अंतरिक्ष विभाग
संसद का प्रश्न: प्रमुख राष्ट्रीय पहलों को समर्थन देने के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
प्रविष्टि तिथि:
11 FEB 2026 12:50PM by PIB Delhi
पश्चिम बंगाल में कार्यरत संचार उपग्रहों का उपयोग टेलीविजन प्रसारण, डीटीएच टेलीविजन, दूरसंचार, वेरी स्मॉल एपर्चर टर्मिनल (वीसैट) सेवाएं, रेडियो नेटवर्किंग, हेडएंड इन द स्काई (एचआईटीएस), डिजिटल सैटेलाइट न्यूज गैदरिंग (डीएसएनजी) एवं सामाजिक अनुप्रयोगों (जैसे टेली-शिक्षा, टेली-मेडिसिन एवं आपदा प्रबंधन) जैसे अनुप्रयोगों को प्रदान करने के लिए किया जाता है, जो डिजिटल इंडिया जैसी प्रमुख पहलों का समर्थन करते हैं। मत्स्य विभाग ने इसरो द्वारा विकसित तकनीक, जिसमें नेविक एवं संचार उपग्रह का उपयोग किया गया है, के साथ प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत पोत संचार और सहायता प्रणाली (वीसीएसएस) परियोजना की शुरात की है, ताकि मछुआरों को जीवन की सुरक्षा एवं आपदा संबंधी चेतावनियां प्रदान की जा सकें। यह परियोजना पश्चिम बंगाल सहित तटीय राज्यों में लागू की गई है। भारतनेट कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करना भी है। इसरो का भूवन जियोपोर्टल रिमोट सेंसिंग डेटा, थीमैटिक मैप्स और जियोटैगिंग सपोर्ट की ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करता है, जो डिजिटल इंडिया की आवश्यकताओं के अनुसार ग्रामीण योजना को सुगम बनाता है।
पश्चिम बंगाल के चार शहरों सहित 98 स्मार्ट शहरों के लिए स्थान संबंधी जानकारी का उपयोग करते हुए रूफटॉप फोटोवोल्टिक (पीवी) क्षमता का आकलन किया गया।
कृषि की मॉनिटरिंग करने के लिए जूट फसल सूचना प्रणाली विकसित की गई है जो भू-स्थानिक दृष्टिकोण का उपयोग करते हुए फसल क्षेत्र, फसल की स्थिति की निगरानी एवं उत्पादन अनुमान से संबंधित कार्य करती है। पश्चिम बंगाल की एक महत्वपूर्ण नकदी फसल आलू के उत्पादन का पूर्वानुमान और मूंगफली के फसल क्षेत्र का अनुमान रिमोट सेंसिंग पर आधारित विधियों का उपयोग कर किया जाता है। भू-स्थानिक दृष्टिकोण पर आधारित फसल बीमा तंत्र, बांग्ला शस्य बीमा योजना, निजी बीमा प्रदाता और प्रौद्योगिकी भागीदार के सहयोग से लागू की जा रही है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान एवं अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग किया है। ऐसे कार्यक्रमों में प्रमुख संस्थानों जैसे आईआईटी में स्थापित स्पेस टेक्नोलॉजी सेल (एसटीसी), साथ ही क्षेत्रीय कार्यक्रम देश में उन्नत शोध को बढ़ावा दे रहे हैं। ये सहयोग एक मजबूत अकादमिक-उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण, प्रौद्योगिकी में तेजी लाने, स्वदेशी विकास को बढ़ावा देने और देश में अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसरो ने पश्चिम बंगाल में अकादमिक कार्यक्रमों के माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं-
- आईआईटी खड़गपुर में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सेल (एसटीसी)।
- क्षेत्रीय अंतरिक्ष शैक्षणिक केंद्र (आरएसी-एस) एनआईटी पटना में स्थित है जो कि पश्चिम बंगाल को कवर करता है।
- एनआईटी राउरकेला में स्थित अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी इनक्यूबेशन सेंटर (एसटीआईसी) पश्चिम बंगाल राज्य को कवर करता है।
- भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा विभाग, भारतीय चाय बोर्ड, जूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के अधिकारियों के लिए आईएसआरओ/डीओएस द्वारा रिमोट सेंसिंग एवं भू-स्थानिक अनुप्रयोगों से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है।
- आईसीएआर-सीआरआईजेएएफ बड़ापोर के सहयोग से जूट की फसल पर कार्बन एक्सचेंज अध्ययन किया जाता है।
- इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में स्थित विश्वविद्यालयों/कॉलेजों को आईएसआरओ द्वारा प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाएं भी आवंटित की जाती हैं।
यह जानकारी कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/एके
(रिलीज़ आईडी: 2226366)
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