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विशेष सेवा और सुविधाएँ

भारतीय रेल का एवरेस्ट : चेनाब पुल

विशेष लेख

 

 

 

 

 

सरोज सिंह

       भारतीय रेलवे जल्द ही दुनिया में एक नया इतिहास रचने जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में शिवालिक की ऊंची पहाड़ियों के बीच बहने वाली चेनाब नदी पर भारतीय रेलवे दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पुल बना रहा है। ये रेल पुल दुनिया भर में अपने वास्तु और अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर फ्रांस की राजधानी पेरिस में बने एफिल टॉवर से भी 35 मीटर ऊंचा होगा। इतना ही नहीं ये पुल दिल्ली के कुतुबमीनार से करीब 5 गुना ऊंचा होगा। रेलवे के मुताबिक चेनाब नदी पर बन रहे इस पुल की ऊंचाई 359 मीटर होगी। ये पुल 1315 मीटर लंबा होगा और इसकी चौड़ाई 13.5 मीटर होगी। इस बेजोड़ पुल को बनाने में 25 हजार मीट्रिक टन स्टील का इस्तेमाल होगा। रेलवे के तमाम अफसर और सैकड़ों मजदूर दिन-रात इस पुल को बनाने में जुटे हैं। रेलवे के मुताबिक फिलहाल इस पुल का काम 70 फीसदी पूरा हो चुका है और उम्मीद जताई जा रही है कि दिसंबर 2018 तक यह पुल पूरी तरह बन कर तैयार हो जाएगा। इस पुल को बनाने में करीब 1198 करोड़ रुपए खर्च होंगे। शिवालिक की पहाड़ियों के बीच बन रहे इस पुल की ऊंचाई, इसकी डिजाइन और इसे बनाने में इस्तेमाल इंजीनियरिंग को देखते हुए ये कहना गलत नहीं होगा कि तैयार होने के बाद ये पुल इंसानी कारीगरी का नायाब नमूना होगा, जिसकी मिसाल सदियों तक दुनिया भर में दी जाएगी।

क्या है उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक परियोजना

     चेनाब नदी पर बन रहा ये पुल उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक परियोजना का सबसे अहम हिस्सा है। ये पुल जम्मू को श्रीनगर से जोड़ेगा। इस लिहाज से इस पुल की अहमियत बहुत ज्यादा है। उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक परियोजना को चार भागों में बांटा गया है।

  • पहला है उधमपुर से कटरा तक का रेल रूट, जो 25 किलोमीटर लंबा है। जुलाई 2014 में ये रेल रूट पूरा हो चुका है और इस पर ट्रेनों की आवाजाही शुरू हो चुकी है।
  • दूसरा है कटरा से बनिहाल का रेलवे रूट, जो कि 111 किलोमीटर लंबा होगा। चेनाब नदी पर बन रहा सबसे ऊंचा पुल इसी रूट का हिस्सा है। रेलवे के मुताबिक यह रूट 2021 तक पूरी तरह तैयार हो जाएगा।
  • तीसरा है बनिहाल से काजीगुंड का 18 किलोमीटर लंबा रास्ता जो कि जून 2013 में बनकर तैयार हो चुका है और इस रुट पर भी ट्रेन दौड़ने लगी है।
  • चौथा है काजीगुंड से बारामुला का 118 किलोमीटर का हिस्सा। ये रूट भी  2009 में ही पूरा हो चुका है।

