प्रधानमंत्री कार्यालय
“परीक्षा पे चर्चा 2026" कार्यक्रम के एपिसोड-2 में छात्रों के साथ प्रधानमंत्री की बातचीत का मूल पाठ
प्रविष्टि तिथि:
09 FEB 2026 3:03PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री- मेरे प्यारे साथियों। ‘परीक्षा पे चर्चा’ के इस महत्वपूर्ण एडिशन में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। इस बार परीक्षा पे चर्चा कुछ अलग है, कुछ खास है, बहुत सारे स्टूडेंट्स ने मुझे ये सजेशन भेजा था कि देश के अलग-अलग हिस्सों में भी परीक्षा पे चर्चा होनी चाहिए, तो इस बार मैंने देश के अलग-अलग हिस्सों में भी स्टूडेंट के साथ बैठ करके परीक्षा पे चर्चा की है। इस स्पेशल एपिसोड में आप यही देखने जा रहे हैं, तो सबसे पहले चलते हैं तमिलनाडु के कोयंबटूर। तमिलनाडु के स्टूडेंट्स की एनर्जी, उनकी क्यूरियोसिटी ने मुझे बहुत प्रभावित किया, आईए देखते हैं।
प्रधानमंत्री- वणक्कम !
विद्यार्थी- वणक्कम सर !
प्रधानमंत्री- तो आप लोगों को कुछ खाने-पीने को मिला कि नहीं?
विद्यार्थी- नहीं सर खा लिया।
प्रधानमंत्री- क्या मिला?
विद्यार्थी- अभी हम घर से लेकर आए थे।
प्रधानमंत्री- घर से लेके आए थे।
विद्यार्थी- I couldn't believe my eyes when I saw him.
विद्यार्थी- First I expected like a dynamic, dramatic entry because he is the Prime Minister after all but he is very simple, humble and down to earth.
विद्यार्थी- वो जब अंदर आए बस एक goose bumps आने लग गए, he was really great.
प्रधानमंत्री- ऐसा है कि मैं कई वर्षों से 10th और 12th के जो बच्चे हैं, उनसे बातचीत करता रहता हूं परीक्षा पे चर्चा, और मैं बातचीत करता हूं कुछ सीखने के लिए, मेरे लिए बहुत बड़ा ये सीखने का कार्यक्रम होता है, ये सिखाने का कार्यक्रम नहीं, तो मैं आज तमिलनाडु के नौजवानों को इसलिए मिल रहा हूं कि मुझे कुछ सीखना है, तो आप में से अगर कोई कुछ बातें करना चाहते हो, अपनी बात बताना चाहते हो, तो मुझे सुनना है, कौन शुरू करेगा?
विद्यार्थी- छवि जैन है मेरा नाम, मुझे स्टार्टअप करना है, तो मुझे किन-किन विषयों की जानकारी चाहिए और एजुकेशनल लेवल पर मुझे क्या करना होगा, जिससे मुझे स्टार्टअप के लिए मदद मिल सके?
प्रधानमंत्री- आपकी बात एकदम सही है, मैं भी आजकल जब भी किसी नौजवान से मिलता हूं, तो तुरंत कहते हैं स्टार्टअप, पहले आपका ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि आप क्या करना चाहते हैं, कुछ स्टार्टअप ऐसे हैं, जो सिर्फ टेक्नोलॉजी में इनोवेशन करना चाहते हैं, किसी को लगता है मैं ड्रोन बनाऊं, किसी को लगता है कि मैं घर में बिजली की व्यवस्था ऐसी खड़ी कर दूं, अपने किसी चार दोस्तों को जानती होगी, जो टेक्नोलॉजी में एक्सपर्ट है, एकाध दोस्त है, जो फाइनेंस में एक्सपर्ट है, चलो अब चार लोगों की टोली बना दे, साइड में अपन स्टार्टअप शुरू करते है। जरूरी नहीं कोई स्टार्टअप के लिए कोई 25 साल की उम्र चाहिए, आप कभी भी शुरू कर सकते हैं, छोटे-छोटे स्टार्टअप से भी काम शुरू हो सकता है। तो मैं समझता हूं कि अगर आपकी रुचि है, तो बहुत अच्छी बात है। कुछ स्टार्टअप चलाते हैं तो उनको मिलने जाना, और एक प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाना, और उनको बताना जरूरी है कि मैं स्कूल से हूं, मैं स्कूल का प्रोजेक्ट बना रही हूं, तो वो छुपाएगा नहीं, आपसे बताएगा। तो धीरे-धीरे आपको ज्ञान भी मिलेगा, कैसे कर सकते हैं।
विद्यार्थी- सर हमेशा मुझे यह डर रहता है कि कहीं मैं पढ़ाई में ज्यादा फोकस करूं, तो मैं अपना पैशन को दूं, अगर मैं अपने पैशन पे ज्यादा फोकस करूं, तो मेरी पढ़ाई छूट जाएगी, दोनों के बीच में बैलेंस कैसे लाऊं?
प्रधानमंत्री- देखिए पहली बात है कि ये दो अलग चीज है, ऐसा आप मानती क्यों है? दोनों उपयोगी हैं, जैसे मान लीजिए आपको आर्ट का शौक है और आपने साइंस का कोई विषय पढ़ा और उसमें कोई लैब की चर्चा है, और कुछ केमिकल मिलाने की चर्चा है, तो आप ऐसा कीजिए कागज लीजिए लैब बनाएं, कागज पर पेंटिंग करें, लैब बनाएं, फिर जो केमिकल पढ़ने के थे हर बोतल में केमिकल का नाम लिखें, फिर आप पढ़ने में आया था कि भई इस केमिकल को, इस केमिकल को मिलने से ऐसा कलर बनता है, तो एक दूसरा चित्र बनाइए, उस पॉट के अंदर वो कलर, तो आपका चित्र का काम भी हो गया, और आपको वो लेशन भी याद हो गया, यानी एक साथ दोनों चीजें बहुत अच्छी तरह से आप कर सकते हैं। आपकी थकान को उतारने के लिए भी एक प्रकार से आपके पास ये जो कला है, क्राफ्ट की जो कुछ भी आपकी सीखने की इच्छा है, वो आपको मदद कर सकती है। डेली या सप्ताह में दो दिन, आधा घंटा इसके लिए दूं, समाज जीवन में जिसकी जरूरत है, वो शिक्षा तो करनी ही करनी है, लेकिन जो व्यक्तिगत जीवन में उपयोगी है, वो आप इससे कर सकती है।
विद्यार्थी- हमारा देश भी 2047 में डेवलप्ड राष्ट्रों के साथ एक होने वाला है, सो मेरा प्रश्न क्या है कि हम नवयुवक इसे हासिल करने के लिए क्या कर सकते हैं?
