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भारत का बदलता मेट्रोलॉजी इकोसिस्टम
व्यापार, पारदर्शिता और उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करना
Posted On:
20 MAY 2026 12:04PM
भारत का बदलता माप-विज्ञान (मेट्रोलॉजी) इकोसिस्टम निष्पक्ष व्यापार, उपभोक्ता संरक्षण, औद्योगिक गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत कर रहा है। लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 ने एक आधुनिक नियामक ढाँचे की नींव रखी है जो प्राचीन तौल और माप प्रणाली से विकसित हुआ है। नेशनल फिजिकल लैबोरेटरी और रीजनल रेफ़रेंस स्टैंडर्ड लैबोरेटरी जैसी संस्थाएँ राष्ट्रीय मापन मानकों और सत्यापन प्रणालियों का समर्थन करती हैं। eMaap यानि ई माप पोर्टल, वन नेशन वन टाइम और OIML प्रमाणन जारी करने का अधिकार जैसे पहलों से पारदर्शिता, दक्षता और उपभोक्ता संतोष बढ़ रहे हैं। ये पहल वैश्विक मापन और गुणवत्ता अवसंरचना के साथ भारत के समन्वय के माध्यम से व्यापार में सुगमता को भी बढ़ावा दे रही हैं।
मेट्रोलॉजी: मापन विज्ञान के माध्यम से व्यापार में विश्वास निर्माण
मापन आधुनिक आर्थिक प्रणाली, औद्योगिक उत्पादन, वैज्ञानिक प्रगति और उपभोक्ता संरक्षण की नींव है। मानकीकृत मापन व्यापार, स्वास्थ्य, अवसंरचना, दूरसंचार, ऊर्जा वितरण और डिजिटल तकनीकों जैसे क्षेत्रों में पारदर्शिता और सार्वजनिक विश्वास सुनिश्चित करते हैं। इसी संदर्भ में मेट्रोलॉजी (मापन विज्ञान) और लीगल मेट्रोलॉजी (मापों का नियमन) व्यापार और वाणिज्य में निष्पक्षता सुनिश्चित करते हैं। मेट्रोलॉजी इकाइयों और माप यंत्रों के लिए सामान्य मानक स्थापित करती है। ये मानकीकृत इकाइयाँ लंबाई, भार, आयतन, समय, तापमान और अन्य भौतिक मात्राओं जैसे बहुत से मापों के लिए निर्धारित की जाती हैं, जिनका उपयोग वस्तुओं के व्यापार में होता है। मापन का उपयोग नेविगेशन, निर्माण, उत्पाद विकास, पर्यावरण निगरानी, चिकित्सा और खाद्य प्रसंस्करण सहित अनेक क्षेत्रों में होता है।
मेट्रोलॉजी मापन के विज्ञान और सटीकता पर केंद्रित है। वहीं लीगल मेट्रोलॉजी सार्वजनिक सुरक्षा और निष्पक्ष व्यापार के लिए तौल और मापों की सटीकता तथा विश्वास्यता सुनिश्चित करने पर ध्यान देती है। भारत ने प्रगतिशील विधायी सुधारों, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और डिजिटल गवर्नेंस पहलों के माध्यम से एक व्यापक लीगल मेट्रोलॉजी ढाँचा विकसित किया है। प्राचीन तौल और माप प्रणाली से लेकर लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 के प्रवर्तन तक, भारत का मापन इकोसिस्टम निरन्तर विकसित हो रहा है। यह विकसित होता ढाँचा बदलती व्यापार प्रथाओं, उभरती तकनीकों और बढ़ती उपभोक्ता सुरक्षा आवश्यकताओं का समाधान करने का प्रयास करता है।
वर्ल्ड मेट्रोलॉजी दिवस
वर्ल्ड मेट्रोलॉजी डे, जो हर साल 20 मई को मनाया जाता है, आधुनिक समाज में मापन विज्ञान के महत्व को उजागर करता है। यह दिन इंटरनेशनल कमेटी फॉर वेट्स ऐंड मेंज़र्स (International Committee for Weights and Measures) द्वारा 1999 में स्थापित किया गया था। यह 20 मई 1875 को मीटर कन्वेंशन पर हस्ताक्षर की स्मृति में मनाया जाता है। इस कन्वेंशन ने वैश्विक रूप से एक समान और निरंतर विकसित होती मैट्रिक माप प्रणाली के लिए संस्थागत और वैज्ञानिक आधार सुनिश्चित किया। इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट्स एंड मेंज़र्स (BIPM) और इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ लीगल मेट्रोलॉजी (OIML) संयुक्त रूप से उत्सव का समन्वय करते हैं। इस वर्ष की थीम, “Metrology: Building Trust in Policy Making” (मेट्रोलॉजी: नीति निर्धारण में विश्वास का निर्माण), मेट्रोलॉजी की साक्ष्य-आधारित और पारदर्शी शासन में भूमिका पर जोर देती है।
