वित्‍त मंत्रालय
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स्थिरता से नए आयामों की ओर, भारत के  सेवा निर्यात में वृद्धि महामारी-पूर्व अवधि (वित्तवर्ष 16–वित्तवर्ष20) के 7.6 प्रतिशत से दोगुना से ज्यादा बढ़कर वित्तवर्ष 24-वित्तवर्ष25 में 14 प्रतिशत हो गई


वित्त वर्ष 26 में सेवा क्षेत्र में सभी उप-क्षेत्रों में व्यापक विस्तार देखा गया। 9.1 प्रतिशत की दर पर सेवा क्षेत्र में सशक्त वृद्धि जीवीए के लिए वृद्धि का मुख्य चालक रही

मीडिया, मनोरंजन क्षेत्र और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियां सेवा क्षेत्र के नए विकास आयामों के रूप में उभरे

आने वाले वर्षों में भारत को वृद्धि का सशक्त इंजन बनाए  रखने के लिए ऑरेंज इकोनॉमी, महासागरों के वाणिज्यिक उपयोग, डेटा सेंटर, कंसर्ट इकोनॉमी विकास

प्रविष्टि तिथि: 29 JAN 2026 1:58PM by PIB Delhi

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश करते हुए कहा कि भारत का सेवा क्षेत्र आर्थिक वृद्धि, लचीलापन और संरचनात्मक परिवर्तन की प्रमुख प्रेरक शक्ति बना हुआ हैं। वैश्विक अनिश्चितता और संकुचित वैश्विक औद्योगिक गतिविधि की पृष्ठभूमि में यह क्षेत्र स्थिरता कायम करने वाली ताकत के रूप में उभरा है, जो भारत के सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में आधे से अधिक का योगदान दे रहा है तथा निर्यात और रोजगार का एक बड़ा चालक बन कर उभरा है।

भारत विश्व में सेवाओं का सातवां सबसे बड़ा निर्यातक है। वर्ष 2005 में वैश्विक सेवा व्यापार में इसकी हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 2024 में 4.3 प्रतिशत हो गई है। श्रीमती सीतारमण ने कहा, कृषि और उद्योग में देखे गए तीव्र चक्रीय उतार-चढ़ाव के विपरीत 7-8 प्रतिशत की निरंतर आर्थिक वृद्धि के साथ सेवा क्षेत्र उच्च वृद्धि, कम अस्थिरता वाला स्तंभ बना हुआ है।

वित्त वर्ष 26 में सेवा क्षेत्र में सभी उप-क्षेत्रों में व्यापक विस्तार देखा गया। सेवा क्षेत्र में 9.1 प्रतिशत वित्त वर्ष 26 के लिए प्रथम अग्रिम अनुमान (एफएई) में सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) वृद्धि का मुख्य चालक रही है, जिसमें सभी प्रमुख उप-खंडों में लगभग 8  प्रतिशत से 9.9 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई।

वैश्विक रुझान और भारत का अनुभव

कोविड 19 महामारी ने पर्यटन, आतिथ्य और परिवहन जैसी संपर्क गहन सेवाओं को गंभीर रूप से बाधित किया, जबकि आईटी, वित्त और पेशेवर सेवाओं सहित डिजिटल रूप से प्रदान की जाने वाली सेवाओं के विस्तार को तेजी प्रदान की। वर्ष 2024 में जीडीपी में सेवा व्यापार की हिस्सेदारी महामारी से पहले के स्तरों की तुलना में अधिक हो गई, जो कि सेवाओं के प्रति वैश्विक व्यापार को असमान लेकिन क्रमिक रूप से पुनः संतुलित करने का संकेत देती  है।   

