उप राष्ट्रपति सचिवालय
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मिजोरम विश्वविद्यालय के 18वें दीक्षांत समारोह आइजोल, मिजोरम, में उपराष्ट्रपति के सम्बोधन के मुख्य अंश

Posted On: 26 FEB 2024 4:43PM by PIB Delhi

मिजोरम के माननीय राज्यपाल, डॉ. हरि बाबू कंभमपति, मिजोरम के माननीय मुख्यमंत्री, डॉ. लालदुहोमा, पूर्व चांसलर बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ, प्रोफेसर डॉ. प्रकाश बरतुनिया, सम्मानित अतिथि, राज्य सभा के माननीय सदस्य के. वनलालवेना और यहां उपस्थि अन्य प्रतिष्ठित सदस्य।

मेरे प्रिय विद्यार्थियों, आप सभी को मेरा नमस्कार! आपको और आपके माता-पिता और मित्रों को मेरी बधाई!

दीक्षांत समारोह आपके जीवन का एक अद्वितीय पड़ाव है। यह एक यादगार क्षण है।

यह आपके जीवन और करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ है। डिग्री प्राप्त करने के बाद आप इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र बन जायेंगे। आपके पास अपने दोस्तों, अपने शिक्षकों के साथ बीते क्षणों की सुखद यादें होंगी और आप जीवन भर उस शिक्षक को याद रखेंगे जो कक्षा में सबसे कठोर थे।

इस विश्वविद्यालय से पढ़ाई खत्म करने के बाद, जहां आपकी देखभाल की गई है और आपकी शैक्षणिक प्रतिभा को आकार मिला है आप बड़ी दुनिया में प्रवेश करेंगे।

मेरे युवा दोस्तों, पहले समय बहुत अलग था। जब हम, जो डायस पर या अग्रिम पंक्ति में हैं, ने विश्वविद्यालय से संसार में प्रवेश किया था। तब का वातावरण चुनौतीपूर्ण था, सुविधाजनक नहीं था। आप भाग्यशाली और सौभाग्यशाली हैं.

आप भाग्यशाली हैं कि आप उस भारत में रह रहे हैं जो पहले से कहीं ज्यादा उन्नति पर है। आप भाग्यशाली हैं कि आप अमृत काल के भारत में रह रहे हैं, जो हमारा गौरव काल है, जब हम अर्थशास्त्र में, बुनियादी ढांचे में, सामाजिक स्तर पर अपनी वृद्धि को देखते हैं, तो हमें इस पर गर्व होता है।

युवा साथियों! आजकल आप क्या चाहते हैं, आप सबसे पहले कानून का सम्मान चाहते हैं? कोई भी लोकतंत्र तब तक जीवित नहीं रह सकता, कोई भी लोकतंत्र विकसित नहीं हो सकता, कोई भी लोकतंत्र तब तक फल-फूल नहीं हो सकता जब तक कि कानून के समक्ष समानता न हो।

यदि कुछ लोग सोचते हैं कि वे दूसरों की तुलना में श्रेष्ठ हैं, वे दूसरों की तुलना में विशेषाधिकार प्राप्त हैं, वे कानून के प्रति जवाबदेह नहीं हैं, तो यह लोकतंत्र नहीं है। देश को बहुत लंबे समय तक कष्ट सहना पड़ा। ऐसे लोगों की एक श्रेणी थी जो सोचते थे कि वे कानून से ऊपर हैं। वे कानून की पहुंच में नहीं थे, उन्हें लगता था कि उन्हें कानून से छूट प्राप्त है। और अब कानून के समक्ष समानता एक हकीकत है। कानून के सामने सब बराबर हैं। जो लोग बड़े विश्वास से सोचते थे कि कानून उन तक नहीं पहुंच सकता, वे आज कानून के शिकंजे में हैं। यही वह व्यवस्था है जिसका आप अभी सामना कर रहे हैं।