दैनिक जीवन में मेट्रोलॉजी: सटीकता, विश्वास और निष्पक्षता सुनिश्चित करनादैनिक जीवन में मेट्रोलॉजी: सटीकता, विश्वास और निष्पक्षता सुनिश्चित करना
मेट्रोलॉजी सामान्य लेन-देन और सार्वजनिक सेवाओं में सटीकता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित कर के दैनिक जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। लीगल मेट्रोलॉजी प्रणालियाँ विभिन्न प्रकार के तौल और माप यंत्रों को नियंत्रित करती हैं। इनमें पेट्रोल पम्प के यंत्र, किराना दुकानों के तराजू, आभूषण की दुकानें, अस्पतालों में उपयोग होने वाले यंत्र, बिजली मीटर, जल आपूर्ति प्रणाली और पैकेज्ड वस्तुएँ शामिल हैं। यह सुनिश्चित करती है कि उपभोक्ताओं को उनकी खरीद और सेवाओं के लिए सही मात्रा और मूल्य मिले। ये प्रणालियाँ कम मात्रा देने, गलत बिलिंग और अनुचित व्यापारिक प्रथाओं को रोकने में मदद करती हैं और इस तरह दैनिक वाणिज्यिक लेन-देन में उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करती हैं।
सटीक मापन प्रणालियाँ सार्वजनिक कल्याण और सुरक्षा में भी योगदान देती हैं। मेट्रोलॉजी सेवा प्रदान करने में उपयोग किए जाने वाले तकनीकी उपकरणों, माप इकाइयों और मशीनों के मानकीकरण को सुनिश्चित करती है। इससे सटीक चिकित्सा परीक्षण और निदान, बिजली/जल/गैस खपत की विश्वसनीय मॉनिटरिंग, और गति मापने वाले उपकरणों के माध्यम से सड़क सुरक्षा का प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित होता है। इस प्रकार एकरूप मानक और सत्यापन तंत्र बनाए रख कर मेट्रोलॉजी रोज़मर्रा की आर्थिक और सार्वजनिक गतिविधियों में विश्वास, पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ाती है।
प्राचीन भारत की मापन विरासत और वाणिज्यिक प्रणालियाँ
प्राचीन भारत में तौल और माप की एक सुव्यवस्थित प्रणाली मौजूद थी। इनका व्यापार, वाणिज्य, कराधान, आभूषण निर्माण, कृषि और दैनिक आर्थिक लेन-देन में महत्वपूर्ण भूमिका थी। ये प्रणालियाँ बीजों, अनाज, शरीर के मापों और गणितीय अनुपातों से निकले मानकीकृत इकाइयों पर आधारित थीं। ये प्रथाएँ समय के साथ संगठित और व्यापक रूप से स्वीकार किए गए वाणिज्यिक मापन मानकों में विकसित हुईं।
प्राचीन भारत में वाणिज्यिक और व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए कई मानकीकृत इकाइयाँ व्यापक रूप से उपयोग में थीं:
- रत्ती: एक छोटा बीज-आधारित इकाई जो मुख्य रूप से सोना, रत्न और अन्य कीमती वस्तुओं को तौलने में प्रयोग होती थी
- माशा: रत्ती की एक निश्चित संख्या
- तोला: वाणिज्यिक लेन-देन और कीमती धातुओं के लिए व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली इकाई।.
- (सीर): व्यापार और बाजार लेन-देन में सामान्यतः प्रयुक्त एक बड़ी इकाई
मन और कैंडी: थोक व्यापार, भंडारण और कृषि लेन-देन के लिए प्रयुक्त बड़े पैमाने की इकाइयाँ.

