पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
आई ई डब्लू 2026: भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में घरेलू निर्माण और ग्रिड समन्वय की केंद्रीय भूमिका
लीडरशिप स्पॉटलाइट सत्र में निर्माण सुदृढ़ता, बाज़ार निर्माण और वैश्विक समन्वय पर चर्चा
प्रविष्टि तिथि:
29 JAN 2026 7:30PM by PIB Delhi
भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को केवल क्षमता विस्तार पर ही नहीं, बल्कि ग्रिड इंटीग्रेशन और तकनीक पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा ताकि अपनाने की प्रक्रिया अधिक सुचारु हो, यह बात नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव श्री संतोष कुमार सारंगी ने भारत एनर्जी वीक 2026 के तीसरे दिन आयोजित लीडरशिप स्पॉटलाइट सत्र में कही। यह कार्यक्रम 27 जनवरी से 30 जनवरी 2026 तक गोवा में आयोजित हो रहा है।
“द सोलर एंड विंड ऑपरच्युनिटी: रियलाइजिंग द ड्यूल पोटेंशियल ऑफ स्केलिंग इंडिया’ज़ रिन्यूएबल्स आउटलुक” शीर्षक वाले सत्र में बोलते हुए श्री सारंगी ने बताया कि भारत की गैर‑जीवाश्म ऊर्जा क्षमता लगभग 267 गीगावाट तक पहुंच चुकी है, जिसे वित्त वर्ष 2030 तक 600 गीगावाट से अधिक करने का लक्ष्य है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य की नीतियां ग्रिड इंटीग्रेशन, वितरित नवीकरणीय ऊर्जा प्रबंधन और सौर व पवन मूल्य श्रृंखलाओं में घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने पर केंद्रित रहेंगी, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।
इस सत्र में उद्योग और वैश्विक नीति दोनों स्तरों से विचार विमर्श हुआ, जिसमें भारत को नवीकरणीय ऊर्जा में वैश्विक निर्माण केंद्र बनाने की आवश्यकता, तकनीकी उन्नयन और ग्लोबल मार्केट में मजबूत भागीदारी पर जोर दिया गया।
उद्योग के दृष्टिकोण से, विक्रम सोलर के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ज्ञानेश चौधरी ने जोर देकर कहा कि भारत द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा को शुरुआत में ही अपनाना न केवल एक बड़ा अवसर बना, बल्कि अनुभव और सीखने का भी स्रोत बना। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक विस्तार के दौरान घरेलू निर्माण और आपूर्ति श्रृंखलाओं में कमियां सामने आईं, लेकिन नीतिगत स्थिरता और बाज़ार निर्माण के कारण भारत आज विश्व के प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा तैनातीकर्ताओं में से एक बन चुका है।
चौधरी ने कहा कि अगले चरण में गहरा लंबवत एकीकरण (vertical integration), उन्नत तकनीक तक पहुंच और वैश्विक बाज़ारों में मजबूत भागीदारी जरूरी होगी, ताकि भारत के दीर्घकालिक निर्माण हब बनने के लक्ष्य को पूरा किया जा सके।वैश्विक नीति के दृष्टिकोण से, GH2 India के अंतरराष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष एरिक सोलहेइम ने कहा कि सौर ऊर्जा विश्व स्तर पर बिजली के सबसे सस्ते स्रोतों में से एक बन चुकी है, जिससे ऊर्जा संक्रमण अब केवल पर्यावरणीय निर्णय नहीं, बल्कि आर्थिक निर्णय भी है।
इसी बात को आगे बढ़ाते हुए, इंडियन विंड टर्बाइन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के सीईओ आदित्य प्यासी ने भारत के पवन उद्योग के विकास पर चर्चा की, जो शुरुआती तैनाती से लेकर अब गहरे निर्माण और वैश्विक एकीकरण की ओर बढ़ चुका है।उन्होंने कहा कि भारतीय निर्माता अब न केवल घरेलू, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों को भी सेवा प्रदान कर रहे हैं, और भविष्य में होने वाली वृद्धि नीतिगत स्थिरता, घटक-स्तरीय स्वदेशीकरण तथा रोजगार और निर्माण पर निरंतर ध्यान देने पर निर्भर करेगी, विशेषकर भू राजनीति के अनिश्चित वातावरण में।
भारत एनर्जी वीक के बारे में
भारत एनर्जी वीक (India Energy Week) देश का प्रमुख वैश्विक ऊर्जा मंच है, जो सरकारी नेताओं, उद्योग के कार्यकारी और नवाचारकों को एक साथ लाता है ताकि एक सुरक्षित, स्थायी और किफायती ऊर्जा भविष्य की ओर प्रगति को तेज किया जा सके। एक तटस्थ अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में, आई ई डब्लू निवेश, नीतिगत समन्वय और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देता है, जो वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य को आकार दे रहा है।
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पीके/ केसी/एमएम
(रिलीज़ आईडी: 2220586)
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