दूसरा बड़ा बदलाव बच्चों, एक समय था जब भ्रष्टाचार के बिना कोई भर्ती नहीं होती थी, कोई अनुबंध नहीं होता था। भ्रष्टाचार सफलता का मार्ग था। लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया जाता था। हमारे सत्ता के गलियारे लाइजनर और एजेंटों, भ्रष्ट तत्वों से भरे हुए थे। ये तत्व आपकी कीमत पर कानून से इतर निर्णय लेने में मदद करते थे  क्योंकि युवाओं आप न तो संरक्षण में विश्वास करते हैं, न ही भाई-भतीजावाद में, न ही पक्षपात में, आप योग्यता में विश्वास करते हैं। जो बड़ा बदलाव हमारे सत्ता के गलियारों में आया है वह यह है कि ये भ्रष्टाचार से पूरी तरह मुक्त हो गए हैं। भ्रष्टाचार अब आपको अनुबंध और भर्ती की गारंटी नहीं देता। भ्रष्टाचार आपको सरकारी नियंत्रण में एक सुरक्षित स्थान प्रदान करता है और ऐसा नहीं है कि वे कानून के प्रति कुछ कम जवाबदेह हों।

तीसरा बड़ा बदलाव, हमारे देश में बड़े क्षेत्र में एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र का उपलब्ध होना है जहां हर युवा अपनी ऊर्जा और प्रतिभा, अपने  सपनों और आकांक्षाओं को साकार करने के लिए अपनी क्षमता का दोहन कर सकते हैं। सरकारी पहल और नीतियां इसे सुविधाजनक बना रही हैं। वे सकारात्मक हैं।

यह उस समय नहीं था जब बड़ी दुनिया में मैंने एक एक बड़ी छलांग लगाई। मैं अर्थव्यवस्था के संबंध में कहता हूं क्योंकि मुझे 1989 में संसद सदस्य बनने का सौभाग्य मिला। माननीय मुख्यमंत्री 1984 में लोकसभा के सदस्य थे। वह इसे जानते हैं। जब मैं वहां था तो हमें भी मंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। अपनी वित्तीय विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए हमारे देश का सोना स्विट्जरलैंड के दो बैंकों में रखने के लिए हवाई मार्ग से ले जय गया था। तब हमारी विदेशी मुद्रा 1-2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बीच थी और अब हमारी विदेशी मुद्रा 600 बिलियन डॉलर से अधिक है और हम एक सप्ताह में 5 से 6 बिलियन डॉलर जोड़ सकते हैं, जो यह बताता है कि आप उस दुनिया में छलांग लगा रहे हैं। जहां भारत की अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत है। ठीक एक दशक पहले यह स्थिति थी कि हम नाजुक पांच में गिने जाते थे।

हमारा देश सबसे अधिक आबादी वाला देश है, मानवता की आबादी  का छठा हिस्सा नाजुक-पांच में माना जाता था और हमने पिछले एक दशक में कठिन चुनौतीपूर्ण समय को पार किया है। आज हम हम पहले से ही दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं, हमने कनाडा, यूके, फ्रांस को पीछे छोड़ दिया है।

आपको अपना करियर बनाना है और इसलिए आप इस बात पर गर्व कर सकते हैं कि क्रय शक्ति के मामले में भारत तीसरा सबसे बड़ा देश है और देखें कि हम कहां जा रहे हैं। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, जहां बड़ी अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक संस्थानों विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, के अनुसार प्रदर्शन करने में सक्षम नहीं हैं, हम निवेश और अवसरों का एक उज्ज्वल वैश्विक हॉटस्पॉट हैं।

बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में हमारी जीडीपी वृद्धि सबसे अधिक है। लोग इस देश की ओर आ रहे हैं क्योंकि यह अवसरों की भूमि है, यह निवेश करने की भूमि है और आप इस देश के समृद्ध मानव संसाधन हैं।