प्राचीन भारतीय मापन प्रथाओं में इसके अतिरिक्त भी शामिल थे:
- लंबाई, भार और क्षमता मापने की प्रणालियाँ।
- क्यूबिट और हाथ फैलाव जैसी शरीर-आधारित माप इकाइयाँ।
- गणना और अनुपाती विभाजन के लिए द्वि-आधार, दैशिक (दशमलव) और आठाधार (ऑक्टोनरी) संख्यात्मक प्रणालियों का उपयोग।
सिंधु घाटी सभ्यता ने उन्नत शहरी नियोजन, व्यापार और वास्तुकला को दर्शाते हुए बहुत मानकीकृत मापन प्रणालियाँ विकसित की थीं। मौर्य साम्राज्य (322–185 ई.पू.) के दौरान प्रशासन, कराधान और व्यापार नियमन के लिए तौल और माप की संगठित प्रणालियाँ लागू की गईं। बाद में शेर शाह सूरी ने तौल और माप को मानकीकृत किया और रूपया सिक्का पेश किया, जो आधुनिक रुपये का पूर्ववर्ती बन गया।
भारत के लीगल मेट्रोलॉजी ढाँचे का विकास
नेशनल फिजिकल लैबोरेटरी की स्थापना (1947) के साथ भारत की आधुनिक मेट्रोलॉजी यात्रा आकार लेने लगी। इसके बाद 1956 में स्टैंडर्ड्स ऑफ वेट्स एंड मेज़र्स एक्ट पारित किया गया, जिसने पूरे देश में एकरूपता स्थापित की। भारत ने 1957–58 के दौरान मीटर कन्वेंशन पर हस्ताक्षर करके और इंटरनेशनल सिस्टम ऑफ यूनिट्स (SI) को अपनाकर वैश्विक अनुकूलन को और मजबूत किया। 1976 और 2009 में पारित अन्य विधायी सुधारों ने भारत के लीगल मेट्रोलॉजी ढाँचे को और आधुनिक और मजबूत बनाया।
इंटरनेशनल सिस्टम ऑफ यूनिट्स (एसआई)
SI इकाइयाँ वैश्विक स्तर पर मापन के लिए स्वीकार्य मानक इकाइयाँ हैं। इन इकाइयों को ऐसे स्थिर वैज्ञानिक नियतांकों के आधार पर परिभाषित किया गया है जो कभी नहीं बदलते। इससे सुनिश्चित होता है कि मापन दुनिया भर में सटीक, एकसमान और विश्वसनीय रहें। मीटर, किलोग्राम और सेकेंड जैसी इकाइयाँ SI प्रणाली का हिस्सा हैं। यह प्रणाली विज्ञान, व्यापार, उद्योग और दैनिक जीवन में संगति बनाए रखने में मदद करती है।

नेशनल फिजिकल लैबोरेटरी - 1947
नेशनल फिजिकल लैबोरेटरी (NPL) भारत का नेशनल मेज़रमेंट इंस्टिट्यूट बनकर उभरी और मीटर तथा किलोग्राम के राष्ट्रीय प्रोटोटाइप की रख-रखाव करने वाली संस्था बनी। रीजनल रेफरेंस स्टैंडर्ड लैबोरेटरीज़ (RRSLs) राज्यों में मानकीकरण और सत्यापन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए स्थापित की गईं। ये लैबोरेटरी प्रयोगशालाओं और वाणिज्यिक व्यापार गतिविधियों में प्रयुक्त मानकों की तुलना और सत्यापन करती हैं।
नेशनल फिजिकल लैबोरेटरी (एनपीएल) की कुछ उल्लेखनीय उपलब्धियाँ
- भारत की NPL एशिया पैसिफिक मेट्रोलॉजी प्रोग्राम (APMP) की संस्थापक सदस्य रही है। APMP एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के राष्ट्रीय मेट्रोलॉजी संस्थानों का समूह है। ये अपने क्षेत्रीय मेट्रोलॉजी क्षमता को विशेषज्ञता साझा कर और तकनीकी सेवाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से सुदृढ़ करने का कार्य करते हैं।
- NPL ने वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त इंडेलिबल इंक (अमिट स्याही) विकसित की है। यह 37 देशों में चुनावों में उपयोग की जाती है और यह विश्व मंच पर भारत के लोकतांत्रिक प्रभाव का प्रतीक है।