प्रधानमंत्री- मुझे अच्छा लगा कि मेरे देश के 10th 12th के बच्चों के मन में भी 2047 विकसित भारत का ड्रीम है। यह मेरे लिए बहुत बड़ी खुशी की बात है, यानी आज मुझे अब मजा आएगा। वाह ! देखिए ये चीज है ना, अब 2047 में विकसित भारत यानी क्या? आपने कभी सिंगापुर के विषय में सुना होगा। सिंगापुर एक जमाने में एक मछुआरों का छोटा सा गांव था, उसमें से आज इतना बड़ा बन गया। तो ली कुआन यू कहते थे कि भई अगर हमको डेवलप कंट्री बनना है, तो हमें अपनी आदतें डेवलप कंट्री के लोगों की होती है, वैसी बनानी पड़ेगी। हमें थर्ड वर्ल्ड कंट्री की तरह कहीं पर भी कूड़ा-कचरा फेंक दिया, कहीं पर थूक दिया, यह नहीं चल सकता, सिर्फ कहीं जाना है अभी यहां पर रेड लाइट है, मुझे स्कूटर खड़ा कर देना चाहिए। अब छोटी सी चीज है कि भई हम परिवार में तय करेंगे कि हमारे घर में खाने के बाद कुछ भी जूठा नहीं छोड़ेंगे, बताइए सब लोग ऐसा करें, तो कितना खाना बचेगा, कितना बड़ा फायदा होगा। तो एक नागरिक के नाते मैं अगर इन चीजों का जीवन में ठीक से पालन करूं, तो मतलब कि मैं विकसित भारत के लिए कंट्रीब्यूट कर रहा हूं। अब जैसे वोकल फॉर लोकल, मैं, मेरे देश की चीजें खरीदूंगा, मैं भारत में जो चीजें बनी हैं, उसको लूंगा, जैसे मैं कहता हूं वेड इन इंडिया। अब कुछ लोग पैसे वाले लोगों को लगता है दुबई में जाके शादी करेंगे, हिंदुस्तान में क्या कमी है भई? हम सब देश के नागरिक छोटी-छोटी चीजों को करें, हम जरूर विकसित भारत बनाने में अपना दायित्व निभा सकते हैं, हम कंट्रीब्यूट कर सकते हैं।
विद्यार्थी- We were shocked, O my god student is actually concern about this and he told us that it’s the small step that matter not the large one.
विद्यार्थी- मेरा आपसे प्रश्न यह है कि कोई भी छात्रा या कोई भी मनुष्य अपना जीवन जब व्यतीत करता है तो बहुत सारी चुनौतियों का सामना करता है, जब चीजें डिफिकल्ट हो जाती है, तभी हमको हमारा जो मोटिवेशन होता है जीवन व्यतीत करने में वो कम होता है। तो ऐसी स्थिति में सफलता प्राप्त करने के लिए हमें मोटिवेशन की जरूरत है या अनुशासन की?
प्रधानमंत्री- दोनों चीजें महत्वपूर्ण है जीवन में। अगर अनुशासन है ही नहीं, तो कितना ही इंस्पिरेशन होगा, तो वो इंस्पिरेशन क्या काम आएगा। मान लीजिए एक किसान है उसको प्रेरणा मिल रही है, बगल वाला किसान बहुत फसल कर रहा है, इंस्पिरेशन है यार, उसकी तो एक एकड़ भूमि है, मेरी तो चार एकड़ भूमि है, वो ज्यादा कमाता है, मैं कम कमाता हूं। तो उसको इंस्पिरेशन तो वहां से मिलता है, लेकिन यह बारिश के पहले जोतना चाहिए, वो कुछ सोचता नहीं है, देखेंगे, अब हफ्ते के बाद करेंगे। अगर खेत जोतेगा नहीं और बारिश आ गई फिर वह कुछ भी करे, उसकी तो हालत खराब ही रहेगी, तो उसके अंदर वो डिसिप्लिन नहीं था, इंस्पिरेशन था कि मैं उसकी जितनी कमाई करूं, लेकिन डिसिप्लिन नहीं थी कि भई मुझे इस समय के पहले खेत जोत के रखना चाहिए, बीज की जरूरत है, ला करके रखना चाहिए, बीज को तैयार करने का काम करना चाहिए, कुछ डिसिप्लिन नहीं था। जीवन में डिसिप्लिन बहुत अनिवार्य है, इंस्पिरेशन में सोने में सुहागा का काम करता है। अगर डिसिप्लिन नहीं है, कितना ही इंस्पिरेशन क्यों ना हो, वो फिर बोझ बन जाता है, निराशा पैदा करता है।
विद्यार्थी- When I asked my question, it was a question that was stucked with me from so many year, now finally, I feel great and honoured to get a clarity from a person who I have looked up too.
विद्यार्थी- सर, आजकल के जमाने में एआई का प्रभाव बढ़ते ही जा रहा है। हम देख सकते हैं कि कई कंपनियों में इंसान नहीं बल्कि एआई एम्प्लाइज भी होते हैं, तो मेरा यह सवाल है कि क्या हम एआई से डरना है और हमें अपने फ्यूचर करियर लेने के समय क्या-क्या याद रखना चाहिए?
प्रधानमंत्री- देखिए हर युग में जब भी कोई नई टेक्नोलॉजी की चर्चा होती है, कंप्यूटर आया तो चर्चा हुई, क्या हो जाएगा, सब तो यह हर युग की चर्चा का विषय रहा है। हमें किसी चीज से डरना नहीं चाहिए, हमारी कोशिश होनी चाहिए, एक हम उसके गुलाम नहीं बनेंगे, मैं अपने जीवन में, मैं ही निर्णायक रहूंगा, वो मेरा मालिक नहीं बनेगा, जैसे कुछ बच्चों का है मोबाइल उनका मालिक बन गया है, अगर मोबाइल नहीं है, तो खाना नहीं खा सकता है, टीवी नहीं है तो, जी नहीं सकता है। मतलब ये आप उसके गुलाम बन गए। मैं गुलाम नहीं बनूंगा। एक बार मन में ये पक्का करना। हर टेक्नोलॉजी का हम ज्यादा उपयोग कर सकते हैं। अगर मैं एआई को पूछूं मुझे यह किताब कहां से मिलेगी, कौन सी है, इस विषय पे अच्छी किताब कौन सी है, हो सकता है वो गाइड करे। आपके लिए काम आएगा। लेकिन तुम कहोगे मैं नहीं पढूंगा, तुम ही मुझे बता दो अंदर क्या है, तो फिर गड़बड़ है, और हमेशा ही नेचर ऑफ जॉब बदलेगा, नेचर ऑफ जॉब बदलना है और पहले भी जब बैलगाड़ी में लोग जाते थे, तो एक प्रकार का जॉब था, अब वो हवाई जहाज में जाने लगा है, तो बहुत कुछ बदल गया। लेकिन जीवन तो चलता रहा। तो मैं समझता हूं हमने टेक्नोलॉजी को समझना होगा, खुद का विस्तार करना होगा, उसमें उस टेक्नोलॉजी की ताकत को जोड़ना होगा। हमारे कामों में वैल्यू एडिशन करें। अगर ये होता है, तो मैं पक्का मानता हूं कि कितनी ही उत्तम से उत्तम टेक्नोलॉजी क्यों ना आए, हमें उपयोग होने ही वाली है, हमें डरने की जरूरत नहीं है।
विद्यार्थी- I never believed, I would be the one to be chosen, to have such a gracious occasion with our Prime Minister.
विद्यार्थी- It was a really great experience, I am completely overwhelmed and it felts a real.
विद्यार्थी- He felt like a family more than a Prime Minister.