आपको कोठरी से बाहर आना होगा, प्रतियोगी परीक्षा के कोठरी से, सरकारी नौकरी के कोठरी से बाहर आना होगा। मैं आपसे अपील करता हूं कि अपने पास मौजूद विशाल क्षेत्रों को देखें जहां आप अपनी प्रतिभा का योगदान देकर खुद को गौरवान्वित कर सकते हैं।

मैं आपको बता दूं कि भारत स्टार्ट-अप में वैश्विक नेता के रूप में उभरा है। मैं विशेष रूप से आपके मुख्यमंत्री का संदर्भ देना चाहूँगा। एक युवा के रूप में आपके मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री के निजी सहायक बन गए। किशोरवय में उन्हें अनुभव प्राप्त हुआ। मुश्किल वक्त में उन्होंने अवसरों का फायदा उठाया। फिर वह भारतीय पुलिस सेवा में आ गए। वहाँ वे एक दशक भी नहीं रहे लेकिन, उस एक दशक मे उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दिया। इसलिए आप उस लिहाज से भाग्यशाली हैं कि आपके पास एक ऐसा व्यक्ति है जिसने मौसम की मार का सामना किया है, उसका भरपूर लाभ उठाया है, एक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया है, राष्ट्रीय स्तर पर योगदान दिया है, शासन, सुरक्षा और खेलों के विकास के बारे में अच्छी तरह से जानकारी रखता है। उन्होंने छलांग लगाई और राजनीति में कदम रखा, संसद में पहुंचे जहां मुझे भी रहने का अवसर मिला और अब वह मुख्यमंत्री हैं।

इसलिए बाहर के पारिस्थितिकी तंत्र के अलावा आपके पास स्टार्ट-अप में शामिल होने के लिए राज्य के भीतर भी स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध है। यह एक ऐसा राज्य है जो चुनौतियां और अवसर प्रदान करता है। पर्यटन! मैं माननीय राज्यपाल के पास था, मैंने माननीय राज्यपाल से जानना चाहा कि सर क्या इस राज्य में कोई हिल स्टेशन है? और माननीय राज्यपाल ने कहा कि पूरा राज्य ही एक हिल स्टेशन है। हमारे पास ऐसी व्यवस्था कहां हो सकती है? पर्यटन की दृष्टि से योगदान करने के लिए आपके पास पर्याप्त अवसर हैं। हमारी वैश्विक छवि देखें। हमारी अध्यक्षता में हमने बहुत सफल जी20 का आयोजन किया। पूरी दुनिया ने इसकी सराहना की है, लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि जी20 केवल नई दिल्ली तक ही सीमित नहीं था, बल्कि पूरे देश और मिजोरम सहित सभी केंद्र शासित प्रदेशों और सभी राज्यों में महत्वपूर्ण बैठकें हुईं। पर्यटन के संदर्भ में यह मिजोरम था जहां विशाल निवेश किए गए।

पिछले दशक में केंद्र सरकार ने नॉर्थ ईस्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए जिस तरह का निवेश किया है, उस पर नजर डालें तो आप हैरान रह जाएंगे। हमारे बीच रेल, सड़क और डिजिटल कनेक्टिविटी का एक जुड़ाव है। यहाँ तक कि आज के दिन ही माननीय प्रधान मंत्री ने इस क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी के संबंध में एक बहुत ही महत्वपूर्ण उद्घाटन किया है।

युवा साथियों! अब अपना दिमाग लगाने की बारी आपकी है। बड़ा सोचो, मिजोरम को पर्यटन केंद्र बनाओ। आप इसमें योगदान कर सकते हैं, आप इसमें बड़े पैमाने पर योगदान कर सकते हैं क्योंकि राज्य के पास देने के लिए बहुत कुछ है। हमारा ध्यान देश में कहीं और है लेकिन जब मैं मिजोरम और उत्तर-पूर्व को देखता हूं, तो चीजें बहुत अलग हैं। देश का यह भाग बहुत ही अनमोल भाग है।