- NPL ने पर्यावरण निगरानी उपकरणों के लिए भारत की पहली प्रमाणन सुविधा, एक विश्व-स्तरीय सोलर सेल कालिब्रेशन सुविधा, और रणनीतिक क्षेत्रों के लिए कार्बन कंपोजिट सामग्री भी विकसित की हैं। ये प्रगति न केवल भारत की औद्योगिक और रक्षा क्षमताओं को बढ़ाती हैं, बल्कि देश के नवीकरणीय ऊर्जा और सततता लक्ष्यों के साथ भी मेल खाती हैं।
स्टैंडर्ड्स ऑफ वेट्स एंड मेज़र्स एक्ट, 1956 और 1976
स्टैंडर्ड्स ऑफ वेट्स एंड मेज़र्स एक्ट, 1956, भारत में एक एकसमान, वैज्ञानिक और मानकीकृत मापन प्रणाली स्थापित करने के लिए पारित किया गया था। यह मीट्रिक प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय स्वीकृत मापन मानकों पर आधारित था। इस कानून ने भारत को SI यूनिट्स और OIML (इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ लीगल मेट्रोलॉजी) के अंतर्गत विकसित वैश्विक लीगल मेट्रोलॉजी प्रथाओं के साथ संरेखित होने में सुविधा दी, जिसका भारत सदस्य है।स्टैंडर्ड्स ऑफ वेट्स एंड मेज़र्स एक्ट, 1956, भारत में एक एकसमान, वैज्ञानिक और मानकीकृत मापन प्रणाली स्थापित करने के लिए पारित किया गया था। यह मीट्रिक प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय स्वीकृत मापन मानकों पर आधारित था। इस कानून ने भारत को SI यूनिट्स और OIML (इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ लीगल मेट्रोलॉजी) के अंतर्गत विकसित वैश्विक लीगल मेट्रोलॉजी प्रथाओं के साथ संरेखित होने में सुविधा दी, जिसका भारत सदस्य है।
यह अधिनियम 1976 में संशोधित किया गया, जिससे स्टैंडर्ड्स ऑफ वेट्स एंड मेज़र्स एक्ट, 1976 पारित हुआ, जिसमें निम्न शामिल थे:
- भारतीय अंकों के अंतरराष्ट्रीय रूप के अनुसार मानकीकृत अंकीय प्रणाली का परिचय.
- तौल, माप और पैकेज्ड वस्तुओं से संबंधित अंतर-राज्य व्यापार और वाणिज्य का नियमन
- तौलने और मापने वाले उपकरणों की स्वीकृति और मानकीकरण
- निरीक्षकों और लीगल मेट्रोलॉजी अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ लीगल मेट्रोलॉजी की स्थापना की सुविधा।
- तौल और माप संबंधी कानूनों के उल्लंघनों के लिए दंड और सजा का प्रावधान
वैधानिक मेट्रोलॉजी कानून, 2009
लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 भारत में तौल और माप के मानकों को स्थापित करने और लागू करने के लिए पारित किया गया था। यह अधिनियम प्रौद्योगिकी में प्रगति, आधुनिक व्यापार प्रथाओं और मापन तथा मानकीकरण के विकसित होते मानकों को समाहित करता है। इसका उद्देश्य भार, माप या संख्या द्वारा बेची जाने वाली वस्तुओं के व्यापार और वाणिज्य को एक आधुनिक कानूनी ढांचे के माध्यम से नियंत्रित करना था। वाणिज्यिक लेन-देन में सटीकता, पारदर्शिता और उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करना इसके मुख्य उद्देश्यों में थे। यह अधिनियम 1 अप्रैल, 2011 से लागू हुआ। इसके प्रवर्तन के साथ 1976 का स्टैंडर्ड्स ऑफ वेट्स एंड मेज़र्स एक्ट और 1985 का स्टैंडर्ड्स ऑफ वेट्स एंड मेज़र्स (एनफोर्समेंट) एक्ट रद्द कर दिए गए।
लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
- भारत में मीट्रिक प्रणाली और मानकीकृत मापन इकाइयों को अनिवार्य रूप से अपनाना।
- व्यापार और वाणिज्यिक लेन-देन में उपयोग होने वाले तौलने और मापने वाले उपकरणों को नियंत्रित करता है।.
