कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय
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लखनऊ में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की प्रेस कॉन्फ्रेंस


दलहन-तिलहन, विविधीकरण और छोटे किसानों की आय पर फोकस- केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान

किसान क्रेडिट कार्ड, फार्मर आईडी और वैज्ञानिक मॉडल से खेती को मिलेगी नई दिशा- श्री शिवराज सिंह

केंद्र ने दी उर्वरक राहत,  प्राकृतिक खेती को बढ़ावा; नकली बीज-कीटनाशकों पर सख्त कानून की तैयारी- श्री चौहान

प्रविष्टि तिथि: 24 APR 2026 2:25PM by PIB Delhi

उत्तर भारत की खेती-किसानी को नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन के अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ किया कि अब कृषि विकास का रास्ता एक जैसी नीति से नहीं बल्कि क्षेत्रीय जरूरतों, जलवायु, जल उपलब्धता और स्थानीय फसली परिस्थितियों के अनुसार तय होगा। लखनऊ में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने खरीफ और रबी फसलों की रणनीति, दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता, कृषि विविधीकरण, छोटे किसानों के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग, किसान क्रेडिट कार्ड, फार्मर आईडी, प्राकृतिक खेती, उर्वरक सब्सिडी, आलू किसानों को राहत और नकली कृषि आदानों पर सख्त कानून जैसे मुद्दों पर विस्तार से बात करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य मिलकर खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और किसानोन्मुख बनाने की दिशा में ठोस रोडमैप तैयार करेंगे।  

लखनऊ में आयोजित इस उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को केंद्र सरकार ने व्यापक क्षेत्रीय समन्वय के मंच के रूप में प्रस्तुत किया है। यहां मीडिया से चर्चा में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में जलवायु, पानी, भूमि और फसलों की प्रकृति अलग है इसलिए यह महसूस किया गया कि एक ही राष्ट्रीय सम्मेलन पर्याप्त नहीं होगा। इसी सोच के तहत पूरे देश को 5 भागों में बांटकर 5 क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया  और लखनऊ में संपन्न हो रहा यह सम्मेलन उस श्रृंखला का दूसरा चरण है।  

उन्होंने कहा कि भारत सरकार के पास कृषि विकास के लिए योजनाएं, अधिकारी, शोध संस्थान और बड़ी वैज्ञानिक क्षमता उपलब्ध है लेकिन कृषि राज्य का विषय होने के कारण इन योजनाओं का वास्तविक क्रियान्वयन राज्य सरकारों के सहयोग से ही संभव है। इसलिए इस सम्मेलन में राज्यों के साथ मिलकर खरीफ और रबी का पूरा रोडमैप तैयार किया जा रहा है साथ ही वे ज्वलंत समस्याएं भी चर्चा में लाई जा रही हैं जिनका सीधा असर किसान की आय, उत्पादन और बाजार पर पड़ता है।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि अब चर्चा का दायरा केवल खरीफ और रबी फसलों तक सीमित नहीं रहेगा। कृषि का विविधीकरण कैसे किया जाए, खेती को अधिक लाभकारी कैसे बनाया जाए, दलहन और तिलहन में देश को आत्मनिर्भर कैसे किया जाए, बागवानी और प्रसंस्करण को कैसे बढ़ावा दिया जाए, ये सभी विषय सम्मेलन के केंद्र में हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने खाद्यान्न उत्पादन में नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं और गेहूं तथा धान के उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। चावल उत्पादन में देश अग्रणी स्थिति में पहुंच चुका है और गेहूं उत्पादन बेहतर होने के कारण सरकार ने 50 लाख मीट्रिक टन गेहूं निर्यात की अनुमति भी दी है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद्यान्न में उपलब्धि के बावजूद दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए पर्याप्त खाद्यान्न और पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है इसलिए कृषि नीति के तीन बड़े उद्देश्य तय किए गए हैं, देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आय और आजीविका बेहतर करना और जनता को पोषणयुक्त खाद्यान्न उपलब्ध कराना।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सरकार की रणनीति छह प्रमुख आधारों पर आगे बढ़ रही है। इनमें उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, किसानों को उनकी मेहनत का पूरा दाम दिलाना, नुकसान होने पर भरपाई सुनिश्चित करना, कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देना और खेती को बाजार से जोड़ना शामिल है। उन्होंने कहा कि केवल गेहूं-धान आधारित खेती पर टिके रहना भविष्य के लिए पर्याप्त नहीं होगा इसलिए दलहन, तिलहन, बागवानी, फल-सब्जी, प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन को मजबूती देना समय की जरूरत है।  

उन्होंने विशेष रूप से छोटे किसानों की स्थिति का उल्लेख किया और कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में किसानों के पास छोटी जोत है। ऐसी परिस्थितियों में कम जमीन पर अधिक आमदनी देने वाले मॉडल जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि इंटरक्रॉपिंग, अनाज के साथ फल-सब्जी, पशुपालन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन और वृक्ष आधारित खेती जैसे इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल छोटे किसानों के लिए अधिक उपयोगी साबित हो सकते हैं। केंद्र सरकार ने ऐसे कई मॉडल तैयार किए हैं जिन्हें राज्यों के साथ साझा किया जाएगा ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुसार उन्हें लागू किया जा सके।

प्रेसवार्ता में किसान क्रेडिट कार्ड पर भी केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि करोड़ों किसानों को अभी भी सस्ते औपचारिक कृषि ऋण की पूरी पहुंच नहीं मिल पाई है, इसलिए विशेष अभियान चलाकर हर पात्र किसान तक केसीसी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। उनका मानना है कि यदि किसान को समय पर कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध होगा तो वह बेहतर बीज, उर्वरक, उपकरण और अन्य संसाधनों का उपयोग कर पाएगा जिससे उत्पादन और आय दोनों बढ़ेंगी।  