देश के इस क्षेत्र को हमारे पर्यटन, हमारी संस्कृति, हमारे पारिस्थितिकी तंत्र को आगे बढ़ाना है। 1990 के दशक में हमने केंद्र सरकार के स्तर पर एक ऐसी नीति विकसित की जो काफी समय तक जारी रही। जिसने कुछ परिणाम तो दिया लेकिन, पर्याप्त नहीं।

माननीय प्रधान मंत्री की बड़ी पहल ने उस नीति को 'लुक ईस्ट एक्ट ईस्ट' में बदल दिया और इसने क्षेत्र को आर्थिक और अन्यथा भी बदल कर रख दिया। यह एक बड़ा बदलाव है, जब देश के इस हिस्से के लिए केंद्र सरकार में एक अलग विभाग है, हम वास्तव में इस क्षेत्र का तेजी से विकास कर रहे हैं। आपको इससे बेहतर ताज़ी हवा नहीं मिल सकती। आपको अपनी ऊर्जा लगाने के लिए इससे बेहतर प्रदूषण मुक्त वातावरण नहीं मिल सकता।

इसलिए मैं विशेष रूप से इस प्रदेश के युवाओं से आग्रह करूंगा कि ये आपका समय है, अपने समय को अनलॉक करें। किसी शानदार विचार को सिर्फ अपने दिमाग में ही रहने न दें। इसे कार्यान्वित करें। असफलता से न डरें, असफलता स्वाभाविक है। जिस क्षण आपको असफलता का डर होता है, आप डर को जीत जाने देते हैं, भय को जीतने नहीं दें। डर को अपने वश में रखें क्योंकि ग्रह पर ऐसा कोई भी इंसान नहीं है जो असफल न हुआ हो। जरा सोचिए! असफलता तो बस सफलता की एक सीढ़ी है।

मैं आपको सितंबर 2019 की याद दिलात हूँ, जब मैं पश्चिम बंगाल का राज्यपाल था। चंद्रयान-2 को लगभग 2:00 बजे चंद्रमा पर उतरना था, मैं आपकी उम्र के 500 लड़के और लड़कियों के साथ साइंस सिटी कोलकाता में था। चंद्रयान 2 चंद्रमा की सतह के बहुत करीब आया लेकिन उसने सॉफ्ट लैंडिंग नहीं की। यह हृदयविदारक था। कमरे में एकदम सन्नाटा था। फिर तुरंत प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया आई कि हम सफल हुए हैं, पूरी सफलता अगली बार मिलेगी और युवा साथियों! पूरी सफलता मिली, यह 23 अगस्त 2023 को मिली।

हमारा चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला मिशन बन गया। हमने चांद के उस हिस्से पर इतिहास रचा है। मैं बस आपको यह बताना चाहता हूं कि असफलता, असफलता नहीं है, असफलता को अपने मूल और उद्देश्य तक जाने के लिए प्रेरणा के रूप में लिया जाना चाहिए और आप उसे हासिल कर लेंगे।

बच्चों ! तुम्हें अब अलग ढंग से सोचना होगा। डिजिटल क्रांति के चलते आप देश के किसी भी क्षेत्र से अपना योगदान दे सकते हैं, आपकी कोई सीमा नहीं है। मैं आपका ध्यान कुछ नई प्रौद्योगिकियों की ओर आकर्षित करना चाहता हूं जिनके साथ हमें रहना होगा - विघटनकारी प्रौद्योगिकियां, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन आदि।

हमारा देश अग्रणी है, हम वर्तमान में उन कुछ देशों में से है जिन्होंने इस विशेष क्षेत्र में योगदान दिया है। हमारे पास क्वांटम कंप्यूटिंग मिशन, हरित हाइड्रोजन मिशन है। ये वे क्षेत्र हैं जो आपके लिए बने हैं, ये वे क्षेत्र हैं जिनसे आपको प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। ये वे क्षेत्र हैं जिनमें आप योगदान कर सकते हैं, ये वे क्षेत्र हैं जिनमें आप प्रतिस्पर्धी बैरल से बाहर निकल सकते हैं।

