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अंतरिक्ष विभाग28-अगस्त, 2016 14:35 IST

इसरो के स्‍क्रेमजेट इंजन तकनीक उड़ान का सफल परीक्षण

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का वायुमंडल प्रणोदन प्रणाली वाला स्‍क्रेमजेट इंजन का पहला प्रायोगिक परीक्षण सफल रहा। 12 घंटे की उल्‍टी गिनती के बाद श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भारतीय समयानुसार 6 बजे सुबह इस स्‍क्रेमजेट इंजन को छोड़ा गया। महत्‍वपूर्ण उड़ान घटनाक्रम में दो चरण होता है जिसमें पहला चरण बूस्‍टर रॉकेट का जलन और दूसरा ठोस रॉकेट का प्रज्‍जवलन होता है। अपने पांच सेकेंड के कामकाज के दौरान स्‍क्रेमजेट इंजन ने पूर्ण रूप से योजना के मुताबिक काम किया। 300 सेकेंड की उड़ान के बाद यह वाहन श्रीहरिकोटा से 320 किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी में गिर गया। इस वाहन ने श्रीहरिकोटा से अपनी उड़ान को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस उड़ान के द्वारा जटिल तकनीकों जैसे सुपरसोनिक गति ने एयर ब्रीथिंग इंजन का प्रज्‍जवलन, एयर इंटेक मैकेनिज्‍म और फ्यूल इंजेक्शन सिस्‍टम का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया।

इसरो द्वारा निर्मित यह स्‍क्रेमजेट इंजन हाइड्रोजन का उपयोग इंधन के रूप में करता है जबकि ऑक्‍सीकारक के रूप में वायुमंडल से ऑक्‍सीजन लेता है। इसरो द्वारा उन्‍नत प्रौद्योगिकी वाहन (एटीभी) को स्‍क्रेमजेट इंजन के परीक्षण में ठोस रॉकेट बूस्‍टर के रूप में उपयोग किया गया। 3277 किलोग्राम भार वाले स्‍क्रेमजेट इंजन एटीभी के माध्‍यम से उड़ान भरा। एटीभी दो स्‍तरों वाला लॉन्‍चर है।

इसरो द्वारा स्‍क्रेमजेट इंजन को विकसित करने के दौरान कुछ तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा जिसमें हाइपरसोनिक इंजन एयर इंटेक का डिजाइन और विकास, सुपरसोनिक कमबूस्‍टर अत्‍यधिक तापमान पर टिकने वाली वस्‍तुओं का विकास, विमान की गति के दौरान पूरे इंजन के प्रदर्शन को सुनिश्चित करना, उचित थर्मल प्रबंधन और इंजनों का ग्राउंड टेस्टिंग इत्‍यादि शामिल है।

भारत विश्‍व का चौथा देश है जिसने स्‍क्रेमजेट इंजन के उड़ान का परीक्षण किया है। इसरो द्वारा एयर ब्रीथिंग स्‍क्रेमजेट इंजन प्रौद्योगिकी का सफल परीक्षण आने वाले समय में विकसित एयरब्रीथिंग इंजन के डिजाइन और विकास में मील का पत्‍थर साबित होगा साथ ही अंतरिक्ष परिवहन प्रणाली में भी मददगार साबित होगा।

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एके/सीसी- 4075
(Release ID 53818)


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