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बांध पुनर्वास: नीति और प्रौद्योगिकी के जरिए बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करना

प्रविष्टि तिथि: 15 MAY 2026 1:32PM by PIB Delhi

 

6628 निर्दिष्ट बांधों के साथ भारत दुनिया भर में बड़े बांधों के मामले में तीसरे स्थान पर है। 26 प्रतिशत से अधिक बांध 50 वर्ष से अधिक पुराने हैं, जिसके लिए व्यवस्थित पुनर्वास और सुरक्षा उन्नयन की आवश्यकता है। बांध सुरक्षा और परिचालन प्रदर्शन में सुधार के लिए बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (डीआरआईपी) को चरणों में कार्यान्वित किया जा रहा है। बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के तहत बांध की विफलता से संबंधित आपदाओं की रोकथाम के लिए निर्दिष्ट बांध की निगरानी, निरीक्षण, संचालन और रखरखाव प्रदान किया जाता है। यह उनके सुरक्षित कामकाज को सुनिश्चित करने और उससे जुड़े या उसके आनुषंगिक मामलों के लिए एक संस्थागत तंत्र भी प्रदान करता है। इंस्ट्रूमेंटेशन और अर्ली वार्निंग सिस्टम के साथ धर्म (डीएचएआरएम) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म तत्क्षण निगरानी और डेटा-संचालित बांध सुरक्षा प्रबंधन को मजबूत कर रहे हैं।

 

परिचय

भारत के बांध सिंचाई, जल विद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, पेयजल आपूर्ति और समग्र जल सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दशकों से, बांधों ने देश भर में कृषि विकास, औद्योगिक विकास और सामाजिक-आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

जैसे-जैसे बड़ी संख्या में बांध पुराने पड़ते जाते हैं और जलवायु परिवर्तनशीलता बढ़ती है, उनके पुनर्वास, परिचालन सुरक्षा और दीर्घकालिक सुदृढ़ता का मुद्दा महत्वपूर्ण हो जाता है। भारत सरकार संरचनात्मक पुनर्वास, संस्थागत सुधारों, डिजिटल निगरानी प्रणालियों और जोखिम-आधारित सुरक्षा प्रबंधन के संयोजन के माध्यम से इस मुद्दे पर काम करती है।

भारत में बांधों की स्थिति

भारत आज विश्व स्तर पर सबसे बड़े बांध श्रेणियों में से एक का प्रबंधन करता है। यह 6628 निर्दिष्ट बांधों के साथ दुनिया में तीसरे स्थान पर है, जिनमें से 6,545 चालू हैं और 83 बांध निर्माणाधीन हैं।  इन बांधों की सकल जल भंडारण क्षमता लगभग 330 अरब क्यूबिक मीटर है। वे राष्ट्रीय खाद्य, ऊर्जा और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

इन बांधों में से लगभग 26 प्रतिशत (1,681 बांध) 50 वर्ष से अधिक पुराने हैं। इसमें 291 वैसे बांध शामिल हैं जो 100 साल से अधिक पुराने हैं। लगभग 42 प्रतिशत बांध 25 से 50 वर्ष पुराने हैं। भारत का सबसे पुराना बांध तमिलनाडु में कल्लनई (ग्रैंड एनीकट) लगभग 2,000 वर्षों से काम कर रहा है जो स्थायी इंजीनियरिंग और रखरखाव का मिसाल है।

इनमें से लगभग 98.5 प्रतिशत यानी 6,448 बांध हैं जो राज्य सरकारों के स्वामित्व में हैं। केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में 49 बांध या 0.7 प्रतिशत हैं; निजी संस्थाओं के पास 0.6 प्रतिशत या 36 बांध हैं, और केंद्र सरकार के पास 0.2 प्रतिशत या 12 बांध हैं। महाराष्ट्र में सबसे अधिक निर्दिष्ट बांध हैं, इसके बाद मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, राजस्थान, कर्नाटक और ओडिशा का स्थान आता है।