साथियों, जब मैं डिग्रियां और गोल्ड मेडल दे रहा था तो मैंने देखा कि बहुत बड़ा बदलाव आ रहा है। मुझे वह बदलाव चाहिए जो मैंने गणतंत्र दिवस पर देखा। 26 जनवरी 2024 को कर्तव्य पथ पर हमारी 75 वीं गणतंत्र दिवस परेड, जो चीज भरपूर थी, वह थी हमारी नारी शक्ति। जीवन के हर क्षेत्र में, यहां भी मैं देखता हूं, वे बहुमत में हैं  या बहुमत के करीब हैं। हमारी शक्ति परिभाषित होगी क्योंकि अब उन्हें नीति निर्माण के साथ शासन में शामिल होने के पर्याप्त अवसर मिलेंगे। जब हमारा देश इतना सुव्यवस्थित हो, जब कोई देश इतना उत्साहित हो, जब देश ऐसे अवसर प्रदान कर रहा हो जिनका लाभ बाहर के लोग उठा रहे हों, तो आपको किसी भी चीज़ से रुकना नहीं चाहिए।

मित्रों, जब हम 2047 में आजादी की शताब्दी मना रहे होंगे तो शायद मैं दुनिया में नहीं रहूंगा, मंच पर उपस्थित ज्यादातर लोग नहीं होंगे, लेकिन अमृत काल में हमने भारत@2047 के लिए मैराथन दौड़ शुरू कर दी है। आप शासन में सबसे महत्वपूर्ण भागीदार हैं, आपका जनसांख्यिकीय लाभांश भारत की क्षमता है, दुनिया इसे पहचानती है। आप 2047 में भारत के लिए इस मैराथन मार्च में भागीदार बनकर भारत को राष्ट्रों के समुदाय में एक विकसित राष्ट्र बनाएंगे। भविष्य आपके सामने है। हमारी सफलता आपके हाथ में है। मैं सिर्फ आपको इशारा करके निष्कर्ष पर आऊँगा, आपको ही इसे हासिल करना है।

आपको अपनी ऊर्जा को पहचानना होगा, आपको अपनी क्षमता का दोहन करना होगा और मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है, सफलता आपकी है और वह सफलता राज्य, देश और दुनिया के लिए अत्यधिक प्रभावशाली होगी। मैं आपको एक विचार देता हूं, आज आपको डिग्री मिली है, आप उन कारकों में से एक हैं, योगदान देने वाले कारकों में से एक हैं आपके माता-पिता, आपके मित्र, आपके शिक्षक। अपने माता-पिता का हमेशा अत्यंत सम्मान करें, हमेशा अपने शिक्षकों पर विश्वास रखें, जो मित्रता आपने यहां पाई है उसे पोषित-पल्लवित करें। आप मेरे शब्दों को हमेशा याद रखेंगे, वे आपके कानों में गूंजेंगे, जिस दोस्ती को आपने यहां चुना है, अगर आप इसे जीवन भर निभाते हैं, तो यह दोस्ती आपके लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत होगी। अंत में, युवा साथियों ! हम गौरवान्वित भारतीय हैं, हमें अपनी अभूतपूर्व वृद्धि पर गर्व है। हम अपने राष्ट्रवाद में विश्वास रखते हैं, हमारा राष्ट्रवाद ही हमारा परम धर्म है। हमें ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए, और ना ही हमें किसी को  इसके विरुद्ध कुछ करने की अनुमति देनी चाहिए जिससे हमारी राष्ट्रीयता पुष्पित और पल्लवित न हो सके।

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! खुश रहो! ईश्वर आप सब का भला करे!

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