आयुष
एनएमपीबी के अंतर्गत औषधीय पादपों का संवर्धन
प्रविष्टि तिथि:
21 JUL 2026 3:56PM by PIB Delhi
आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी), देशभर में "औषधीय पादपों का संरक्षण, विकास एवं सतत प्रबंधन" विषयक केंद्रीय क्षेत्र की योजना का क्रियान्वयन कर रहा है। इस योजना के अंतर्गत औषधीय पादपों की खेती एवं समग्र विकास को बढ़ावा देने हेतु निम्नलिखित गतिविधियों के लिए सहायता प्रदान की जाती है—
- सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) संबंधी गतिविधियाँ, जैसे—प्रशिक्षण, कार्यशालाएँ, संगोष्ठियाँ, सम्मेलन आदि।
- औषधीय पादपों की आपूर्ति श्रृंखला में अग्र एवं पश्च संबंध (एकीकृत घटक) को सुदृढ़ करने हेतु सहायता।
- औषधीय पादपों के स्व-स्थाने तथा बाह्य-स्थाने संरक्षण ।
- संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (जेएफएमसी), पंचायतों/ वन पंचायतों/ जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) तथा स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से आजीविका संबंधी संपर्क (लाइवलीहुड लिंकेज)।
- अनुसंधान एवं विकास।
- औषधीय पादप उत्पादों के संवर्धन, विपणन एवं व्यापार को प्रोत्साहन।
इसके अतिरिक्त, एनएमपीबी, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित क्षेत्रीय-सह-सुविधा केंद्रों (आरसीएफसी) के माध्यम से किसानों/उत्पादकों को औषधीय पादपों की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए गुणवत्तायुक्त रोपण सामग्री (क्यूपीएम) उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही, इन आरसीएफसी के माध्यम से समय-समय पर अच्छी कृषि पद्धतियों (जीएपीएस) तथा अच्छी क्षेत्रीय संग्रहण पद्धतियों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं कार्यशालाओं का भी आयोजन किया जाता है।
इसके अलावा, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 की अवधि के दौरान देशभर में औषधीय पादपों की खेती को बढ़ावा देने हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रमों, संगोष्ठियों एवं कार्यशालाओं के आयोजन के लिए 1,186.91 लाख रूपये की राशि की 152 परियोजनाओं को अनुमोदित किया है। राज्यवार विवरण संलग्नक-। पर है।
(ख): कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, एकीकृत बागवानी विकास मिशन एमआईडीएच के अंतर्गत देशभर में औषधीय पादपों सहित बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास हेतु एक केंद्र प्रायोजित योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत किसानों/लाभार्थियों को अल्पावधि (गैर-बारहमासी प्रकृति के) तथा गैर-वृक्षीय औषधीय पादपों की खेती के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। लागत मानकों तथा सहायता के स्वरूप का विवरण संलग्नक-II पर है।
