर पर मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा, किसान-सदस्यों की निविष्टि लागत में कमी आएगी तथा उनकी शुद्ध आय में वृद्धि और उन्हें बेहतर आजीविका सुरक्षा प्राप्त होगी ।
- नई कर व्यवस्था के अधीन अंतर-सहकारी समिति लाभांश में सदस्यों का आगे वितरित किए जाने की सीमा तक कटौती की अनुमति: पुरानी कर व्यवस्था के अंतर्गत एक सहकारी समिति को किसी अन्य सहकारी समिति से प्राप्त लाभांश पर कटौती की अनुमति थी। इसी प्रकार, नई कर व्यवस्था के अंतर्गत भी यह कटौती उस सीमा तक अनुमन्य की गई है, जिस सीमा तक लाभांश को आगे सदस्यों को वितरित किया जाता है । यह राहत सहकारी संरचना में दोहरे कराधान से बचाव करेगी ।
- दिनांक 31.01.2026 तक निवेश करने के संबंध में अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी परिसंघों द्वारा प्राप्त लाभांश में सदस्यों को आगे वितरित किए जाने की सीमा तक तीन वर्षों की अवधि के लिए कटौती: दिनांक 31.01.2026 तक किए गए निवेशों पर अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी परिसंघों को प्राप्त लाभांश पर, उसे आगे सदस्यों में वितरित किए जाने की सीमा तक, वर्ष 2028-29 तक तीन वर्षों की अवधि के लिए कटौती की अनुमति प्रदान की गई है । यह राहत सहकारी संरचना के भीतर दोहरे कराधान को रोकने में सहायक होगी ।
- बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 के अधीन पंजीकृत सहकारी समितियों को “सहकारी समिति” की परिभाषा में शामिल किया जाना: "बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002" के अधीन पंजीकृत सहकारी समितियों को अधिनियम में "सहकारी समिति" की परिभाषा के अंतर्गत स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है । इससे ऐसी सहकारी समितियां सुचारू रूप से कर लाभ और प्रोत्साहन प्राप्त कर सकेंगी, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न क्षेत्रों में प्रचालनरत बहुराज्य सहकारी समितियों का सशक्तीकरण होगा ।
घ. सहकारी चीनी मिलों का पुनरुद्धार
- सहकारी चीनी मिलों को आयकर से राहत: सरकार ने एक स्पष्टीकरण जारी कर यह स्पष्ट किया है कि सहकारी चीनी मिलों को अप्रैल, 2016 से गन्ना किसानों को गन्ने के उच्च्तर मूल्य का भुगतान करने पर उचित एवं लाभकारी मूल्य या राज्य सलाह मूल्य तक कोई अतिरिक्त कर नहीं देना पड़ेगा।
- सहकारी चीनी मिलों के आयकर से संबंधित दशकों पुरानी लंबित मुद्दों का समाधान: सरकार ने अपने केंद्रीय बजट 2023-24 में यह प्रावधान किया है कि सहकारी चीनी समितियों को आकलन वर्ष 2016-17 से पूर्व की अवधि में गन्ना किसानों को किए गए भुगतानों को व्यय के रूप में दावा करने की अनुमति होगी जिससे उन्हें 46,000 करोड़ रुपये से भी अधिक की राहत मिलेगी।
- सहकारी चीनी मिलों के सशक्तीकरण के लिए 10,000 करोड़ रुपये की ऋण योजना: सरकार ने एथेनॉल संयंत्र या कोजेनरेशन संयंत्र स्थापित करने या कार्यशील पूंजी के लिए या फिर तीनों प्रयोजनों के लिए एनसीडीसी के माध्यम से एक योजना आरंभ की है । मंत्रालय ने इस योजना के अधीन एनसीडीसी को 1000 करोड़ रुपये (वित्तीय वर्ष 2022-23 में 500 करोड़ रुपये और वित्तीय वर्ष 2024-25 में 500 करोड़ रुपये) जारी किए और एनसीडीसी ने 56 सहकारी चीनी मिलों को 10,005 करोड़ रुपये के ऋण संवितरित किए हैं ।
- एथेनॉल की खरीद में सहकारी चीनी मिलों को प्राथमिकता: भारत सरकार द्वारा एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम (ईबीपी) के अधीन एथेनॉल की खरीद में सहकारी चीनी मिलों को अब निजी कंपनियों के समरूप रखा गया है ।
- शीरा आधारित एथेनॉल संयंत्रों को मल्टी-फीड एथेनॉल संयंत्रों मे परिवर्तित करके सहकारी चीनी मिलों को सशक्त करना: सहकारिता मंत्रालय ने नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ लि. (NFCSFL) के परामर्श से सहकारी चीनी मिलों (CSMs) के मौजूदा शीरा आधारित एथेनॉल संयंत्रों को मल्टी-फीड एथेनॉल संयंत्रों में परिवर्तित करने की पहल की है । सहकारी चीनी मिलें एथेनॉल उत्पादन संयंत्र स्थापित करके शीरा और शुगर सिरप से भी एथेनॉल का उत्पादन करती हैं । तथापि, एथेनॉल के उत्पादन के लिए कच्चे माल, अर्थात शीरा और शुगर सिरप की उपलब्धता कई कारणों से सीमित हैं, जैसे शुगर सिरप के डायवर्जन पर सरकारी नीति, एथेनॉल के उत्पादन के लिए B-heavy शीरा और गन्ना पेराई मौसम की अवधि तथा वर्षा पर निर्भर गन्ने की उपलब्धता, आदि। सीमित करने वाले इन कारकों के चलते एथेनॉल संयंत्र वाली सहकारी चीनी मिलें पूरे वर्ष अपनी पूर्ण क्षमता से कार्य नहीं कर पाती हैं । भारत सरकार ने एथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का को प्राथमिकता दी है, इसलिए यह सहकारी चीनी मिलों के लिए उचित है कि वे अपने मौजूदा एथेनॉल उत्पादन संयंत्रों को मल्टी-फीड एथेनॉल उत्पादन संयंत्रों में बदलें जिससे वे मक्का को कच्चे माल के रूप में उपयोग करके एथेनॉल का उत्पादन कर सकें । जहां एनसीडीसी ने इस उद्देश्य हेतु ऋण प्रदान करने पर सहमति दी है वहीं खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) ने विशेष रूप से सहकारी चीनी मिलों के लिए उनके ऋण पर 6% प्रति वर्ष या वास्तविक ब्याज का 50%, जो भी कम हो, की दर से 5 वर्षों की अवधि के लिए ब्याज अनुदान प्रदान करने की एक योजना शुरू की है । इसके अतिरिक्त, तेल विपणन कंपनियां (OMCs) सहकारी चीनी मिलों को पहली प्राथमिकता देंगे जो एथेनॉल प्रापण में ब्याज अनुदान योजना से लाभान्वित होंगी और एकल फीडस्टॉक से बहु-फीडस्टॉक की ओर रूपांतरित हो सकेंगी ।
- शीरा पर जीएसटी को 28% से घटाकर 5% किया गया: सरकार ने शीरा पर जीएसटी को 28% से घटाकर 5% करने का निर्णय लिया है जिससे सहकारी चीनी मिलें डिस्टिलरियों को उच्चतर दरों पर शीरा की बिक्री करके अपने सदस्यों के लिए अधिक लाभ अर्जित कर सकेंगे ।
- बंद सहकारी चीनी मिलों का पुनरुद्धार: गुजरात के तलाला, कोडिनार और वलसाड स्थित 3 बंद सहकारी चीनी मिलों के पुनरुद्धार एवं आधुनिकीकरण के लिए इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) ने लगभग ₹305 करोड़ का निवेश किया है तथा इन मिलों में पुनः कार्य शुरू करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है । इंडियन पोटाश लिमिटेड ने इन मिलों पर स्थानीय सहकारी बैंकों के लगभग ₹300 करोड़ के बकाया ऋण का भुगतान किया जिसके फलस्वरूप राज्य एवं जिला स्तर के सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई । इसके अतिरिक्त कर्मचारियों, विक्रेताओं, किसानों और सांविधिक निकायों के ₹40.09 करोड़ के लंबित बकायों का भी निपटान किया गया । गन्ना क्षेत्र के विस्तार तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिए उन्नत गन्ना किस्मों को बढ़ावा दिया गया जिससे हजारों किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था लाभान्वित हुए । गुजरात में इस मॉडल की सफलता के बाद, ओडिशा की बडंबा सहकारी चीनी मिल के पुनरुद्धार हेतु इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) और ओडिशा सरकार के बीच लगभग ₹360 करोड़ के अनुमानित निवेश के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं ।.