प्रधानमंत्री- साथियों कोयंबटूर के हमारे युवा साथी पढ़ाई के साथ-साथ एआई, स्टार्टअप और फ्यूचर की टेक्नोलॉजी को लेकर बहुत जागरूक हैं और मैं कह सकता हूं, यही तो है युवा भारत की युवा सोच, जो विकसित भारत 2047 के संकल्प को नीत नई मजबूती दे रही है।
साथियों,
परीक्षा पे चर्चा का मतलब ही है साथ बैठकर बात करना और एक दूसरे से सीखना और इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए हमारी चर्चा कुछ हफ्तों के बाद कोयंबटूर से निकल करके छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंच गई। वहां भी बच्चों से मेरी बहुत दिलचस्प बातें हुई और मैं कह सकता हूं सिर्फ बातचीत नहीं, बहुत मजेदार चीजें खाने का भी मौका मिल गया। आप भी इसका आनंद लीजिए।
विद्यार्थी- जय जोहार सर।
प्रधानमंत्री- जय जोहार।
प्रधानमंत्री- कुछ खिलाया-विलाया कि नहीं?
विद्यार्थी- यस सर।
विद्यार्थी- सर आप भी बहुत सारी मीटिंग्स अटेंड करके आए हैं। आप भी हमारे यहां आकर खाना चाहेंगे?
प्रधानमंत्री- ये, कैसे बनता है?
विद्यार्थी- सर ये बेसन को गोल-गोल आकार देके उसको तलते हैं।
प्रधानमंत्री- अच्छा, और?
विद्यार्थी- ये नमकीन होता है।
प्रधानमंत्री- तो कब खाते हैं ये लोग?
विद्यार्थी- सर ये दिवाली के टाइम पे।
प्रधानमंत्री- दिवाली टाइम पे खाते हैं।
विद्यार्थी- ज्यादातर दिवाली टाइम पे बनता है।
प्रधानमंत्री- महाराष्ट्र में इसको क्या कहते हैं?
विद्यार्थी- नहीं पता।
प्रधानमंत्री- महाराष्ट्र में ऐसा ही बनता है, इसे चकली कहते हैं।
विद्यार्थी- हां सर।
प्रधानमंत्री- ये क्या है?
विद्यार्थी- सर ये खुरमी है।
प्रधानमंत्री- हां।
विद्यार्थी- हमारी गुड़ से बनती है, आटे से बनती है और सूजी से बनती है।
प्रधानमंत्री- तो बढ़िया खिलाने के लिए धन्यवाद बेटा।
विद्यार्थी- वहां पे उन्हें खुरमी मिली, तो उन्होंने सबको अपने हाथ से एक-एक खुरमी खिलाई and it was just so amazing.
प्रधानमंत्री- आपके मन में भी कुछ सवाल आते होंगे, आज आप लोगों को यहां आने के लिए मौका मिल गया है तो?
विद्यार्थी- यस सर।
प्रधानमंत्री- बताइए?
विद्यार्थी- हम स्टूडेंट्स को भी एग्जाम्स के बाद वेकेशंस में जाने का बहुत मन करता है, तो आप इंडिया में कोई ऐसी पांच जगह बता सकते हैं, जहां हम भी जा सके?
प्रधानमंत्री- आप जिस तहसील में से हो, कौन सा तहसील है आपका?
विद्यार्थी- सर मैं रायपुर से...
प्रधानमंत्री- रायपुर से, रायपुर तहसील में कौन-कौन सी चीजें हैं, इसका जरा लिस्ट बनाओ, एक घंटा लगेगा, 2 घंटे लगेंगे, जाऊंगा। फिर लिस्ट बनाओ, जिले में कौन से हैं जो देखे नहीं हैं, फिर तय करूं मैं राज्य में कौन से हैं, छत्तीसगढ़ में ऐसी कौन सी जगह है, मैं गया नहीं हूं। हम कहीं पर भी जाए, स्टूडेंट के रूप में जाना चाहिए, तब टूरिज्म का मजा आता है। रेल के डिब्बे में जाना और खास साथ में खाना भी ले जाना। देखना चाहिए कैसा अनुभव होता है, भीड़ होती है, क्या होता है, लोग बातें करते हैं, क्या करते हैं, इसका एक आनंद होता है, जीवन में सीखने को मिलता है। भारत इतनी विविधताओं से भरा हुआ है, एक जिंदगी भी कम पड़ जाए देखने के लिए।
विद्यार्थी- सर, मेरा प्रश्न आपसे यह है कि कभी-कभी हम एग्जाम के दौरान रिवीजन नहीं कर पाते हैं, जिससे हमारा मन अशांत हो जाता है, तो सर हम अपने मन को शांत कैसे करें, एग्जाम के दौरान भी और एग्जाम हॉल में जाने से पहले भी?
प्रधानमंत्री- एक वीक देख लीजिए परीक्षा के पहले का, सभी चीजों को आपने ऊपर-नीचे तो कर ही लिया होगा। आप मान के चलिए आपने जो सुना है, आपने जो पढ़ा है, वो बेकार नहीं गया है, कहीं ना कहीं तो स्टोरेज है ही है वो। आप शांत मन से बैठ लीजिए, चिंता मत कीजिए, जैसा पेपर आता है देख लीजिए। दूसरी चीज, आप अच्छा विद्यार्थी बनना है ना, आपको उस विषय पर ग्रीप होनी चाहिए ना, तभी तो अच्छे विद्यार्थी बनोगे। सब्जेक्ट पर ग्रीप कैसे आएगी? एक अच्छा खिलाड़ी, अच्छा खिलाड़ी कैसे बनता है?
विद्यार्थी- प्रैक्टिस से, कंसिस्टेंसी से, डिसिप्लिन में रहता है, रूटीन में चलता है।
प्रधानमंत्री- सबसे बड़ी बात है वो लगातार कंपटीशन करता रहता है, गिरता है, पटकता है, हारता है, जीतता है, करता है। उसमें से वो खिलाड़ी बनता है, ठीक है? आपको मैं एक सुझाव देता हूं, आप करिए। आपके क्लास में कुछ विद्यार्थी होंगे, आपको लगता है जरा पढ़ने में थोड़ा कम है, ऐसे तो होते ही है, ऐसे एकाध को आप दोस्त बनाइए। ये टेक्निक बहुत काम आएगी आपको। उसको कहो कि मैं आज तुझे मैथ्स सिखाना चाहता हूं। अब उसको मैथ्स सिखाने के लिए आप जो मेहनत करेंगे, दिमाग फोकस करेंगे, आपका मैथ्स पक्का होगा कि नहीं होगा?
विद्यार्थी- होगा सर।
विद्यार्थी- मैं ताइक्वांडो खेलती हूं और मैं आगे चलके स्पोर्ट्स पर्सन बनना चाहती हूं, अपनी स्टडीज और स्पोर्ट्स को बैलेंस करके कैसे रख सकती हूं?
विद्यार्थी- शिक्षा की जीवन में भी जरूरत है, समाज जीवन में भी जरूरत है, इसको अंडरएस्टीमेट नहीं करना चाहिए। ये गलती कभी मत करना कि खेल में, मैं बहुत अच्छा हूं, इसलिए मुझे पढ़ने की जरूरत नहीं है। लेकिन शिक्षा ही सब कुछ कर लेगी, ऐसा नहीं है। आप में हुनर है, जो भी है उसको डेवलप करना चाहिए। खिलाड़ी बनने के लिए खेलें वो एक विषय है, लेकिन जिंदगी में खेल होना चाहिए, यह भी बहुत जरूरी है। जिंदगी खेल होने से बचाना है, तो जिंदगी में खेल होना चाहिए। खेलना भी है, खेलूंगा तो खिलूंगा, और पढ़ना भी है ताकि और लोग कहेंगे कि इसको कुछ पढ़ना-वढ़ना आता नहीं, इसलिए मैदान में रहता है, नहीं, पढ़ने में भी मैं पावरफुल हूं, खेलने में भी बहुत...
