ग्रामीण विकास मंत्रालय
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्रामीण विकास विभाग और भूमि संसाधन विकास विभाग की योजनाओं पर समीक्षात्मक बैठक की !
मनरेगा के तहत किसी भी पात्र श्रमिक को कोई परेशानी न हो तथा वर्तमान मनरेगा के किसी भी घटक में बजट की कोई कमी न हो - केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री
प्रविष्टि तिथि:
20 FEB 2026 8:00PM by PIB Delhi
केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत ग्रामीण विकास विभाग और भूमि संसाधन विकास विभाग के कार्यक्रमों पर एक समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई।
बैठक में मनरेगा और वीबी- जी राम जी एक्ट के बारे में चर्चा के दौरान बताया गया कि राज्यों को इस वर्ष 244 करोड़ सहमत मानवदिवस का बजट दिया गया था जिसमें से 204 करोड़ मानव दिवस का सृजन हो चुका है। अभी तक मनरेगा योजना के तहत वर्ष 2025-26 के दौरान 64.70 लाख कार्य पूरे किए जा चुके है तथा जनवरी 2025 तक 198 करोड़ मानव दिवस सृजित किए जा चुके है। चर्चा में योजना की राज्यवार प्रगति की जानकारी भी दी गई। यह भी बताया गया कि योजना के अंतर्गत वर्तमान वित्त वर्ष में मजदूरी मद में 65,506 करोड़ जारी किए जा चुके है।
इस दौरान बंगाल के लंबित श्रम बजट पर भी चर्चा हुई।
बैठक में श्रमिकों के ईकेवाईसी पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान बताया गया कि मनरेगा के तहत हर राज्य के एक जिले में फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक का सफलतापूर्वक प्रयोग किया जा रहा है। यह भी बताय गया कि फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली का बिना इंटरनेट के भी प्रयोग किया जा सकेगा। फिलहाल 80 प्रतिशत श्रमिकों का ईकेवाईसी पूरा हो चुका है और जल्द ही इस योजना को पूरे देश में लागू किया जाएगा। केन्द्रीय मंत्री ने इस तकनीक के प्रयोग की सराहना की तथा निर्देश दिए की वर्तमान में चल रही मनरेगा योजना के किसी भी पात्र श्रमिक को काम मिलने में कोई परेशानी न हो तथा मनरेगा के किसी भी घटक में बजट की कोई कमी न हो।
बैठक में आगे दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) योजना पर विस्तृत समीक्षा की गई। चर्चा में बताया गया कि दोनो योजनाओं के लिए ‘कौशल पंजी एप’ के तहत महिलाओं एव युवाओं का ईकेवाईसी पूरा किया जा चुका है। जिससे डुप्लीकेशन की कोई संभावना नहीं रहेगी। समीक्षा बैठक में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के निर्धारित मानकों के तहत चल रही योजना की जानकारी दी गई। चर्चा में बताया गया कि जनवरी 2026 तक 18.29 लाख अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है तथा 11.78 लाख अभ्यर्थियों को नियोजित किया जा चुका है। इस दौरान आरएसईटीआई (RSETI) कार्यक्रमों में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी चर्चा की गई। बताया गया कि पूर्व में संचालन एक निजी एजेंसी के माध्यम से किया जा रहा था, जिसे अब सुव्यवस्थित किया गया है।यह भी बताया गया कि दोनो योजनाओं के लिए एनआईसी की मदद से एकीकृत डिज़िटल प्लेटफार्म kausal.rural.gov.in का बना लिया गया था।
देशभर में आरएसईटीआई योजना की कवरेज बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के 619 जिलों में स्थापना की प्रक्रिया प्रगति पर है। इनमें से 407 भवनों का निर्माण स्वीकृत किया जा चुका है। श्री शिवराज सिंह चौहान ने इनकी राज्य स्तर पर भी नियमित समीक्षा करने की बात कही, ताकि लंबित कार्य शीघ्र पूर्ण हों और लक्ष्य समय पर प्राप्त किया जा सके। श्री चौहान ने ‘कौशल पंजी एप’ पर शत प्रतिशत पंजीकरण और नए प्रस्तावित नई सुधारों की सराहना की। उन्होंने योजना के तहत हो रही प्रगति पर भी संतोष जताया।
इस दौरान भूमि संसाधन विकास विभाग की पीएमकेएसवाई योजना और लैंडस्टैक योजना की भी समीक्षा की गई। चर्चा में बताया गया कि 99.81 प्रतिशत भूमि रिकार्ड का डिज़िटलाइजेशन पूरा हो चुका है। डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) का एक अभिन्न अंग, विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (यूएलपीआईएन) के तहत 66.53 प्रतिशत भूमि पार्सल मानकीकृत किये जा चुके है। लैड़स्टैक (भूमि-प्रणाली) का तमिलनाडु और चंडीगढ़ चिन्हित स्थलों पर पायलट प्रोजक्ट सफलता पूर्वक चल रहा है। आने वाले पांच वर्षों में पूरे देश में इसे लागू किया जाएगा।
बैठक में ग्रामीण विकास विभाग और भूमि संसाधन विकास विभाग मंत्रालय के सचिव श्री शैलश कुमार सिंह तथा दोनो विभागों के सयुंक्त सचिव उपस्थित थे।
*****
RC/MS
(रिलीज़ आईडी: 2230904)
आगंतुक पटल : 82