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विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय19-जनवरी, 2016 18:23 IST

केन्‍द्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने भारतीय भू-चुम्‍बकत्‍व संस्‍थान के शिलांग भूभौतिकीय अनुसंधान केंद्र का उद्घाटन किया

केन्‍द्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि शिलांग भूभौतिकीय अनुसंधान केंद्र (एसजीआरसी) आने वाले वर्षो में भूकंप प्रक्रियाओं को उजागर करने और भूकंप के पूर्वानुमानों के लिए एक अग्रदूत मॉडल का सृजन करने के लिए विश्‍व मे

 

केन्‍द्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि शिलांग भूभौतिकीय अनुसंधान केंद्र (एसजीआरसी) आने वाले वर्षो में भूकंप प्रक्रियाओं को उजागर करने और भूकंप के पूर्वानुमानों के लिए एक अग्रदूत मॉडल का सृजन करने के लिए विश्‍व में अपने किस्‍म के एक केन्‍द्र के रूप में उभरेगा। उन्होंने ऐसा कल शिलांग में एसजीआरसी का उद्घाटन करते हुए कहा।

 

http://pibphoto.nic.in/documents/rlink/2016/jan/i201611901.jpg

 

डॉक्‍टर हर्षवर्धन ने यह आश्‍वासन दिया कि सरकार, इस किस्‍म की  नई पहल के लिए पूरी सहायता उपलब्‍ध कराएगी, जिससे देश वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में शीर्ष स्‍थान प्राप्‍त करेगा। उन्‍होंने मंत्रालय द्वारा शुरू की गई अनेक नई पहलों के लिए सरकार द्वारा पहले ही दी जा चुकी सहायता का जिक्र करते हुए कहा कि इन पहलों से समाज को लाभदायक परिणाम प्राप्‍त हो रहे हैं। उन्‍होंने युवा शोधकर्ताओं और छात्रों का आह्वान किया कि उनके उद्देश्‍य बड़े होने चाहिए और उन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उन्‍हें कड़ी मेहनत करनी चाहिए।

 

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भारतीय भू-चुम्बकत्‍व संस्‍थान विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन एक प्रमुख अनुसंधान संगठन है, जो भू-चुम्बकत्‍व और संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान के कार्य कर रहा है।  इसका मुख्यालय मुंबई के पास न्यू पनवेल में स्थित है। इसके पूरे देश में दो क्षेत्रीय केंद्र और 12 चुंबकीय वेधशालाएं स्थित हैं। आईआईजी ने अपने तीसरे क्षेत्रीय केंद्र के रूप में शिलांग भूभौतिकीय अनुसंधान केंद्र (एसजीआरसी) की स्‍थापना करके एक नई पहल की है। शिलांग में स्‍थापित नये केन्‍द्र का अनुसंधान में ध्यान संख्यात्मक मॉडलिंग उपकरणों द्वारा सहायता प्राप्त अवलोकन तकनीक की एक किस्म का उपयोग करके उत्तर-पूर्व में विभिन्न वायुमंडलीय क्षेत्रों में पूर्व और सह-भूकंपीय सिग्‍नेचरों के गूढ़ रहस्यों का पता लगाने पर केन्द्रित होगा।

यह अच्‍छी तरह से ज्ञात है कि भारत का पूर्वोत्‍तर क्षेत्र देश के सबसे अधि‍क सक्रिय भूकंप की आशंका वाले क्षेत्रों के केंद्र में स्थित है। यह भूकंप की आशंका वाला अतिसंवेदनशील क्षेत्र है। यह इसी से जाहिर है कि जनवरी, 2016 में मणिपुर में भयानक भूकंप आया था। एसआरजीसी द्वारा किये जाने वाले अध्‍ययनों से भूकंप के स्रोतों और उनके पैदा होने की कार्यप्रणाली को समझने में मदद मिलेगी।

पर्यवेक्षणीय उपकरण से यह पता लगाया जा सकता है कि भूकंप आने की किसी भी प्रारंभिक चेतावनी के संकेतों से इस क्षेत्र में आसन्न भूकंप से उत्पन्न प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी, जिससे पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में भूकंप आने के उन्‍नत लक्षण और स्‍थानीय जनता को इनसे पैदा होने वाली चुनौतियों का मूल्‍यांकन करने में मदद मिलेगी। एसजीआरसी में लगाये गये उपकरणों से इस क्षेत्र में आने वाले भूकंप संबंधी संकेतों की चेतावनी जल्‍दी मिलने से इस क्षेत्र में भूकंप के पड़ने वाले व्‍यापक प्रभाव को कम करने में सहायता मिलेगी। एसजीआरसी को पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में भूभौतिकीय अनुसंधान और पूर्वोत्तर क्षेत्र में शिक्षा का एक प्रमुख संस्‍थान के रूप में पूर्वोत्‍तर क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए कठोर प्रयास करने होंगे।

 

माईलियम निर्वाचन क्षेत्र के विधानसभा सदस्य, श्री रोनी वी लिंगदोह, आईआईजी के निदेशक प्रोफेसर डी.एस. रमेश, आरएसी के अध्यक्ष प्रोफेसर अभिजीत सेन और पद्मश्री डॉ. वी.पी. डिमरी ने इस अवसर पर बोलते हुए आईआईजी द्वारा पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में किये जाने वाले भूभौतिकीय अनुसंधान के संदर्भ में एसजीआरसी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इस अनुसंधान केन्‍द्र को विश्व स्तरीय अनुसंधान केंद्र को उन्‍नत सुविधाएं प्रदान किये जाने की आवश्यकता पर बल दिया। एनईएचयू के कुलपति प्रोफेसर श्री कृष्ण श्रीवास्तव ने लिथोसफियर-एटमोसफियर-आयनोस्‍फेयर-मेगनेटसफेयर (एलएआईएम) के दौरान हुए विचार-विमर्श का उल्‍लेख किया। यह कार्यशाला एनईएचयू में आईआईजी द्वारा आयोजित की गई थी।

 

शिलांग भूभौतिकीय अनुसंधान केंद्र के औपचारिक उद्घाटन के बाद, डॉ. हर्षवर्धन ने अनुसंधान सुविधाओं और चल रहे वैज्ञानिक प्रयोगों का निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्र के कर्मचारियों और छात्रों से भी बातचीत की।

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आईपीएस/जीआरएस-400

(Release ID 44400)


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