सहकारिता मंत्रालय
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पैक्स और बहुउद्देशीय सहकारी समितियों को मजबूत करना

प्रविष्टि तिथि: 03 FEB 2026 6:43PM by PIB Delhi

प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्स) को बहुउद्देशीय संस्थाओं में बदलने की सरकार की पहल ने कृषि, डेयरी और मात्स्यिकी क्षेत्रों में ग्रामीण आर्थिक कार्यकलापों को महत्वपूर्ण रूप से सशक्त  किया है । पैक्स के लिए आदर्श उप-विधियों के अंगीकरण के माध्यम से, ये समितियां अब पेट्रोल पंपों, एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप, जन औषधि केंद्रों और कॉमन सेवा केंद्रों के संचालन सहित 25 से अधिक व्यावसायिक कार्यकलापों को करने में सक्षम हैं, जिससे आय के स्रोतों में विविधता आई है और वित्तीय संधारणीयता में सुधार हुआ है।

कृषि क्षेत्र में, इस पहल ने 'विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अन्न भंडारण योजना' के माध्यम से अवसरंचना  और फसलोत्तर मिलने वाली सहायता को बढ़ाया है, जिसके अंतर्गत पैक्स स्तर पर गोदाम और कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं; इससे फसलोत्तर नुकसान, परिवहन लागत और मजबूरी में की जाने वाली बिक्री में कमी आई है, जबकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत बाजार पहुंच को सशक्त किया गया है, जिससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दलहन और मक्का के सुनिश्चित प्रापण के लिए सहकारी समितियों के माध्यम से पंजीकरण करने में सक्षम बनाया गया है ।  इसके अतिरिक्त, 38,000 से अधिक पैक्स  को 'प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों' (पीएमकेएसके) के रूप में उन्नत  किया गया है, जो उर्वरक, बीज और मृदा परीक्षण सेवाओं के लिए एक एकल-खिड़की मंच प्रदान करते हैं । पैक्स कंप्‍यूटरीकरण परियोजना, जिसमें 79,630 पैक्स शामिल हैं, ने ईआरपी-आधारित प्रणालियों के माध्यम से पारदर्शिता और दक्षता में सुधार किया है, जिसके परिणामस्वरूप तेजी से ऋण प्रदाय और लेनदेन लागत में कमी आई है ।

डेयरी क्षेत्र में, श्वेत क्रांति 2.0 का लक्ष्य उन क्षेत्रों में सहकारी समितियों के कवरेज का विस्तार करके, जहाँ अभी तक इनकी पहुँच नहीं है, पाँच वर्षों में दुग्ध प्रापण में 50 प्रतिशत की वृद्धि करना है । वर्ष 2026 की शुरुआत तक, देश भर में 21,000 से अधिक नई डेयरी सहकारी समितियाँ पंजीकृत की जा चुकी थीं। जीएसटी युक्तीकरण  जैसे राजकोषीय उपायों में दूध और पनीर पर शून्य जीएसटी और मक्खन, घी एवं चीज पर जीएसटी में कटौती शामिल है जिसनें सहकारी डेयरी उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार किया है, जिससे उपभोक्ता मूल्य के लाभ का एक बड़ा हिस्सा सीधे डेयरी किसानों को प्राप्त हो रहा है ।

मात्स्यिकी क्षेत्र में, सरकार बाजार लिंकेज और मूल्यसंवर्धन में सुधार के लिए 1,000 मात्स्यिकी सहकारी समितियों को मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) में परिवर्तित कर रही है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने एफएफपीओ अवसरंचना और व्यावसायिक क्षमता को सशक्त करने के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान की है ।

कुल मिलाकर, राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (एनसीडी) की स्थापना - जिसमें 8.4 लाख सहकारी समितियों और लगभग 32 करोड़ सदस्यों को शामिल किया गया है - ने साक्ष्य-आधारित योजना और कवरेज कमियों को चिह्नित करने में सक्षम बनाया है ।  इसके अलावा, राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) और राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल) जैसे शीर्ष सहकारी संस्थानों ने प्राथमिक उत्पादकों के लिए बाजार पहुंच का विस्तार किया है, जिसमें एनसीईएल ने 29 देशों को 5300 करोड़ रुपये से अधिक की वस्तुओं का निर्यात किया है।