वैश्विक व्यापार में सेवाओं की बढ़ती भूमिका पूंजीगत आवंटन में हो रहे परिवर्तन से प्रतिबिंबित होती है। वित्त वर्ष 2022-2024 के दौरान सेवाएं वैश्विक एफडीआई के औसतन 53.5 प्रतिशत के लिए उत्तरदायी रहीं, जो कि प्रवाहों के तेजी से संकेंद्रित होने के साथ महामारी से पहले की अवधि के 50.9 प्रतिशत से अधिक हैं। ऊर्जा एवं गैस आपूर्ति, सूचना एवं संचार, निर्माण और परिवहन मिलकर 88 प्रतिशत से अधिक सेवा एफडीआई को समाहित करते हैं, जबकि महामारी से पहले के दौर में यह आंकड़ा 75.5 प्रतिशत था।

भारत का अनुभव व्यापक रूप से वैश्विक रुझानों में प्रतिबिंबित होता है। वित्त वर्ष 23 वित्त वर्ष 25 के दौरान सेवा क्षेत्र का एफडीआई कुल एफडीआई का 80.2 प्रतिशत था जो कि महामारी से पहले की अवधि (वित्त वर्ष 16-वित्त वर्ष 20) में 77.7 प्रतिशत से अधिक रहा। ये प्रवाह सूचना और संचार सेवाओं में (25.8 प्रतिशत) और पेशेवर सेवाओं में (23.8 प्रतिशत) रहा, जो डिजिटल और ज्ञान- गहन गतिविधियों में हमारी ताकत को दर्शाता है; वित्त और बीमा (14.2 प्रतिशत) ऊर्जा और गैस (12.8 प्रतिशत) और ट्रेडिंग में (12.2 प्रतिशत) के साथ ये खंड सेवा क्षेत्र एफडीआई के लगभग 89 प्रतिशत के लिए उत्तरदायी है। यह भारत के निवेश प्रोफाइल में डिजिटल, कौशल- गहन और अवसंरचना से जुड़ी सेवाओं के वर्चस्व को रेखांकित करता है।

आर्थिक समीक्षा के आंकड़ों में बताया गया है कि सेवा क्षेत्र की वृद्धि के प्रमुख चालक वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र रहे, जो ऋण, कारोबारी सेवाओं और रियल एस्टेट से संबंधित गतिविधियों की निरंतर मांग द्वारा समर्थित रहे। उपरोक्त महामारी पूर्व रुझानों के साथ लोक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाएं भी निरंतर सार्वजनिक खर्च और सेवाओं की निरंतर डिलीवरी के साथ विस्तारित होती रही। इसके विपरीत व्यापार, आतिथ्य, परिवहन, संचार और संबंधित सेवाओं में वृद्धि मोटे तौर पर महामारी पूर्व के औसत के निकट रहने के साथ क्रमिक सामान्यीकरण देखा गया।

सेवाओं के निर्यात में औसत वृद्धि महामारी-पूर्व अवधि (वित्त वर्ष 2016वित्त वर्ष 2020) के 7.6 प्रतिशत से दोगुना से ज्यादा बढ़कर वित्त वर्ष 24-25 में 14 प्रतिशत हो गई, जो भारतीय सेवाओं के लिए मजबूत और व्यापक आधार वाली वैश्विक मांग को प्रतिबिंबित करती है। वैश्विक सेवा बाजारों में प्रतिस्पर्धी स्थितियों और अत्यधिक नीतिगत अनिश्चितता के बावजूद सेवा निर्यात में वृद्धि वित्त वर्ष 26 (अप्रैल-नवंबर) के दौरान 8 प्रतिशत तक रही।

सॉफ्टवेयर सेवाएं कुल सेवा निर्यात के 40 प्रतिशत से अधिक के लिए उत्तरदायी रहकर प्राथमिक वृद्धि चालक रही। ये सेवाएं डिजिटल सेवाओं के लिए सशक्त वैश्विक मांग के समर्थन से वित्तवर्ष 16-वित्तवर्ष 20 में 4.7 प्रतिशत की तुलना में  वित्तवर्ष 23-वित्तवर्ष 25 के दौरान 13.5 प्रतिशत की औसत दर तक विस्तातरित हुईं। पेशेवर और प्रबंधन परामर्श 25.9 प्रतिशत की दर से बढ़कर दूसरे बड़े योगदानकर्ता के रूप में उभरा। इसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र की हिस्सेदारी वित्तवर्ष 16-वित्तवर्ष 20 में 10.5 प्रतिशत से बढ़कर वित्तवर्ष 23-वित्तवर्ष 25 के दौरान 18.3 प्रतिशत हो गई।