विद्यार्थी- वो जो भी बताएं उसको मैं अपने लाइफ पे इंप्लीमेंट करने का कोशिश करूंगी और मैं लफ्जों में बयां नहीं कर सकती, आज जो भी हुआ।
विद्यार्थी- सर मेरा सवाल ये है जैसे कुछ सालों पहले आपने स्वच्छ भारत स्टार्ट किया था, हमारा नया रायपुर भी डेवलपमेंट की ओर जा रहे हैं, तो हम एज ए स्टूडेंट उस डेवलपमेंट के लिए या अपने एनवायरमेंट को प्रोटेक्ट करने के लिए क्या कंट्रीब्यूट कर सकते हैं?
प्रधानमंत्री- प्राकृतिक संपदा को बचाने का हमारे स्वभाव में होना चाहिए, और धीरे-धीरे हमें लोगों को जोड़ना चाहिए, अब जोड़ते रहते हैं, तो बदलाव आता है। खुद के जीवन में कुछ नियमों का अगर हम पालन करते हैं। जैसे अब पानी, मुझे बताइए कि मैं ब्रश कर रहा हूं और पानी बह रहा है, अगर तुम ब्रश कर रहे हो, तो पानी तो बंद करो, जब मुंह धोओगे तब पानी लेना। छोटी-छोटी चीजें होती है। एक बार मैं एक गांव की यात्रा कर रहा था, दूर से मैंने देखा कि एक जगह एकदम से जंगल जैसा लग रहा है, बड़ा हरा-भरा, बोले ये क्या है, बोले ये तो स्कूल है। कहते है ये सब इतना सूखा है, ये ग्रीन है। वहां एक टीचर थे, उस टीचर ने ये जो पेट्रोल पंप होता है वहां जो ऑइल के कैन-वगैरह होते हैं, वो इकट्ठे करते थे वो और बच्चों को कहते थे कि तुम्हारे घर में वो जो पानी होता है, जिसमें खाने का कुछ अंश होता है, वो इस बोतल में रोज स्कूल आओगे, तब भर करके आना, तो सारे बच्चे वो बोतल भर के या जो उनको कंटेनर दिया है, वो भर करके आते थे, और उन्होंने वहां पेड़ लगाए थे। हर बच्चे को एक पेड़ दे दिया गया था, वो जो पानी ले आता था, वो उसमें डालना होता था उसको। फर्टिलाइजर का भी काम करता था, सब्जी-वब्जी के टुकड़े होते थे, उसके कारण वो पूरा स्कूल चारों तरफ एकदम से ग्रीन बन गया था। एक टीचर ने इतना बड़ा परिवर्तन लाया। मानवीय रूप से व्यवहार करें, तो बदलाव शुरू हो जाता है। छोटी चीजें हैं, हम आराम से कर सकते हैं। समाज का वातावरण हमारे स्वभाव में आना चाहिए।
विद्यार्थी- आप इतने साल से देश को संभाल रहे हो, देश के लीडर हो, तो आप फ्यूचर जनरेशन से हम बच्चों से ऐसी कौन सी क्वालिटी एक्सपेक्ट करते हो कि हमारे अंदर आनी चाहिए एक लीडर के रूप में?
प्रधानमंत्री- ऐसा लीडर बनना है कि निडर बनना है?
विद्यार्थी- दोनों बनना है।
प्रधानमंत्री- देखिए पहले निडर बनिए।
विद्यार्थी- यस सर।
प्रधानमंत्री- जो काम है मन में तय करिए, कोई करे या ना करे मैं करूंगा, जब यह आ जाएगा, मैं अपने से शुरू करूंगा, तो आप देखिए अपने आप लीडरशिप आना शुरू हो जाएगी। जैसे मान लीजिए यहां कूड़ा-कचरा है, आप जा रहे हैं और आपने एक उठा लिया, तो आपके साथ जो चार लोग चलते होंगे ना, आपने देखा होगा वो भी, उनको भी लगेगा यार उठा लो। मतलब आप लीडर बन गए कि नहीं बन गए? अच्छी चीज है, हमें अपने आप को हमेशा लीडर रोल में तैयार करना चाहिए, ये अच्छा विश्वास है, विचार भी अच्छा है। लेकिन लीडर का मतलब ये नहीं है कि चुनाव लड़ना, पॉलिटिकल पार्टी बनाना, पार्टी में जाना, लच्छादार भाषण करना, ऐसा नहीं होता है, लीडर मतलब, लीडरशिप में एक क्वालिटी होनी बहुत जरूरी है कि आप 10 लोगों को अपनी बात समझा पाओ, थोपनी नहीं है, समझानी है। समझाने के लिए पहले उसको समझना है, जो उनको समझ पाता है, वो समझा पाता है, जो उनको नहीं समझता है, वो कुछ नहीं समझा पाता। और इसलिए हमारी कोशिश ये होनी चाहिए कि उनको समझना चाहिए।
विद्यार्थी- उन्होंने बहुत अच्छे से बताया कि किसी के अंदर एक लीडरशिप क्वालिटीज होती है, अगर वो किसी चीज के लिए रिस्पांसिबल हो रहा है। If I would describe this whole and I would say सपना।
विद्यार्थी- मैं प्रधानमंत्री से मिली।
विद्यार्थी- I am very lucky.
विद्यार्थी- बहुत अच्छा था, मतलब ऐसा एक्सपीरियंस जो लाइफ में बहुत कम लोगों को मिलता है।
प्रधानमंत्री- परीक्षा की तैयारी के अनुभव, परीक्षा के समय आने वाले विचार, स्ट्रेस और लोगों के एक्सपेक्टेशन से जुड़े हुए ढेर सारे सवाल लगातार चर्चा का हिस्सा बनते हैं और परीक्षा पे चर्चा का मकसद ही है कि हमारे युवा साथी इस पर खुलकर बात करें। परीक्षा पे चर्चा सिर्फ बोर्ड एग्जाम की तैयारियों से जुड़ी नहीं है। मैं जब आपके सवाल सुनता हूं, तो स्वाभाविक है मेरे मन को भी वो छूते हैं। मैं अंदाजा लगाता हूं कि जीवन के कई पहलुओं से जुड़ी हुई बातें हमारे युवा मित्रों के मन में लगातार चल रही हैं। मैं अब आपको गुजरात लेकर चलूंगा, वहां के बच्चों ने और विशेषकर ट्राइबल बेल्ट के मेरे आदिवासी बच्चों ने जो सवाल पूछे और उन्होंने तो मुझे सचमुच में हैरत में डाल दिया था।
विद्यार्थी- नमस्ते सर। देव मोगरा गाँव में आपका स्वागत है ।
प्रधानमंत्री- वाह। मुझे तो बताया गया था की आज सभी को हिन्दी में बोलना है...
विद्यार्थी- हां सर।
प्रधानमंत्री- चलिए।
विद्यार्थी- सर जब आए तो हमने देखा कि उन्होंने एक कोटी पहन रखी है जिस पर वारली आर्ट है, तो हमारे आदिवासी समाज में वारली आर्ट का बहुत महत्व है, तो हमें ये देख के बहुत अच्छा लगा।
विद्यार्थी- हम बहुत एक्साइटेड थे, आपको मिलने के लिए। किसी और बच्चे को आपसे मिलने और आपसे बातें करने के लिए कितने ही सवाल होते हैं। लेकिन हम उतने नसीब वाले हैं कि जो आपके साथ बातें करें।
प्रधानमंत्री- आप कितने दूर से आए हैं?
