सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
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फरक्का में बना नया चार लेन का पुल पश्चिम बंगाल में कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए तैयार है

प्रविष्टि तिथि: 28 FEB 2026 6:00PM by PIB Delhi

पश्चिम बंगाल में दशकों से जीर्ण-शीर्ण फरक्का बांध पर आवागमन धैर्य की दैनिक परीक्षा रहा है। 1960 के दशक में निर्मित और आज मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तरी बंगाल क्षेत्र को जोड़ने वाला लगभग 70 वर्ष पुराना यह बांध वाहनों के भारी प्रवाह को सहने में असमर्थ है। प्रोफेसर सैयद नूरुल हसन कॉलेज में कार्यरत अरुणमय दास जैसे कॉलेज के शिक्षक, जो प्रतिदिन मालदा से फरक्का आते-जाते हैं, कार्यालय पहुंचने से पहले ही यातायात जाम में एक से दो घंटे बर्बाद होने की बात कहते हैं। राणा हलदर जैसे कॉलेज छात्र, विशेष रूप से परीक्षा के मौसम में, सुबह-सुबह घर से निकलते हैं, फिर भी उन्हें यह सुनिश्चित नहीं होता कि वे समय पर कक्षा पहुंच पाएंगे या नहीं। गंगा नदी पर बने भारत के सबसे लंबे पुलों में से एक यह नया फरक्का पुल बनकर लगभग तैयार है और इससे कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार होने, हजारों नागरिकों को समय की बचत होने और पश्चिम बंगाल के सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल होने की उम्मीद है।

 

गंगा नदी पर पुराने फरक्का बैराज के पास बन रहे 5.468 किलोमीटर लंबे नए चार लेन वाले पुल से इस क्षेत्र की आर्थिक, पर्यटन और सामाजिक स्थिति में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। 622.04 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह परियोजना अब 96 प्रतिशत पूरी हो चुकी है और जल्द ही इसके बनकर तैयार होने की उम्मीद है। इससे दशकों से रोजाना जाम झेल रहे हजारों लोगों को राहत मिलेगी। इस परियोजना से लंबे समय से चले आ रहे ट्रैफिक जाम में काफी कमी आने की उम्मीद है और उत्तरी बंगाल से दक्षिणी बंगाल तक माल और कृषि उत्पादों की सुगम आवाजाही होगी। इसके अलावा झारखंड से आने-जाने वाले कच्चे माल का परिवहन भी निर्बाध होगा। मालदा और मुर्शिदाबाद के मशहूर आम और लीची को भारत और उससे बाहर के व्यापक बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि उत्पाद ताजे और समय पर उपभोक्ताओं तक पहुंचें।

कंक्रीट और स्टील से परे, यह पुल परिवार के साथ बिताए जाने वाले अतिरिक्त समय, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक समय पर पहुंच और आजीविका के अवसरों का प्रतीक है। फरक्का की निवासी नफीसा नए फरक्का पुल के दैनिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बताती हैं। वह कहती हैं, “हमें इससे कई तरह से लाभ होगा। मेरा घर मुख्य सड़क के ठीक बगल में है, और नूरुल हसन कॉलेज और एक हाई स्कूल हमारे बहुत करीब हैं। परीक्षाओं के दौरान यातायात जाम छात्रों के लिए बेहद तनावपूर्ण हो जाता है। कई छात्र समय पर अपने केंद्रों तक पहुंचने को लेकर चिंतित रहते हैं। इसके एक बार चालू हो जाने पर, इस तरह की रोज-रोज की चिंता काफी हद तक कम हो जाएगी। चिकित्सा आपात स्थितियों में भी इससे बहुत फर्क पड़ेगा। अभी, यातायात अक्सर मरीजों को ले जाने वाले वाहनों को रोक देता है। सुगम और तेज आवागमन से जीवन बचाए जा सकेंगे।”

 

फरक्का से लॉजिस्टिक्स का कारोबार चलाने वाले आसिफ हुसैन भी इस पुल को लेकर आशावादी हैं और इसे महज़ बुनियादी ढांचा से कहीं बढ़कर मानते हैं। यह पुल क्षेत्र के कारोबारी समुदाय के लिए नई ऊर्जा का स्रोत बनेगा। वे कहते हैं, “लगातार ट्रैफिक जाम और देरी ने हमारे लिए परिवहन को बेहद मुश्किल बना दिया है। फरक्का में ट्रैफिक जाम में हमारा काफी समय बर्बाद हो जाता है। यह नया पुल वाकई वरदान साबित होगा। कारोबारियों, खासकर वाहन चालकों के लिए, इससे बहुत बड़ा फर्क पड़ेगा। सुगम आवागमन से हम ट्रिप रोटेशन बढ़ा सकेंगे, कार्यकुशलता में सुधार कर सकेंगे और कमाई भी बढ़ा सकेंगे।”

यह पुल पर्यटन कनेक्टिविटी को पूरी तरह से बदल देगा, जिससे उत्तरी बंगाल के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों तक तेज़ और सुगम पहुंच संभव हो सकेगी। इससे कुलिक पक्षी अभयारण्य, गौर मालदा, आदिना मस्जिद जैसे स्थलों के साथ-साथ दार्जिलिंग, कुर्सियोंग, कलिम्पोंग और सिक्किम राज्य के पहाड़ी पर्यटन स्थलों तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जिससे उत्तरी बंगाल में पर्यटन आधारित विकास के लिए व्यापक अवसर खुलेंगे।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं
• कुल लंबाई: 5.468 किमी
• परियोजना लागत: 622.04 करोड़ रुपये
• निर्माण कार्य की प्रगति: 96 प्रतिशत पूर्ण
• फरक्का बैराज पर भीड़भाड़ कम करने में सक्षम होगा

• उत्तर और दक्षिण बंगाल के बीच कनेक्टिविटी बढ़ेगी
• झारखंड के साथ अंतर-राज्यीय आवागमन सुगम होगा

फरक्का के लोगों के लिए, नया पुल केवल गंगा नदी पार करने का साधन नहीं है। यह एक अधिक निश्चित, जुड़ावपूर्ण और आशापूर्ण भविष्य की ओर बढ़ने का प्रतीक है। निर्माण के अंतिम चरण पूरे होने के साथ ही, नया फरक्का पुल बीते समय की वापसी और संभावनाओं के पुनर्स्थापन का प्रतीक बन गया है। उन छात्रों के लिए जो कभी सूर्योदय से पहले घर से निकलते थे, उन शिक्षकों के लिए जिन्होंने यातायात में अपने कीमती घंटे गंवा दिए, और चिकित्सा आपात स्थितियों के दौरान बेसब्री से इंतजार करने वाले परिवारों के लिए यह पुल व्यावहारिक और व्यक्तिगत दोनों तरह से राहत देगा।

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पीके/केसी/के/एनके


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