मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
उत्तर प्रदेश में मछली पकड़ना
प्रविष्टि तिथि:
03 FEB 2026 2:20PM by PIB Delhi
केन्द्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान [सेंट्रल इनलैंड फ़िशरीज़ रिसर्च इंस्टीट्यूट (CIFRI)] के अनुसार, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) कार्यक्रम के अंतर्गत विगत पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश की छह नदियों में सर्वेक्षण किया गया है। उत्तर प्रदेश के हिस्से में गंगा नदी के 10 निर्दिष्ट नमूना स्थलों से कुल 130 फिनफिश प्रजाति का दस्तावेजीकरण किया गया था। यमुना, बेतवा और केन नदियों में मत्स्य विविधता का अस्थायी आकलन निम्नानुसार है:
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नदी
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आधार वर्ष
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मत्स्य प्रजातियों की संख्या
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वर्तमान अध्ययन में मत्स्य प्रजातियों की संख्या (2025)
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यमुना
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2017
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143
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84
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बेतवा
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2017
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81
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67
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केन
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2017
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89
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66
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सरयू
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2024
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51
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84
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राप्ती
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2020
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27
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59
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हालांकि नदी प्रदूषण का विनियमन एवं नियंत्रण, पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधिदेश के अंतर्गत आता है तथापि मत्स्यपालन विभाग, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (NFDB) के माध्यम से उत्तर प्रदेश सहित 17 राज्यों को कवर करने वाली प्रमुख नदी प्रणाली में मछुआरा समुदायों की आजीविका को सहायता प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत देशी फिश स्टॉक के संरक्षण और बहाली और नदी जल में मत्स्यपालन के सतत विकास के लिए रिवर रेंचिंग प्रोग्राम कार्यान्वित कर रहा है जिसमें ICAR-मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थानों जैसे सेंट्रल इनलैंड फ़िशरीज़ रिसर्च इंस्टीट्यूट (ICAR-CIFRI), सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फ़्रेशवॉटर एक्वाकल्चर (ICAR-CIFA) एवं डायरेक्टोरेट ऑफ़ कोल्डवॉटर फ़िशरीज़ रिसर्च (ICAR-DCFR) से तकनीकी सहायता ली जाती है । इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के संबंध में, गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों में 281.66 लाख फिंगरलिंग की रैंचिंग के लिए PMMSY के अंतर्गत 8.45 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत और जारी की गई है और कार्यक्रम को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। इसके अलावा, मत्स्यपालन विभाग, भारत सरकार राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड (NFDB) के माध्यम से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद- राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो [नेशनल ब्यूरो ऑफ़ फिश जेनेटिक रिसोर्सेज (ICAR-NBFGR)] द्वारा शुरू की गई राज्य की मछली (स्टेट फिश) की अवधारणा को भी बढ़ावा दे रहा है, ताकि राज्यों को क्षेत्रीय रूप से महत्वपूर्ण मत्स्य प्रजातियों को अपनाने और संरक्षित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके, जिसका उद्देश्य देशी मत्स्य स्टॉक को फिर से बहाल करना, पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखना और संकटग्रस्त प्रजातियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। वर्तमान में, 21 जलीय प्रजातियों को या तो राज्य की मछली, राज्य का जलीय जीव या राज्य पशु के रूप में नामित किया गया है। इसके अलावा, मत्स्यपालन विभाग ने राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड, उत्तर प्रदेश सरकार और ICAR- CIFRI के सहयोग से गंगा नदी में मूल्यवान देशी मत्स्य प्रजातियों की बहाली के लिए प्रयास किए हैं और जैसा कि CIFRI द्वारा बताया गया है, संस्थान ने विगत 3 वर्षों में उत्तर प्रदेश क्षेत्र में नदी के विभिन्न हिस्सों में नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत 47 रैंचिंग कार्यक्रम आयोजित किए और 22.94 लाख फिश फिंगरलिंग रैंचिंग की। इसमें सीड उत्पादन बढ़ाना, कृषि के लिए सीड और तैयार फीड़ की उपलब्धता में सुधार करना और बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाना शामिल है।
(घ) प्रधान मंत्री मत्स्य सम्पदा योजना में अन्य बातों के अलावा, मछली पकड़ने पर प्रतिबंध/मंद अवधि के दौरान, मत्स्य संसाधनों के संरक्षण की मंशा से, सक्रिय, सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े परंपरागत मछुआरों के परिवारों को आजीविका एवं पोषण सहायता का प्रावधान शामिल है। इस घटक के तहत प्रत्येक मछुआरे को तीन महीनों के लिए सरकार द्वारा 3,000/- रुपए प्रदान किए जाते हैं और इसमें लाभार्थियों का योगदान 1,500/-रुपए होता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मछली पकड़ने पर प्रतिबंध/मंद अवधि के दौरान वर्ष 2024-25 में ही इस गतिविधि के अंतर्गत 1,000 मछुआरों के परिवारों को आजीविका एवं पोषण सहायता प्रदान की है।
PMMSY के अंतर्गत मछुआरों को बीमा कवरेज भी प्रदान किया जाता है, जिसमें मछुआरे, मत्स्य किसान तथा मत्स्यन एवं मात्स्यिकी से जुड़ी संबद्ध गतिविधियों में सीधे तौर पर शामिल अन्य सभी श्रेणियों के लोग शामिल हैं। PMMSY के तहत प्रदान किए गए बीमा कवरेज में शामिल हैं (i) दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी पूर्ण शारीरिक अक्षमता के लिए 5,00,000 रुपए/-, (ii) स्थायी आंशिक शारीरिक अक्षमता के लिए 2,50,000 रुपए/- और (iii) दुर्घटना की स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने के खर्च के लिए 25,000 रुपए/- की राशि प्रदान की जाती है ।
यह जानकारी आज लोकसभा में मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ,भारत सरकार श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने प्रश्न के उत्तर में दी।
JP
(रिलीज़ आईडी: 2222502)
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