स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली के 51वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित किया
श्री राधाकृष्णन: एम्स नई दिल्ली पिछले 70 वर्षों से चिकित्सा नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है। इसने बेहद किफायती सुविधाओं देते हुए रोगी देखभाल और आधुनिक चिकित्सा के उच्चतम मानक स्थापित किए हैं
श्री राधाकृष्णन ने आगे कहा, "एम्स ने अपने विश्वास और दृढ़ता के बल पर एक ब्रांड खड़ा किया है, जिसका प्रमाण कोविड महामारी के दौरान और चिकित्सा नवाचार में इसकी अग्रणी भूमिका है"
उपराष्ट्रपति ने अंटार्कटिका के मैत्री अनुसंधान केंद्र में एक व्यक्ति पर विश्व का पहला लाइव, रिमोट टेली-रोबोटिक अल्ट्रासाउंड परीक्षण करके इस वर्ष एम्स की टीम द्वारा हासिल की गई प्रभावशाली उपलब्धि का खास तौर पर ज़िक्र किया
उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से एम्स की प्रतिष्ठित विरासत को बनाए रखने और न केवल दुनिया के साथ कदम मिलाकर चलने, बल्कि वास्तव में चिकित्सा के भविष्य की दिशा तय करने का भी आह्वान किया
एम्स, नई दिल्ली हमेशा से ही एक शैक्षणिक केंद्र या अस्पताल से कहीं अधिक रहा है। यह अपने आप में एक ब्रांड है: श्री जे.पी. नड्डा
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने देशभर में उभरते एम्स संस्थानों को खड़ा करने में एम्स छात्रों की अधिक जिम्मेदारी पर जोर दिया
“केंद्र सरकार 2025-2029 के बीच देश में स्नातक और स्नातकोत्तर की 10,000 और सीटें सृजित करेगी”
प्रविष्टि तिथि:
12 MAY 2026 7:18PM by PIB Delhi
भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री सी पी राधाकृष्णन ने आज केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा की उपस्थिति में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली के 51वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “पिछले 70 वर्षों से एम्स, नई दिल्ली चिकित्सा नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है। इसने रोगी देखभाल और आधुनिक चिकित्सा के उच्चतम मानक स्थापित किए हैं, साथ ही साथ यह बेहद किफायती सुविधाएं भी प्रदान कर रहा है।” उन्होंने कहा कि, “एम्स ने विश्वास और दृढ़ता के साथ खुद को एक ब्रांड के तौर पर स्थापित किया है, जिसका प्रमाण कोविड महामारी के दौरान और चिकित्सा नवाचार में इसकी अग्रणी भूमिका है।”
श्री राधाकृष्णन ने ज़ोर देते हुए कहा कि एम्स प्रतिवर्ष 50 लाख बाह्य रोगियों का इलाज कर रहा है और बेहद गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं के साथ रोगी देखभाल के नए मानक स्थापित कर रहा है और यहां गरीब मरीजों को भी सर्वोत्तम चिकित्सा उपचार और देखभाल मिल रही है। उन्होंने कहा, “कई देशों की जनसंख्या भी इतनी नहीं है, इसलिए एम्स नई दिल्ली के चिकित्सा समुदाय द्वारा दी जाने वाली सेवा वास्तव में कहीं भी अतुलनीय है।” उन्होंने यह भी बताया कि एम्स के चिकित्सा पेशेवरों ने न केवल देश में बल्कि विश्व भर के प्रतिष्ठित संस्थानों में शीर्ष पदों को प्राप्त किया है।