पुराने बुनियादी ढांचे, अवसादन, बदलते हाइड्रोलॉजिकल पैटर्न और बढ़ती जलवायु परिवर्तनशीलता को देखते हुए व्यवस्थित पुनर्वास और सुरक्षा प्रबंधन की आवश्यकता है। भारत में 439 जलाशयों के विश्लेषण (सीडब्ल्यूसी डेटा) से पता चलता है कि औसतन 42 वर्ष पुराने जलाशय के साथ सकल भंडारण क्षमता का औसतन 19 प्रतिशत नुकसान होता है। भंडारण की औसत वार्षिक हानि 0.74 प्रतिशत अनुमानित है, जो प्रति वर्ष लगभग 1.81 एमसीएम प्रति जलाशय के बराबर है।

 

बांध पुनर्वास और सुधार कार्यक्रम (डीआरआईपी)

बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (डीआरआईपी) जैसी प्रमुख पहल को संरचनात्मक मरम्मत, स्पिलवे और गेटों के आधुनिकीकरण और उन्नत निगरानी प्रणालियों की स्थापना के माध्यम से मौजूदा बांधों की सुरक्षा और परिचालन प्रदर्शन में सुधार करने के लिए तीन चरणों में कार्यान्वित किया जा रहा है। डीआरआईपी विश्व स्तर पर सबसे बड़े बांध पुनर्वास कार्यक्रमों में से एक है, जो बांध सुरक्षा प्रबंधन के लिए एक व्यवस्थित और जोखिम-आधारित दृष्टिकोण की ओर भारत के बदलाव को दर्शाता है।

बांध पुनर्वास और सुधार कार्यक्रम (डीआरआईपी) चरण 1 (2012-2021)

डीआरआईपी चरण 1 को विश्व बैंक की मदद से अप्रैल 2012 में शुरू किया गया था। इस कार्यक्रम में सात राज्यों- झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु और उत्तराखंड के 223 बांधों को शामिल किया गया। इस कार्यक्रम ने इसमें शामिल राज्यों और एजेंसियों में बांध सुरक्षा प्रथाओं और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसमें 144 बांधों के पुनर्वास कार्यों के साथ 223 बांधों के लिए बाढ़ की समीक्षा की डिजाइन, बांध स्वास्थ्य निरीक्षण और पुनर्वास प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया गया और 223 बांधों के लिए इसका कार्यान्वयन पूरा किया गया हैयह कार्यक्रम निम्नलिखित पर केंद्रित था:

  • बांध संरचनाओं का पुनर्वास और आधुनिकीकरण।
  • बांध सुरक्षा निरीक्षण और मूल्यांकन।
  • आपातकालीन कार्य योजनाओं (ईएपी) का विकास।
  • क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम।
  • बांध स्वास्थ्य और पुनर्वास निगरानी अनुप्रयोग (डीएचएआरएमए- धर्म) का परिचय।

बांध पुनर्वास और सुधार कार्यक्रम (डीआरआईपी) चरण II और III

डीआरआईपी चरण II और III अक्टूबर, 2021 में शुरू हुआ। चरण- II योजना को विश्व बैंक और एआईआईबी ने सह-वित्तपोषित किया है। कुल परियोजना परिव्यय 10,211 करोड़ रुपये है (चरण II: 5,107 करोड़ रुपये; चरण III: 5,104 करोड़ रुपये), जिसमें 7,000 करोड़ रुपये बाहरी ऋण के रूप में और 3,211 करोड़ रुपये भाग लेने वाले राज्य और केंद्रीय एजेंसियां वहन करेंगी चरण II और III दोनों 10 वर्षों तक चलेगा, प्रत्येक चरण दो वर्षों के ओवरलैप के साथ छह वर्षों तक जारी रहेगा। 191 बांधों के लिए 5,053 करोड़ रुपये की राशि के पुनर्वास प्रस्तावों (परियोजना स्क्रीनिंग टेम्पलेट - पीएसटी) को मंजूरी दी गई है। 31 मार्च 2025 तक डीआरआईपीआई के तहत कुल व्यय 2,225 करोड़ रुपये है, जिसमें 43 बांधों पर प्रमुख भौतिक पुनर्वास कार्य पूरे किए गए हैं।