फार्मर आईडी को उन्होंने कृषि शासन में बड़ा बदलाव बताया। उनके अनुसार फार्मर आईडी बनने से किसान की जमीन, खसरा नंबर, पशुधन और अन्य जरूरी सूचनाएं एक मंच पर उपलब्ध होंगी। इससे किसानों को अलग-अलग योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार दस्तावेजी दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी और योजनाओं का लाभ अधिक तेज, पारदर्शी और लक्षित तरीके से दिया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि करोड़ों किसानों की फार्मर आईडी पहले ही बनाई जा चुकी हैं और राज्यों से इसे तेजी से पूरा करने को कहा गया है।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ‘लैब टू लैंड’ की सोच को मजबूत करने के लिए राज्यों के साथ मिलकर अभियान चलाना चाहती है। उन्होंने कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत वैज्ञानिकों और अधिकारियों की टीमें गांव-गांव जाएंगी, किसान चौपाल में किसानों से संवाद करेंगी और उन्हें आधुनिक शोध, नई तकनीक, बेहतर बीज और उत्पादन बढ़ाने वाली वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी देंगी। उनका कहना था कि जब तक प्रयोगशाला का ज्ञान खेत तक नहीं पहुंचेगा तब तक शोध का वास्तविक लाभ किसानों को नहीं मिल पाएगा।  

उत्तर प्रदेश के संदर्भ में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हर परिस्थिति में राज्य सरकारों के साथ खड़ी है। आलू के दाम गिरने के बाद किसानों को राहत देने के लिए एमआईएस योजना के तहत 20 लाख मीट्रिक टन आलू खरीदने की अनुमति दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश में आलू उत्पादन, शोध, प्रसंस्करण और भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक इंटरनेशनल प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया गया है, जिससे किसानों को फसल का बेहतर मूल्य और प्रसंस्करण आधारित अवसर मिल सकेंगे।

बागवानी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने कहा कि देश में 9 क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले, रोगमुक्त और बेहतर उत्पादक पौधे उपलब्ध कराना है ताकि बागवानी क्षेत्र को नई गति मिल सके। उन्होंने कहा कि दलहन मिशन, तिलहन मिशन, अच्छी बीज उपलब्धता, बागवानी विस्तार और कृषि विविधीकरण जैसे विषय सम्मेलन के महत्वपूर्ण एजेंडे में शामिल हैं।

उर्वरक कीमतों पर पूछे गए सवाल के जवाब में श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमत बढ़ने का बोझ किसानों पर नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि हाल की कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 41,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई है ताकि किसानों को यूरिया 266 रुपये प्रति बोरी और डीएपी 1,350 रुपये प्रति बोरी की दर से मिलती रहे। उन्होंने साफ किया कि उर्वरक क्षेत्र में वैश्विक महंगाई का असर भारत सरकार खुद वहन कर रही है ताकि किसान की लागत न बढ़े।

मिलावट, नकली बीज, नकली कीटनाशक और कृषि आदानों की गुणवत्ता पर उन्होंने कड़ा रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि यह केवल किसान की फसल का सवाल नहीं बल्कि मानव स्वास्थ्य का भी गंभीर मुद्दा है। फल, सब्जियों और अन्य खाद्य उत्पादों में मिलावट तथा असंतुलित रासायनिक उपयोग से बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है इसलिए सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ नकली और मिलावटी कृषि उत्पादों के खिलाफ भी अभियान चला रही है।

प्राकृतिक खेती पर उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से धरती का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है और मानव स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। इसी कारण केंद्र सरकार ने प्राकृतिक कृषि मिशन शुरू किया है। उन्होंने माना कि प्राकृतिक खेती की शुरुआत करने वाले किसानों को शुरुआती वर्षों में संक्रमण काल की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है इसलिए सरकार ने प्रति हेक्टेयर आर्थिक सहायता का प्रावधान किया है ताकि किसान इस बदलाव के दौरान अकेला महसूस न करे।

उन्होंने यह भी कहा कि नकली बीज और कीटनाशकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मौजूदा कानून पर्याप्त कठोर नहीं हैं। पुराने कानूनों में कई बार केवल मामूली जुर्माने का प्रावधान है जिससे दोषियों पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाता। इसलिए सरकार सीड एक्ट और पेस्टिसाइड एक्ट में सख्त प्रावधान लाने की तैयारी कर रही है ताकि किसानों को ठगने वालों और मिलावट फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके।

प्रेसवार्ता के दौरान उत्तर क्षेत्र के लिए विशेष कृषि कॉरिडोर या निर्यात रणनीति को लेकर सवाल पर केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि विभिन्न राज्यों में कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग रणनीतियों पर काम किया जा रहा है। उत्तर भारत के फलों, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार दिलाने के लिए समन्वित प्रयास आगे बढ़ाए जाएंगे।

लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को केंद्र सरकार उत्तर भारत की खेती के लिए नीतिगत और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मान रही है। इस सम्मेलन से निकलने वाले सुझाव न केवल आगामी खरीफ और रबी सीजन की तैयारी को दिशा देंगे, बल्कि किसानों की आय, फसल विविधीकरण, पोषण सुरक्षा, तकनीकी हस्तांतरण और टिकाऊ खेती की दिशा में भी आगे की कार्ययोजना तय करेंगे।

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आरसी/एमएस


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