विद्यार्थी- हम यहां डेडियापाड़ा से।
प्रधानमंत्री- डेडियापाड़ा से ही आए हैं। अच्छा।
विद्यार्थी- हम मांडवी से सर।
प्रधानमंत्री- मांडवी, अच्छा, क्या नाम?
विद्यार्थी- जय।
प्रधानमंत्री- जय और अभी। इतने बड़े हो गए आप लोग? पहचानते, इनको बताया कैसा मेरा परिचय है आपसे?
विद्यार्थी- हां।
प्रधानमंत्री- इनकी हिम्मत आई कि नहीं आई सबको?
विद्यार्थी- आई सर आई।
प्रधानमंत्री- ये मुझे पहले भी एक बार मिलने आए थे।
प्रधानमंत्री – चलिए बताइए आप लोग कुछ पूछना चाहते हो, कुछ जानना चाहते हो बताइए?
विद्यार्थी – सर हमारे माता-पिता ने यह बताया कि पहले कुछ आदिवासी इलाके थे, जो बहुत ही पिछड़े हुए थे। तो उन्होंने यह भी बताया कि आपका गुजरात के आदिवासी इलाकों से बहुत लगाव है, और आपने वहां बदलाव भी किया, तो मैं जानना चाहूंगा कि आपको इस चीज की प्रेरणा कहां से हुई?
प्रधानमंत्री – आपको पाल-चितरिया की घटना मालूम है?
विद्यार्थी – हां।
प्रधानमंत्री – वहां आदिवासी समाज ने बहुत बड़ा आजादी का संघर्ष लड़ा था। एक बार बहुत भयंकर अकाल हुआ था। तो उस समय मैं उस क्षेत्र में काफी दिनों तक रहकर के काम करता था। तो उस समय लगता था कि यहां एजुकेशन पर ध्यान देना चाहिए। उसके बाद जब मुझे मौका मिला, मुख्यमंत्री बना तो मैं ध्यान देने लगा। आपको हैरानी होगी एक समय ऐसा था कि उमरगांव से अंबाजी तक, एक भी साइंस स्कूल नहीं था। तो बाद में आपने तो देखा अब तो दो यूनिवर्सिटी हैं, साइंस स्कूल हैं, इंजीनियर आईटीआई है, बहुत सारा बदलाव आया है। उसका बहुत बड़ा लाभ हो रहा है।
विद्यार्थी – हां सर।
प्रधानमंत्री – आज भी आपको मालूम होगा एक मैंने पीएम जनमन योजना बनाई है। आदिवासियों में भी कुछ इलाके और कुछ लोग हैं समाज, वो और पीछे रह गए हैं। तो मुझे फिर उनके लिए अलग से स्कीम बनानी पड़ी, अलग से बजट बनाना पड़ा। तो मुझे तब से लगता था कि हम शिक्षा पर जितना ज्यादा बल देंगे, उतना बहुत तेजी से विकास होगा। दूसरा मेरे मन में था, पूरे आदिवासी में उमरगांव से अंबाजी पूरा हाईवे बनाया है यहां, तो विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की बहुत जरूरत होती है, लोग भी आना जाना शुरू करते हैं, तो उस दिशा में ध्यान दिया।
विद्यार्थी – मेरा आपसे यह प्रश्न है कि पहलगाम हमले के बाद हमारे घर में सब चर्चा कर रहे थे कि अब आगे क्या होगा? पूरा देश आपकी ओर देख रहा था। फिर ऑपरेशन सिंदूर हुआ और हमारे देश की सेना ने जीत हासिल की। तो ऐसे संयोग में आपने अपने तनाव को कैसे हैंडल किया? हम तो सिर्फ परीक्षा के तनाव से।
प्रधानमंत्री – आप लोगों को परीक्षा का तनाव आ जाता है।
विद्यार्थी – हां, यस सर।
प्रधानमंत्री – जब आप पुरानी परीक्षा के दिनों को याद कीजिए, अगर पुरानी परीक्षाओं को याद करेंगे तो आपको लगेगा हां यार जब गया तब तो टेंशन था, लेकिन जब करके आ गया तो कुछ नहीं था।
विद्यार्थी – हां सर।
प्रधानमंत्री – ऐसा होता है कि नहीं?
विद्यार्थी – होता है सर।
प्रधानमंत्री – परीक्षा के लिए सबसे अच्छी चीज होती है कि आप पेपर सॉल्व करने की आदत डालें, लिखने की। ज्यादातर लोग क्या करते हैं? पढ़ते हैं।
विद्यार्थी – हां। यस सर।
प्रधानमंत्री – अगर खुद इस प्रकार से आप प्रैक्टिस करते रहते हैं, तो मुझे पक्का विश्वास है कि आपको कभी भी तनाव नहीं आएगा।
विद्यार्थी – हां सर।
प्रधानमंत्री – हम क्या करते हैं, पूरे दिन किताब, अरे कभी हंसो। दूसरा सबसे बड़ी चीज है जो आज लोगों को ध्यान में नहीं है, वो है नींद। अच्छी नींद लेनी ही चाहिए। आपको लगेगा ये ऐसा कैसा प्रधानमंत्री है, जो सोने की बात करने के लिए आया, हम तो एग्जाम के लिए पूछ रहे थे। लेकिन वो नींद इतनी पूरी लेते हैं, तो बाकी समय आपका बहुत ही फ्रेश नए विचार, नए आइडियाज, मन बहुत प्रफुल्लित रहता है।
विद्यार्थी – हां सर। हम डॉक्टर या कभी इंजीनियर या कभी ऑफिसर बनना चाहते हैं, तो हमें आगे बढ़कर, अपना करियर कैसे चूज़ करना चाहिए सर?
प्रधानमंत्री – अगर आपने एक महीने में 10 चीज अलग-अलग बता दी तो घर वाले क्या कहेंगे? इसका तो कोई ठिकाना ही नहीं। ये तो अच्छी चीज है कि आपको कुछ किसी को देख कर लगा, मैं भी ऐसा बनता तो क्या होता? अगर यह हमको करना है, जो व्यक्ति बहुत बड़ा बन गया है, वह बड़ा बनने की इच्छा होना बुरा नहीं है, लेकिन वो बड़ा बना है उससे अपने को जोड़ो मत। कहां से शुरू किया था? अगर आपका ध्यान उस पर होगा तो फिर आगे हां, हां यार यहां से चलो मैं शुरू करता हूं। कोई कहेगा कि मैं क्रिकेटर बना, लेकिन जब मैं आठवीं कक्षा में था तो सुबह 4:00 बजे उठकर के, साइकिल चलाकर के, स्टेडियम तक जाता था। और फिर मैं दो घंटे प्रैक्टिस करता था, तो फिर तो मैंने कहा अच्छा इतना मेहनत करना पड़ता है। चलो मैं शुरू करता हूं, अभी तो क्या लगता है हां देखिए यार सेंचुरी लगा दी, फोटो छप गई, तो सपनों के लिए जीना सीखें, सपनों के अनुकूल जिंदगी बनाएँ। लेकिन शोर अगर मचाए तो सफलता शोर मचाए।
विद्यार्थी – हां।
प्रधानमंत्री – जैसे ही आप नंबर वन आ जाएंगे तो सफलता शोर मचाएगी कि नहीं मचाएगी?
