कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय, जीवंत ग्राम कार्यक्रम के तहत देश के सीमावर्ती गांवों में कौशल आधारित परिवर्तन को बढ़ावा दे रहा है
प्रविष्टि तिथि:
21 APR 2026 7:18PM by PIB Delhi
सीमावर्ती गांवों को विकास और अवसरों के केंद्र में बदलने के सरकार के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने आज नई दिल्ली के कौशल भवन में "विकसित गांव, विकसित भारत " विषय पर आधारित जीवंत ग्राम कार्यक्रम के अंतर्गत एक क्षमता निर्माण और समीक्षा कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में गृह मंत्रालय, वस्त्र, पर्यटन और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के साथ-साथ जिला प्रशासन, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, सिक्किम और उत्तराखंड के राज्य कौशल विकास मिशन (एसएसडीएम) और क्षेत्रीय कौशल परिषदों (एसएससी) सहित प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया। ये भारत के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में कौशल आधारित विकास को गति देने और समन्वय स्थापित करने के लिए एक केंद्रित मंच है।
गृह मंत्रालय की एक प्रमुख पहल, जीवंत ग्राम कार्यक्रम का उद्देश्य अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और लद्दाख के 662 गांवों को आत्मनिर्भर, सुगम संपर्क वाले देश के "प्रथम गांवों" के रूप में विकसित करना है। इस परिकल्पना के अनुरूप, एमएसडीई इन क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों को बढ़ाने के लिए स्थानीय रूप से प्रासंगिक और मांग-आधारित कौशल विकास पहलों को बढ़ावा दे रहा है।
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय, गृह मंत्रालय से प्रस्ताव प्राप्त करने और उनकी जांच करने से लेकर, उन्हें उपयुक्त योजनाओं से जोड़ने, परियोजनाओं को मंजूरी देने, सुदृढ़ कार्यान्वयन और निगरानी सुनिश्चित करने, और स्किल इंडिया डिजिटल हब (एसआईडीएच) के माध्यम से मूल्यांकन और प्रमाणन की सुविधा प्रदान करने तक, जीवंत ग्राम कार्यक्रम के तहत कौशल विकास प्रस्तावों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अब तक, एमएसडीएसई ने कार्यक्रम के तहत 74 कौशल विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी है। यह सीमावर्ती जिलों में कौशल विकास सम्बंधी पहलों को क्रियान्वित करने में महत्वपूर्ण प्रगति का संकेत है।
जीवंत ग्राम कार्यक्रम के विचार-विमर्श में स्वीकृत और चलाई जा रही कौशल परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा, प्रशिक्षकों की उपलब्धता, लाभार्थियों को संगठित करना और बुनियादी ढांचे की कमियों जैसी प्रमुख कार्यान्वयन चुनौतियों की पहचान करना और हितधारकों के बीच समन्वय को मजबूत करना शामिल रहा। राज्य कौशल विकास मिशन और क्षेत्रीय कौशल परिषदों ने कार्यक्रम की रूपरेखा, प्रशिक्षकों के पैनल में शामिल करने और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए बाजार सम्बंधों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भविष्य की योजना बनाते हुए, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए एक केंद्रित और कार्य-उन्मुख रोडमैप तैयार किया है। जिलों को प्रस्ताव प्रस्तुत करने से पहले स्पष्ट समयसीमा, प्रशिक्षण स्थल, प्रशिक्षक और लक्षित लाभार्थियों के साथ सुदृढ़ परियोजना योजना विकसित करने के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा। इसका शीघ्र क्रियान्वयन करने के लिए स्कूलों, आईटीआई और सामुदायिक केंद्रों जैसे मौजूदा सरकारी बुनियादी ढांचे का उपयोग करके मौके पर ही प्रशिक्षण को तेजी से लागू करने पर बल दिया जाएगा।
कार्यान्वयन सम्बंधी चुनौतियों से निपटने के लिए, राज्य कौशल विकास मिशन और क्षेत्रीय कौशल परिषदों के माध्यम से विशेष रूप से प्रस्ताव विकास, प्रशिक्षक प्रशिक्षण और योजना के मानदंडों के अनुपालन जैसे क्षेत्रों में बेहतर मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। इसे सुस्पष्ट मानक संचालन प्रक्रियाओं द्वारा समर्थन दिकिया जाएगा। निरंतर निगरानी, प्रभावी समस्या समाधान और समय पर सुधार सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासनों, राज्य कौशल विकास मिशन तथा क्षेत्रीय कौशल परिषदों एवं कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के बीच एक संरचित समन्वय ढांचा भी स्थापित किया जाएगा।
इस कार्यशाला में विभिन्न जिलों के बीच आपसी सहयोग को भी बढ़ावा दिया गया। इसमें नवोन्मेषी पद्धतियों और व्यावहारिक समाधानों पर प्रकाश डाला गया। चर्चाओं में संस्थागत समन्वय, वास्तविक समय की निगरानी और त्वरित कार्यान्वयन तंत्र के महत्व पर बल दिया गया। इसका उद्देश्य कौशल विकास पहलों को स्थायी आजीविका परिणामों में परिवर्तित करना है।
एमएसडीई की संयुक्त सचिव श्रीमती हेना उस्मान, एमएसडीई की संयुक्त सचिव श्रीमती मानसी सहाय ठाकुर, एमएसडीई की आर्थिक सलाहकार श्रीमती अर्चना मायाराम, एमएसडीई, गृह मंत्रालय और सहयोगी मंत्रालयों, राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी और एसएसडीएम, जिला प्रशासन और एसएससी के प्रतिनिधि भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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पीके/केसी/वीके/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2254286)
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