जीडीपी में भारत के सेवा निर्यात की हिस्सेदारी वित्तवर्ष 23-वित्तवर्ष 25 के दौरान औसतन 9.7 प्रतिशत रही, जो कि महामारी पूर्व अवधि में 7.4 प्रतिशत से अधिक रही। नीतिगत अनिश्चितता और भू-राजनीतिक व्यवधानों के कारण घटे हुए वैश्विक वस्तु व्यापार के बीच सेवा निर्यात ने महत्वपूर्ण बफर प्रदान की। यह  भूमिका एच1 वित्तवर्ष 26 में और मजबूत हुई, ऐसा जीडीपी में सेवा की हिस्सेदारी वित्तवर्ष 25 में 9.7 प्रतिशत एच1 से बढ़कर 10 प्रतिशत हो जाने से हुआ।

राज्य स्तर और क्षेत्र के स्तर पर नीति आयोग के निष्कर्ष बताते हैं कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्य मिलकर आधुनिक, आईटी, वित्त और पेशेवर सेवाओं जैसी उच्च उत्पादकता वाली सेवाओं से प्रेरित लगभग 40 प्रतिशत सेवा आउटपुट के लिए उत्तरदायी रहे। इसके परिणामस्वरूप इस आउटपुट का सांद्रण अत्यधिक शहरीकृत राज्यों विशेषकर दक्षिण भारत में रहा। साथ ही महत्वपूर्ण विरोधाभास बरकरार रहे। बिहार कम प्रति व्यक्ति आय के बावजूद अपने जीवीए का 58.7 प्रतिशत सेवाओं से, मोटे तौर पर कम मूल्य- वर्धित गतिविधियों से प्राप्त करता है। केरल सेवाओं से 64.3 प्रतिशत जीएसवीए के साथ व्यापार, पर्यटन और रियल एस्टेट जैसे परंपरागत खंडों पर निर्भर रहा। इस अवधि के दौरान सेवाओं के प्रति एकतरफा संक्रमण की धारणा को चुनौती देते हुए कुछ मामलों में सेवा के अंश में गिरावट आई : ओडिशा में सेवा का अंश 38.5 प्रतिशत से घटकर 34.9 प्रतिशत हो गया, जबकि असम में सेवा का अंश 46.5 प्रतिशत से घटकर 34.3 प्रतिशत हो गया।

सेवाएं :  रोजगार के मुख्य चालक

आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि वित्तवर्ष 26 की पहली दो तिमाहियों के पीएलएफएस आंकड़ों के अनुसार, शहरी रोजगार में सेवाओं की हिस्सेदारी बढ़कर औसतन 61.9 प्रतिशत हो गई, जो वित्तवर्ष 21-वित्तवर्ष22 की 61.7 प्रतिशत की औसत से आंशिक रूप से अधिक है। यह वह समय था जब महामारी के दौरान सेवा क्षेत्र में काफी ज्यादा भर्ती हुई थी। इसके मुताबिक वित्तवर्ष 26 के अप्रैल-जुलाई के ईपीएफओ आंकड़ों से पता चलता है कि औपचारिक रोजगार में लगातार बढ़ोतरी हुई है., जिसमें निवल रोजगार में बढ़ोतरी सेवाओं का हिस्सा 51.7 प्रतिशत रहा, जिसमें विशेषज्ञ सेवाएं व्यापार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान तथा स्वच्छता सेवाएं शामिल हैं।

