पंचायती राज मंत्रालय
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मोजाम्बिक से आये प्रतिनिधिमंडल ने भारत के विकेंद्रीकृत शासन ढांचे का अध्ययन किया

Posted On: 02 APR 2025 6:40PM by PIB Delhi

1 अप्रैल, 2025 को पंचायती राज मंत्रालय ने मोजाम्बिक के एक प्रतिष्ठित प्रतिनिधिमंडल के लिए विकेंद्रीकृत शासन और लोक प्रशासन पर एक संवादात्मक सत्र की मेजबानी की। प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी पंचायती राज मंत्रालय (एमओपीआर) में अपर सचिव श्री सुशील कुमार लोहानी और संयुक्त सचिव श्री आलोक प्रेम नागर ने की। मोजाम्बिक के इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मोजाम्बिक सरकार द्वारा स्थापित विकेंद्रीकरण के मॉडल पर आधारित चिंतन आयोग (सीआरईएमओडी) के समन्वयक प्रो. बेनिग्ना जिम्बा ने किया। यह प्रतिनिधिमंडल विशेष रूप से देश के विकेंद्रीकरण ढांचे और भारत में पंचायती राज प्रणाली का अध्ययन करने के लिए भारत का दौरा कर रहा है।

बातचीत के दौरान पंचायती राज मंत्रालय में अपर सचिव श्री सुशील कुमार लोहानी ने भारत में पंचायती राज प्रणाली का व्यापक विहंगावलोकन साझा किया। उन्होंने भारत में स्थानीय स्वशासन का समर्थन करने वाले संवैधानिक ढांचे पर बल दिया और 73वें संविधान संशोधन के बाद से विकेंद्रीकरण की यात्रा के बारे में विस्तार से बताया। श्री लोहानी ने पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका और प्रतिनिधित्व पर भी रोशनी डाली। उन्होंने पिछले दस वर्षों के दौरान शासन तंत्र में गतिविधियों और परिवर्तनकारी बदलावों को रेखांकित किया, जिसने जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव किये हैं।

पंचायती राज मंत्रालय में संयुक्त सचिव श्री आलोक प्रेम नागर ने पंचायती राज संस्थाओं के संचालन संबंधी पहलुओं और देश भर में स्थानीय शासन को मजबूत करने के लिए उनके मंत्रालय द्वारा की गई विभिन्न पहलों पर अपने बहुमूल्य विचार साझा किए। उन्होंने खासतौर पर पंचायती राज संस्थाओं में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने में डिजिटल परिवर्तन की भूमिका पर जोर दिया।

पीआरआई के क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण (सीबीएंडटी), विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाई गई अच्छी प्रथाओं, पंचायत स्तर पर ई-गवर्नेंस, डिजिटल गवर्नेंस, ई-ग्राम स्वराज को सरकारी ई-मार्केट प्लेस (जीईएम) के साथ एकीकृत करने के मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। सत्र में इस बात पर भी बल दिया गया कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ने सेवा वितरण में सुधार किया है और नौकरशाही संबंधी बाधाओं को कम किया है। पीआरआई का नागरिक चार्टर चर्चा का एक और केंद्र बिंदु था, जिसने नागरिकों और पीआरआई के बीच स्पष्ट अपेक्षाएं कायम करने में इसके महत्व पर प्रकाश डाला। सत्र के दौरान स्वयं के स्रोत से राजस्व जुटाना, वित्त आयोग अनुदान, एसडीजी का स्थानीयकरण और पीईएसए अधिनियम आदि जैसे प्रमुख विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

प्रोफेसर बेनिग्ना जिम्बा और मोजाम्बिक प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों ने इस संवादात्मक सत्र में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसमें मोजाम्बिक में विकेंद्रीकृत शासन मॉडल की विशिष्ट विशेषताओं को साझा किया गया, मोजाम्बिक की शासन संरचना, वहां चल रहे सुधारों और भविष्य की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी गई। प्रतिनिधिमंडल ने भारत की डिजिटल शासन पहलों और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में विशेष रुचि दिखाई तथा मोजाम्बिक के संदर्भ में उनकी संभावित प्रयोज्यता को पहचाना।

मोजाम्बिक प्रतिनिधिमंडल में प्रोफेसर बेनिग्ना जिम्बा (सदस्य और समन्वयक, सीआरईएमओडी), श्री फ्रांसिस्को एलिसेउ डी सूसा (सदस्य), श्री फ्लेवियो मुलमडो (सचिवालय), श्री तुआरिक अब्दाला (सचिवालय) और श्री ऑरलैंडो रोडोल्फो, मिनिस्टर काउन्सलर, मोज़ाम्बिक उच्चायोग, नई दिल्ली शामिल थे।

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