(घ): आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एनएमपीबी द्वारा "औषधीय पादपों के संरक्षण, विकास एवं सतत प्रबंधन संबंधी केंद्रीय क्षेत्र योजना" के अंतर्गत राज्य वन विभागों को परियोजना-आधारित वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह सहायता वन क्षेत्रों में औषधीय पादपों के संरक्षण, संसाधन संवर्धन/रोपण तथा स्व-स्थाने संरक्षण, स्व-स्थाने/बाह्य-स्थाने संसाधन संवर्धन एवं एफएमसीएस/पंचायतों/वन पंचायतों/एसएचजीएस/ बीएमसीएस आदि के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है ताकि मूल्य संवर्धन, सुखाने (ड्राइंग), भंडारण (वेयरहाउसिंग), विपणन अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण आदि के लिए स्थानीय क्लस्टरों की स्थापना हो सके और इन वन-सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले समुदायों के लिए अजीविका के साधन उपलब्ध हो सकें। गत पाँच वर्षों के दौरान इन घटकों के अंतर्गत 15 नई परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनके लिए 3,363.24 लाख रुपये की अनुदान सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके अतिरिक्त, एनएमपीबी, आयुष मंत्रालय देशभर के सरकारी एवं निजी विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों तथा अन्य संगठनों के माध्यम से औषधीय पादपों के विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को भी समर्थन प्रदान करता है। पिछले पाँच वर्षों में औषधीय पादपों के संरक्षण, विकास एवं सतत उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 57 परियोजनाओं को सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा, औषधीय पादपों की आपूर्ति श्रृंखला में अग्र एवं पश्च संबंध – (एकीकृत घटक) के अंतर्गत एनएमपीबी ने वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान देशभर में 12 परियोजनाओं को समर्थन प्रदान किया है। इन परियोजनाओं के अंतर्गत जारी की गई निधियों का विवरण संलग्नक-III पर है।
आईईसी गतिविधियों के माध्यम से औषधीय पादपों की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एनएमपीबी, आयुष मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान देशभर में प्रशिक्षण कार्यक्रमों, संगोष्ठियों एवं कार्यशालाओं के आयोजन हेतु 152 परियोजनाओं को 1,186.91 लाख रूपये की वित्तीय सहायता के साथ स्वीकृति प्रदान की है। इन परियोजनाओं का राज्यवार विवरण संलग्नक-I पर है।
संलग्नक-I
|
वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) गतिविधियों के अंतर्गत राज्यवार स्वीकृत एवं जारी की गई निधि का विवरण।
|
|
क्रम संख्या
|
राज्य/ संघ राज्य क्षेत्र
|
वर्ष
|
स्वीकृत परियोजनओं की संख्या
|
स्वीकृत राशि (लाख रूपये में)
|
जारी की गई राशि (लाख रूपये में)
|
|
2021-22
|
2022-23
|
2023-24
|
2024-25
|
2025-26
|
|
1
|
आंध्र प्रदेश
|
1
|
1
|
0
|
2
|
1
|
5
|
51
|
43
|
|
2
|
अरुणाचल प्रदेश
|
0
|
1
|
0
|
0
|
0
|
1
|
14.2
|
14.2
|
|
3
|
असम
|
3
|
3
|
2
|
0
|
1
|
9
|
131.14
|
126.14
|
|
4
|
चंडीगढ़
|
0
|
0
|
0
|
0
|
1
|
1
|
20
|
0
|
|
5
|
छत्तीसगढ़
|
0
|
1
|
0
|
0
|
0
|
1
|
29.5
|
29.5
|
|
6
|
दिल्ली
|
5
|
6
|
1
|
3
|
3
|
18
|
134.611
|
129.611
|
|
7
|
गुजरात
|
0
|
0
|
1
|
1
|
3
|
5
|
51
|
18.81
|
|
8
|
हरियाणा
|
0
|
1
|
1
|
1
|
1
|
4
|
11
|
9
|
|
9
|
हिमाचल प्रदेश
|
0
|
0
|
1
|
1
|
1
|
3
|
31.575
|
22.545
|
|
10
|
जम्मू एवं कश्मीर
|
0
|
0
|
4
|
0
|
0
|
4
|
36.91
|
26.91
|
|
11
|
झारखंड
|
0
|
3
|
0
|
0
|
0
|
3
|
11.8
|
11.8
|
|
12
|
कर्नाटक
|
3
|
2
|
0
|
3
|
1
|
9
|
119.875
|
99.875
|
|
13
|
केरल
|