- व्यावसायिक उपयोग से पहले तौल और माप का सत्यापन और मोहर/स्टैम्प करवाने की आवश्यकता।
- पूर्व-पैकेज्ड वस्तुओं के लिए अनिवार्य घोषणाएँ निर्धारित करता है, जिनमें मात्रा, वजन और मापन संबंधी विवरण शामिल हैं।
- तौल यंत्रों के निर्माताओं, विक्रेताओं, मरम्मत करने वालों और आयातकों के लिए पंजीकरण की व्यवस्था करता है।
- लीगल मेट्रोलॉजी अधिकारियों को निरीक्षण, तलाशी, जब्ती और अन्य प्रवर्तन कार्रवाई करने का अधिकार प्रदान करता है।.
- गैर-मानक या अन सत्यापित तौल और माप के उपयोग के लिए दंड लागू करता है।
लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के अंतर्गत शामिल प्रमुख वस्तुएँ
- तौलने वाले उपकरण: दुकानों और बाजारों में उपयोग होने वाले तौलने वाली मशीनों का लीगल मेट्रोलॉजी प्राधिकरणों द्वारा सत्यापन और स्टैम्पिंग अनिवार्य है। इससे सुनिश्चित होता है कि उपभोक्ताओं को दिए गए पैसे के बदले सही मात्रा मिले और छेड़छाड़ या कम तौलना रोका जा सके।
- पैकेज्ड वस्तुएँ: खाद्य पदार्थ, दवाइयाँ और घरेलू उत्पाद जैसी पैकेज्ड वस्तुओं पर मात्रा, अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP), निर्माण तिथि और निर्माता से संबंधित जानकारी की घोषणाएँ अनिवार्य हैं। ये घोषणाएँ उपभोक्ताओं को सूचित चुनाव करने में मदद करती हैं और भ्रमित करने वाली पैकेजिंग प्रथाओं को रोकती हैं।
- ईंधन वितरण यंत्र: पेट्रोल पम्पों पर ईंधन देने वाली मशीनों का नियमित सत्यापन और कालिब्रेशन किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि उपभोक्ताओं को मशीन पर दिखाए गए ठीक‑ठीक मात्रा के ईंधन ही मिल रहे हैं।
- जल और बिजली मीटर: जल और बिजली मीटरों को खपत को सटीक रूप से रिकॉर्ड करना चाहिए ताकि बिलिंग में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।
- क्लिनिकल और चिकित्सीय उपकरण: थर्मामीटर, ब्लड प्रेशर मॉनिटर और तौलने वाली मशीनें जैसी चिकित्सीय उपकरण लीगल मेट्रोलॉजी कानूनों के तहत नियंत्रित हैं। सही निदान और उपचार के लिए सटीक मापन आवश्यक हैं।
- दूरसंचार और डिजिटल सेवाएँ: मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट सेवाएँ और ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म जैसे डिजिटल सिस्टम्स को अत्यंत सटीक समय और सिग्नल मापों की आवश्यकता होती है। सटीक मापन सुचारू, विश्वसनीय और सुरक्षित डिजिटल संचार सुनिश्चित करता है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण: स्मार्टफोन, लैपटॉप और स्मार्ट टीवी जैसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसें सटीक निर्माण पर निर्भर करती हैं। मेट्रोलॉजी सेमीकंडक्टर उत्पादन के दौरान सटीकता सुनिश्चित करती है और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के उचित कार्य के लिए समर्थन प्रदान करती है।
इस अधिनियम के तहत बनाए गए नियम (2011 और 2013)
इस अधिनियम के तहत कुल 7 नियम बनाए गए हैं जो विभिन्न वस्तुओं को नियंत्रित करते हैं:
- लीगल मेट्रोलॉजी (जनरल) नियम: इनमें लगभग 40 प्रकार के तौलने और मापने वाले उपकरण शामिल हैं, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक तराजू, पेट्रोल पम्प, वेइब्रिज, जल मीटर, क्लिनिकल थर्मामीटर और स्फिग्मोमैनोमीटर शामिल हैं।
- लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम: ये नियम पूर्व-पैकेज्ड वस्तुओं की बिक्री को नियंत्रित करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि उपभोक्ताओं को खरीद से पहले उत्पादों के बारे में स्पष्ट जानकारी मिले।
- लीगल मेट्रोलॉजी (मॉडल स्वीकृति) नियम: ये नियम निर्दिष्ट तौल और माप उपकरणों के निर्माताओं और आयातकों को ऐसे उपकरणों के निर्माण या आयात से पहले सरकार से मॉडल स्वीकृति प्राप्त करने की आवश्यकता रखते है।