क्या है चेनाब पुल की खासियत

     चेनाब पर बन रहे इस पुल का निर्माण भारतीय रेलवे की एक इकाई कोंकण रेल कॉर्पोरेशन कर रहा है। स्टील से बन रहे इस पुल की डिजाइनिंग और निर्माण के लिए दुनिया के बेहतरीन पुल विशेषज्ञों से सलाह-मशवरा किया गया और उनकी मदद ली गई। चेनाब नदी का ये इलाका दुर्गम पहाडियों के बीच का है। आड़ी-तिरछी पहाड़ियों के बीच पुल का निर्माण हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। कश्मीर घाटी के मौसम ने भी इस पुल के निर्माण में कम चुनौतियां नहीं खड़ी कीं। बर्फबारी और सर्द हवाओं ने इस पुल को बनाने में जुटे अफसरों और मजदूरों के लिए काफी कठिन परिस्‍थितियां उत्‍पन्‍न कीं। यही वजह है कि इस पुल को बनाने के लिए भारतीय रेलवे को फिनलैंड, जर्मनी और डेनमार्क जैसे देशों के पुल निर्माण विशेषज्ञों की मदद लेनी पड़ी। पूरे इलाके के गहन सर्वे और जानकारों से सलाह-मशवरे के बाद इस पुल का अंतिम डिजाइन तैयार हुआ। चेनाब पुल को कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया है कि 266 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बहने वाली तेज हवाएं भी इसका बाल तक बांका नहीं कर सकेंगी। पुल में हवा की तेज गति को भांपने वाले सेंसर भी लगे हैं, जो किसी भी आपात स्थिति में खुद-ब-खुद ट्रेन का परिचालन बंद कर देंगे। शून्य से 20 डिग्री कम तापमान हो या तपती गर्मी में 45 डिग्री तक का तापमान, इस पुल में लगे स्टील को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकते। इतना ही नहीं पुल को बनाते वक्त भूकंप के खतरे को भी ध्यान में रखा गया। भूकंप आने के लिहाज से देश को पांच हिस्सों में बांटा गया है और चेनाब नदी का ये इलाका भूंकप आने के लिहाज से सीस्मिक जोन-4 में आता है। लेकिन इस रेल पुल को बनाने के लिए सीस्मिक जोन-5 के आधार पर टेस्ट किए गए हैं। मतलब ये कि अगर रिक्टर पैमाने पर 8 की तीव्रता का भूकंप आया तो इस पुल को कोई नुकसान नहीं होगा। सबसे खास बात ये कि इस पुल की पुताई के लिए जिस पेंट का इस्तेमाल किया गया है वो कोई साधारण पेंट नहीं है। रेलवे के मुताबिक इस पेंट की औसत उम्र 15 से 20 साल है। इस पेंट को रिसर्च और डिजाइनिंग संस्था RDSO ने लंबे शोध के बाद तैयार किया है। इस पेंट पर धूप, बारिश और बर्फ का असर नहीं के बराबर होता है।

    कश्मीर में बन रहा ये बेमिसाल पुल जम्मू और श्रीनगर को जोड़ेगा। ऐसे में इस पुल की अहमियत बहुत ज्यादा होगी, लिहाजा ये रेल पुल आंतकियों के निशाने पर भी हो सकता है। इस खतरे को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने इस पुल को ब्लास्ट प्रूफ बनाया है। रेलवे का दावा है कि इस पुल पर 40 टन विस्फोटक के दबाव से हमला किया जाए तो भी इसको कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। रेलवे अपने इस पुल की उम्र 120 साल बता रहा है, लेकिन अगर इसका रखरखाव सही से किया गया तो ये पुल 120 साल से भी अधिक कार्य करेगा।  

चेनाब पुल के फायदे  

     रेलवे के इस पुल के बन जाने से जम्मू-कश्मीर देश के बाकी हिस्सों से हर मौसम में 12 महीने जुड़ा रह पाएगा, क्योंकि सर्दियों में भारी बर्फबारी की वजह से अक्सर सड़क मार्ग बंद हो जाता है और श्रीनगर समेत कश्मीर के कई इलाके देश से कट जाते हैं। साथ ही चेनाब पुल के बनने के बाद जम्मू से श्रीनगर आने-जाने में 4 से 5 घंटे का वक्त कम लगेगा। ऐसे में इस पुल के बन जाने से कश्मीर के पर्यटन को तो बढ़ावा मिलेगा ही, वहां रह रहे लोगों की आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी। रेलवे ने इस परियोजना के लिए जिन लोगों की जमीन 75 फीसदी से ज्यादा अधिग्रहीत की है, उनके परिवार में एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी गई है। इतना ही नहीं परियोजना में काम करने वाले लोगों को चेनाब तक पहुंचाने के लिए रेलवे ने 200 किलोमीटर लंबी सड़क भी तैयार की है, जो कि इस रेल लाइन के शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों के आने-जाने के काम भी आएगी।

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लेखिका वरिष्ठ पत्रकार और लेख में व्‍यक्‍त विचार उनके निजी हैं।

वीके/एसएस/वाईबी-107

 



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