उपराष्ट्रपति ने इस वर्ष एम्स की टीम द्वारा अंटार्कटिका के मैत्री अनुसंधान केंद्र में एक व्यक्ति पर किए गए विश्व के पहले लाइव, रिमोट टेली-रोबोटिक अल्ट्रासाउंड के ज़रिए प्रौद्योगिकी और दृढ़ता के शानदार प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा, “12,000 किलोमीटर दूर से, हमारे विशेषज्ञों ने एआई संचालित रोबोटिक्स का उपयोग करते हुए, बर्फ से जमे एक महाद्वीप के बीच की दूरी को खत्म करते हुए यह साबित कर दिया कि भौगोलिक स्थितियां अब जीवन को बचाने की राह में बाधा नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “इसके अलावा, स्वास्थ्य में एआई के लिए भारत-फ्रांस केंद्र का उद्घाटन नैदानिक नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में हमारी स्थिति को मजबूत करता है, जहां दोनों देशों के प्रतिभाशाली दिमाग अब मस्तिष्क स्वास्थ्य और डिजिटल चिकित्सा को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग करेंगे।”
उपराष्ट्रपति ने एम्स परिवार के योगदान को भी रेखांकित किया, जिसे वर्षों से लगातार प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता रहा है, जिनमें 2 पद्म विभूषण, 15 पद्म भूषण और 51 पद्म श्री शामिल हैं। उन्होंने वैश्विक स्तर पर एम्स की प्रसिद्धि पर भी प्रकाश डाला, जिसमें एम्स नई दिल्ली के 56 वैज्ञानिक 2025 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में शामिल हैं।
स्वास्थ्य सेवा से जुड़े ढ़ांचे के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए, श्री राधाकृष्णन ने कहा कि पिछले एक दशक में देश भर में नए एम्स संस्थानों की स्थापना से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच मजबूत हुई है, खासकर कम सुविधाओं वाले क्षेत्रों में। उन्होंने कहा, “देश के हर कोने में एम्स का विस्तार देश के एकीकरण का प्रतीक है।”
उपराष्ट्रपति ने छात्रों और अभिभावकों को उनके अथक त्याग, मेहनत और अनुशासन के लिए बधाई देते हुए अपना संबोधन समाप्त किया। उन्होंने कहा, “आप एक ऐसे संस्थान से स्नातक हो रहे हैं, जो न केवल दुनिया के बाकी हिस्सों के साथ कदम मिलाकर चल रहा है, बल्कि वास्तव में चिकित्सा के भविष्य की दिशा भी तय कर रहा है। एआई-आधारित निदान से लेकर नैदानिक नैतिकता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने तक, आपने यहां जो कौशल हासिल किए हैं, वे भारतीय स्वास्थ्य सेवा को बदलने के लिए ज़रुरी उपकरण हैं।”
भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थान से स्नातक होने वाले छात्रों को बधाई देते हुए श्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा, “यह दीक्षांत समारोह केवल एक समापन समारोह नहीं है, बल्कि यह पिछले सात दशकों की निस्वार्थ सेवा को डिजिटल युग से संचालित भविष्य से जोड़ने वाला एक सेतु है।” उन्होंने कहा कि, “एम्स नई दिल्ली शुरू से ही एक शैक्षणिक केंद्र या अस्पताल से कहीं अधिक रहा है। यह अपने आप में एक ब्रांड है।” इस संदर्भ में, उन्होंने एम्स नई दिल्ली के छात्रों पर निहित बड़ी जिम्मेदारी पर जोर दिया, जिन्हें देश भर में उभरते हुए एम्स संस्थानों का मार्गदर्शन और समर्थन करने का महत्वपूर्ण कार्य सौंपा गया है।

एम्स में अनुसंधान के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता का ज़िक्र करते हुए, श्री नड्डा ने कहा, “एम्स नई दिल्ली वर्तमान में 300 करोड़ रुपये की निधि के साथ 900 से अधिक बाह्य अनुसंधान परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है। इसके अलावा, 150 से अधिक आंतरिक शोध कार्य भी चल रहे हैं।”