विद्यार्थी – मचाएगी।
प्रधानमंत्री – पूरे स्कूल को पता चलेगा कि नहीं चलेगा?
विद्यार्थी – चलेगा।
प्रधानमंत्री – पूरे गांव को पता चलेगा या नहीं चलेगा?
विद्यार्थी – चलेगा।
प्रधानमंत्री – तो हमारी कोशिश यह होनी चाहिए।
विद्यार्थी – सर ने जो बातें कही जो मैंने सुनी सब मैंने अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए और आगे बढ़ के कुछ बनने के लिए, सब अपने लिए सोचा।
प्रधानमंत्री – आइए।
विद्यार्थी – सर अब हम ले चलते हैं हमारे कल्चर से रिलेटेड कुछ चीजें दिखाने। सर ये है वारली पेंटिंग्स है जो एक कार्डबोर्ड बनाते हैं, उस पर ऐसे पेंटिंग करते हैं। ये सभी वो चीजें हैं जो हमारे कल्चर से रिलेटेड है। सर हमने आदिवासी इलाके से जो आदिवासी हैं, उनके कलाकृतियों को भी प्रेजेंट किया है। जैसे कि चित्रकला है, ये है लिप्पन आर्ट। ये जो मैंने बनाया ये है पिठोरा आर्ट।
प्रधानमंत्री – खुद बनाए हो?
विद्यार्थी – यस सर। आपके लिए ये बनाया है।
प्रधानमंत्री – क्या नाम है आपका?
विद्यार्थी – किशन है।
प्रधानमंत्री – ये आपकी हैंडराइटिंग है?
विद्यार्थी – यस सर।
प्रधानमंत्री – अरे वाह।
विद्यार्थी – थैंक यू सर।
प्रधानमंत्री – कितने बढ़िया है भाई।
विद्यार्थी – घर की दीवारों पे ये बनाए हैं और उनकी पूजा भी करते हैं।
प्रधानमंत्री – वाह, तो आप तो बड़े आर्टिस्ट हो गए भई।
विद्यार्थी – यस सर। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है कि हमारे भारत देश के प्रधानमंत्री ने मेरी पेंटिंग्स ली है और सर ने भी बहुत अच्छी तरह से हमारे साथ जैसे हम खुद फ्रेंड्स के साथ बात कर रहे हैं, ऐसा फील हो रहा था।
विद्यार्थी – मुझे आपसे यह सवाल है कि आपकी लाइफ में आपके टीचर्स का क्या रोल था?
प्रधानमंत्री – बहुत रोल था, बहुत रोल था, जैसे मैंने बताया ये मेरे, टीचर हमें डेली कहते थे कि आप लाइब्रेरी जाइए, टाइम्स ऑफ इंडिया में ये editorial के ऊपर एक वाक्य रहता है, वो अपने उसमें लिख कर के आइए और दूसरे दिन वो उसकी चर्चा करते थे, तो ऐसी बहुत सी चीजें ऐसी जैसे ये जो फिटनेस वाला मामला है तो मेरे यहां एक परमार साहब करके थे, जब मैं प्राइमरी में था, वो बहुत आग्रही रहते थे फिजिकल फिटनेस के लिए, सिखाते भी थे, और योगा सिखाते थे, मलखंभ सिखाते थे। हम प्लेयर नहीं बने, लेकिन हमें ये तो समझ आया कि यह शरीर के लिए जरूरी है। तो हर टीचर का हर एक के जीवन में आप दुनिया के कितने भी बड़े महान पुरुष को मिलिए, उसके जीवन में से दो बातें जरूर मिलेगी। वो एक वो कहेगा कि मेरे जीवन में मेरी मां का बहुत बड़ा रोल है।
विद्यार्थी – हां।
प्रधानमंत्री – दूसरा कहेगा मेरे जीवन में मेरे टीचर का बहुत बड़ा रोल है।
विद्यार्थी – हर एक क्षेत्र में हमारा देश आगे बढ़ रहा है। तो आप बताएंगे कि हमारे देश से आदिवासी समुदाय के लोग हमारे देश को आगे बढ़ाने में क्या कर सकते हैं?
प्रधानमंत्री – बहुत! देखिए देश जो आज आगे बढ़ा है ना, वो आदिवासी समाज के कारण ही बढ़ा है। आज देश का पर्यावरण बचा है तो आदिवासी समाज के कारण बचा है। वे प्रकृति की पूजा करते हैं, प्रकृति की रक्षा करते हैं। आज भी हमारे देश की सेना, सर्वाधिक देश भर के आदिवासी समाज के बेटें-बेटियां सेना में है। आज देश के हर क्षेत्र में अब कोई फर्क नहीं रहना चाहिए। हमारे लिए कोई फर्क नहीं, हमारे पास तो अब जैसे स्पोर्ट्समैन हैं, हमारे आदिवासी बच्चे बहुत कर सकते हैं। इनका डेवलपमेंट हुआ, देश का नाम रोशन, आपको मालूम है अभी क्रिकेट महिला टीम जीत करके आई, पता है।
विद्यार्थी – हां सर।
प्रधानमंत्री – क्रांति गौड़ नाम की बच्ची हैं मध्यप्रदेश से, वो आदिवासी बेटी है।
विद्यार्थी – हां सर।
प्रधानमंत्री – उसने खेल कूद में नाम कमाया है।
विद्यार्थी – हां सर।
प्रधानमंत्री - और वैसे भी हमारे देश के कई खिलाड़ी हैं, जो आदिवासी समाज से हैं और उन्होंने बहुत बड़ा नाम रोशन किया है। उसी प्रकार से हुनर! आपके पास इतनी बड़ी कला है, आप अगर टेक्नोलॉजी सीख लें, तो यही सामर्थ्य कितना आगे बढ़ जाएगा।
विद्यार्थी – हां सर।
प्रधानमंत्री - तो एक तो हमें नौकरी के लिए जिंदगी, ये नहीं हो सकता।
विद्यार्थी – नहीं।
प्रधानमंत्री - सपना तो ऐसा होना है कि भई मैं एक ऐसी जिंदगी जीना चाहता हूं, उसके लिए मैं जिंदगी को बनाऊंगा। अगर ये हम करते हैं तो हमें बहुत लाभ होगा। गाना गाएंगे चलिए सुनाइए।
विद्यार्थी – जंगलु रेनारी तूं पाहाडू रेनारी, जंगलु रेनारी तूं पाहाडू रेनारी…. (पूरा गाना स्पष्ट नहीं)
विद्यार्थी – हम सब ने मिलके उनके लिए एक गाना गाया जो कि यहां मोगी माता के बारे में था। वो कहां रहते हैं, कैसे रहते हैं, वो सब था उस सॉन्ग में।
विद्यार्थी – हमारी बहुत सारी बातचीत हुई सर के साथ, कि कैसे जीवन में हमेशा खुश रहें, सारे स्ट्रेस को कैसे दूर करें, अपने टाइम मैनेजमेंट कैसे करें और एग्जाम के बारे में भी कैसे मतलब पढ़ाई करें एग्जाम से डरना नहीं है।
विद्यार्थी – पहले तो मुझे खुद पे आंखों पे भरोसा ही नहीं हो रहा था, कि पीएम सर हमारे सामने हैं। पता ही नहीं चला कि टाइम कहां चला गया।
प्रधानमंत्री - परीक्षा पे चर्चा का हमारा सफर अष्टलक्ष्मी, यानी नॉर्थ ईस्ट भी पहुंचा। और गुवाहाटी में परीक्षा पे चर्चा और वो भी ब्रह्मपुत्रा के उस बहते हुए प्रवाह के बीच मजे से सैर करते-करते चर्चा भी चलती रही।
विद्यार्थी – नमस्कार सर।
प्रधानमंत्री - चलिए बैठिए।
विद्यार्थी – प्रणाम माननीय प्रधानमंत्री जी। हम सभी आपको एक गमोचा पहनाना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री – जरूर, असम में आए और गमोचा ना हो। वाह।
विद्यार्थी – उनका जो प्रेजेंस है ना वो बहुत ही कामिंग है, लाइक रिलैक्स जैसा लग गया। बैठे रहने पर जो एंजायटी होती है सब निकल गया। उनके साथ एक साथ बहुत बातें किया फिर हमने।
प्रधानमंत्री – अच्छा आप लोगों ने परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम पहले कभी देखा है टीवी पर?
