अल्‍पसंख्‍यक कार्य मंत्रालय
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अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने बिहार के राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में दो दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया


पहले दिन मंत्रालय ने पीएमजेवीके, पीएमविकास, एनएमडीएफसी, उम्मीद सेंट्रल पोर्टल और हज पहलों जैसी अपनी प्रमुख योजनाओं के माध्यम से हासिल की गई मुख्य उपलब्धियों का संक्षिप्त विवरण दिया गया

प्रविष्टि तिथि: 18 FEB 2026 7:24PM by PIB Delhi

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने आज बिहार के राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर का आयोजन किया। शिविर में केंद्रीय एवं राज्य मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों ने अल्पसंख्यकों के कल्याण और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए नीतिगत रूपरेखा तैयार करने हेतु विचार-विमर्श किया। चिंतन शिविर का उद्देश्य प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसे सामूहिक दृष्टिकोण और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देकर प्राप्त किया जा सकता है।

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इस शिविर का औपचारिक उद्घाटन 19 फरवरी 2026, गुरुवार को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य तथा संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू द्वारा केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन और विभिन्न राज्य मंत्रियों की उपस्थिति में किया जाएगा। नालंदा का ऐतिहासिक स्थल, जो भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और संवाद की भावना का प्रतीक है, समावेशी राष्ट्रीय विकास पर केंद्रित विचार-विमर्श के लिए एक प्रेरणादायक पृष्ठभूमि प्रदान करता है।

कार्यक्रम संरचना

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शिविर के पहले दिन वरिष्ठ अधिकारी विषयगत प्रस्तुतियां देंगे और प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों की ओर से विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। दिन का समापन बिहार की समृद्ध विरासत को दर्शाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ होगा। दूसरे दिन की शुरुआत स्वास्थ्य सत्र से होगी, जिसके बाद उद्घाटन समारोह और नीतिगत दिशा-निर्देश एवं कार्यक्रम सुदृढ़ीकरण पर केंद्रित विषयगत चर्चाएं होंगी।

शिक्षा मंत्रालय के सचिव डॉ. सी.एस. कुमार ने चिंतन शिविर को सफल बनाने में राज्य सरकार और नालंदा के अधिकारियों को धन्यवाद और आभार व्यक्त किया। उन्होंने राज्यों से विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप अभिनव प्रस्ताव प्रस्तुत करने का आग्रह किया।

डॉ. कुमार ने बताया कि मंत्रालय अपनी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में राज्यों की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करता है। चिंतन शिविर में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा विषयगत प्रस्तुतियां और इंडस्ट्रियल फाइनेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (आईएफसीआई), फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (एफआईटीटी), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली और भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा विशेष प्रस्तुतियां शामिल होंगी।

इसका उद्देश्य समावेशी विकास हासिल करना और केंद्र-राज्य समन्वय बढ़ाकर तथा नागरिक भागीदारी को शामिल करके 2047 तक प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करना है, जिससे सभी स्तरों पर विकास को एकीकृत किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का ‘रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म और इन्फॉर्म’ का लक्ष्य सार्वजनिक-निजी-सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार के लक्ष्यों और दृष्टिकोण को प्राप्त करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका सर्वोपरि है, जैसा कि चल रहे इंडिया एआई समिट में भी बल दिया गया है। मंत्रालय कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा दे रहा है।

मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री राम सिंह ने चिंतन शिविर की संरचना और इसके उद्देश्य को रेखांकित करते हुए मंत्रालय के जनादेश का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने मंत्रालय की प्रमुख उपलब्धियों का भी उल्लेख किया, जैसे: पीएमजेवीके (प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम) योजना के तहत नौ लाख से अधिक सामुदायिक संपत्तियों के लिए 26,237 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए; एनएमडीएफसी (राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम) 26.93 लाख परिवारों की सहायता कर रहा है और 10,042 करोड़ रुपये का रियायती ऋण प्रदान कर रहा है; हज सुविधा ऐप का शुभारंभ; पीएम विकास योजना के तहत 2,800 करोड़ रुपये का उपयोग करके 10 लाख से अधिक अल्पसंख्यक युवाओं को कौशल और प्रशिक्षण प्रदान करना; उम्मीद अधिनियम, 1995 के प्रावधानों के अनुसार उम्मीद केंद्रीय पोर्टल, 2025 पर वक्फ संपत्तियों का प्रशासन और प्रबंधन; 8.12 करोड़ लाभार्थियों के बीच 20,610 करोड़ रुपये की छात्रवृत्तियां वितरित की गईं।

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विचार-विमर्श के मुख्य क्षेत्र

चिंतन शिविर के दौरान होने वाली चर्चाएं पांच प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर केंद्रित हैं, जिनमें अवसंरचना विकास, सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण पहल, वक्फ प्रबंधन और हज प्रबंधन शामिल हैं। कार्यान्वयन में कमियों की पहचान करने, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और व्यावहारिक अनुशंसाएं तैयार करने के लिए संवादात्मक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

डिजिटल पहलों का आरंभ

19 फरवरी को होने वाले उद्घाटन सत्र के दौरान तीन प्रमुख डिजिटल पहलों का आरंभ किया जाएगा, जिनमें विकास कार्यक्रमों की निगरानी के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन, हज यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा बढ़ाने के लिए एक स्मार्ट रिस्टबैंड और नागरिक सेवा वितरण में सुधार के लिए एक एआई-सक्षम चैटबॉट शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य सेवाओं में पारदर्शिता, दक्षता और सुलभता को बढ़ाना है।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री एसपी रॉय ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए इस बात पर जोर दिया कि मंत्रालय साझेदारी और नागरिक भागीदारी की भावना को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करता है। मंत्रालय प्रतिभागियों की सार्थक भागीदारी के माध्यम से राज्य और नागरिक सहयोग को बढ़ाने के लिए आगे विचार-विमर्श करेगा।

मंत्रालय अपनी विभिन्न योजनाओं जैसे पीएमजेवीके, पीएमविकास, एनएमडीएफसी, हज, उम्मीद सेंट्रल पोर्टल आदि के माध्यम से अल्पसंख्यकों के कल्याण और विकास को बढ़ावा देकर विविधता का जश्न मनाता है। संवाद, समीक्षा और मंथन के सिद्धांतों को शामिल करके सोच से समाधान तक, संवाद से विकास तक के माध्यम से चिंतन शिविर का आयोजन किया जा सकता है।

अपेक्षित परिणाम

चिंतन शिविर से ठोस कार्य योजनाओं, बेहतर नीति समन्वय, नवीन कार्यक्रम योजनाओं और राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को मजबूत करने के लिए एक व्यापक खाका तैयार होने की उम्मीद है।

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पीके/केसी/एसएस/एसएस


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