- लीगल मेट्रोलॉजी (राष्ट्रीय मानक) नियम: इन नियमों के तहत तौल और माप के राष्ट्रीय प्रोटोटाइप और प्राथमिक मानक नेशनल फिजिकल लैबोरेटरी (NPL) में रखे जाते हैं।
- लीगल मेट्रोलॉजी (न्यूमरेशन) नियम: इन नियमों के तहत अंकों के अंकन और संख्याएँ किस प्रकार लिखी जाएँगी, इसकी व्यवस्था की गई है।
- Iइंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ लीगल मेट्रोलॉजी नियम: रांची स्थित इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ लीगल मेट्रोलॉजी (IILM) भारत में लीगल मेट्रोलॉजी अधिकारियों के प्रशिक्षण संस्थान के रूप में कार्य करता है। ये नियम प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों, संस्थान के कार्यों और संस्थान में प्रवेश के लिए आवश्यक योग्यताओं का निर्धारण करते हैं।
- लीगल मेट्रोलॉजी (गवर्नमेंट अप्रूव्ड टेस्ट सेंटर) नियम: ये नियम कुछ तौल और मापों के सत्यापन के लिए निजी व्यक्तियों द्वारा स्थापित GATC (सरकार-स्वीकृत परीक्षण केन्द्र) की स्वीकृति से संबंधित हैं।

इन नियमों के अनुरूप, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने भी अपने प्रवर्तन नियम बनाए हैं।
इन नियमों में समय-समय पर संशोधन किए जाते हैं ताकि वे व्यापार और तकनीक की बदलती स्थितियों के अनुरूप बने रहें। हाल ही में, अक्टूबर 2025 में, गवर्नमेंट अप्रूव्ड टेस्ट सेंटर्स (GATCs) के दायरे का विस्तार किया गया ताकि उनमें 18 श्रेणियों के मापन उपकरण शामिल हो सकें, जिनमें जल मीटर, गैस मीटर, ऊर्जा मीटर और स्फिग्मोमैनोमीटर शामिल हैं।
जन विश्वास अधिनियम, 2023 और जन विश्वास अधिनियम, 2026
जन विश्वास (धाराओं में संशोधन) अधिनियम, 2023 ने कई मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाले कई कानूनों में संशोधन किए, जिसमें लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 भी शामिल है। इन सुधारों के अंतर्गत, लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट की सात धाराओं को आपराधिक अपराध से हटाकर चयनित मामलों में कारावास प्रावधानों को मौद्रिक दंड से बदल दिया गया। लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम में ये संशोधन 1 अक्टूबर 2023 से लागू हुए। ये सुधार व्यापार करने में सुगमता बढ़ाने, अनुपालन के बोझ को कम करने और स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उपभोक्ता हितों की सुरक्षा और व्यापार व मापन प्रणालियों में जवाबदेही बनाए रखने का लक्ष्य रखते हैं।
जन विश्वास (धाराओं में संशोधन) अधिनियम, 2026 ने अनुपालन बोझ कम करने के लिए सुधार प्रस्तुत किए। इसने विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए व्यापार सुगमता को और बढ़ावा दिया। संशोधनों का उद्देश्य व्यावसायिक संस्थाओं को स्वैच्छिक अनुपालन के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि वे प्रक्रियात्मक चूकों को तुरन्त दंडात्मक कार्रवाई का सामना किए बिना सुधार सकें। लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 की पूर्व प्रावधानों के तहत निर्धारित रिकॉर्ड बनाए रखने या प्रस्तुत करने में कीअसफलता पर सीधे दंड लग सकते थे। इन संशोधनों ने प्रथम बार की चूक के लिए “इम्प्रूवमेंट नोटिस” तंत्र की शुरूआत की है। इससे MSME आयातक और व्यवसाय निर्दिष्ट अवधि के भीतर अनुपालन अंतर को सुधार सकते हैं, उसके बाद ही दंड लगाया जाएगा। यह सुधार भरोसा-आधारित शासन, सुविधाजनक नियामक प्रवर्तन और व्यापार-अनुकूल अनुपालन ढांचे की दिशा में एक बदलाव को दर्शाता है।