इस योजना में 19 राज्यों और तीन केंद्रीय एजेंसियों (सीडब्ल्यूसी, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड और दामोदर घाटी निगम) में 736 बांध शामिल हैं। डीआरआईपी चरण II और III के तहत सुरक्षा सुधार के लिए नियोजित प्रमुख बांधों में भाखड़ा बांध (हिमाचल प्रदेश), रंजीत सागर बांध (पंजाब), एनटीआर सागर बांध (तेलंगाना), नागार्जुन सागर बांध (तेलंगाना), गांधी सागर बांध (मध्य प्रदेश), कडाना (गुजरात), जिरगो बांध (उत्तर प्रदेश), इम्फाल बैराज (मणिपुर), मिंत्दू लेश्का बांध (मेघालय), सिलाबती बैराज (पश्चिम बंगाल) और गायत्री बांध (पश्चिम बंगाल) शामिल हैं।

बांध पुनर्वास और सुधार कार्यक्रम (डीआरआईपी) चरण II और III के चार घटक हैं:

  1. सुरक्षा और प्रदर्शन में सुधार के लिए बांधों और संबंधित संरचनाओं का पुनर्वास।
  2. राज्य और केंद्रीय स्तर पर बांध सुरक्षा प्रणालियों को बढ़ाने के लिए संस्थागत सुदृढ़ीकरण।
  3. स्थायी संचालन और रखरखाव का समर्थन करने के लिए राजस्व सृजन के उपाय।
  4. प्रभावी कार्यान्वयन के लिए परियोजना प्रबंधन।

संस्थागत ढांचा: बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021

बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 30 दिसंबर 2021 को लागू हुआइस अधिनियम के तहत, देश भर में निर्दिष्ट बांधों की निगरानी, निरीक्षण, संचालन और रखरखाव के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है। अधिनियम के तहत, एक निर्दिष्ट बांध उस बांध को कहते हैं जो ऊंचाई में 15 मीटर से अधिक है, या ऊंचाई में 10 से 15 मीटर के बीच है यदि यह निर्धारित तकनीकी मानदंडों को पूरा करता है। अधिनियम के तहत विभिन्न प्रावधानों का अनुपालन अब निश्चित समयसीमा के साथ बांध मालिकों का वैधानिक दायित्व बन गया है। 

इसमें एक चार-स्तरीय संस्थागत तंत्र स्थापित किया गया है जिसमें शीर्ष निकाय के रूप में बांध सुरक्षा पर राष्ट्रीय समिति (एनसीडीएस), नियामक और कार्यान्वयन शाखा के रूप में राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए), बांध सुरक्षा पर राज्य समितियां (एससीडीएस), और राज्य स्तर पर निगरानी, निरीक्षण और अनुपालन के लिए जिम्मेदार राज्य बांध सुरक्षा संगठन (एसडीएसओ) शामिल हैं। सभी 31 बांध स्वामित्व वाले राज्यों ने एसडीएसओ का गठन किया है।

इस अधिनियम में नियमित निरीक्षण, इंस्ट्रूमेंटेशन सिस्टम की स्थापना, व्यापक बांध सुरक्षा मूल्यांकन, जोखिम मूल्यांकन अध्ययन, अंतर्वाह पूर्वानुमान, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, जलाशयों का एकीकृत संचालन, खतरे की क्षमता और संचालन और रखरखाव मैनुअल तथा आपातकालीन कार्य योजना (ईएपी) तैयार करने सहित प्रमुख सुरक्षा प्रावधानों को अनिवार्य किया गया है। इसमें बांध मालिकों पर रखरखाव और मरम्मत के लिए पर्याप्त धन आवंटित करने की जिम्मेदारी भी डाली गई है, ताकि सुरक्षा अनुपालन को निरंतर वित्तीय प्रावधान से जोड़ा जा सके।

कुछ प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं:

