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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज तमिलनाडु के कोयंबटूर में ईशा फाउंडेशन द्वारा आयोजित महाशिवरात्रि उत्सव को संबोधित किया

महा शिवरात्रि एक पर्व होने के साथ-साथ आत्मजागृति की रात्रि है, जब समस्त ब्रह्मांड शिवमय हो जाता है, तभी शिवरात्रि की अनुभूति होती है

भगवान शिव एक कल्याणकारी चेतना हैं, जो संहारक भी हैं और पालनकर्ता भी हैं

मोदी जी ने विश्व योग दिवस मनाकर पूरी दुनिया को योग की ओर आकर्षित किया और सद्गुरु जी ने आदियोगी के माध्यम से योग को एक नया रूप दिया

भारत की आध्यात्मिक इतिहास की यात्रा तमिल संस्कृति के वर्णन के बिना अधूरी है

ईशा योग केंद्र योग, साधना, भक्ति, आत्मज्ञान व मुक्ति का केंद्र बनकर उभरा है

आदियोगी की 112 फीट की भव्य प्रतिमा हमें अपनी आध्यात्मिक यात्रा के 112 मार्गों की अनुभूति कराती है

सद्गुरु जी ने विज्ञान और अध्यात्म को एक साथ लाकर यह सिद्ध किया है कि ध्यान, ऊर्जा और चेतना की अवस्थाएँ कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि मूलभूत विज्ञान हैं

Posted On: 26 FEB 2025 9:48PM by PIB Delhi

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज तमिलनाडु के कोयंबटूर में ईशा फाउंडेशन द्वारा आयोजित महाशिवरात्रि उत्सव को संबोधित किया।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने अपने संबोधन की शुरूआत देशवासियों को महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं देकर की। उन्होंने कहा कि सोमनाथ से केदारनाथ, पशुपतिनाथ से रामेश्वरम और काशी से कोयंबटूर तक पूरा देश आज शिवमय है। उन्होंने कहा कि आज ही प्रयागराज में महाकुंभ समाप्त हो रहा है और आज ही यहां कोयंबटूर में भक्ति का महाकुंभ देखा जा सकता है। श्री शाह ने कहा कि शिवरात्रि सिर्फ एक पर्व नहीं है बल्कि आत्मजागृति की रात्रि है। उन्होंने कहा कि जब पूरा ब्रह्मांड शिवमय हो जाता है, तभी हम शिवरात्रि की अनुभूति कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज शिव और पार्वती के मिलन का दिन है और आज ही शिव और जीव के मिलन का रास्ता प्रशस्त होता है और मोक्ष प्राप्ति का रास्ता भी आज ही भक्ति के माध्यम से खुलता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि शिव सिर्फ एक प्रतीक नहीं हैं, बल्कि एक कल्याणकारी चेतना हैं जो संहारक और पालनकर्ता दोनों हैं और हमारे जीवन में दोनों की विशिष्ट भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि शिव, शंभु और स्वयंभू हैं, वे सत्य औऱ सुंदर भी हैं, उन्हें भोलेनाथ और महाकाल भी कहते हैं और यहां शिव, आदि योगी के रूप में विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि शिव केवल आराध्य नहीं बल्कि अस्तित्व का मूल आधार हैं। श्री शाह ने कहा कि ये महाशिवरात्रि, भक्ति और श्रद्धा की पराकाष्ठा का प्रमाण है जिसमें असली अर्पण हमारा भक्ति के प्रति समर्पण है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सद्गुरू जी द्वारा बनाया गया ये स्थान सिर्फ एक तीर्थस्थल नहीं है बल्कि ये योग, साधना, भक्ति, आत्मज्ञान और मुक्ति का केन्द्र बनकर पूरे विश्व में उभरा है। उन्होंने कहा कि इशा योग केन्द्र ने योग और ध्यान के माध्यम से करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक सोच और दिशा का उद्भव करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आदियोगी की 112 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा हमें अपनी आध्यात्मिक यात्रा के 112 मार्गों की अनुभूति और परिचय कराती है। उन्होंने कहा कि यहां आकर हमें पता चलता है कि जीवन का अंतिम लक्ष्य शिवत्व की प्राप्ति करना है। श्री शाह ने कहा कि इशा योग केन्द्र, लोगों, विशेषकर युवाओं को, ईश्वर से जोड़ने का माध्यम बन गया है। उन्होंने कहा कि यहां आकर व्यक्ति चेतना से ब्रह्मचेतना, स्वार्थ से परमार्थ और सेल्फ से यूनिवर्स तक की यात्रा की अनुभूति कर सकता है। उन्होंने कहा कि सद्गुरू जी ने न सिर्फ युवाओं को धर्म से जोड़ने का काम किया है बल्कि उनके सामने धर्म की बुद्धिगम्य व्याख्या को भी रखा है।

श्री अमित शाह ने कहा कि A Mystic Man on a Mission की कहावत सद्गुरू जी के लिए ही बनी है। उन्होंने कहा कि सद्गुरू जग्गी वासुदेव आज पूरी दुनिया को जीने का रास्ता दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सद्गुरू के माध्यम से पूरी दुनिया को सनातन का ज्ञान समझ में आता है कि स्वयं को समझना ही सच्चा ज्ञान है। श्री शाह ने कहा कि संसार को बदलने का रास्ता स्वयं को बदलने से ही शुरू होता है। उन्होंने कहा कि सद्गुरू जी ने हमारी सबसे अमूल्य धरोहर हमारी मिट्टी के लिए पूरे देशभर में संस्कार जगाया और पूरी दुनिया को पर्यावरण का एक सुंदर संदेश देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि सद्गुरू जी पूरे राष्ट्र की संपत्ति के रूप में दुनिया के सामने उभर कर आए हैं।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि सद्गुरू जी ने आदियोगी के माध्यम से योग को एक नया रूप देने का काम किया है और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने विश्व योग दिवस मनाकर पूरी दुनिया को योग के प्रति आकर्षित करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि योग हमें स्व से सर्व, अहम से वयम, संकल्प से सिद्धि और वैराग्य से समाधि तक ले जाने का काम करता है। श्री शाह ने कहा कि योग, प्राचीन होकर भी प्रासंगिक है और स्थिर होकर भी गतिशील है। उन्होंने कहा कि योग मन, शरीर और आत्मा को एकाकार करता है, जीव और परमात्मा को जोड़ता है और भक्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि भारत के आध्यात्मिक इतिहास की व्याख्या तमिल संस्कृति के वर्णन के बिना अधूरी है। उन्होंने कहा कि ये भूमि ऐसे कई उदाहरणों से सुसज्जित है जो आध्यात्म के जीवंत उदाहरण रहे हैं। उन्होंने कहा कि सद्गुरू जी द्वारा आयोजित महाशिवरात्रि का उत्सव अद्भुत, अकल्पनीय और अवर्णनीय है। श्री शाह ने कहा कि इस तीर्थस्थान की रचना में सद्रृगुरू ने विज्ञान औऱ आध्यात्म को साथ लाकर सिद्ध किया है कि ध्यान, ऊर्जा और चेतना की अवस्थाएं अंधविश्वास नहीं बल्कि मूलभूत विज्ञान हैं। उन्होंने कहा कि सद्गुरू जी ने सभी को ये अनुभूति कराई है कि शिव ही शाश्वत हैं, चेतना हैं और शिवत्व को जागृत करने का यही एक रास्ता है।

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