मेट्रोलॉजी और लीगल मेट्रोलॉजी में प्रमुख सरकारी पहल
ई माप पोर्टल

eMaap पोर्टल, उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा लॉन्च किया गया, व्यापार में सुगमता और G2B सेवा वितरण को बढ़ावा देने का उद्देश्य रखता है। यह पोर्टल लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत नियमों और दिशानिर्देशों को सरल और तर्कसंगत बनाता है। यह सूचना तकनीक का उपयोग कर कुशल, पारदर्शी शासन सक्षम करता है। पोर्टल सभी राज्यों की लीगल मेट्रोलॉजी प्रणालियों को केंद्रीय प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत भी करता है। यह पोर्टल निर्माताओं, विक्रेताओं, मरम्मत करने वालों, आयातकों, पैकर्स और पैकेज्ड वस्तुओं के उत्पादकों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण सेवाएं देशव्यापी रूप से प्रदान करता है।
वन नेशन, वन टाइम पहल
भारत ने पूरे देश में मिलीसेकंड से माइक्रोसेकंड की सटीकता के साथ भारतीय मानक समय (IST) प्रसारित करने के लिए 'वन नेशन, वन टाइम' पहल शुरू की है। यह परियोजना उपभोक्ता मामलों के विभाग द्वारा नेशनल फिजिकल लैबोरेटरी (NPL) और ISRO के सहयोग से भारत भर में स्थित पाँच लीगल मेट्रोलॉजी प्रयोगशालाओं के माध्यम से लागू की जा रही है।
यह पहल दूरसंचार, बैंकिंग, नेविगेशन, पावर ग्रिड, डिजिटल गवर्नेंस, 5G सेवाएँ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, IoT और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में एक समान, अति-सटीक समय समकालिकीकरण प्रणाली स्थापित करने का लक्ष्य रखती है। यह GPS जैसे विदेशी समय स्रोतों पर निर्भरता कम करने और राष्ट्रीय सुरक्षा, महत्वपूर्ण अवसंरचना प्रबंधन, सटीक वित्तीय लेन-देन, आपातकालीन प्रतिक्रिया समन्वय, औद्योगिक दक्षता और विश्वसनीय सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने का भी प्रयास करती है।
OIML प्रमाणन मान्यता के माध्यम से वैश्विक व्यापार को सशक्त बनाना

भारत 1956 में इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ लीगल मेट्रोलॉजी (OIML) का सदस्य बना। 2023 में भारत वैश्विक रूप से उन 13 देशों में शामिल हुआ जिसे तौलने और मापने वाले उपकरणों के लिए अंतरराष्ट्रीय रूप से स्वीकृत OIML अनुमोदन प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार प्राप्त हुआ। इस मान्यता से भारतीय निर्माताओं को अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय परीक्षण लागत के बिना उपकरण पूरे विश्व में निर्यात करने में सुविधा मिलती है, साथ ही यह वैश्विक व्यापार, मानक निर्धारण और लीगल मेट्रोलॉजी शासन में भारत की भूमिका को भी मजबूत करता है।
रीजनल रेफरेंस स्टैंडर्ड लैबोरेटरीज़ (RRSLs) द्वारा समर्थित यह प्रमाणन प्रणाली भारत को विदेशी निर्माताओं को प्रमाणन सेवाएँ प्रदान करने, विदेशी मुद्रा अर्जित करने और अंतरराष्ट्रीय OIML नीति एवं रणनीति विकास में योगदान करने की क्षमता भी देती है।
सततता का मापन: मेट्रोलॉजी किस प्रकार SDGs का समर्थन करती है
मेट्रोलॉजी सटीक, विश्वसनीय और मानकीकृत माप सुनिश्चित करके सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देती है। यह SDG 1 (गरीबी उन्मूलन) को विश्वसनीय मापन प्रणालियों के माध्यम से निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ावा देकर समर्थन करती है। SDG 3 (सुप्रभात स्वास्थ्य और कल्याण) के अंतर्गत मेट्रोलॉजी सटीक चिकित्सा निदान, क्लिनिकल माप और सुरक्षित उपचार प्रथाओं के जरिए स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करती है। यह SDG 7 (सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा) को कुशल ऊर्जा वितरण, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण और सटीक ऊर्जा निगरानी व बिलिंग के योग्य बनाकर आगे बढ़ाती है। मेट्रोलॉजी SDG 9 (उद्योग, नवाचार और अवसंरचना) में औद्योगिक गुणवत्ता, कैलिब्रेशन, परीक्षण और तकनीकी नवाचार में सुधार करके योगदान देती है। साथ ही यह SDG 13 (जलवायु कार्रवाई) का समर्थन सटीक पर्यावरण निगरानी, जलवायु अनुसंधान और वायुमंडलीय तथा पारिस्थितिक परिवर्तनों के वैज्ञानिक आकलन के माध्यम से करती है।