  • बांध स्वास्थ्य और पुनर्वास निगरानी अनुप्रयोग (धर्म) प्लेटफॉर्म पर सभी 6,628 निर्दिष्ट बांधों का पंजीकरण
  • बेहतर बांध सुरक्षा निगरानी और डेटा प्रबंधन के लिए धर्म वेब-आधारित प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्लिकेशन का शुभारंभ।
  • सालाना लगभग 13,000 बांधों का निरीक्षण जिनका रिकॉर्ड डिजिटल रूप में दर्ज किया गया है।
  • वेब-आधारित मूल्यांकन उपकरण का उपयोग करके देश भर में निर्दिष्ट बांधों की त्वरित जोखिम जांच का कार्यान्वयन। अब तक, 5553 निर्दिष्ट बांधों के लिए यह काम पूरा हो गया है।
  • बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के तहत आधिकारिक राजपत्र में 20 विनियमों का प्रकाशन।
  • एमएनआईटी जयपुर में राष्ट्रीय बांध भूकंप सुरक्षा केंद्र की स्थापना

बांध सुरक्षा पर राष्ट्रीय समिति (एनसीडीएस)

एनसीडीएस, बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के तहत शीर्ष नीति निकाय है, जो देश भर में एक समान बांध सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए नीतियां तैयार करने और नियमों की सिफारिश करने के लिए जिम्मेदार है। यह बांध की विफलता से संबंधित आपदाओं को रोकने और बांध सुरक्षा के मानकों को बनाए रखने के लिए आवश्यक होने वाले पहली अनुसूची में निर्दिष्ट कार्यों का निर्वहन करता है। यह बांध से संबंधित आपदाओं को रोकने के लिए तकनीकी और नियामक मानक स्थापित करके राष्ट्रीय बांध सुरक्षा ढांचे का मार्गदर्शन करता है। फरवरी 2022 में अपने गठन के बाद से, एनसीडीएस ने ग्यारह (11) बैठकें की हैं और बांध सुरक्षा के लिए नियामक ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए)

एनडीएसए निर्दिष्ट बांधों की उचित निगरानी, निरीक्षण और रखरखाव के लिए राष्ट्रीय समिति द्वारा विकसित नीति, दिशानिर्देशों और मानकों को लागू करने के लिए दूसरी अनुसूची में निर्दिष्ट ऐसे कार्यों का निर्वहन करेगा जो आवश्यक हो सकते हैं

 

 

"बांध मालिक" का अर्थ है केंद्र सरकार या राज्य सरकार या एक अथवा एक से अधिक सरकारों या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या स्थानीय प्राधिकरण या कंपनी और सभी ऐसे व्यक्ति या संगठन जो संयुक्त रूप से एक निर्दिष्ट बांध का स्वामित्व, नियंत्रण, संचालन या रखरखाव करते हैं।

राज्य स्तरीय संस्थान और बांध मालिक

बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021, बांध सुरक्षा पर राज्य समितियों (एससीडीएस) के गठन और राज्य बांध सुरक्षा संगठनों (एसडीएसओ) की स्थापना को अनिवार्य करता है। निर्दिष्ट बांधों के स्वामित्व वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अधिनियम के अनुसार एससीडीएस और एसडीएसओ की स्थापना की है। एसडीएसओ  अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर सभी निर्दिष्ट बांधों की सतत निगरानी, निरीक्षण और निगरानी के लिए जिम्मेदार हैं इसके साथ ही, यह बांध डेटाबेस का रखरखाव; एनडीएसए द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार बांधों की भेद्यता और जोखिम वर्गीकरण; और बांध मालिकों के लिए सुधारात्मक सुरक्षा उपायों की सिफारिश के लिए भी जिम्मेदार हैं।

बांध मालिक इस अधिनियम के अंतर्गत विभिन्न कार्यकलापों के लिए बाध्य हैं जिनमें अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित शामिल हैं

  • प्रत्येक बांध पर एक बांध सुरक्षा इकाई स्थापित करना
  • मॉनसून से पहले और मॉनसून के बाद निरीक्षण करना, साथ ही किसी भी आपदा या संकट के संकेत के दौरान या बाद में निरीक्षण करना।
  • रखरखाव और मरम्मत के लिए धनराशि निर्धारित करना
  • आपातकालीन कार्य योजना तैयार करना
  • निर्दिष्ट अंतराल पर जोखिम मूल्यांकन अध्ययन करना
  • तकनीकी दस्तावेज संकलित करना
  • नियमित अंतराल पर विशेषज्ञ पैनलों के जरिए व्यापक बांध सुरक्षा मूल्यांकन करना।
  • जल-मौसम विज्ञान स्टेशनों और भूकंप विज्ञान स्टेशनों की स्थापना।
  • बांध सुरक्षा के लिए उपकरणों की स्थापना
  • पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करना