विद्यार्थी – हां सर देखा है।
प्रधानमंत्री – अच्छा कभी आप लोगों ने वो किताब देखी है?
विद्यार्थी – हां सर। एग्जाम वारियर।
प्रधानमंत्री – तो उसमें से फिर आपको पहले जो सोचते थे, परीक्षा के पहले और अब सोचते हैं, उसमें क्या फर्क है? किताब पढ़ने के बाद या कार्यक्रम देखकर क्या फायदा हुआ?
विद्यार्थी – परीक्षा से इतना डर नहीं लगता। आपके जो मंत्र दिए हैं ना वैसे जैसे कि लाइक परीक्षा को एक सेलिब्रेशन उत्सव की तरह सेलिब्रेट करना चाहिए। तो अब थोड़ा-थोड़ा परीक्षा की तरफ से मतलब डर कम रहा है पर अब।
प्रधानमंत्री – लेकिन डर तो घर के लोग डराते हैं ना।
विद्यार्थी – हां सर।
प्रधानमंत्री – हां।
विद्यार्थी – पूछते हैं कि लाइक वो एक नंबर कहां गया? क्यों कटा एक नंबर?
प्रधानमंत्री – जीवन में अगर संतोष हो जाता, बस बहुत हो गया, अब क्या, तो फिर जीवन में प्रगति नहीं होती।
विद्यार्थी – यस सर।
प्रधानमंत्री – ये जीत तो रहनी चाहिए मन में, लेकिन उसके लिए मैंने मंत्र में एक बात बताई है।
विद्यार्थी – सर हमें किसी और से प्रतियोगिता नहीं करना चाहिए।
प्रधानमंत्री – या शाबाश। हां। मैंने ये कहा है कि हमने लगातार खुद से कंपटीशन करते ही रहना चाहिए। कोई हमें कहता है भई 99 आए, एक क्यों नहीं आया? ठीक है, उन्होंने कहा बात अलग है। एक खुद को भी पूछना चाहिए कि मेरे जीवन में यह बदलाव क्यों आया? ये कमी क्यों रही? क्या कारण था? अच्छा आपके मन में कुछ सवाल होंगे तो जरूर पूछिए।
विद्यार्थी – मेरा आपसे यह प्रश्न है कि मैंने सुना है कि आप अपने रोजमर्रा की जिंदगी में एक पर्टिकुलर डाइट हेल्दी रहने के लिए फॉलो करके चलते हैं, तो हम छात्र ऐसा कौन सा मैजिकल डाइट फॉलो करके चलें, जिससे कि हम energised और focused रह पाएं, और हमारा सबसे बेहतर प्रदर्शन आ पाए परीक्षाओं में।
प्रधानमंत्री – हकीकत ये है कि मेरा कोई डाइट का सिस्टम ही नहीं है, क्योंकि मैं पहले अलग-अलग परिवारों में भोजन करता था। तो इतना ही रहता था कि भई वेजिटेरियन हूं, तो वेजिटेरियन खाऊंगा। फिर उस घर में जो होता था, वो मैं खाता था। दूसरा मुझे खुद को कभी पकाना पड़ता था। कभी खिचड़ी पका देता था। खिचड़ी खाते हैं की नहीं आप?
विद्यार्थी – हां सर।
प्रधानमंत्री – डाइट आपकी पसंद का होना चाहिए। यानी ऐसा नहीं दवाई की तरह डाइट नहीं खाए। तय करो, कि पेट भर के खाना है, कि मन भर के खाना है।
विद्यार्थी – मन भर के खाना है।
प्रधानमंत्री – और ज्यादातर लोगों के क्या होता है, मना ना करे तब तक तो खाते रहते हैं। अनाज जो है पेट भर के खाते हैं। लेकिन सांस सीना भर के नहीं लेते हैं। यहां उल्टा करना चाहिए। दिन में जब भी मौका मिले एकदम शरीर भर जाए इतना सांस लेना चाहिए। हो सके तो कुछ पल उसको रोकना चाहिए और फिर धीरे से निकालना चाहिए। हम लोग क्या करते हैं खाना, यानी बाकी 50 कामों में शरीर को सबसे आखिरी प्रायोरिटी देते हैं। लास्ट प्रायोरिटी। अच्छा आप में से कितने लोग हैं जिन्होंने नियम बनाया कि हम सूर्योदय देखेंगे, यानी देखेंगे। ऐसे कितने हैं?
प्रधानमंत्री – सनराइज।
विद्यार्थी – देखेंगे सर!
प्रधानमंत्री – ये शरीर को ये चीजें एक ताजगी देती हैं, एक एनर्जी देती हैं। इनको हमने आदत बनाना है। शरीर को सबसे पहले प्रायोरिटी देना चाहिए।
विद्यार्थी – सर, अक्सर हमारे माता-पिता हमारे दोस्तों के साथ हमारी तुलना करते हैं। परंतु उससे ज्यादा दबाव हम पर तब पड़ता है जब हमारे अपने घर वालों या भाई बहनों से तुलना की जाती है। तो ऐसी परिस्थिति में हमें क्या करना चाहिए?