2011-2024 में सेवाओं मैं रोजगार संबंधी लचीलापन 0.43 रहा जो कोविड के बाद की अवधि में रिकवरी वाले चरण में बढ़कर 0.63 हो गया। ये निर्माण के बाद दूसरे स्थान पर रहा, जो श्रम आघात अवशोषक के रूप में इस क्षेत्र की भूमिका को रेखांकित करता है।

उप-क्षेत्र का प्रदर्शन और उत्प्रेरक

सेवाएं, डिजायन, अनुसंधान एवं विकास. संभार तंत्र, सॉफटवेयर विकास और पेशेवर सेवाओं जैसे कार्यकलापों के जरिए विनिर्माण में तेजी से शामिल हो रही हैं, जो उत्पादन प्रणालियों के बढ़ते सेवाकरण को दिखाता है। यह स्मार्ट उपकरणों जैसे उत्पादों, ऑटोमोबाइल, चिकित्सा उपकरण/वेयरेबल्स आदि में साफ दिखता है। अंतर्राष्ट्रीय अनुभव बताते हैं कि यह एकीकरण मूल्यवर्धन, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता और रोजगार बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि वित्तवर्ष 24 में यात्रा और पर्यटन ने जीडीपी 5.22 प्रतिशत का योगदान दिया, जो महामारी के पहले के स्तर के करीब है। इससे अनुमानित तौर पर 8.46 करोड़ प्रत्यक्ष और अप्रत्य़क्ष रोजगार को सहारा मिला(कुल रोजगार का लगभग 13.3 प्रतिशत)। इस वृद्धि के अनुरूप पर्यटन से विदेशी मुद्रा आय 2024 में बढ़कर 35.0 बिलियन डॉलर हो गई, जो कि 2023 से 8.8 प्रतिशत अधिक है। घरेलू पर्यटन इस क्षेत्र की रीढ़ बना रहा। 2024 में पिछले वर्ष की तुलना में पर्यटन लगभग 17.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। और जनवरी-सितंबर 2025 के दौरान पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में लगभग 52.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

विदेशी पर्यटकों के आगमन (एफटीए) और अप्रवासी भारतीयों (एनआरआई) सहित अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों का आगमन बढ़कर 20.57 मिलियन हो गया, जो 2023 की तुलना में 8.9 प्रतिशत रहा। लैशर पर्यटन से तेज गति से बढ़ते हुए मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म उच्च क्षमता वाली विशेष श्रेणी के रूप में उभर रहा है जो उच्च मूल्य और गैर मौसमी पर्यटन प्रदान करता है।

वित्तवर्ष 2025 में आईटी सक्षम सेवाएं (आईटी-आईटीईएस) क्षेत्र ने राजस्व वृद्धि, वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) की बढ़ती भूमिका और ज्यादा मूल्य वाली जटिल प्रौद्योगिकीय गतिविधियों में गहरे जुड़ाव के साथ भारत को एक वैश्विक प्रौद्योगिकी और नवाचार केंद्र के तौर पर मजबूत किया। नेसकॉम का अनुमान है कि वित्तवर्ष 25 में आईटी और आईटीईएस उद्योग का राजस्व (हार्डवेयर सहित) 283 बिलियन डॉलर रहेगा। जिसका आशय है कि वित्तवर्ष 24 के 3.9 प्रतिशत के मुकाबल सालाना वृद्धि 5.1 प्रतिशत होगी। 1700+ वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) में लगभग 19 लाख व्यवसायियों की भर्ती के साथ ही जीसीसी उत्पाद, अभियांत्रिकी, विश्लेषण, साइबर सुरक्षा और एआई सक्षम कार्यों में विस्तार कर रहे हैं।

भारत के डेटा सेंटर की क्षमता 2025 की दूसरी तिमाही में लगभग 1.4 गीगावाट से बढ़कर 2030 तक लगभग 8 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। नेसकॉम के अनुसार, दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत जनरेट करने के बावजूद भारत में दुनिया के केवल लगभग 3 प्रतिशत डेटा सेंटर हैं- दुनियाभर में 11000 में से लगभग 150- भारत के लिए खुद को वैश्विक के डेटा सेंटर हब के तौर पर स्थापित करने के लिए ऊर्जा की कमी जैसी संरचनात्मक दिक्कतों को दूर करना बेहद जरूरी होगा।

