वित्‍त मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

आर्थिक समीक्षा रणनीतिक लचीलेपन के लिए अनुशासित स्वदेशी की पेशकश करती है : रणनीतिक भारतीयकरण के लिए त्रि-स्तरीय रूपरेखा


राष्ट्रीय इनपुट लागत कटौती रणनीति : प्रतिस्पर्धात्मकता को अवसंरचना के रूप में मानने वाली आवश्यक बुनियाद

विश्व को “भारतीय उत्पाद खरीदने के बारे में सोचने” से “बिना सोचे भारतीय उत्पाद ही खरीदने” की ओर अग्रसर कराने के लिए राष्ट्र को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ना रणनीतिक अपरिहार्यता है : आर्थिक समीक्षा

प्रविष्टि तिथि: 29 JAN 2026 2:12PM by PIB Delhi

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26  पेश करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन उसका सामना जिस वैश्विक परिवेश से हो रहा है वह भौतिक रूप से अलग और अव्यस्थित है। भू-राजनीतिक बिखराव, रणनीतिक व्यापार, अस्थिर पूंजीगत प्रवाह और त्वरित प्रौद्योगिकीय व्यवधानों से घिरे विश्व में मुख्य बाधा अब केवल व्यापक आर्थिक प्रबंधन ही नहीं रह गया है। यह देश की क्षमता की मजबूती और गुणवत्ता है।

अस्थिरता से घिरे इस वैश्विक परिवेश में भारत का दृष्टिकोण व्यापक आयात विकल्प से सोची-समझी त्रि-स्‍तरीय रणनीति की ओर बढ़ना है, जो महत्वपूर्ण क्षमताओं का निर्माण करती है, इनपुट लागतों में कमी लाती है, अत्याधुनिक विनिर्माण को मजबूती प्रदान करती है तथा आत्मनिर्भरता से रणनीतिक अपरिहार्यता की दिशा में बढ़ती है।

श्रीमती सीतारमण ने कहा, इस स्थिति में स्वदेशी अनिवार्य और आवश्यक हो जाता है। उत्पादन में निरंतरता बनाए रखने के लिए यह बाहरी आघातों से निपटने और आर्थिक संप्रभुता को सुदृढ़ बनाने वाली स्थायी राष्ट्रीय क्षमताओं का निर्माण करने की दिशा में रक्षात्मक और आक्रामक नीतिगत साधन दोनों हैं।

आर्थिक समीक्षा इस बदलाव को रणनीतिक लचीलेपन – यानी आघातों से निपटने की क्षमता और स्थिरता के संरक्षण से रणनीतिक अपरिहार्यता – यानी विश्वसनीयता, क्षमता और अन्य के लिए मूल्य का स्रोत बनने की योग्यता के रूप में निरुपित करती है।

भारतीयकरण के प्रति अनुशासित दृष्टिकोण के रूप में स्वदेशी

आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि स्वदेशी अनिवार्य रूप से एक अनुशासित रणनीति होनी चाहिए, क्योंकि समस्त आयात विकल्प न तो व्यवहार्य हैं और  न ही वांछित। उत्पादकता संवर्धित करने वाले निवेश के बिना संरक्षण, क्षमता उन्नयन और निर्यात अभिमुखीकरण सशक्त बनाने के बजाय उसे नाजुक बनाता है।

यह समीक्षा भारतीयकरण के लिए त्रि-स्तरीय रूपरेखा की पेशकश करती है, जो महत्वपूर्ण असुरक्षा की उच्च रणनीतिक तात्कालिकता, आर्थिक रूप से व्यवहार्य क्षमताओं की रणनीतिक पेऑफ और अल्प रणनीतिक तात्कालिकता तथा उच्च लागत वाले विकल्प के रूप में पहचान करती है ताकि हस्तक्षेप से अक्षमता को संरक्षित करने के बजाय दीर्घकालिक क्षमता का निर्माण किया जा सके। ये स्तर स्थिर नहीं हैं, अपितु वे प्रौद्योगिकियों की परिपक्वता, लागत में कमी अथवा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के रूप में विकसित होते हुए भारतीयकरण को निर्यात क्षमता में परिणत करते हैं, जो कि विवेकपूर्ण आयात विकल्प की विशिष्ट विशेषता है।

यह समीक्षा राष्ट्रीय लागत इनपुट कटौती रणनीति की पड़ताल करती है, जो प्रतिस्पर्धात्मकता को अवसंरचना मानती है, किफायती और विश्वसनीय इनपुट को विनिर्माण, निर्यात और रोजगार के लिए मूलभूत मानती है तथा बढ़ी हुई इनपुट लागतों को बिखराव युक्त और निरंतर आर्थिक जुर्माना मानती है। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है भारत के लिए यदि भारतीयकरण का आशय निर्यात में कमी लाए बिना लचीलेपन को मजबूती प्रदान करना है तो उसे व्यवस्थित इनपुट- लागत कटौती के साथ जोड़ना होगा।

अत्याधुनिक विनिर्माण क्षमता निर्माण में निर्णायक बन जाता है, क्योंकि यह उन कमजोरियों को जाहिर कर सकता है, जो आवरणयुक्त गतिविधियां लंबे अरसे तक जारी रख सकती हैं। यह सरकार और कंपनियों दोनों के लिए तनाव के परीक्षण का काम करता है, जिसमें अनुमान लगाने योग्य नियमों, परिचालन संबंधी विश्वसनीयता और संस्थागत मजबूती अस्थित्व बचाने की स्थितियां हैं।

पूर्वी एशियाई अनुभव के आधार पर समीक्षा में प्रगति के समर्थन में उद्यमी देश की भूमिका को रेखांकित किया गया है। परिणामोन्मुख नौकरशाही, सीख के साथ असफलता को सहन करने (गलतियां स्वीकार्य हैं: ठहराव नहीं) और भरोसे के साथ समर्थन वापसी (निकास भी प्रवेश के समान ही महत्वपूर्ण है) सहित संस्थागत सुधारों के साथ औद्योगिक नीति में सफलता की कहीं अधिक संभावनाएं हैं।   

यद्यपि लचीलापन आवश्यक उद्देश्य है, लेकिन यह अपने आप में पर्याप्त नहीं है। जो राष्ट्र केवल आघातों को बर्दाश्त करता है वह प्रतिक्रियात्मक बना रहता है। आत्मसंतुष्टि से अधिक तथा लचीलेपन से अधिक आकांक्षा की मांग करने वाला, परिणामों को आकार देने वाला देश प्रभावशाली बनता है। आर्थिक समीक्षा स्वदेशी से रणनीतिक लचीलेपन और रणनीतिक लचीलेपन से रणनीतिक अपरिहार्यता की प्रगति को निरुपित करती है, जिसमें विवेकपूर्ण आयात विकल्प राष्ट्रीय शक्ति में निवेश करते हैं और भारत को वैश्विक प्रणालियों के साथ संबद्ध करते हैं ताकि विश्व भारतीय उत्पाद खरीदने के बारे में सोचनेसे बिना सोचे भारतीय उत्पाद ही खरीदनेकी ओर अग्रसर हो सके।  

***

एनबी/एमजी/केसी/हिन्दी इकाई - 11


(रिलीज़ आईडी: 2219967) आगंतुक पटल : 36