- तीन नई राष्ट्र-स्तरीय बहुराज्य सहकारी समितियां
- प्रमाणित बीजों हेतु नई राष्ट्रीय बहु-राज्य सहकारी बीज समिति: सरकार ने बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 के अधीन भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) नामक एक नई शीर्ष बहुराज्य सहकारी बीज समिति लिमिटेड की स्थापना की है जो एक अम्ब्रेला संगठन के रूप में कार्य करते हुए विभिन्न मंत्रालयों की योजनाओं एवं नीतियों का लाभ उठाकर पैक्स के माध्यम से बीजों की दोनों पीढ़ियों, अर्थात् बुनियादी और प्रमाणित बीजों के उत्पादन, परीक्षण, प्रमाणीकरण, प्रापण, प्रसंस्करण, भंडारण, ब्रांडिंग, लेबलिंग और पैकेजिंग पर विशेष ध्यान केंद्रित करेगी । BBSSL ने 19,407 किसानों की भागीदारी से 16,877 हेक्टेयर क्षेत्र में 15 फसलों के लिए 6,07,620 क्विंटल उन्नत बीजों का उत्पादन किया है । “भारत बीज” ब्रांड के अंतर्गत, BBSSL ने विभिन्न फसल किस्मों के 3,18,572 क्विंटल उन्नत बीजों का वितरण किया है । समिति ने बीज उत्पादन, विपणन तथा संबद्ध कार्यकलापों के प्रचालन के लिए 17 राज्यों में बीज लाइसेंस प्राप्त किए हैं ।
वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान, BBSSL ने आठ रणनीतिक समझौता ज्ञापन (MoUs) एवं सहयोग व्यवस्थाएं में प्रवेश किया, जिनमें बीज क्षेत्र के अनुसंधान और विकास हेतु ICRISAT, सहकारिता-आधारित बीज आलू इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने हेतु बनस डेयरी, पारंपरिक और स्वदेशी बीज किस्मों के संरक्षण, शुद्धीकरण, संवर्धन एवं प्रोत्साहन हेतु SSIAST तथा IRDF, संकर मक्का उत्पादन हेतु IARI–IIMaizeR, महिला किसान सशक्तीकरण हेतु FDRVC, तथा सहकारी और संस्थागत नेटवर्कों के माध्यम से बीज उत्पादन, विपणन एवं वितरण हेतु NSCL और NAFED के साथ समझौता ज्ञापन और सहयोग व्यवस्था शामिल हैं । BBSSL देश में सर्वाधिक सदस्यता वाली सहकारी समिति के रूप में भी उभरी है जिसमें वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान 37,206 सदस्य सहकारी समितियाँ थीं, जो अभी बढ़कर 38,665 हो गई है ।
- जैविक खेती हेतु नई राष्ट्रीय बहु-राज्यीय सहकारी जैविक समिति: सरकार ने बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 के अधीन राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) नामक एक नई शीर्ष बहुराज्य सहकारी ऑर्गेनिक समिति की स्थापना की है जो एक अम्ब्रेला संगठन के रूप में कार्य करते हुए अपने सदस्य सहकारी समितियों, जिनमें पैक्स (PACS) और एफपीओ (FPOs) शामिल हैं, के माध्यम से जैविक उत्पादों के एकत्रीकरण, प्रमाणीकरण, परीक्षण, प्रापण, भंडारण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, लेबलिंग, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक सुविधाओं तथा विपणन के लिए संस्थागत सहायता प्रदान करती है । साथ ही, यह जैविक किसानों के लिए वित्तीय सहायता की व्यवस्था करने तथा जैविक उत्पादों के प्रचार एवं विकासात्मक गतिविधियों को भी सुगम बनाती है। अब तक 14,286 पैक्स/सहकारी समितियाँ NCOL की सदस्य बन चुकी हैं । NCOL ने अपने उत्पादों को “भारत ऑर्गेनिक्स” ब्रांड नाम के अंतर्गत लॉन्च किया है तथा अब तक 29 जैविक उत्पाद (अरहर दाल, भूरा चना, चना दाल, काबुली चना, मसूर मलका, मसूर टूटा, मसूर साबुत, मूंग धुली, मूंग टूटा, मूंग साबुत, राजमा चित्रा, उड़द दाल, उड़द दाल गोटा (सफेद), उड़द दाल टूटा, उड़द दाल साबुत, आटा, गुड़ क्यूब, गुड़ पाउडर, ब्राउन शुगर, खांडसारी शुगर, बेसन, एप्पल साइडर विनेगर, काजू, अखरोट गिरी, कश्मीरी बादाम मामरा, पारंपरिक ब्राउन बासमती चावल, पारंपरिक सफेद बासमती चावल, मर्तबान में गुड़ क्यूब तथा भारत ऑर्गेनिक्स A2 देसी गाय का घी) दिल्ली-एनसीआर एवं बेंगलुरु में उपलब्ध हैं ।
भारत ऑर्गेनिक्स के उत्पादों का मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में 245 से अधिक कीटनाशकों के लिए 100 प्रतिशत बैच परीक्षण किया जाता है । उपभोक्ताओं तक पहुँच को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए, NCOL ने डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) पोर्टल एवं मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया है, जिसके माध्यम से देशभर के 20,000 से अधिक पिनकोड क्षेत्रों में उत्पादों की डिलीवरी संभव हुई है । NCOL ने अपने उत्पादों को Zepto, Blinkit, Swiggy, BigBasket तथा Amazon जैसे प्रमुख डिजिटल एवं क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों पर भी सफलतापूर्वक उपलब्ध कराया है, जिससे उच्च-विकास वाले उपभोक्ता वर्गों तक पहुँच सुनिश्चित हुई है ।
- निर्यात को बढ़ावा देने हेतु नई राष्ट्रीय बहुराज्य सहकारी निर्यात समिति: सरकार ने बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 के अधीन एक नई शीर्ष बहुराज्य सहकारी निर्यात समिति, अर्थात् राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL) की स्थापना एक अम्ब्रेला संगठन के रूप में की है जो भारतीय सहकारी क्षेत्र में उपलब्ध अधिशेष उत्पादों एवं सेवाओं का देश की भौगोलिक सीमाओं से परे व्यापक बाजारों तक पहुंच बनाकर निर्यात करने पर अपना ध्यान केंद्रित करेगा, जिससे वैश्विक स्तर पर भारतीय सहकारी उत्पादों/सेवाओं की मांग बढ़े तथा इनके लिए सर्वोत्तम संभव मूल्य प्राप्त हो सके । यह प्रापण, भंडारण, प्रसंस्करण, विपणन, ब्रांडिंग, लेबलिंग, पैकेजिंग, प्रमाणीकरण, अनुसंधान और विकास, आदि सहित विभिन्न कार्यकलापों तथा सहकारी समितियों द्वारा उत्पादित सभी प्रकार की वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार के माध्यम से निर्यात को प्रोत्साहित करेगी । अब तक 16,408 पैक्स/सहकारी समितियां NCEL की सदस्य बन चुकी हैं । NCEL द्वारा अब तक 38 देशों को चावल, गेहूं, मक्का, चीनी, प्याज, जीरा आदि 54 कृषि जिंसों का लगभग 15.40 लाख मीट्रिक टन निर्यात किया गया है, जिसका कुल मूल्य 6,341 करोड़ रुपये है । वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान NCEL द्वारा अपनी सदस्य सहकारी समितियों को 20% लाभांश प्रदान किया गया है ।
- बीज अनुसंधान केंद्र (BAK) की स्थापना: माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने दिनांक 6 अप्रैल 2025 को कलोल, गुजरात में एक अत्याधुनिक बीज अनुसंधान केंद्र की आधारशिला रखी । यह "बीज अनुसंधान केंद्र" किसानों की आर्थिक समृद्धि को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में नवाचार और समावेशी विकास को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करेगा । इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT), इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको), और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) ने दिनांक 3 जून 2025 को इस केंद्र की स्थापना के लिए एक त्रिपक्षीय सेवा समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए हैं
- केले के लिए टिश्यू कल्चर सुविधाएं स्थापित करने की पहल: केले की वर्षभर उपलब्धता, किफायत, स्वाद, पोषण मूल्य और औषधीय गुणों के कारण इसकी देश और विदेश, दोनों में उच्च मांग है और इसके निर्यात की भी अपार संभावनाएं हैं । भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) ने आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश राज्यों में केले के लिए टिश्यू कल्चर सुविधा (TCF) स्थापित करने का निर्णय लिया है । इन सुविधाओं के माध्यम से, बीबीएसएसएल ‘true to the type’ मातृ पौधों का अनुरक्षण करेगा, टिश्यू कल्चर से तैयार केले के पौधे/रोपण सामग्री का उत्पादन करेगा, और किसानों को 100% रोगमुक्त पौधे/रोपण सामग्री वितरित करेगा । इससे किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और उनकी आय में संधारणीय वृद्धि होगी ।
- आलू के लिए टिश्यू कल्चर सुविधाएं स्थापित करने की पहल: भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेडऔर बनस डेयरी के बीच गुजरात और उत्तर प्रदेश में आलू के टिश्यू कल्चर को प्रोत्साहित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं ।
- पारंपरिक प्राकृतिक बीजों के संरक्षण और संवर्धन की पहल: रसायन-मुक्त भारतीय पारंपरिक प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों की बढ़ती रुचि के चलते पारंपरिक प्राकृतिक बीजों की मांग में संभावित रूप से वृद्धि होगी । अतः, इन बीजों के संरक्षण, पुनरुत्पादन और संवर्धन के लिए समन्वित प्रयास की आवश्यकता है । "भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL)" ने खाद्यान्न, सब्जियों, फलों, आदि के बीजों तक सीमित न रहते हुए देशी पौधों की किस्मों के प्राकृतिक बीजों की पहचान करने और उनके संरक्षण, संवर्धन, प्रजनन, उत्पादन, वितरण, प्रोत्साहन तथा इससे संबंधित सभी प्रकार के कार्यकलापों के लिए एक प्रणाली विकसित करने की पहल की है । प्राकृतिक स्वदेशी बीजों के प्रोत्साहन के क्षेत्र में कार्यरत राज्य सरकारों एवं तकनीकी संस्थानों से अनुरोध किया गया है कि वे इस महत्वपूर्ण कार्य को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने हेतु BBSSL को हर संभव प्रशासनिक, संस्थागत और तकनीकी सहयोग प्रदान करें ।
- सहकारी समितियों में क्षमता निर्माण
- सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना: सहकारिता मंत्रालय ने इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट आणंद (इरमा) को परिवर्तित करके सहकारी क्षेत्र में "त्रिभुवन” सहकारी यूनिवर्सिटी (टीएसयू) नामक राष्ट्रीय स्तर के एक विश्वविद्यालय की स्थापना की है । इसे संसद के अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में स्थापित एवं घोषित किया गया है ।
इस संबंध में, "त्रिभुवन” सहकारी यूनिवर्सिटी विधेयक, 2025 को लोकसभा तथा राज्यसभा में क्रमश: 26 मार्च 2025 और 1 अप्रैल 2025 को पारित किया गया था । इसके अलावा, अधिनियम के प्रवृत्त होने और विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु राजपत्र अधिसूचना दिनांक 4 अप्रैल, 2025 को जारी की गई जिसके अनुसार विश्वविद्यालय की स्थापना 6 अप्रैल, 2025 से प्रभावी मानी गई ।
चूंकि, इस विश्वविद्यालय की स्थापना एक तत्कालीन संस्थान को परिवर्तित करके की गई थी, अतः यह तत्काल प्रभाव से कार्यशील हो गया है । इसके अलावा, अतिरिक्त अवसंरचना निर्माण के लिए गुजरात सरकार द्वारा 50 वर्षों के पट्टे पर भूमि भी आबंटित कर दी गई है और दिनांक 5 जुलाई, 2025 को विश्वविद्यालय के नए भवन का शिलान्यास भी कर दिया गया है ।
इसके अलावा, दिनांक 12.06.2026 को विश्वविद्यालय के नियमित कुलपति को नियुक्त किया गया है । विश्वविद्यालय के नियमित वित्त अधिकारी और कुलसचिव की भी नियुक्ति क्रमश: दिनांक 27.02.2026 और 15.04.2026 को की जा चुकी है । विश्वविद्यालय के शासी बोर्ड और कार्यकारी परिषद का गठन भी कर दिया गया है और विश्वविद्यालय के परिनियम मंत्रालय द्वारा अधिसूचित कर दिए गए हैं । इसके अलावा, टीएसयू द्वारा यूनिवर्सिटी के अध्यादेश भी अधिसूचित कर दिए गए हैं ।
- "त्रिभुवन” सहकारी यूनिवर्सिटी (TSU) द्वारा नए पाठ्यक्रमों की शुरूआत और संबद्धता: "त्रिभुवन” सहकारी यूनिवर्सिटी ने वर्ष 2025-26 शैक्षणिक वर्ष के दौरान तीन नए एमबीए कार्यक्रमों (कृषि व्यवसाय प्रबंधन, सहकारी प्रबंधन तथा सहकारी बैंकिंग और वित्त) की शुरूआत की है ।
इसके अलावा, इस विश्वविद्यालय ने तीन बाह्य कैंपस शुरू किए हैं । वर्तमान शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से इन कैंपसों में एमबीए (विकास प्रबंधन और सहकारिता) कार्यक्रम प्रदान किया जाएगा । इन कैंपसों को ब्योरा निम्नानुसार है:
- भुवनेश्वर, ओडिशा
- गांधीनगर, गुजरात
- गडग, कर्नाटक
इस विश्वविद्यालय से संबद्धता के संबंध में वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान (वैमनीकॉम), पुणे सहित 16 संस्थानों को संबद्ध किया गया है ।
- अध्ययन बोर्ड और अध्ययन उप-बोर्ड: त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय तथा राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 के अनुरूप पाठ्यक्रमों के मानकीकरण एवं आवधिक समीक्षा हेतु मुख्यालय स्तर पर एक अध्ययन बोर्ड तथा संस्थान स्तर पर अध्ययन उप-बोर्डों की परिकल्पना की गई है । इस पहल का लक्ष्य पाठ्यक्रम में एकरूपता सुनिश्चित करना, शैक्षणिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करना तथा विभिन्न राज्यों में स्थित राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद के सभी संस्थानों के विद्यार्थियों के लिए समान अधिगम परिणामों को प्रोत्साहित करना है।
तदनुसार, सहकारिता मंत्रालय के अपर सचिव (सीटीपी) की अध्यक्षता में फरवरी, 2026 में मुख्यालय स्तर पर अध्ययन बोर्ड का गठन किया गया । इसके साथ ही, एनसीसीटी के सभी संस्थानों द्वारा अपने-अपने स्तर पर अध्ययन उप-बोर्डों का भी गठन किया गया है ।
- एक लाख पैक्स सचिवों का प्रशिक्षण और प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (टीओटी) कार्यक्रम: सहकारिता मंत्रालय के निर्देशानुसार, राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद द्वारा एक लाख प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों के सचिवों के क्षमता निर्माण हेतु एक व्यापक प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किया गया है । इस पहल का उद्देश्य पैक्स के सचिवों को आवश्यक प्रबंधकीय एवं प्रशासनिक दक्षताओं से सुसज्जित करना है, जिससे वे अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें, व्यावसायिक कार्यकलापों में विविधीकरण को प्रोत्साहित कर सकें तथा आंतरिक नियंत्रण प्रणालियों को सुदृढ़ बना सकें ।
इस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु विस्तृत प्रशिक्षण मॉड्यूल एवं अध्ययन सामग्री तैयार की गई है । कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए दिनांक 24-25 मार्च, 2026 को पुणे स्थित वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान (वैमनीकॉम) में राष्ट्रीय स्तर के ‘प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण’ (ToT) कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें एनसीसीटी के विभिन्न संस्थानों के 43 संकाय सदस्यों को मास्टर प्रशिक्षक के रूप में प्रशिक्षित किया गया । तदोपरांत, वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान जिला स्तर पर पैक्स सचिवों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने प्रस्तावित हैं
- iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर ई-लर्निंग पाठ्यक्रमों का विकास: सहकारिता मंत्रालय के निदेशानुसार, राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद द्वारा iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर अपलोड किए जाने हेतु 12 पाठ्यक्रम चिह्नित कर प्रस्तावित किया गया है । इनमें से 7 पाठ्यक्रमों को iGOT कर्मयोगी द्वारा सामग्री विकास हेतु अनुमोदित किया गया है । तदनुसार, एनसीसीटी ने अपने विभिन्न संस्थानों के विषय-विशेषज्ञों के माध्यम से अनुमोदित पाठ्यक्रमों की विषय-वस्तु विकसित की । विकसित सामग्री को वीडियो-आधारित ई-लर्निंग पाठ्यक्रमों में रूपांतरित किए जाने हेतु iGOT कर्मयोगी द्वारा सूचीबद्ध एजेंसियों को दिया गया है । जून, 2026 माह के दौरान, सभी 7 पाठ्यक्रमों को iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर उपलब्ध और लाइव करा दिया गया है ।
- एनसीसीटी में ई-ऑफिस प्रणाली का कार्यान्वयन : राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद मुख्यालय तथा इसके सभी प्रशिक्षण संस्थानों में VPN कनेक्टिविटी के माध्यम से ई-ऑफिस प्रणाली के सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया गया है जिससे निर्बाध, पारदर्शी एवं कागजरहित निष्पादन सुनिश्चित हुआ है । ई-ऑफिस प्रणाली के सुचारु क्रार्यान्वयन एवं प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने हेतु सभी संस्थानों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए । प्रशासन प्रभाग द्वारा प्रणाली का निर्बाध कार्यकरण सुनिश्चित करने के लिए प्रचालनात्मक एवं तकनीकी समस्याओं का सक्रियतापूर्वक समाधान किया जा रहा है।
- सहकारिता मंत्रालय ने एग्रीकल्चरल फाइनेंस कॉरपोरेशन (AFC) इंडिया लि. के माध्यम से नेशनल लेबर कोऑपरेटिव फेडरेशन (NLCF) पर एक व्यापक राष्ट्र-स्तरीय अध्ययन पूरा किया है जिसके द्वारा NLCF को बेहतर अवसंरचना, विविध सेवाओं और मजबूत प्रशिक्षण पहलों के साथ एक व्यवसाय-चालित इकाई के रूप में स्थापित करने की रणनीतिक सिफारिशें की है ।
- मंत्रालय ने अपने द्वारा किए गए उपायों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए एक प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन पूरा कर लिया है, जिससे लिनाक के माध्यम से सहकारी क्षेत्र की मजबूती और समावेशिता को और बढ़ाने के लिए कार्रवाई योग्य अंतर्दृष्टि उत्पन्न होगी ।
- सहकारिता मंत्रालय ने अमृत काल (2022-2047) के दौरान भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ की विकास क्षमता का आकलन करने के लिए एक रणनीतिक अध्ययन शुरू करवाया है जिसे एग्रीकल्चरल फाइनेंस कॉरपोरेशन (AFC) इंडिया लि. द्वारा संचालित किया जाएगा । इस अध्ययन का लक्ष्य बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम की धारा 24 का अनुपालन सुनिश्चित करना, सहकारी शिक्षा का आधुनिकीकरण करना, 25 वर्षीय विकास रोडमैप तैयार करना और एनसीयूआई के शासन, आउटरीच, प्रशिक्षण अवसंरचना और सहकारी क्षेत्र के देशव्यापी विकास में उसकी भूमिका को मज़बूत करना है ।
- सहकारिता मंत्रालय ने अमृत काल (2022-2047) के दौरान नेशनल फेडरेशन ऑफ फिशर्स कोऑपरेटिव्स लिमिटेड (FISHCOPFED) के व्यवसाय विकास को बढ़ावा देने के लिए AFC इंडिया लि. के माध्यम से एक राष्ट्रीय अध्ययन शुरू किया है । इसका लक्ष्य विविधीकरण, शासन सुधार, डिजिटल पहुंच और सहकारी सशक्तीकरण के माध्यम से 25% की वृद्धि प्राप्त करना है । छह राज्यों और हितधारकों के विभिन्न स्तरों को शामिल करते हुए यह अध्ययन मात्स्यिकी सहकारी समितियों के आधुनिकीकरण और देश भर में उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को बढ़ाने के लिए रणनीतिक योजनाएं तैयार करेगा ।
- भारत में सहकारिता पर विशेष मॉड्यूल: सहकारिता मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (एनसीईआरटी) के समन्वय से राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद ने माध्यमिक स्तर के स्कूली छात्रों के लिए सहकारिता पर एक विशेष मॉड्यूल तैयार किया है जिसे माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा दिनांक 5 जुलाई, 2025 को लॉन्च किया गया । इस पहल का लक्ष्य छात्रों को सहकारी समितियों की राष्ट्र निर्माण में भूमिका के प्रति जागरूक करना है। यह छात्रों को सहकारिता क्षेत्र को करियर के एक विकल्प के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करता है । छात्रों के लिए यह मॉड्यूल एनसीईआरटी की वेबसाइट पर उपलब्ध है ।