देश भर में किसानों के साथ-साथ डेयरी और मात्स्यिकी क्षेत्रों को महत्वपूर्ण रूप से लाभान्वित करने के उद्देश्य से प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्स) और बहुउद्देशीय सहकारी समितियों को सशक्त करने के लिए, सरकार ने दिनांक 15.02.2023 को 2028 तक देश में सभी अनाच्छादित पंचायतों/गांवों को कवर करते हुए नई बहुउद्देशीय पीएसीएस या प्राथमिक डेयरी/मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की योजना को अनुमोदित किया है ।

सरकार द्वारा की गई पहलों के परिणामस्वरूप दिनांक 15.02.2023 से अब तक देश भर में 32,802 नए पैक्स , डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियां पंजीकृत की गई हैं । स्थापित किए गए  पैक्स , डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियों का राज्य-वार ब्योरा और उनसे जुड़े सदस्यों की जानकारी संलग्नक के रूप में संलग्न है । ओडिशा में कुल 8,361 सहकारी समितियाँ हैं, जिनमें से 7,754 कार्यशील हैं। राष्ट्रीय योजना के अंतर्गत, राज्य में 2,281 नई सहकारी समितियाँ पंजीकृत की गई हैं, जिनमें 1,543 बहुउद्देशीय पैक्स और 679 डेयरी सहकारी समितियाँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 59 मात्स्यिकी सहकारी समितियों और 209 मौजूदा डेयरी समितियों को सशक्त किया गया है। आकांक्षी जिले कंधमाल में 103 सहकारी समितियां हैं, जिनकी कुल सदस्य संख्या 2,37,288 है, जिसमें 76 पैक्स और 2 मात्स्यिकी सहकारी समितियां शामिल हैं।

            ओडिशा में डिजिटल एकीकरण और महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), लघु एवं सीमांत किसानों तथा जनजातीय समुदायों के लक्षित समावेशन से सहकारी-आधारित आय सृजन और सेवा प्रदाय में सुधार हुआ है । ओडिशा ने 2,281 नए पैक्स, डेयरी और मात्स्यिकी सहकारी समितियों को पंजीकृत किया है और मौजूदा समितियों को सशक्त किया है, जबकि आदर्श उप-विधियों के अंगीकरण से पैक्स को पीएम किसान समृद्धि केंद्र ,कॉमन सेवा केंद्रों आदि जैसी कई व्यावसायिक कार्यकलापों को करने में सक्षम बनाया गया है । ये उपविधियाँ व्यापक आधार वाली सदस्यता का प्रावधान करती हैं और सहकारी शासन में महिलाओं तथा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती हैं। इसके अतिरिक्त, बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अधिनियम, 2023 बहु-राज्य सहकारी समितियों के बोर्ड में महिलाओं के लिए दो सीटें और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के लिए एक सीट के आरक्षण को अधिदेशित करता है । आदर्श उपविधियाँ  पैक्स  को बहुउद्देशीय सेवा केंद्रों के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाती हैं, जिससे लघु एवं सीमांत किसानों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), महिलाओं आदि को एक ही स्थान पर किफायती ऋण, गुणवत्तापूर्ण इनपुट और संबद्ध सेवाएं प्राप्त करने में मदद मिलती है। साथ ही, वे भांडागारण, कस्टम हायरिंग सेंटर और प्राथमिक प्रसंस्करण जैसे कार्यकलापों से लाभान्वित हो पाते हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है।