श्री नड्डा ने कहा कि एम्स नई दिल्ली ने उत्कृष्टता की अनुशासित संस्कृति के कारण एनआईआरएफ में लगातार प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो हर वार्ड और कक्षा में व्याप्त है। उन्होंने बताया कि नवीनतम क्यूएस विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग में, एम्स नई दिल्ली ने दो साल पहले के 145वें स्थान से छलांग लगाकर चिकित्सा क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर 105वां स्थान हासिल किया है, जिससे भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थान के रूप में इसका स्थान मजबूत हुआ है और अब यह वैश्विक शीर्ष 100 में शामिल होने के बेहद करीब पहुंच गया है। उन्होंने कहा, “ये हालिया उपलब्धियां मात्र तकनीकी तौर पर मील के पत्थर नहीं हैं, ये राष्ट्र के प्रति हमारे कर्तव्य की पूर्ति हैं।”
पिछले 11 वर्षों में भारत के स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए, श्री नड्डा ने कहा, “केवल एम्स में बुनियादी ढांचे के सुधार और नए निर्माण पर ही 2,800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं।” उन्होंने बताया कि देश भर में एम्स की संख्या 7 से बढ़कर 23 हो गई है। इसी तरह, 2014 में 387 मेडिकल कॉलेजों की तुलना में आज हमारे पास लगभग 825 मेडिकल कॉलेज हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार 2025-2029 के बीच देश में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की 10,000 और सीटें सृजित करेगी।
अपने संबोधन के समापन में उन्होंने छात्रों से राष्ट्रीय स्वास्थ्य के संरक्षक बनने का आग्रह किया। उन्होंने छात्रों के समक्ष दोहराया कि प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा तो जन्मसिद्ध अधिकार है, लेकिन व्यावसायिक शिक्षा समाज द्वारा दिया गया एक विशेषाधिकार है। उन्होंने कहा, “आपके मार्गदर्शकों और परिवारों ने नींव रख दी है, अब भारत के भविष्य के स्वास्थ्य सेवा ढांचे की नींव रखना आपके हाथों में है।”
दीक्षांत समारोह के दौरान, एम्स नई दिल्ली ने चिकित्सा विज्ञान, शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल में असाधारण योगदान के लिए पांच प्रतिष्ठित पूर्व संकाय सदस्यों को आजीवन उपलब्धि पुरस्कार से सम्मानित किया:
• डॉ (प्रो.) टी. पी. सिंह, पूर्व डीन (परीक्षा) और एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी और संरचना-आधारित दवा खोज के क्षेत्र में अग्रणी
• डॉ. शशि वाधवा, पूर्व डीन (अकादमिक) और प्रख्यात न्यूरोबायोलॉजिस्ट
• डॉ. एस. सी. तिवारी, भारत में नेफ्रोलॉजी और गुर्दा देखभाल नवाचारों के क्षेत्र में अग्रणी
• डॉ (प्रो.) आर. सी. डेका, प्रतिष्ठित ईएनटी सर्जन और एम्स के पूर्व निदेशक
• डॉ. वी. एस. मेहता, भारत में ब्रेकियल प्लेक्सस सर्जरी के क्षेत्र में अग्रणी


स्नातक, स्नातकोत्तर, सुपरस्पेशलिटी, डॉक्टरेट, नर्सिंग और संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान कार्यक्रमों में कुल 523 डिग्रियां प्रदान की गईं। संस्थान ने एमबीबीएस, नर्सिंग और संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान कार्यक्रमों के मेधावी छात्रों को 18 पदक, पुस्तक पुरस्कार और प्रशंसा प्रमाण पत्र भी प्रदान किए, जो विभिन्न विषयों और कार्यक्रमों में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन को मान्यता देते हैं।

इस कार्यक्रम में एम्स नई दिल्ली के निदेशक प्रो. निखिल टंडन, एम्स नई दिल्ली की डीन प्रो. राधिका टंडन और एम्स नई दिल्ली के रजिस्ट्रार प्रो. गिरिजा प्रसाद रथ के साथ-साथ संकाय सदस्य और छात्र भी उपस्थित थे।
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पीके/केसी/एनएस
(रिलीज़ आईडी: 2260432)
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