भारत का प्रौद्योगिकी स्टार्टअप इकोसिस्टम दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम है और इसमें अब लगभग 32,000-35,000 स्टार्टअप हैं, जिसमें केलेंडर वर्ष 2025 में 2,000 से अधिक नए स्टार्टअप जुड़े हैं, जिनमें केलेंडर वर्ष 2025 में 900 से ज्यादा वित्त पोषित स्टार्टअप शामिल हैं। इसके तहत जेनरेटिव एआई क्षेत्र तेजी से बढ़ा है, जिसमें जेन एआई स्टार्टअप केलेंडर वर्ष। 2024 की पहली छमाही में लगभग 240 से बढ़कर केलेंडर वर्ष 2025 की पहली छमाही में 890 से ज्यादा हो गए।

भारत का अंतरिक्ष सेवा क्षेत्र 8.4 प्रतिशत मिलियन डॉलर मूल्य के साथ वैश्विक अंतरिक्ष बाजार के लगभग 2 प्रतिशत के लिए उत्तरदायी है। भारत ने 2015 और 2024 के बीच 34 देशों के लिए 393 विदेशी उपग्रह वाणिज्यिक रूप से लॉन्च कर लगभग 433 मिलियन डॉलर अर्जित किए। जिन्होंने इसकी किफायती और विश्वसनीय क्षमताओं को प्रतिबिंबित किया। भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से बढ़ते, प्रौद्योगिकी गहन और सेवा अर्थव्यवस्था के क्रमिक रूप से बढ़ते वाणिज्यिक खंड के रूप में उभरा है।

मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र भारत की सेवा अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन गया है जिसमें दृश्य-श्रव्य प्रोडक्शन, प्रसारण, डिजिटल कंटेंट, एनिमेशन और गेमिंग, विज्ञापन और लाइव मनोरंजन शामिल है। उद्योग के अनुमानों के मुताबिक बढ़ती आय, इंटरनेट की बढ़ती पहुंच और बड़े घरेलू बाजार के कारण वर्ष 2024 में इस सेक्टर का आकार लगभग 2.5 ट्रिलियन होगा। डिजिटल मीडिया मुख्य विकास इंजन के रूप में उभरा है जो इस सेक्टर के कुल राजस्व में लगभग एक तिहाई का योगदान देता है। लाइव कार्यक्रमों का इकोसिस्टम ऑरेंज इकोनॉमी कतमी का भाग है और इससे संबंधित पर्यटन इस क्षेत्र के मुख्य रुझान के रूप में उभर रहा है।

आगे की राह

आर्थिक समीक्षा में सेवा क्षेत्र के सभी उप क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की गई है और उन महत्वपूर्ण कारकों के बारे में सचेत किया गया हे जिन पर उनकी वृद्धि निर्भर करती है। उदाहरण के लिए आईटी और आईची सक्षम सेवाओं के लिए इस क्षेत्र का भविष्य समयबद्ध पुनःकौशल, डिजिटल प्रौद्योगिकियों के व्यापक प्रसार और नवाचार तथा स्केलिंग के लिए सहयोगपूर्ण नीतिगत वातावरण के सृजन पर निर्भर करता है।

पर्यटन के लिए लंबी दूरी वाली हाइकिंग पगडंडियां जैसी सुविधाएं तैयार करने तथा नीली अर्थव्यवस्था की संभावनाओं का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय मरीना विकास नीति, अंतरिक्ष और महासागर सेवाएं वाणिज्यीकरण और सार्वजनिक निजी भागीदारियों के माध्यम से त्वरित विस्तार के लिए तत्पर हैं।

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एनबी/एमजी/केसी/हिन्दी इकाई - 18


(रिलीज़ आईडी: 2219948) आगंतुक पटल : 34
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