पैक्स कंप्‍यूटरीकरण परियोजना के अंतर्गत, राज्य में 4,240 पैक्स को एक कॉमन ईआरपी-आधारित राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर पर ऑनबोर्डिंग के लिए संस्वीकृति दी गई है, जिसमें हार्डवेयर, डिजिटलीकरण और सपोर्ट सिस्टम के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 18.07 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं । इसका उद्देश्य पारदर्शिता में सुधार करना, लेनदेन की रियलयल-टाइम रिकॉर्डिंग को सक्षम बनाना और सदस्यों को ऋण एवं गैर-ऋण सेवाओं की तेजी से डिलीवरी की सुविधा प्रदान करना है । सहकारी बोर्डों में महिलाओं और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के अनिवार्य प्रतिनिधित्व सहित समावेशी शासन सुधारों ने  वंचित समूहों की भागीदारी को और अधिक सशक्त  किया है ।

राष्ट्रीय सहकारिता नीति  2025 महिलाओं और दुर्बल वर्गों के लिए सदस्यता और नेतृत्व भूमिकाओं को बढ़ावा देने पर भी जोर देती है । महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को मिलने वाली सहायता को 'स्‍वयंशक्ति सहकार योजना जिसके माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी)  को आगे ऋण दिया जाता है और महिला-नेतृत्व वाली सहकारी समितियों को बढ़ावा देने वाली 'नंदिनी सहकार' जैसी योजनाओं के माध्यम से और अधिक सशक्त किया गया है ।

इसके अतिरिक्त, लक्षित वित्तीय सहायता और सहकारी गतिविधियों के विविधीकरण ने आय के अवसरों को बढ़ाया है । विगत तीन वर्षों के दौरान, महिला और जनजातीय नेतृत्व वाली सहकारी समितियों को 0.20 करोड़ रुपये संवितरित किए गए हैं, और स्‍वयंशक्ति सहकार योजना' के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को दी जाने वाली सहायता का विस्तार किया जा रहा है ।

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संलग्नक

 

एम-पैक्स

डेयरी सहकारी समितियां

मात्स्यिकी सहकारी समितियां

राज्य

स्थापित

सदस्यता

  स्थापित

सदस्यता

  स्थापित

सदस्यता

 अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

1

12

1

10

11

132

 आंध्र प्रदेश

11

110

1034

21946

2

79

 अरुणाचल प्रदेश

121

2584

15

185

20

223

 असम

469

11820

591

13921

81

1823

 बिहार

57

98369

4589

184538

2

104

 छत्तीसगढ़

469

263645

351

5226

322

5904

 गोवा

37

1148

5

53

3

32

 गुजरात

525

89678

706

41774

23

1371

 हरियाणा

31

22282

161

5150

6

109

 हिमाचल प्रदेश

116

4639

708

9952

6

124

 जम्मू और कश्मीर

216

21728

1313

17636

36

701

 झारखंड

127

40925

257

9745

177

6594

 कर्नाटक

243

65808

1097

110057

45

4828

 लद्दाख

3

333

3

150

1

20

 लक्षद्वीप

0

0

0

0

7

567

 मध्य प्रदेश

663

401304

874

21596

226

5817

 महाराष्ट्र

149

25864

1140

67249

161

9008

 मणिपुर

104

13791

24

502

67

2220

 मेघालय

228

15772

16

274

7

137

 मिजोरम

97

5444

2

49

2

42

 नागालैंड

18

972

5

95

18

704

 ओडिशा

1543

706225

679

30766

59

5119

 पुडुचेरी

4

99

3

127

3

1150

 पंजाब

1

21

463

9955

43

520

 राजस्थान

1387

523638

2174

42213

22

462

 सिक्किम

24

568

61

1309

3

37

 तमिलनाडु

28

12126

794

27976

25

2512

 तेलंगाना

0

0

173

3736

102

4244

दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव

6

399

1

333

2

560

 त्रिपुरा

288

4287

2

28

19

882

 उत्तर प्रदेश

1099

141166

4340

174235

486

14709

 उत्तराखंड

621

7602

263

8799

120

1408

 पश्चिम बंगाल

24

3673

137

5733

3

175

कुल योग

8,710

24,86,032

21,982

8,15,318

2,110

72,317

यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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AK/AP


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