प्रधानमंत्री – मान लीजिए कह दिया पिताजी ने कि देख तेरी बहन के अक्षर कितने बढ़िया हैं। उसकी हैंडराइटिंग कितनी सुन्दर हैं। तो अच्छा व्यक्ति क्या कहेगा? उस बहन को कहेगा बहन मुझे सिखाओ ना मैं कैसे हैंडराइटिंग अच्छी बनाऊं। दूसरा क्या करेगा? वैसे पापा मां को बहन ही अच्छी लगती है। उसकी हैंडराइटिंग अच्छी लगती है। मैं इतनी मेहनत कर रहा हूं देखते नहीं है। अगर परिवार में भी किसी एक की अच्छाई की बात होती है, तो हमें उस भाई या उस बहन से उसकी अच्छाइयों को सीखने का प्रयास करना चाहिए। और पिता माता को कहना चाहिए कि आपने अच्छी बात बताई है। यह चीज मेरे में नहीं है। मुझे बताइए मैं कैसे इसको तैयार करूं? तो पिता माता का आपकी तरफ देखने का तरीका, देखिए यह बुरा नहीं मानता है। ये इसमें से सीखने का प्रयास करता है। कंपैरिजन से मां-बाप को बचना चाहिए। और मैं हर मां-बाप से कहता हूं कि कृपा करके आप परिवार में किसी के सामने उतनी तारीफ ना करें ताकि बच्चे की आदत खराब हो जाए। इतनी तारीफ ना करें एक बच्चे की, कि दूसरे बच्चे को लगे कि देखो हर बार ये तो इसकी बात दुनिया में बताते रहते हैं, मेरी तो बताते नहीं। परिवार में अगर निकट हमसे कोई ज्यादा अच्छा है। हमें मन ही मन उसको गुरु मान लेना चाहिए। उसको पता नहीं होना चाहिए कि आप उसको गुरु मानते हैं। अब उसको कहना यार तुम बैडमिंटन बहुत बढ़िया खेलते हो। मेरी गलती क्या होती है? मुझे सिखाओ। तो वो भी अपने आप को बड़ा नहीं मानेगा। वो कहेगा यार यह मेरे से सीखना चाहता है। वो अपने को बराबरी मानेगा।
विद्यार्थी – नर्वसनेस तो ऑब्वियसली थी ही, पर साथ में बहुत उत्साहित भी फील हो रहा था। बहुत खुशी हो रही थी कि मैं मोदी जी से मिलने वाली हूं। मतलब मुझे लगा नहीं था ऐसा मेरे साथ कभी होगा। पर जब हुआ तो बहुत ही खुशी हुई।
विद्यार्थी – अक्सर छात्रों को स्टेज में या फिर लोगों के सामने बात करने में तकलीफ होती है। इसमें आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए आप हमें क्या सलाह देना चाहेंगे?
प्रधानमंत्री – तो आप उल्टे उनको सलाह देनी है तो क्या दोगी? हैं, आइए मेरे पास आगे आइए सब लोग आइए। अगर किसी को एक, दो, तीन में कहना है तो कैसा।
विद्यार्थी – सर आत्मविश्वास रखना चाहिए, हां।
प्रधानमंत्री – ये आत्मविश्वास जो है ना उसमें दो शब्द हैं। दो शब्द कौन-कौन से हैं?
विद्यार्थी – आत्मा और विश्वास।
प्रधानमंत्री - जिसका अपने आप पर विश्वास है, उसको कभी डर नहीं लगता। आपको अपने पर विश्वास है क्या?
विद्यार्थी – हां सर है।
प्रधानमंत्री – अगर खुद पर विश्वास है तो आप हर चीज को पार कर सकते हैं। जिसको खुद पर विश्वास होता है करता क्या है? पूरी परिस्थिति का मन ही मन अध्ययन करता है। आपने स्वामी विवेकानंद जी ने एक चिट्ठी लिखी थी जब शिकागो में उनका भाषण हुआ, जो बहुत प्रसिद्ध भाषण है।
विद्यार्थी – हां सर।
प्रधानमंत्री – और विवेकानंद जी की बहुत तारीफ भी होती है।
विद्यार्थी – हां सर।
प्रधानमंत्री – लेकिन उन्होंने अपने एक शिष्य को चिट्ठी लिखी कि जब मुझे शिकागो में बोलना था, मैं बहुत नर्वस हो गया कि दुनिया के इतने बड़े-बड़े विद्वान, आयु में इतने बड़े-बड़े लोग, इतने तपस्वी लोग, मैं क्या बोलूंगा, तो उन्होंने उसको लिखा मैं बहुत नर्वस था और फिर बोले मैंने मन में मां सरस्वती को याद किया और मां सरस्वती से मैंने प्रार्थना की थी, कि मां मुझमें जितनी शक्ति है उसको जगा दो, जो कुछ मैं सीखा हूं वो एक साथ मेरी जुबा पर आ जाए। बोले मैंने ऐसी प्रार्थना की और मैं गया मंच पे और जब मैंने सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका ऐसा कहते ही दो मिनट तक तालियां बजती रही। बस वो एक टर्निंग पॉइंट बन गया। विश्वास आ गया, नहीं, नहीं, नहीं, मैं सोचता था वैसा मैं नहीं हूं। मेरे भीतर तो कुछ है। आत्मविश्वास आ गया। तो हर एक के जीवन में आज कितने ही अच्छे वक्ता क्यों ना हो, कितने ही बड़ा अच्छे खिलाड़ी, आपने देखा होगा क्या सचिन तेंदुलकर कभी जीरो से आउट नहीं हुए क्या?
विद्यार्थी – हुए हैं।
प्रधानमंत्री – तो वो सर पकड़ के बैठ गए क्या?
विद्यार्थी – नहीं सर।
प्रधानमंत्री – इसका मतलब हुआ हम जो स्थिति है उसको ऑब्जर्व करें, सिचुएशन को एक बार अंदाज कर लेना चाहिए कि ऐसा हुआ था अब देखना आपको लगेगा हां अरे ठीक है मैं कर लूंगा। जो आत्मविश्वास शब्द है ना उसको सच्चे अर्थ में जीवन में समझना आत्म की बात है खुद की बात है, कोई ठीक नहीं करता है, हमें ही करना होता है।
विद्यार्थी – मैं आपके सामने गाना प्रस्तुत करना चाहूंगी
प्रधानमंत्री – हां गाना सुनाओगी।
विद्यार्थी – हां डॉक्टर भूपेन हजारिका का।
प्रधानमंत्री – अरे वाह बताइए।
विद्यार्थी – गाना.. (असमिया भाषा में)
प्रधानमंत्री – वाह।
विद्यार्थी – हमारे गांव में हमारे घर के पास .....(नाम स्पष्ट नहीं). tea estate है। वहां पर मेरी मम्मी आठ सालों से चाय पत्ती तोड़ने का काम देखती हैं।
प्रधानमंत्री – ओह। तो आप चाय बागान से हैं।
विद्यार्थी – यस।
प्रधानमंत्री – आप पढ़ती हैं अच्छी तरह, मां पढ़ाती है और चाय का भी काम करती हैं। तो क्या लाई हो?
विद्यार्थी – मैं आपके लिए चाय पत्ती लाई हूं।
प्रधानमंत्री – तो मुझे चाय बनानी होगी। चलिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आपकी मां को हमारा प्रणाम कह देना।
विद्यार्थी – मैंने कभी सोचा ही नहीं था कि टी गार्डन का लड़का होकर, मैं प्रधानमंत्री जी से मिल पाऊंगा। मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा है कि मैं प्रधानमंत्री जी से मिल पाया।
विद्यार्थी – इतना जनरेशन गैप होने के बाद भी जब वो हमारी बातों को समझते हैं, मतलब बहुत अच्छा लगा।
प्रधानमंत्री – आपने देखा कि कैसे एग्जाम की बात तो हुई ही, साथ ही लोकल संगीत, असम की चाय, वो भी परीक्षा पे चर्चा का यादगार हिस्सा बन गई। परीक्षा एक ऐसा अवसर है और परीक्षा के लिए हेल्दी कंपटीशन की भावना हमारी तैयारी को और बेहतरीन बनाती है। इन सभी चर्चाओं में स्थान अलग-अलग थे, स्टूडेंट्स अलग-अलग थे, अनुभव अलग थे। लेकिन हर चर्चा का उद्देश्य एक ही था। हर स्टूडेंट को सुनना, समझना और साथ मिलकर कुछ ना कुछ सीखना। आप सभी को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद।
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