पारदर्शी और उपभोक्ता-केंद्रित मापन इकोसिस्टम का निर्माण
प्रौद्योगिकी में प्रगति, बदलती व्यापार प्रथाओं और उभरती उपभोक्ता आवश्यकताओं के जवाब में भारत का लीगल मेट्रोलॉजी ढाँचा लगातार विकसित होता जा रहा है। सरकार द्वारा हाल ही में किए गए पहलों का ध्यान अनुपालन बोझ कम करने, एकसमान मापन मानकों को सुनिश्चित करने, सटीकता में सुधार और डिजिटल गवर्नेंस तंत्रों के माध्यम से नियामकीय प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने पर रहा है।
उपभोक्ता संरक्षण उपायों को भी पूर्व-पैकेज्ड वस्तुओं पर अनिवार्य घोषणाओं और ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्मों के लिए मूल देश (country‑of‑origin) प्रकटीकरण प्रावधानों के परिचय द्वारा मजबूत किया गया है, जो 1 जुलाई, 2027 से प्रभावी होंगे। समग्र रूप से ये सुधार बढ़ती पारदर्शिता, व्यवसाय करने में सुगमता, मजबूत उपभोक्ता विश्वास और भारत के समग्र गुणवत्ता अवसंरचना इकोसिस्टम के विकास में योगदान दे रहे हैं।
संदर्भ
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
https://emaap.gov.in/about_us
https://iilm.gov.in/more/act-rules
https://consumeraffairs.gov.in/pages/legal-metrology-act
https://consumeraffairs.gov.in/pages/legal-metrology-overview
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2096622®=3&lang=2
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https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2184053®=3&lang=2
https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1957429®=3&lang=2
संस्कृति मंत्रालय
https://ignca.gov.in/Asi_data/2517.pdf
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2078069®=3&lang=2
https://www.nplindia.in/wp-content/uploads/2021/10/Angela-Historical-perspective-20171129-APMP-2017-NPLI-Symposiumfin.pdf
संयुक्त राष्ट्र
https://www.unesco.org/en/days/metrology
https://www.unido.org/sites/default/files/files/2020- 08/The_role_of_Metrology_in_the_context_of_SDGs.pdf
इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ लीगल मेट्रोलॉजी (OIML)
https://www.oiml.org/en/files/pdf_e/e002-e03.pdf
https://www.worldmetrologyday.org/press_release.html
https://www.oiml.org/en/publications/oiml-bulletin/online-bulletin-1/2024-07/the-importance-of-metrology-from-early-civilization-to-digitalisation-the-indian-perspective
इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट्स एंड मेंज़र्स (BIPM)
https://share.google/xMAPHbZcQO1eHojmD
एशिया पैसिफिक मेट्रोलॉजी प्रोग्राम
https://www.apmpweb.org/portal/list/channel/id/3.html
दिल्ली सरकार (NCT)
https://weightnmeasures.delhi.gov.in/weightnmeasures/about-us
केरल सरकार
https://lmd.kerala.gov.in/2025/06/04/2-meter-convention/
पीआईबी बैकग्राउंडर
https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=158002&ModuleId=3®=3&lang=3
पीआईबी अनुसंधान
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