- विद्यालयों में सहकारी समितियां
- वित्त का सशक्तीकरण: सहकारिता मंत्रालय द्वारा एनसीसीटी हेतु एक नया ऑब्जेक्ट शीर्ष 'सहायता अनुदान सामान्य’ खोला गया है जिससे एनसीसीटी, सहकारिता को सशक्त करने के अपने मिशन को पूरा करने के लिए सहकारी प्रशिक्षण एवं शिक्षा संबंधी महत्वपूर्ण कार्यों को निरंतरतापूर्वक कर सकेगा। पूर्व में प्रशिक्षण प्रयोजन हेतु अधिकांश निधि प्रशिक्षण और विकास फंड (TDF), जो मूलतः भवन मरम्मत एवं अवसंरचना विकास के लिए है, से ली जाती थी । चूंकि, यह लंबे समय तक व्यवहार्य नहीं था अतः, नए शीर्ष के खोले जाने से टीडीएफ पर दबाव कम होगा और वह अपने मूल उद्देश्य में प्रयुक्त होने के लिए उपलब्ध रहेगा ।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, सहकारिता मंत्रालय द्वारा एनसीसीटी को सहायता अनुदान (सामान्य) के अंतर्गत एक पृथक शीर्ष आबंटित किया गया था । इसके अलावा, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) को देश भर में एनसीसीटी के सभी प्रशिक्षण संस्थानों में पूर्णत: लागू किया गया है जिससे वित्तीय पारदर्शिता, दक्षता और निधि उपयोग की रियल-टाइम निगरानी सुनिश्चित होती है ।
- एनसीसीटी के प्रत्येक संस्थान के लिए भवन अवसंरचना विकास कार्यों की समयबद्धता सुनिश्चित करने हेतु भवन उप-समिति का गठन किया गया है
- प्रशिक्षण विकास फंड/भवन फंड का उपयोग: विभिन्न संस्थानों को उनके प्रशिक्षण विकास फंड/भवन फंड का उपयोग भवन अवसंरचना की मरम्मत/नवीनीकरण तथा अचल संपत्तियों (कार्यालय उपस्करों, आदि) की खरीद करने की स्वीकृति प्रदान की गई है ।
- वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान (वैमनीकॉम), पुणे के मौजूदा अवसंरचना में एक नया तीन मंजिला अंतरराष्ट्रीय छात्रावास भवन शामिल किया गया है, जिसमें प्रतिभागियों के लिए 50 ट्विन-शेयरिंग कमरे एवं 3 वीआईपी सुइट्स हैं । छात्रावास में रसोईघर, भोजन कक्ष, वाचनालय, 50 सीटों का क्लास, चर्चा कक्ष, व्यायामशाला तथा कार्यालय कक्ष भी हैं । यह भवन सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार से प्राप्त ₹30 करोड़ की पूंजी अनुदान से निर्मित किया गया है ।
- नए पाठ्यक्रम: वैमनीकॉम द्वारा शैक्षणिक सत्र 2025 के लिए AICTE, नई दिल्ली से संबद्ध पीजीडीएम- सहकारिता के एक नए कार्यक्रम की शुरूआत की गई है जिसमें 30 विद्यार्थियों की प्रवेश क्षमता है
- पायलट परियोजना – पैक्स हेतु समग्र प्रशिक्षण: पैक्स के सदस्यों, निदेशक मंडल, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों/सचिवों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए चार राज्यों के चार जिलों, अर्थात ऊना (हिमाचल प्रदेश), जोधपुर (राजस्थान), संबलपुर (ओडिशा) और थेनी (तमिलनाडु) में एक पायलट परियोजना चलाई गई । इस प्रशिक्षण में सहकारी समितियों की अवधारणाएं एवं लाभ, उपर्युक्त वर्णित सहकारी कार्मिकों की श्रेणियों की भूमिकाएं एवं उत्तरदायित्व, आदर्श उपविधियों के साथ व्यवसाय विविधीकरण के अवसर, इत्यादि जैसे विषय शामिल किए गए । इस परियोजना के अधीन 4 राज्यों में 284 पैक्स से संबंधित कुल 85,219 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया । इन प्रशिक्षणों के फोटो और सामग्री को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर डालकर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया ।
- सीएससी पोर्टल पर पैक्स के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम: एनसीसीटी ने सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के सहयोग से सीएससी पोर्टल पर ऑनबोर्ड हुए पैक्स के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए । इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य 30,000 पैक्स के सचिवों/कंप्यूटर ऑपरेटरों को सीएससी पोर्टल की 300 सेवाओं के माध्यम से प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के व्यावसायिक कार्यकलापों में विविधता लाने के लिए प्रशिक्षित करना था । इसके तहत कुल 649 कार्यक्रम संचालित किए गए और 25 राज्यों के 564 जिलों से आए 30271 पैक्स प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया
सचिव, सहकारिता मंत्रालय की हालिया बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पहले से ऑनबोर्ड हुए 9007 पैक्स को सक्रिय करने के लिए एनसीसीटी के सहयोग से सीएससी एक अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम कराने के साथ-साथ 15,548 पैक्स को सीएससी पोर्टल पर ऑनबोर्ड कराने के लिए भी प्रशिक्षण कराएगा । यह पहल सीएससी के साथ विचार-विमर्श के चरण पर है, पैक्स की पहचान की जा रही है तथा सीएससी के परामर्श से प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अन्य तौर-तरीकों पर कार्रवाई की जा रही है ।
- नवस्थापित बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम: सहकारिता मंत्रालय के अनुमोदन से एनसीसीटी ने दिनांक 27.06.2025 से प्रत्येक नवस्थापित बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि सहकारी समिति (एमपैक्स) के पांच कार्मिकों के लिए क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं I
दिनांक 31.03.2026 के अनुसार एनसीसीटी के संस्थानों द्वारा 254 प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए गए हैं जिनमें 17 राज्यों के 203 जिलों में 2,502 से अधिक पैक्स के 11,399 प्रतिभागियों को शामिल किया गया है जो देश भर में इसकी व्यापक पहुंच और प्रभावी कार्यान्वयन को दर्शाता है।
इसी क्रम में, वर्तमान वर्ष 2026-27 के दौरान, एनसीसीटी के संस्थान एमपैक्स के 12500 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने के लिए 250 से भी अधिक कार्यक्रम संचालित करने जा रहे हैं ।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)/रिस्ट्रक्चर्ड वेदर-बेस्ड क्रॉप इंश्योरेंस स्कीम (RWBCIS) के अधीन क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम: राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद (एनसीसीटी), सहकारिता मंत्रालय तथा फसल बीमा प्रभाग, कृषि और किसान कल्याण विभाग के बीच एक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया है । इस समझौता ज्ञापन के अंतर्गत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)/रिस्ट्रक्चर्ड वेदर-बेस्ड क्रॉप इंश्योरेंस स्कीम (RWBCIS) की योजनाओं के अधीन प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्स) के 10,000 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने के लिए 200 प्रशिक्षण कार्यक्रमों को चरणबद्ध कार्यान्वयन हेतु अनुमोदिन किया गया है । चरण-1 में 11 राज्यों, यथा छत्तीगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कार्यान्यवन प्रस्तावित है।
- शैक्षणिक जर्नल का प्रकाशन – आरआईसीएम, चंडीगढ़ द्वारा सहकारिता एवं सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान और ज्ञान प्रसार को बढ़ावा देने के लिए 'सहकारिता अनुसंधान – एक बहुविषयक सामाज विज्ञान जर्नल’ शीर्षक से एक द्विवार्षिक समकक्ष-समीक्षित जर्नल का प्रकाशन किया गया है ।
इस जर्नल का प्रथम संस्करण अप्रैल, 2025 में जारी किया गया । जर्नल का द्वितीय संस्करण दिसंबर, 2025 में जारी होगा
- पीजीडीएम-एबीएम कार्यक्रम का पुन:प्रारंभ – आरआईसीएम, चंडीगढ़ द्वारा एआईसीटीई द्वारा विधिवत अनुमोदित स्नातकोत्तर प्रबंध डिप्लोमा– कृषि व्यवसाय प्रबंधन (पीजीडीएम-एबीएम) कार्यक्रम को पुनः प्रारंभ करने की पहल की गई है ।
- ‘सुगम व्यवसाय’ के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग
- केंद्रीय पंजीयक के कार्यालय का कंप्यूटरीकरण : पंजीकरण प्रक्रिया को व्यवस्थित करने, उपविधियों में संशोधन और अन्य सेवा अनुरोधों की समयबद्ध प्रोसेसिंग के लिए बहुराज्य सहकारी समितियों के लिए डिजिटल परितंत्र के निर्माण हेतु केंद्रीय पंजीयक के कार्यालय को कंप्यूटरीकृत किया गया है
- राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों में सहकारी समितियों के पंजीयक कार्यलयों के कंप्यूटरीकरण की योजना: मंत्रालय द्वारा दिनांक 30.01.2024 को वर्ष 2023-24 से तीन वर्षों के लिए ₹94.59 करोड़ के बजटीय परिव्यय से राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों में सहकारी समितियों के पंजीयक के कार्यालयों के कंप्यूटरीकरण की एक केंद्रीय प्रायोजित परियोजना लॉन्च की है । यह मंत्रालय की "आईटी इंटरवेंशंस के माध्यम से सहकारी समितियों के सशक्तीकरण" की अंब्रेला योजना का हिस्सा है । इस परियोजना का लक्ष्य सहकारी समितियों के लिए सुगम व्यवसाय में वृद्धि करना और सभी राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों में सहकारी समितियों तथा आरसीएस कार्यालयों के बीच पारदर्शी, कागज़रहित और डिजिटल परितंत्र का सृजन करना है । परियोजना के अधीन राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों को हार्डवेयर प्रापण, सॉफ्टवेयर विकास, रखरखाव एवं उन्नयन, आदि के लिए अनुदान प्रदान किया जा रहा है । इस योजना के अधीन विकसित किया जाने वाला सॉफ्टवेयर संबंधित राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों के सहकारिता अधिनियमों के अनुरूप होगा । वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25, 2025-26 और वित्तीय वर्ष 2026-27 (15 जुलाई, 2026 तक) के दौरान, कुल 35 राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों ने अपने प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं तथा राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों को भारत सरकार के हिस्से के रूप ₹43.21 करोड़ की राशि जारी की गई है।
- कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (ARDBs) का कंप्यूटरीकरण: दीर्घकालिक सहकारी ऋण संरचना को सुदृढ़ करने के लिए सरकार द्वारा 13 राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों में फैले कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (एआरडीबी) की 1,867 इकाइयों के कंप्यूटरीकरण की परियोजना को अनुमोदित किया गया है । नाबार्ड इस परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसी है । अब तक 10 राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों से प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं जिसमें 1422 इकाइयों को मंजूरी दी गई है । इसके अलावा, हार्डवेयर प्रापण, डिजिटलीकरण और सपोर्ट सिस्टम स्थापित करने के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24, वित्तीय वर्ष 2024-25, वित्तीय वर्ष 2025-26 और वित्तीय वर्ष 2026-27 में 10 राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों को भारत सरकार के हिस्से के रूप में 16.74 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं ।
ज. राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा उठाए गए कदम
- ऋण संवितरण में वृद्धि: एनसीडीसी द्वारा वित्तीय सहायता का संवितरण वित्तीय वर्ष 2020-21 में ₹24,733.20 करोड़ से लगभग चार गुना बढ़कर वित्तीय वर्ष 2024-25 में ₹95,182.84 करोड़ हो गया है। एनसीडीसी ने इन चार वर्षों के दौरान संवितरण में 40% से अधिक चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) हासिल की है । वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, एनसीडीसी ने 1,55,347.21 करोड़ रुपये स्वीकृत किए और 1,27,596.28 करोड़ रुपये का संवितरण किया है ।
- फ्लोटिंग ब्याज दर की शुरुआत: एनसीडीसी ने वित्तीय प्रणाली में एक उल्लेखनीय कदम उठाते हुए फ्लोटिंग ब्याज दर की शुरुआत की है । इससे सावधि ऋण की ब्याज दर में लगभग 2% की कमी आई है। फ्लोटिंग ब्याज दर से तात्पर्य है कि यह ब्याज दर, बाजार के हालात और अन्य वित्तीय कारकों के आधार पर बदलती रहती है, जिससे उधार लेने वालों को कम ब्याज दर का लाभ मिलता है ।
- डिफरेंशियल दर अपनाना: एनसीडीसी ने डिफरेंशियल दर प्रणाली को अपनाया है जिसके तहत विभिन्न ऋण उधारकर्ताओं के लिए अलग-अलग ब्याज दर प्रदान की जाती है । यह प्रणाली उधारकर्ताओं की वित्तीय स्थिति और क्षमता को ध्यान में रखते हुए ऋण दर को अनुकूलित करती है जिससे उधारकर्ताओं को अपनी स्थिति के अनुसार बेहतर दरों पर वित्तीय सहायता प्राप्त होती है
- सूक्ष्म और लघु उद्यम क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE), एफपीओ के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (CGSFPO) एवं पशुपालन और डेयरी के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGFT-AHD) के तहत पंजीकरण: इस कदम से सहकारी समितियों को एनसीडीसी से संपार्श्विक मुक्त ऋण प्राप्त करने में मदद मिलती है ।
- राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और एनसीडीसी के बीच समझौता ज्ञापन: एनसीडीसी और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच वित्तपोषण, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर एक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित हुआ है । इस समझौता के तहत दोनों संस्थान मिलकर डेयरी क्षेत्र में छोटे उत्पादकों को सशक्त बनाने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे जिससे किसानों की आय में वृद्धि और डेयरी समितियों का सशक्तीकरण होगा ।
- एनसीडीसी द्वारा अन्य ऋणदाताओं की बड़ी परियोजनाओं का मूल्यांकन: एनसीडीसी ने अन्य ऋणदाताओं, जिनके पास अपेक्षित विशेषज्ञता नहीं है, की बड़ी परियोजनाओं का मूल्यांकन शुरू किया है। जैसे कि, एनसीडीसी ने गुजरात राज्य सहकारी बैंक के लिए तीन डेयरी परियोजनाओं का मूल्यांकन किया, जिसमें परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा और मूल्यांकन किया गया ।
- भौगोलिक पहुंच का विस्तारण: एनसीडीसी ने अपनी भौगोलिक पहुंच का विस्तारण करते हुए विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश) में एक नया क्षेत्रीय कार्यालय तथा जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, सिक्किम, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय एवं नागालैंड में 9 नए उप-कार्यालय खोले हैं।
- युवा पेशेवरों की नियुक्ति: एनसीडीसी ने विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले युवा पेशेवरों को नियुक्त किया । इसमें 14 सीए/सीएमए/इंटर, 39 एमबीए, 3 एलएलबी/एलएलएम, 3 BFSc/MFSc और पत्रकारिता में 2 एम.ए. सहित अन्य युवा पेशेवर शामिल हैं । यह कदम निगम की कार्यक्षमता में वृद्धि करने के लिए उठाया गया है ।
- भारत टैक्सी (भारत का पहला सहकारिता-आधारित मोबिलिटी प्लेटफॉर्म):
सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड एक अभिनव, ड्राइवर (सारथी)-केंद्रित एवं सहकार-आधारित मोबिलिटी समाधान है, जिसे सारथियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने तथा आम जनता को किफायती, सुरक्षित और विश्वसनीय परिवहन सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। सहकारिता, पारदर्शिता और साझा स्वामित्व के सिद्धांतों पर आधारित यह प्लेटफॉर्म पारंपरिक राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म का एक जन-केंद्रित विकल्प है । भारत टैक्सी की प्रमुख विशेषता इसका ‘शून्य-कमीशन मॉडल’ है, जिसके अंतर्गत सारथियों से किसी प्रकार का कमीशन नहीं लिया जाता, जिससे यात्रा किराए का पूरा लाभ सीधे सारथियों को प्राप्त होता है । इस मॉडल में सारथी केवल सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि सहकारी व्यवस्था के सहभागी एवं लाभार्थी भी हैं । उन्हें बेहतर आय, उचित पारिश्रमिक, निर्णयन प्रक्रिया में भागीदारी तथा प्लेटफॉर्म के लाभों में हिस्सेदारी का अवसर प्राप्त होता है, जिससे उनकी सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा सुदृढ़ होती है ।
यह परियोजना राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा सात अन्य प्रमुख सहकारी और राष्ट्रीय संस्थानों- इफको, नेफेड, अमूल, कृभको, एनडीडीबी, एनसीईएल और नाबार्ड के साथ मिलकर प्रवर्तित की गई है । इस परियोजना को "भारत टैक्सी" का नाम दिया गया है और इसे आधिकारिक तौर पर दिनांक 5 फरवरी 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा लॉन्च किया गया था । वर्तमान में, भारत टैक्सी के प्लेटफॉर्म पर 6.37 लाख ड्राइवर और 35.77 लाख ग्राहक पंजीकृत हैं । यह सेवा वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर, गुजरात, लखनऊ, चंडीगढ़, मुंबई, जयपुर और कानपुर में चल रही है ।
- "एनसीडीसी को सहायता अनुदान की केंद्रीय क्षेत्रक योजना: सरकार द्वारा चार वर्षों की अवधि में प्रदान किए जाने वाले ₹2,000 करोड़ की सहायता अनुदान के आधार पर राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) बाजार से लगभग ₹20,000 करोड़ जुटाने में सक्षम होगा । इस निधि का उपयोग एनसीडीसी द्वारा डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन, चीनी, वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण एवं शीत श्रृंखला, श्रमिक सहकारी समितियों, महिला सहकारी समितियों तथा अन्य सहकारी क्षेत्रों को दीर्घकालिक एवं कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराने के लिए किया जा रहा है । इस योजना के अधीन एनसीडीसी सहकारी संस्थाओं को प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में एनसीडीसी को कुल ₹500 करोड़ की राशि जारी की गई थी, जबकि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक ₹250 करोड़ जारी किए जा चुके हैं। इस सहायता के आधार पर एनसीडीसी ने मई 2026 तक ₹10,672 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता का संवितरण किया है, जिससे विभिन्न सहकारी क्षेत्रों की वित्तीय अपेक्षाओं को पूरा करने और उनकी विकास क्षमता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान मिला है।
- सहकारी इंटर्न: सभी ग्रामीण सहकारी बैंकों (राज्य सहकारी बैंकों और जिला सहकारी बैंकों) को कवर करते हुए 385 सहकारी इंटर्न्स की नियुक्ति की जा रही है । इस योजना का लक्ष्य सहकारी संगठनों की समग्र क्षमता का विकास करना तथा जमीनी स्तर पर डिजिटल और व्यावसायिक कौशल को बढ़ावा देना है । चयनित सहकारी इंटर्न को मासिक ₹25,000 पारिश्रमिक दिया जा रहा है जिसकी प्रतिपूर्ति सहकारी शिक्षा कोष (CEF) से की जाती है । दिनांक 31.05.2026 की स्थिति के अनुसार 250 इंटर्न चयनित हो चुके हैं और वर्तमान में 227 इंटर्न काम कर रहे हैं ।