0
|
2
|
2
|
0
|
0
|
4
|
22
|
22
|
|
14
|
लद्दाख
|
0
|
2
|
0
|
1
|
0
|
3
|
15
|
15
|
|
15
|
मध्य प्रदेश
|
4
|
3
|
0
|
1
|
1
|
9
|
77.4
|
68.4
|
|
16
|
महाराष्ट्र
|
0
|
2
|
1
|
1
|
1
|
5
|
19
|
14
|
|
17
|
मणिपुर
|
0
|
1
|
0
|
0
|
1
|
2
|
13
|
10
|
|
18
|
मेघालय
|
0
|
0
|
0
|
1
|
0
|
1
|
2
|
2
|
|
19
|
मिजोरम
|
0
|
1
|
0
|
0
|
0
|
1
|
5
|
5
|
|
20
|
ओडिशा
|
3
|
1
|
2
|
0
|
3
|
9
|
27.25
|
12.25
|
|
21
|
पंजाब
|
1
|
1
|
2
|
0
|
0
|
4
|
30
|
30
|
|
22
|
राजस्थान
|
0
|
0
|
1
|
3
|
2
|
6
|
36.85
|
21.85
|
|
23
|
तमिलनाडु
|
3
|
9
|
4
|
5
|
4
|
25
|
116.85
|
91.85
|
|
24
|
तेलंगाना
|
0
|
0
|
1
|
0
|
1
|
2
|
15
|
10
|
|
25
|
उत्तर प्रदेश
|
2
|
1
|
3
|
0
|
3
|
9
|
80.8
|
49.8
|
|
26
|
उत्तराखंड
|
0
|
1
|
3
|
0
|
0
|
4
|
30
|
20
|
|
27
|
पश्चिम बंगाल
|
1
|
3
|
0
|
1
|
0
|
5
|
54.15
|
45
|
|
कुल
|
26
|
45
|
29
|
24
|
28
|
152
|
1186.91
|
948.54
|
संलग्नक-II
|
घटक का नाम
|
लागत मानदंड
|
सहायता का स्वरूप
|
|
औषधीय पादप (मुलेठी, शतावरी, कालीहारी, सफेद मूसली, गुग्गुलु, मंजीष्ठा, कुटकी, अतीस, जटामांसी, अश्वगंधा, ब्राह्मी, तुलसी, विदारीकंद, पिप्पली, चिरायता, पुष्करमूल)
|
1.50 लाख रूपये प्रति हेक्टेयर
|
सामान्य क्षेत्रों में रोपण सामग्री तथा समेकित पोषक तत्त्व प्रबंधन/समेकित कीट प्रबंधन आदि के लिए आवश्यक (आईएनएम/आईपीएम) की लागत पर होने वाले व्यय की पूर्ति हेतु अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 40% सहायता आनुपातिक (प्रो-राटा) आधार पर 60:40 के अनुपात में दो किश्तों में प्रदान की जाएगी।
पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों, अनुसूचित क्षेत्रों (जनजातीय उपयोजना क्षेत्रों सहित), वाइब्रेंट विलेज, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप द्वीप समूह के मामलों में अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 50% सहायता आनुपातिक (प्रो-राटा) आधार पर प्रदान की जाएगी।
|
संलग्नक-III
पिछले पाँच वर्षों के दौरान देश में "औषधीय पादपों का संरक्षण, विकास एवं सतत प्रबंधन" संबंधी केंद्रीय क्षेत्र की योजना के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं एकीकृत घटक तथा जारी की गई निधियों का राज्य/संघ राज्यक्षेत्र-वार विवरण।
|
क्र संख्या
|
वित्तीय वर्ष
|
राज्य
|
कुल अनुमोदित राशि (लाख रुपए में)
|
जारी की गई राशि (लाख रुपए में)
|
-
|
2023-24
|
आंध्र प्रदेश
|
120.00
|
84.00
|
-
|
2023-24
|
जम्मू एवं कश्मीर
|
82.50
|
57.75
|
-
|
2023-24
|
मिजोरम
|
120.00
|
84.00
|
-
|
2023-24
|
उत्तराखंड
|
120.00
|
84.00
|
-
|
2024-25
|
कर्नाटक
|
120.00
|
84.00
|
-
|
2024-25
|
तमिल नाडु
|
95.00
|
67.00
|
-
|
2024-25
|
केरल
|
120.00
|
84.00
|
-
|
2024-25
|
मध्य-प्रदेश
|
119.95
|
84.00
|
-
|
2025-26
|
राजस्थान
|
120.00
|
84.00
|
-
|
2025-26
|
राजस्थान
|
120.00
|
84.00
|
-
|
2025-26
|
उत्तर-प्रदेश
|
120.00
|
84.00
|
-
|
2025-26
|
उत्तर-प्रदेश
|
100.00
|
70.00
|
यह जानकारी केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी है।
***
SR/SV/SG
(रिलीज़ आईडी: 2287112)
आगंतुक पटल : 106