 

अनिवार्य निरीक्षण

बांध मालिकों को 24.04.2024 को अधिसूचित विनियमन के अनुसार, सभी निर्दिष्ट बांधों का मॉनसून पूर्व और मॉनसून के बाद निरीक्षण करना अनिवार्य है मॉनसून से पहले और बाद के निरीक्षणों के आधार पर, उन्हें तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। श्रेणी I उन महत्वपूर्ण कमियों को इंगित करता है जिनका समाधान न करने पर बांध विफल हो सकता है। श्रेणी II में बड़ी कमियों वाले बांध शामिल हैं, जिनके लिए त्वरित उपचारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है। श्रेणी III में मामूली या बिना किसी कमी वाले बांधों को शामिल किया गया है। वर्ष 2025 के लिए मॉनसून के बाद के निरीक्षणों के आधार पर, श्रेणी I के अंतर्गत 3 बांध आते हैं और श्रेणी II के अंतर्गत 188 बांध आते हैं। बांध की श्रेणी के आधार पर, बांध मालिक समयबद्ध तरीके से उपयुक्त उपचारात्मक उपाय करते हैं।

क्षमता विकास

भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंलुरू में बांधों के व्यापक जोखिम मूल्यांकन और फोकस क्षेत्रों के रूप में उन्नत निर्माण एवं पुनर्वास और बांधों के लिए सामग्री परीक्षण के साथ आईआईटी रुड़की में बांध सुरक्षा पर उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) स्थापित किए जा रहे हैंएमएनआईटी जयपुर में बांधों की राष्ट्रीय भूकंप सुरक्षा केंद्र भी स्थापित किया जा रहा है 2021-22 से आईआईटी रुड़की और आईआईएससी बेंगलुरु में बांध सुरक्षा पर एम.टेक कार्यक्रम भी शुरू हुआ।

अपराध और दंड

अधिनियम के अध्याय X में इस अधिनियम के तहत केंद्र सरकार या राज्य सरकार या राष्ट्रीय समिति या प्राधिकरण या राज्य समिति या राज्य बांध सुरक्षा संगठन द्वारा या उसकी ओर से दिए गए किसी भी निर्देश का पालन करने में किसी भी बाधा और इनकार के लिए अपराध और दंड का प्रावधान है। दंड में एक अवधि के लिए कारावास शामिल है जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है या जुर्माने के साथ, या दोनों के साथऔर, यदि इस तरह की बाधा या निर्देशों का पालन करने से इनकार करने से जीवन की हानि या आसन्न खतरा होता है, तो एक अवधि के लिए कारावास से दंडनीय होगा जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है।

आगे का मार्ग

दशकों से निर्मित भारत का व्यापक बांध नेटवर्क अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को रेखांकित करता है। जैसे-जैसे ये बांध पुराने होते गए और परिवर्तनशील जलवायु परिस्थितियों में काम करते हैं, सरकार का ध्यान बांधों को विस्तार देने से हटकर इनकी सुरक्षा, लचीलापन और जीवनचक्र प्रबंधन पर स्थानांतरित हो गया है। डीआरआईपी जैसे बड़े पैमाने पर कार्यक्रमों का अभिसरण, बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के तहत वैधानिक निरीक्षण और धर्म जैसे डिजिटल उपकरणों का उपयोग भारत में एक परिपक्व बांध सुरक्षा प्रणाली को दर्शाता है। साथ में, ये पहल बांध सुरक्षा को मजबूत करती हैं, पुराने बुनियादी ढांचे के प्रदर्शन में सुधार करती हैं और उभरते जोखिमों के प्रति सतर्कता बढ़ाती हैं।

 

संदर्भ

जल शक्ति मंत्रालय

सिंचाई और जल निकासी पर अंतर्राष्ट्रीय आयोग

विश्व बैंक

अन्य

पीआईबी रिसर्च

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पीके/केसी/एके/एनजे

 

 


(रिलीज़ आईडी: 2261339) आगंतुक पटल : 69
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