- सहकार नवाचार योजना का शुभारंभ: सहकारी क्षेत्र में नवाचार एवं आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए एनसीडीसी ने सहकार नवाचार योजना प्रारंभ की है, जिसके अंतर्गत सहकारी समितियों द्वारा प्रस्तुत नवोन्मेषी और व्यवहार्य व्यावसायिक विचारों को 100% अनुदान-आधारित वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी । इस योजना के लिए प्रतिवर्ष ₹10 करोड़ का कोष निर्धारित किया गया है तथा प्रत्येक सहकारी संस्था को मामला-दर-मामला आधार पर अधिकतम ₹25 लाख तक की सहायता प्रदान की जा सकती है । इस पहल का लक्ष्य नए व्यावसायिक मॉडल, डिजिटल प्रौद्योगिकियों तथा नवाचार-आधारित समाधानों को प्रोत्साहित करना है, विशेषकर उन सहकारी संस्थाओं के लिए जो पर्याप्त संपार्श्विक के अभाव में अथवा व्यवहार्य विचार होने के बावजूद पारंपरिक ऋण प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं ।
- एनसीडीसी समर्थित मिजोरम पैक्स-केंद्रित सहकारी इंटर्न योजना: मिजोरम में जमीनी स्तर की सहकारी समितियों के समक्ष विद्यमान विशिष्ट चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तथा जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के अभाव के कारण सहकारी इंटर्न योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए, एनसीडीसी ने राज्य के लिए एक समर्पित पैक्स-केंद्रित सहकारी इंटर्न योजना अनुमोदित की है । इस पहल के अंतर्गत राज्य के सभी जिलों में 11 अर्हरताप्राप्त इंटर्न तैनात किए जाएंगे जो तीन वर्षों की अवधि में 55 पैक्स को हैंडहोल्डिंग सहायता प्रदान करेंगे।
99 लाख के कुल वित्तीय परिव्यय से, ये इंटर्न सहकारी समितियों को व्यवसाय योजना, क्षमता विकास, शासन सुधार तथा संस्थागत वित्त तक सुगम पहुंच में सुविधा हेतु सहायता करेंगे । इस योजना से कम-से-कम 55 व्यवसाय योजनाएं तैयार किए जाने, लगभग 275 पदाधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किए जाने, सहकारी समितियों की प्रबंधकीय एवं वित्तीय व्यवहार्यता में सुधार करने तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र में जमीनी स्तर की सहकारी संस्थाओं के सशक्तीकरण के लिए एक संधारणीय और अनुकरणीय मॉडल सृजित करने का अनुमान है ।
झ. राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (एनसीडी) का निर्माण
- प्रामाणिक और अद्यतित डेटा संग्रहण हेतु नया राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस: देश भर में सहकारी समितियों से संबंधित कार्यक्रमों/ योजनाओं हेतु नीति निर्माण और कार्यान्वयन में हितधारकों की सुविधा के लिए राज्य सरकारों के सहयोग से देश में सहकारी समितियों का एक व्यापक डेटाबेस विकसित किया गया है। एनसीडी पोर्टल को दिनांक 08.03.2024 को माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा लॉन्च किया गया था । इस डेटाबेस में अब तक 30 विभिन्न क्षेत्रकों की लगभग 8.6 लाख सहकारी समितियों, जिनसे लगभग 32 करोड़ सदस्य जुड़े हुए हैं, के डेटा शामिल हैं ।
- राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (एनसीडी) पोर्टल 3.0 का शुभारंभ: अद्यतित/उन्नत संस्करण एनसीडी पोर्टल 3.0 को आधिकारिक तौर पर माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा दिनांक 06.07.2026 को लॉन्च किया गया था । एनसीडी पोर्टल 3.0 कई नई सुविधाएँ प्रदान करता है जिनमें ओटीपी-आधारित सुरक्षित लॉगइन, सहकारी समिति-स्तरीय उपयोगकर्ता पहुंच और डैशबोर्ड, एआई चैटबॉट, ग्राम-स्तरीय जीआईएस मैपिंग, भाषिणी एकीकरण के माध्यम से बहुभाषी समर्थन, डेटा के रियल-टाइम अद्यतन के लिए राज्य आरसीएस पोर्टलों के साथ एपीआई एकीकरण, फीडबैक तंत्र, तथा कॉल प्रबंधन और तकनीकी हेल्पडेस्क सहायता, बेहतर सुरक्षा एवं तीव्र एक्सेस के लिए डेटाबेस आदि शामिल हैं ।
- एनसीडी जियोटैग मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ: एनसीडी जियोटैग मोबाइल एप्लिकेशन को सभी कार्यशील सहकारी समितियों की जीपीएस अवस्थिति (अक्षांश और देशांतर) को कैप्चर करने के लिए विकसित किया गया है । इसे दिनांक 06.07.2026 को माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा लॉन्च किया गया था । यह मोबाइल एप्लिकेशन एनसीडी पोर्टल पर सहकारी समितियों की सटीक जियो-टैगिंग और जीआईएस-आधारित मैपिंग को भी सक्षम करेगा ।
- सहकारी रैंकिंग फ्रेमवर्क: सरकार ने सहकारी समितियों की राज्य-वार और क्षेत्र-वार मूल्यांकन और रैंकिंग करने के लिए दिनांक 24 जनवरी 2025 को सहकारी रैंकिंग फ्रेमवर्क लॉन्च किया । यह रैंकिंग फ्रेमवर्क राज्य के आरसीएस को प्रमुख मापदंडों, जैसे ऑडिट अनुपालन, प्रचालन कार्यकलापों, वित्तीय प्रदर्शन, अवसंरचना और बुनियादी पहचान सूचना के आधार पर सहकारी समितियों के प्रदर्शन का आकलन करने में सक्षम बनाता है । राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस पोर्टल के माध्यम से राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों द्वारा 12 प्रमुख क्षेत्रों, अर्थात् पैक्स, डेयरी, मात्स्यिकी, शहरी सहकारी बैंक, आवासन, क्रेडिट और थ्रिफ्ट, खादी एवं ग्राम उद्योग, कृषि प्रसंस्करण/औद्योगिक, हस्तशिल्प, हथकरघा, वस्त्र और बुनकर, बहुउद्देशीय और सहकारी चीनी समितियों की राज्य, जिला और प्रखंड स्तर पर रैंकिंग उत्पन्न कर सकते हैं । इस रैंकिंग प्रणाली का लक्ष्य सहकारी समितियों के बीच पारदर्शिता, विश्वसनीयता और प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रोत्साहित कर अंततः उनके विकास को बढ़ावा देना है ।
- राज्य के आरसीएस पोर्टल को एपीआई के माध्यम से एनसीडी पोर्टल के साथ एकीकरण में राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों को सुविधा प्रदान करना: सहकारिता मंत्रालय ने राज्य की सहकारी समितियों के संपूर्ण डेटा को एनसीडी पोर्टल से संबंधित आरसीएस पोर्टल पर प्राप्त करने हेतु एक मानक एपीआई का विकास किया है और इस मानक एपीआई विनिर्देश दस्तावेज तथा डाटाबेस स्कीम को राज्यों के साथ दिनांक 27.05.2025 को साझा किया है । तदुपरांत, मंत्रालय ने आरसीएस पोर्टलों से एनसीडी पोर्टल पर लाइव, इवेंट ड्रिवन डेटा पुशिंग के लिए पुश APIs (एंड प्वॉइंट APIs) पर दिनांक 22.09.2025 को एक दस्तावेज साझा किया है जिससे रियल टाइम अद्यतन और नया पंजीकरण डाटा सुनिश्चित हो सके । इस प्रक्रिया को और भी स्पष्ट करने के लिए दिनांक 14.11.2025 को सभी राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों को एक परामर्शी सहित समग्र चेक-लिस्ट जारी की गई । एकीकरण योजना के अनुसार, राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों के लिए यह जरूरी है कि वे अपने स्तर पर रिवर्स/पुल एपीआई का विकास सुनिश्चित करें और एनसीडी पोर्टल के साथ सफल एकीकरण के लिए चेकलिस्ट के अनुसार आरसीएस कंप्यूटरीकरण को पूरा करें । दिनांक 15.07.2026 की स्थिति के अनुसार राजस्थान, छत्तीसगढ़, बिहार, मिजोरम और सिक्किम राज्यों तथा दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के संघ राज्यक्षेत्रों ने एनसीडी पोर्टल के साथ एकीकरण पूर्ण कर लिया है । इस दो-तरफा एकीकरण से विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर सहकारी डेटा का सिंक्रोनाइजेशन सुनिश्चित होगा ।
- राष्ट्रीय सहकारिता नीति (एनसीपी): सहकारिता मंत्रालय के “सहकार से समृद्धि” के अधिदेश को पूरा करने के लिए नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति तैयार करने की परिकल्पना की गई थी । यह सहकारी क्षेत्र के व्यवस्थित और सर्वांगीण विकास का रोडमैप प्रदान करता है । माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा दिनांक 24 जुलाई, 2025 को राष्ट्रीय सहकारिता नीति का अनावरण किया गया । इसमें 6 रणनीतिक स्तंभ, 16 उद्देश्य और 83 सिफारिशें हैं । माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में ‘सहकारिता नीति पर राष्ट्रीय संचालन समिति’ का गठन किया गया है और सुचारू एवं समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए सचिव, सहकारिता मंत्रालय की अध्यक्षता में राष्ट्र-स्तरीय ‘नीति कार्यान्वयन और निगरानी समिति’ का गठन किया गया है ।
राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 के अंतर्गत गठित राष्ट्रीय स्तर की नीति कार्यान्वयन और निगरानी समिति की पहली बैठक दिनांक 9 जून 2026 को अटल अक्षय ऊर्जा भवन, नई दिल्ली में आयोजित की गई । बैठक की अध्यक्षता सचिव, सहकारिता मंत्रालय एवं समिति के अध्यक्ष द्वारा की गई । समिति ने राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए रोडमैप पर विचार-विमर्श किया, जिसमें संस्थागत सुदृढ़ीकरण, केंद्रीय सरकार के मंत्रालयों, विभागों, राज्यों एवं संघ राज्यक्षेत्रों तथा राष्ट्रीय परिसंघों/ सहकारी संस्थाओं द्वारा समन्वित कार्रवाई पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि डिजिटल परिवर्तन, क्षमता निर्माण, सदस्यता विस्तार और सहकारिता-नेतृत्व वाले समावेशी एवं संधारणीय आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जा सके । इस बैठक में इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) के अध्यक्ष; “त्रिभुवन” सहकारी विश्वविद्यालय के कुलपति; नाबार्ड के अध्यक्ष; तथा सहकारिता मंत्रालय एवं विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के अपर सचिव, संयुक्त सचिव एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय सहकारी महासंघों, सहकारी संस्थानों सहित चार राज्यों (तमिलनाडु, गुजरात, असम और उत्तर प्रदेश) के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे
- “राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 के लिए कार्यान्वयन पद्धति और आगे की राह” पर राष्ट्रीय संगोष्ठी: माननीय प्रधानमंत्री की "सहकार से समृद्धि" की परिकल्पना में तेजी लाने के लिए और माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री के नेतृत्व में राष्ट्रीय विकास के एक प्रमुख इंजन के रूप में सहकारी क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में प्रयासों को मजबूत करने के लिए दिनांक 30.03.2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई । इस संगोष्ठी का आयोजन सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार और "त्रिभुवन" सहकारी यूनिवर्सिटी (टीएसयू) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था । इस संगोष्ठी में देश भर के नीति निर्माताओं, राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, सहकारी संस्थानों, विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया और नीति के प्रभावी कार्यान्वयन पर विचार-विमर्श किया ।
- भारत में अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष– 2025: संयुक्त राष्ट्र ने 2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष (IYC 2025) घोषित किया ताकि आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और संधारणीयता में सहकारी समितियों की भूमिका को उजागर किया जा सके । सहकारिता मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र के सभी हितधारकों के सहयोग से एक कार्य योजना विकसित की, जिसमें पारदर्शिता, नीति सुधार और पैक्स के माध्यम से ग्रामीण आर्थिक रूपांतरण पर जोर दिया गया । यह कार्य योजना माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा दिनांक 24.01.2025 को लॉन्च की गई । समन्वित योजना और कार्यान्वयन के लिए मंत्रालय ने IYC-राष्ट्रीय सहकारी समिति, IYC-राष्ट्रीय कार्यान्वयन समिति और IYC-राज्य शीर्ष समितियों का गठन किया ।
पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाने, प्रचालन दक्षता में सुधार, सहकारिता में सहकार को बढ़ावा देने, सहकारी समितियों में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा मॉडल उपविधियों के माध्यम से सहकारी शासन को मजबूत करने के उद्देश्य से वर्ष भर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इनमें विभिन्न कार्यशालाओं, वृक्षारोपण अभियानों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, क्षमता निर्माण सत्रों, प्रदर्शनियों, खेल आयोजनों, वॉकाथॉन और जागरूकता अभियानों का आयोजन शामिल था । ये कार्यक्रम विभिन्न स्तरों पर आयोजित किए गए, जिनमें व्यक्तिगत सहकारी समिति स्तर, जिला स्तर, राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर शामिल हैं ।
IYC-2025 के दौरान, व्यापक जागरूकता और आउटरीच अभियान भी चलाए गए, जिनके माध्यम से भारतीय रेल ई-टिकट, सहकारी उत्पाद पैकेजिंग, आधिकारिक वेबसाइटों और आधिकारिक संचार के जरिए IYC लोगो की देशव्यापी दृश्यता सुनिश्चित की गई । राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख पहलों में दिनांक 30 जून, 2025 को राज्य/संघ राज्यक्षेत्रों के राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन और दिनांक 06 जुलाई, 2025 को गुजरात के आणंद में सहकारिता मंत्रालय के चौथे स्थापना दिवस के अवसर पर एक राष्ट्रीय कार्यक्रम शामिल थे । मंत्रालय और उसके हितधारकों के IYC कार्यकलापों के डेटा भंडार और मीडिया आउटरीच कार्यों के लिए दिनांक 24.12.2025 को एक समर्पित पोर्टल लॉन्च किया गया ।
वर्ष के दौरान एक प्रमुख उपलब्धि राष्ट्रीय सहकारिता नीति (NCP) 2025 का शुभारंभ था, जिसका उद्देश्य शासन प्रणालियों को मजबूत करना, प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करना और सहकारी क्षेत्र को विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप बनाना है ।
IYC 2025 के दौरान किए गए कार्यकलापों पर एक वार्षिक रिपोर्ट मंत्रालय द्वारा तैयार की गई और माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा गुजरात में दिनांक 17.02.2026 को आयोजित दूसरी मंथन बैठक के दौरान इसे लॉन्च किया गया ।
- मंत्रालय की मीडिया आउटरीच का सशक्तीकरण: विगत चार वर्षों में सहकारिता मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र के बारे में जन सहभागिता और जागरूकता वर्धन के लिए अपनी डिजिटल और मीडिया पहुंच को उल्लेखनीय रूप से सशक्त किया है । पारंपरिक और डिजिटल, दोनों ही माध्यमों का लाभ उठाते हुए मंत्रालय ने पीआईबी के सहयोग से प्रेस विज्ञप्तियां और प्रमुख समाचार पत्रों में लेखों का लगातार प्रकाशन किया है और साथ ही सोशल मीडिया पर भी अपनी उपस्थिति का विस्तार किया है । माननीय प्रधानमंत्री और माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित सभी राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों का मंत्रालय के यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारण किया जाता है । प्रेस विज्ञप्तियां, समाचार अपडेट और उपलब्धियां नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट पर, व्यापक समावेशन हेतु बहुभाषी पहुंच के साथ साझा की जाती हैं । मंत्रालय के डिजिटल फुटप्रिंट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है । X (ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, लिंक्डइन और व्हाट्सएप सहित सभी प्लेटफॉर्म पर मंत्रालय के आज कुल 6.37 लाख से अधिक फॉलोअर्स/सब्सक्राइबर हैं और यूट्यूब पर कुल वीडियो व्यूअरशिप 1.57 करोड़ से अधिक है । विशेष रूप से प्रमुख आयोजनों और राष्ट्रीय अनुष्ठानों के दौरान ऐतिहासिक पहलों पर विशेष अभियान और क्यूरेटेड पोस्ट लगातार उच्च सार्वजनिक जुड़ाव पैदा करते हैं, ।
इसके अतिरिक्त, मंत्रालय राज्य सरकारों, सहकारी समितियों के रजिस्ट्रारों (आरसीएस) और राष्ट्रीय सहकारी परिसंघों को अपने संबंधित सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से अपने पोस्ट और सामग्री को साझा करके मंत्रालय की पहल को बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रहा है जिससे सहकारी इकोसिस्टम में व्यापक और अधिक समन्वित संचार पहुंच सुनिश्चित हो सके ।
- मासिक प्रकाशन के माध्यम से सहकारी जागरुकता को प्रोत्साहन: सहकारी क्षेत्र में आउटरीच, जागरूकता और क्षमता निर्माण को बढ़ाने के लिए, सहकारिता मंत्रालय अप्रैल 2023 से दो मासिक पत्रिकाओं—सहकार उदय (IFFCO के माध्यम से) और सहकार जागरण (NCUI के माध्यम से) के प्रकाशन के लिए सुविधा प्रदान कर रहा है । हिंदी, अंग्रेज़ी और 11 क्षेत्रीय भाषाओं में प्रकाशित ये पत्रिकाएँ मंत्रालय और व्यापक सहकारी आंदोलन की प्रमुख नीतियों, योजनाओं, पहलों और सफलता की कहानियों के बारे में जानकारी प्रसारित करने के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करती हैं । सहकार उदय हर महीने लगभग 3 लाख प्रतियों का प्रकाशन कर रहा है, जबकि सहकार जागरण का मासिक प्रसार लगभग 2.75 लाख प्रतियों का है । ये प्रकाशन समयोचित, प्रासंगिक और प्रेरणादायक सामग्री प्रदान करके जमीनी स्तर पर सहकारी सदस्यों को सूचित और सशक्त बनाने में मदद करते हैं ।
- बहुराज्य सहकारी समितियां
- बहुराज्य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अधिनियम, 2023: बहुराज्य सहकारी समितियों में शासन सशक्त करने, पारदर्शिता व उत्तरदायित्व बढ़ाने, निर्वाचन प्रक्रिया में सुधार करने और 97वें संविधान संशोधन के उपबंधों को अंतर्विष्ट करने के लिए बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 में संशोधन किया गया है ।
- सहकारी ऑम्बड्समैन: बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 में संशोधन के पश्चात् सहकारी ऑम्बुड्समैन को उक्त अधिनियम की धारा 85क द्वारा दिनांक 05.03.2024 के राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से नियुक्त किया गया है । ऑम्बुड्समैन कार्यालय पूर्णरूपेण कार्यशील है और बहुराज्य सहकारी समितियों के सदस्यों की जमाराशियों, कार्यरत बहुराज्य सहकारी समितियों के न्यायोचित लाभ या संबंधित सदस्यों के व्यक्तिगत अधिकारों को प्रभावित करने वाले किन्हीं अन्य मुद्दों से संबंधित शिकायतों या अपीलों पर कार्य करता है । दिनांक 17.07.2026 तक 38,000 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं, तथा 44 आदेशों के माध्यम से अधिकांश शिकायतों का निपटान किया जा चुका है ।
- सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण (सीईए): बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 में संशोधन के पश्चात् सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण को शासन सशक्तीकरण और उत्तरदायित्व के लिए स्थापित किया गया है जिसे सभी बहुराज्य सहकारी समितियों में स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचन कराने हेतु अधिदेश प्राप्त है I दिनांक 16.07.2026 तक 281 से अधिक बहुराज्य सहकारी समितियों में सफलतापूर्वक निर्वाचन करवाए गए हैं ।
- जेम (गवर्मेंट ई-मार्केटप्लेस) पोर्टल पर सहकारी समितियों को 'क्रेता' के रूप में शामिल करना: सरकार ने सहकारी समितियों को जेम पर ‘क्रेता’ के रूप में पंजीकृत होने की अनुमति प्रदान कर दी है जिससे वे किफायती खरीद एवं अधिक पारदर्शिता के साथ लगभग 102.5 लाख वेंडरों से माल और सेवाओं का प्रापण कर सकेंगे । जेम पोर्टल पर ‘क्रेता’ के रूप में अब तक 783 सहकारी समितियां ऑनबोर्ड/रजिस्टर्ड हो चुकी हैं ।
- सहारा समूह की समितियों के निवेशकों को रिफंड: सहारा समूह की सहकारी समितियों के वैध जमाकर्ताओं को पारदर्शी रीति से भुगतान करने हेतु एक पोर्टल का शुभारंभ किया गया है । उनकी जमाराशि और दावों के साक्ष्य की प्रस्तुति एवं उचित पहचान के पश्चात् संवितरण का कार्य आरंभ हो चुका है । अब तक 41,55,502 आवेदकों को 9,265.09 करोड़ रुपये का संवितरण किया गया है ।
142. स्विगी इंस्टामार्ट के क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से सहकारी उत्पादों की बाजार पहुंच को बढ़ाना: सहकारिता मंत्रालय ने भारतीय सहकारी क्षेत्र को बढ़ावा देने और ‘सहकार से समृद्धि’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए सहकारी उत्पादों के डिजिटल और बाजार एकीकरण को बढ़ाने, नीतिगत चर्चाओं को सुविधाजनक बनाने और उपभोक्ता जुड़ाव को गति देने हेतु सहयोग के लिए दिनांक 25.04.2025 को स्विगी लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं । इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य सहकारिता मंत्रालय और स्विगी के बीच, विशेष रूप से डेयरी और ऑर्गेनिक क्षेत्रों में सहकारी उत्पादों के डिजिटल एकीकरण और बाजार पहुंच को बढ़ाने और डिजिटल मार्केटिंग, लॉजिस्टिक्स एवं उपभोक्ता तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहकारी समितियों की क्षमता निर्माण की सुविधा प्रदान करने के लिए एक रणनीतिक साझेदारी स्थापित करना है । समझौता ज्ञापन के दायरे में निम्नलिखित शामिल हैं:
- सहकारिता मंत्रालय के सहयोग से स्विगी द्वारा भारत में सहकारी आंदोलन/संगठनों/उत्पादों के लिए जागरूकता अभियान चलाना ।
- सहकारी समितियों के लिए स्विगी द्वारा अपने इंस्टामार्ट प्लेटमॉर्म के माध्यम से प्राथमिकता पर एक्सेस प्रदान करने हेतु सहकारी डेयरी उत्पादों और सहायता की ऑनबोर्डिंग को प्रोत्साहन प्रदान करना ।
- सहकारिता मंत्रालय के सहयोग से स्विगी द्वारा सहकारी ब्रांडों को मार्केटिंग, प्रचार-प्रसार, उपभोक्ता प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में समर्थन प्रदान करना ।
- स्विगी अपने प्लेटफॉर्म पर एक अलग सहकारी श्रेणी बनाएगा, जिसमें सहकारी संगठनों द्वारा प्रोत्साहित ब्रांड के उत्पादों, जैसे कि ऑर्गेनिक, डेयरी, श्रीअन्न (मिलेट्स), हस्तशिल्प, आदि पर फोकस किया जाएगा ।
- यह पहल डिजिटल पहुंच बढ़ाएगी, सहकारी समितियों के लिए संधारणीय विकास के अवसर सृजित करेगी, डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहकारी संस्थाओं का प्रभाव अधिकतम करेगी और परस्पर सहमत परियोजनाओं के माध्यम से सहकारी समितियों की क्षमता निर्माण को बढ़ावा देगी।
- सहकारिता मंत्रालय जन शिकायतों के प्रभावी एवं समयबद्ध निवारण के लिए प्रतिबद्ध है । वर्ष 2025-2026 के दौरान, सहकारिता मंत्रालय ने केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (CPGRAM) के माध्यम से प्राप्त 6130 से अधिक शिकायतों का समयबद्ध तरीके से निपटान किया है I जिससे मंत्रालय को CPGRAM निपटान के लिये श्रेणी- ए में रखा है ।
- बहुराज्य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अधिनियम, 2023 के अधिनियमन के पश्चात् सहकारिता मंत्रालय ने सहकारी शिक्षा निधि (CEF) खाते को भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) से सहकारिता मंत्रालय सफलतापूर्वक हस्तांतरित किया है और इसके प्रबंधन और उपयोग के लिए एक समर्पित संरचना स्थापित की है ।
- डेयरी क्षेत्र में संधारणीयता और चक्रीयता: श्वेत क्रांति 2.0 में जोड़ा गया एक महत्वपूर्ण उद्देश्य डेयरी क्षेत्र में संधारणीयता और चक्रीयता को बढ़ावा देना है । इस उद्देश्य को प्राप्त करने की रणनीति में जलवायु-दक्ष तरीकों, संसाधनों का कुशल उपयोग और कम उत्सर्जन एवं आय सृजन करने वाले परितंत्र के निर्माण के लिए नवीकरणीय समाधानों द्वारा डेयरी मूल्य श्रृंखला में संधारणीयता और चक्रीयता को एकीकृत करना होगा । माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा डेयरी क्षेत्र में संधारणीयता और चक्रीयता पर दिनांक 03.03.2025 को एक कार्यशाला का उद्घाटन किया गया था । डेयरी क्षेत्र में संधारणीयता और चक्रीयता की कार्रवाई "कचरे से कंचन (Gold out of Garbage)" की परिकल्पना द्वारा मार्गदर्शित है ।
- डेयरी क्षेत्र में संधारणीयता और चक्रीयता के अंतर्गत दिनांक 31.12.2025 को सहकारी निविष्टियां और सेवा प्रदाय बहुराज्य लिमिटेड नामक एक बहुराज्य सहकारी समिति को पंजीकृत किया गया है। इस समिति का लक्ष्य किफायती, गुणवत्तापूर्ण निविष्टियों और अनिवार्य सहयोग सेवाओं की समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करके डेयरी पशुओं की उत्पादकता में वृद्धि और डेयरी किसानों की लाभप्रदता में सुधार करना है ।
- डेयरी क्षेत्र में संधारणीयता और चक्रीयता के अंतर्गत दिनांक 31.12.2025 को गोमय सहकारी समिति बहुराज्य लिमिटेड नामक एक अन्य बहुराज्य सहकारी समिति को पंजीकृत किया गया है। इस समिति का लक्ष्य नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों और जैविक उर्वरक के संधारणीय उपयोग का समर्थन करते हुए ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार और आय के अवसर उत्पन्न करने हेतु खाद प्रबंधन प्रथाओं को प्रोत्साहित करना है ।
- सरदार पटेल कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (एसपीसीडीएफ) की स्थापना: माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री द्वारा दिनांक 06.07.2025 को ₹200 करोड़ की प्रारंभिक पूंजी के साथ सरदार पटेल कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (एसपीसीडीएफ) नामक एक नई बहुराज्य सहकारी समिति का शुभारंभ किया गया । एसपीसीडीएफ से 20 राज्यों (जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडु, तेलंगाना) के 20,000 से अधिक गांवों के 20 लाख से अधिक डेयरी किसान एक संगठित सहकारी संरचना के प्रत्यक्ष सदस्य बन सकेंगे । एसपीसीडीएफ के माध्यम से किसानों को आश्वस्त दुग्ध प्रापण, बेहतर पशु चिकित्सा देखभाल, मवेशियों के पोषण में वृद्धि और आधुनिक डेयरी प्रथाओं का लाभ प्राप्त होगा । मजबूत शीत श्रृंखला अवसंरचना, शीतलन केंद्रों और कुशल प्रसंस्करण सुविधाओं में निवेश से गुणवत्ता मानक सशक्त होंगे जो सुरक्षित, स्वच्छ डेयरी उत्पादों की बढ़ती मांग में सहायक होगा ।
- एमपीओ के लिए सहकारी दुग्ध उत्पादक संगठन मल्टी स्टेट लिमिटेड: दिनांक 31.12.2025 को सहकारी दुग्ध उत्पादक संगठन बहुराज्य लिमिटेड के नाम से एक नई मल्टी स्टेट लिमिटेड का पंजीकरण किया गया है । इस समिति का लक्ष्य सहकारी समितियों के अधीन 9 राज्यों (आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल) के मौजूदा दुग्ध संग्रहण बिंदुओं को बहुद्देशीय ग्राम सहकारी समितियों (लगभग 20,000 वीसीएस) के रूप में एकीकृत करना है ।
- केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) के लिए PESB चयन प्रक्रिया में सहकारी परिसंघों की भागीदारी सक्षम बनाना: मंत्रालय की पहल पर राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय परिसंघों के आवेदकों को, लागू विहित पात्रता शर्तों को पूरा करने के अध्यधीन, PESB द्वारा विज्ञापित केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) के बोर्ड-स्तरीय पदों पर “प्राइवेट श्रेणी” के अधीन आवेदन करने की अब अनुमति है जो उन्हें अन्य व्यावसायिक इकाइयों के आवेदकों के समरूप बराबरी का दर्जा देता है ।
- ‘स्टार्ट-अप’ की परिभाषा में सहकारी समितियों को शामिल किया जाना: सहकारिता मंत्रालय की पहल पर बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 के अधीन पंजीकृत बहुराज्य सहकारी समितियों के साथ-साथ राज्य और संघ राज्यक्षेत्र के अधीन पंजीकृत सहकारी समितियों को अब स्टार्ट-अप्स के रूप में मान्यता प्रदान की गई है जो सहकारी समितियों में नवाचार-चालित विकास को बढ़ावा देगी ।
- सहकारी समितियों के संवर्धन के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहकार: कैबिनेट के अनुमोदन से सहकारिता मंत्रालय, भारत गणराज्य की सरकार और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास मंत्रालय (MoSMED), जांबिया गणराज्य की सरकार के बीच एक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित हुआ है । सहकारिता मंत्रालय, भारत गणराज्य की सरकार और मंगोलिया सरकार के बीच सहकारी सिद्धांतों के संवर्धन और संबंधित देशों की सहकारी समितियों में सहयोग हेतु एक अन्य समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित हुआ है । इन व्यवस्थाओं का आशय मैत्रीपूर्ण और परस्पर लाभकारी संबंधों को बढ़ावा देना और सहकारी समितियों के बीच व्यापार गठबंधन विकसित करने के लिए आवश्यक सुविधाएं और प्रणालियां प्रदान करना है ।
यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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AK/AP
(रिलीज़ आईडी: 2287222)
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